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यूपीए-2 कार्यकाल में बंधक बने विधेयक

यूपीए के निष्क्रिय सहयोगियों और आक्रामक विपक्ष ने मिलकर कुछ अहम विधेयकों को राज्‍यसभा में पारित करवाने की राह में अड़ंगा डाला हुआ है. यहां यूपीए अल्पमत में है.

ज्‍यूडिशियल स्टैंडर्ड्स ऐंड एकाउंटेबिलिटी बिल
इस विधेयक का लक्ष्य न्यायिक शुचिता के नए प्रतिमान स्थापित करना है. 'दुर्व्यवहार' के आधार पर कोई भी किसी जज के खिलाफ  ओवरसाइट कमेटी को शिकायत कर सकता है.
रोड़ा ओवरसाइट कमेटी में गैर-न्यायिक सदस्य हैं जो न्यायपालिका की स्वतंत्रता का अतिक्रमण होगा. भाजपा राज्‍यसभा में इसका विरोध कर सकती है.
स्थिति राज्‍यसभा ने अब तक पारित नहीं किया है.

पेंशन फंड रेगुलेटरी ऐंड डेवलपमेंट  अथॉरिटी बिल
बिल का उद्देश्य 2003 में गठित अंतरिम प्राधिकरण को वैधानिक अधिकार देना है. इसमें न्यू पेंशन सिस्टम का नाम बदल कर नेशनल पेंशन सिस्टम कर दिया गया है. इसे लेने वाले फंड प्रबंधक और योजना को चुन सकेंगे, जिससे वे अपनी पेंशन का प्रबंधन कर सकें. यह विधेयक लोकसभा में 24 मार्च, 2011 को लाया गया था.
रोड़ा निवेश का जोखिम सिर्फ  कर्मचारी को उठाना पड़ेगा. भाजपा इसका समर्थन करती है, लेकिन वाम दल और यूपीए की अहम सहयोगी तृणमूल कांग्रेस इसे मजदूर विरोधी करार देते हैं.
स्थिति राज्‍यसभा ने अब तक पारित नहीं किया है.

एजुकेशन ट्रिब्यूनल्स बिल
शिक्षा के क्षेत्र में विवादों का निबटारा तेज करने के लिए शैक्षणिक पंचाट बनाने का लक्ष्य इस विधेयक में है. विधेयक को राज्‍यसभा में मानव संसाधन मंत्रालय की ओर से पेश किया गया था.
रोड़ा विपक्ष में और खुद कांग्रेस के भीतर इसका विरोध है. राज्‍य पंचाटों का सिर्फ  अध्यक्ष ही न्यायपालिका से होगा, जिससे संभावना बढ़ जाती है कि मामलों की सुनवाई बगैर किसी न्यायिक सदस्य के होगी.
स्थिति विधेयक राज्‍यसभा में लाया गया था लेकिन विरोध के बाद इसे टाल दिया गया.
लोकपाल और लोकायुक्त विधेयक
विधेयक का उद्देश्य भ्रष्टाचार-विरोधी लोकपाल का गठन है जो भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की जांच कर उसमें सजा दे. लोकपाल अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश कर सकता है और अपराध को अंजाम दिए जाने की पुष्टि पर खुद केस दर्ज करवा सकता है.
रोड़ा अण्णा हजारे के नेतृत्व में सिविल सोसाइटी की ओर से छेड़े गए आंदोलन ने इसे बेकार बताया है. भाजपा और अन्य विपक्षी दल ऐसी स्वतंत्र जांच एजेंसी चाहते हैं, जिसके लोकपाल के साथ प्रशासनिक रिश्ते हों.
स्थिति विधेयक राज्‍यसभा में लाया गया था लेकिन विरोध के बाद इसे टाल दिया गया.

माइंस ऐंड मिनरल डेवलपमेंट ऐंड रेगुलेशन बिल
यह विधेयक 1952 के खनन अधिनियम का संशोधन है जो खदानों के परिचालन को  रेगुलेट करता है और खनिकों की सुरक्षा   आदि के लिए प्रावधान बनाता है. संशोधित विधेयक में खदान के 'स्वामी' की परिभाषा उसके तात्कालिक मालिक से बदल कर ऐसे व्यक्ति की रखी गई है जिसका खदान के सारे मामलों पर 'आखिरी नियंत्रण' हो.
रोड़ा खनन क्षेत्र में हुए घोटालों के उजागर होने के बाद यह विधेयक चर्चा में आया है. इसकी राह में मंत्रालयों के बीच का विवाद रोड़ा है.
स्थिति स्थायी समिति अपनी रिपोर्ट मई में पेश करेगी.

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा विधेयक
विधेयक कहता है कि 75 फीसदी तक ग्रामीण और 50 फीसदी तक शहरी आबादी को अनाज दिया जाना चाहिए. लाभार्थी व्यक्तियों तक अनाज की आपूर्ति न होने की स्थिति में उन्हें खाद्य सुरक्षा भत्ता मिलेगा.
रोड़ा  लाभार्थियों की पहचान को लेकर मतभेद   है. केरल और तमिलनाडु के मुख्यमंत्रियों ने इसका यह कहते हुए विरोध किया है कि यह उनके राज्‍यों में प्रभावशाली जन वितरण प्रणाली को  नष्ट कर देगा.
स्थिति स्थायी समिति को अभी रिपोर्ट जमा करनी है.

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