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खड़गपुर-टाटानगर-राउरकेला-आद्रा रेलवे सेक्शन पर रात में रेल नहीं आती

पिछले 17 महीनों से खड़गपुर-टाटानगर-राउरकेला-आद्रा रेलवे सेक्शन पर रात में नहीं चलती है यात्री रेलगाड़ी.

टाटा नगर रेलवे स्‍टेशन टाटा नगर रेलवे स्‍टेशन

रात के 10 बजे से लेकर सुबह 5 बजे तक तकरीबन 300 किमी वाले खड़गपुर-टाटानगर-राउरकेला-आद्रा रेलवे सेक्शन पर सन्नाटा पसरा रहता है और इस बात को 17 महीने गुजर चुके हैं. बात 28 मई, 2010 की है. इस दिन माओवादी हमले के कारण ज्ञानेश्वरी एक्सप्रेस के हादसे में लगभग 150 लोगों की मौत हो गई थी.

इसके  बाद ही रेल मंत्रालय ने सुरक्षा कारणों से इस सेक्शन पर यात्री रेलगाड़ियों का रात्रि परिचालन बंद कर दिया. हालांकि पिछले 17 महीनों में तकरीबन 60 बार सुरक्षा समीक्षा के बाद भी रात में रेलगाड़ियों की आवाजाही बंद ही पड़ी है. यही नहीं रात्रि सेवा बहाल करने के  लिए झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडीसा के आला अधिकारियों ने दर्जनों बार बैठकें भी कीं. नतीजा सिफर ही रहा.

यहां तक कि झारखंड सरकार ने अपने इलाकों से गुजरने वाली ट्रेनों को समुचित सुरक्षा देने की पेशकश तक की है, फिर भी रेलवे अभी तक इस खंड में रात में ट्रेन के परिचालन की हिम्मत नहीं जुटा सका है. विडंबना यह है कि जहां इस रेल खंड पर खनिजों से लदी मालगाड़ियां हरेक दस मिनट पर गुजरती हैं और रेलवे को करोड़ों रु. का राजस्व देती हैं, वहीं इस रेलखंड में रहने वाले लोगों की सुविधा के लिए रेल प्रशासन संवेदनाहीन बना हुआ है.

23 नवंबर 2011: तस्‍वीरों में देखें इंडिया टुडे

16 नवंबर 2011: तस्‍वीरों में देखें इंडिया टुडे

रेल मंत्रालय के इस टालू रवैये से आजिज आ चुके  झारखंड के कोल्हान इलाके के लोग और व्यवसायी सड़कों पर उतर आए हैं. मामले ने राजनैतिक रूप ले लिया है. पिछले दिनों राज्‍य भाजपा के  नेतृत्व में चक्रधरपुर रेलवे डिवीजन के डीआरएम कार्यालय के घेराव के दौरान गुस्साई भीड़ ने रेल प्रशासन को खासा परेशान कर दिया.

रात्रि सेवा को तुरंत बहाल करने की मांग को लेकर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिनेशानंद गोस्वामी सहित तमाम वरीय नेता घेराव में मौजूद थे. गोस्वामी ने कहा, ''केंद्र सरकार झारखंड के  साथ सौतेला रवैया अपना रही है. सुरक्षा की कमी के नाम पर पिछले डेढ़ साल से यात्री रेलगाड़ियां रात में नहीं चलतीं. रेल मंत्रालय को न तो यात्रियों की तकलीफ की कोई चिंता है और न ही इससे हो रहे राजस्व और व्यापार के नुक्सान की.'' रेलवे सूत्र बताते हैं कि मंत्रालय को तकरीबन 6,000 करोड़ रु. के राजस्व का नुक्सान झेलना पड़ा है.

9 नवंबर 2011: तस्‍वीरों में देखें इंडिया टुडे

2 नवंबर 201: तस्‍वीरों में देखें इंडिया टुडे

अकेले जमशेदपुर स्टेशन जहां तकरीबन 10 लाख रु. के  यात्री टिकट हर महीने बिकते थे, वह घटकर महज 5,00,000 रु. पर आ गए हैं. इन मार्गों पर चलने वाली गाड़ियां थका देने की हद तक देरी से चलती हैं. वरीय डीसीएम और चक्रधरपुर डिवीजन के प्रवक्ता ए.क हलधर बताते हैं, ''हमने अपने उच्चाधिकारियों को लोगों की भावनाओं से अवगत करा दिया है. अब आगे इस पर निर्णय लिया जाएगा.''

भाजपा ने आगे की रणनीति तय कर ली है. गोस्वामी बताते हैं, ''हम 26 नवंबर तक इंतजार करेंगे और अगर रेलवे ने रात्रि परिचालन बहाल नहीं किया तो हम आर्थिक नाकेबंदी शुरू करेंगे. झारखंड के खनिजों को बाहर ले जाने से रोकेंगे और यह एक बड़ी लड़ाई की शुरुआत होगी.'' इस बड़ी लड़ाई का आगाज 22 नवंबर से शुरू होने वाले संसद के शीतकालीन अधिवेशन में देखा जा सकेगा. भाजपा ने झारखंड से अपने सांसदों को इस बात का निर्देश दिया है कि सत्र के दौरान इस मामले को प्रमुखता से उठाएं. हालांकि भाजपा के उग्र आंदोलन के बाद रेलवे सूत्रों ने संकेत दिए कि रात्रि सेवा बहाल करने का निर्णय हफ्ते भर के अंदर लिया जा सकता है.

19 अक्‍टूबर 2011: तस्‍वीरों में देखें इंडिया टुडे
12 अक्‍टूबर 2011: तस्‍वीरों में देखें इंडिया टुडे
 
5 अक्‍टूबर 2011: तस्‍वीरों में देखें इंडिया टुडे

भाजपा को हरेक कदम पर मात देने की फिराक में लगी बाबूलाल मरांडी की झारखंड विकास मोर्चा (झाविमो), को यह समझते देर नहीं लगी कि भाजपा इस पूरे मामले का श्रेय लेने की स्थिति में है. मोर्चे ने आनन-फानन में भाजपा की घोषित तारीख से ठीक एक दिन पहले इस मुद्दे को लेकर प्रदर्शन कर डाला. भाजपा नेता सरयू राय टिप्पणी करते हैं, ''झाविमो के पास मुद्दों का अभाव रहा है. वह हमारे कार्यक्रमों की नकल कर सकती है.''

हालांकि झारखंड हाइकोर्ट ने राय के इस साल के मार्च के महीने में रेल सेवा को बहाल करने के लिए दायर लोकहित याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि यह मामला हाइकोर्ट के अधिकार क्षेत्र से बाहर का है.

28 सितंबर 2011: तस्‍वीरों में देखें इंडिया टुडे
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7 सितंबर 2011: तस्‍वीरों में देखें इंडिया टुडे

भाजपा के साथ-साथ राज्‍य सरकार भी गंभीर है और केंद्र के साथ दो-दो हाथ करने के मूड में भी. अर्जुन मुंडा कहते हैं, ''इस मुद्दे को लेकर मैं पिछले एक साल में कई बार रेल मंत्री और गृह मंत्री से मिला लेकिन लेकिन केंद्र सरकार इस पर गंभीर नहीं है. केंद्र राज्‍य में रेल का विकास नहीं चाहता.'' देखें भाजपा के ये प्रयास क्या रंग लाते हैं.

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