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जोधपुर सीडी कांड: चकरी से बड़े-बड़े चकराए

एक एएनएम के पास मौजूद कथित सेक्स सीडी ने उड़ाई सत्ता पक्ष की नींद. रहस्यमय ढंग से उसकी गुमशुदगी प्रदेश भर में चर्चा का विषय. कलाकार रही भंवरी की जीवनशैली ऐशोआराम वाली थी. ओहदेदारों से उसके खास ताल्लुकात थे.

जोधपुर सीडी कांड जोधपुर सीडी कांड

यह मामला राजस्थान की सियासत में बड़ा तूफान ला सकता है. प्रदेश के एक कैबिनेट मंत्री और सत्ता पक्ष के एक विधायक का नाम कथित रूप से एक सेक्स सीडी प्रकरण में उछला है. मामले के चर्चा में आने के बाद से स्वास्थ्य महकमे की एक एएनएम 36 वर्षीया भंवरी देवी के एकाएक गायब हो जाने से कई सारे सवाल खड़े हो रहे हैं.

पुलिस भंवरी देवी के अपहरण, हत्या या फिर आत्महत्या समेत तमाम पहलुओं की खोजबीन में जुटी है. भंवरी देवी के पति अमरचंद नट ने गुमशुदगी की प्राथमिकी हफ्ते भर पहले दर्ज कराई थी. पर अभी तक भी यह मामला पुलिस के लिए सिरदर्द बना हुआ है.

पुलिस ने जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (पीएचईडी) के एक ठेकेदारों और लूणी के विधायक मलखानसिंह के रिश्तेदार सोहनलाल विश्नोई को इस मामले में बिलाड़ा से पकड़ा है. गुरुवार को पुलिस ने उसे राजस्थान हाइकोर्ट में पेश करके सात दिन की रिमांड पर ले लिया. विश्नोई ने भंवरी से स्विफ्ट गाड़ी खरीदी थी.

1 सितंबर को भंवरी, बताते हैं उसी सौदे के बकाया पैसे लेने, घर से निकली थी. स्वास्थ्य विभाग की मानें तो वह पिछली 25 अगस्त से ही ड्यूटी पर नहीं आ रही थी. अब पुलिस उसके मोबाइल कॉल की डीटेल खंगालने में जुटी है.

पुलिस को अभी तक ऐसा कोई सुराग हाथ नहीं लगा है, जिसकी बिना पर वह कार्रवाई को सही दिशा में ले जा सके. जोधपुर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक उमेश मिश्र, जोधपुर (ग्रामीण) पुलिस अधीक्षक नवज्‍योति गोगोई समेत कई आला अफसर मामले की गंभीरता को देखते हुए मौके पर अपनी पूरी ताकत के साथ जमे हुए हैं. एक अदनी-सी एएनएम की गुदशुदगी पर पुलिस महकमे की इतनी सक्रियता. बताने वाले बताते हैं कि पुलिस ने इतने हाथ-पांव तो हाल ही में रहस्यमय ढंग से लापता हुए (फिर मिले) बारां के पूर्व जिला कलेक्टर नवीन जैन के मामले में भी नहीं मारे थे. इतनी बड़ी प्रशासनिक तत्परता ही असल में घटना के पीछे की गंभीरता का सुराग दे देती है.

छत्तीस वर्ष की, सुंदर चेहरे-मोहरे और आकर्षक कदकाठी की भंवरी देवी का ससुराल जिले के छोटे-से गांव बोरुंदा में है लेकिन उसकी पहुंच और ताल्लुकात खासे ऊंचे ओहदे पर बैठे लोगों से भी हैं. भंवरी का पति एक लक्जरी गाड़ी किराए पर चलाता है. खुद एएनएम की मामूली नौकरी करने वाली भंवरी के ठाठ-बाट भी ओहदेदारों से कम नहीं हैं. उसके पास जोधपुर में आलीशान मकान और बोरूंदा में भी दो मंजिला मकान है. तीन बच्चों की मां भंवरी की एक बेटी जयपुर में पढ़ रही है.

गाड़ियों का उसे खास शौक है. पिछले दिनों उसने 5-6 लाख रु. में आने वाली स्विफ्ट गाड़ी बेचकर इतनी कीमत में आने वाली नई इंडिगो गाड़ी खरीदी थी. चलाने के लिए एक ड्राइवर भी रखा हुआ था. भंवरी के घर पर बेडरूम में पुलिस की छानबीन के दौरान पता चला कि वह विदेशी और महंगे स्प्रे काम में लेती थी.

ऐशोआराम की जिंदगी जीने वाली भंवरी की पहुंच और पहचान से क्षेत्र के लोग अच्छी तरह वाकिफ थे. जोधपुर के बिलाड़ा क्षेत्र के जालीवाड़ा खुर्द के उप स्वास्थ्य केंद्र पर कार्यरत भंवरी नौकरी के नाम पर केवल दस्तखत करने जाती थी. उसके ऊंचे ताल्लुकात का ही नतीजा था कि उसकी ऐसी 'लापरवाही' पर भी शिकायत करने की किसी की हिम्मत नहीं हुई. महकमे के लोगों की मानें तो पिछले आठ महीनों में वह मुश्किल से आठ दिन ही नौकरी पर आई होगी.

हां, मर्जी की मालकिन भंवरी की एक बार जरूर बेनण गांव के ग्रामीणों ने कलेक्टर से शिकायत की. इस पर कलेक्टर ने उसे एपीओ कर दिया था. उसके अगले ही दिन वह जालीवाड़ा खुर्द के उप स्वास्थ्य केंद्र पर लग गई. जाहिर है यह उसकी पहुंच का ही नतीजा था. जिला स्वास्थ्य और चिकित्सा अधिकरी और ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी भी उस पर हमेशा मेहरबान रहे बल्कि यूं कहें कि मेहरबान रहना पड़ा. उसके लिए नियमों को ताक पर रखा गया. उप-स्वास्थ्य केंद्र पर एक एएनएम के प्रावधान के बावजूद भंवरी को दूसरी एएनएम के तौर पर लगाया गया. वजहः शायद यही कि उसके आने, न आने पर कोई स्थानीय विरोध न हो.

प्रदेश भर में तमाम गर्म चर्चाओं के दौर के बीच बताया जा रहा है कि भंवरी के पास तीन सीडी हैं. एक प्रदेश के एक कैबिनेट मंत्री की, दूसरी सत्ता पक्ष के एक विधायक की और तीसरी पूर्व जिला उप प्रमुख की. जाहिर है, लोगों को पहला शक स्थानीय विधायक पर ही होता है लेकिन पिछले तीन महीने से लोगों को जवाब दे-देकर थक चुके बिलाड़ा के भाजपा विधायक अर्जुनलाल कहते हैं, ''जी वो विधायक मैं नहीं हूं.'' वे आगे बताते हैं किसी भंवरी देवी का तीनेक महीने पहले फोन जरूर आया था. उसने कांग्रेस छोड़कर भाजपा से जुड़ने की बात कही थी. ''उसने यह भी कहा था कि उसे वसुंधरा (राजे) जी से मिला दिया जाए, उसके पास सरकार गिराने का मसाला है.''

अर्जुन लाल की मानें तो वे किसी पचड़े में नहीं पड़ना चाहते थे, इसलिए उन्होंने भंवरी के फ ोन उठाने बंद कर दिए. पर वह मसाला क्या था? वह धीरे-धीरे क्षेत्र के लोगों की जबान पर आ गया.

बिलाड़ा के रहने वाले और पड़ोस के लूणी विधानसभा क्षेत्र के विधायक मलखानसिंह भी अपने को मामले से दूर रखते हैं. ''इस मामले में पुलिस से ही पूछिए. जब जांच चल रही हो तो फिर उस पर टिप्पणी करना ठीक नहीं.'' तेजा दशमी पर नागौर के खरनाल में आए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डॉ. चंद्रभान ने तो बेमुरव्वती से यहां तक कह दिया कि उन्हें तो इस मामले की कोई जानकारी ही नहीं. वैसे मामले के जांच अधिकारी, जोधपुर के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अभिलाष टाक बताते हैं कि भंवरी की गुमशुदगी के बाद उसके अपहरण का भी मामला दर्ज हुआ है.

बता दें कि रसूखदारों से ताल्लुक के चलते भंवरी का राजनीति में भी दिल लगने लगा था. सरकारी नौकर रहते हुए वह अपने गांव और स्थानीय चुनावों में कांग्रेस प्रत्याशी का प्रचार करती. नेताओं के साथ और मंच पर भी वह नजर आती थी. प्रदेश के शिक्षा मंत्री मास्टर भंवरलाल ने नागौर में पंचायतीराज व्यवस्था के तहत पंचों को नए अधिकार देते वक्त जब 'नर्सों की चोटी आपके हाथ में' जैसा विवादित बयान दिया तो जोधपुर जिले में पहले भंवरी ने ही उनका विरोध किया था. सुनने में आया कि पिछले विधानसभा चुनावों में भंवरी ने कांग्रेस से टिकट भी मांगा था. न मिलने पर निर्दलीय लड़ने की मंशा बनाई पर स्थानीय नेताओं के समझाने पर मान गई.

भंवरी एक कलाकार भी थी. स्थानीय लोकदेवताओं समेत कई तरह के विषयों पर तैयार एल्बमों में वह काम कर चुकी है. मसलन, कुंवर वीर तेजा, राम भरोसे गाड़ी और नहीं जाउं सासरिए. अब उसका रुतबा, उसके मोबाइल की लंबी कॉल डीटेल और लोगों में उससे जुड़ी चर्चाएं पुलिस कार्रवाई में अड़चनें डाल रही हैं. अब देखना यह है कि क्या पुलिस दूध का दूध और पानी का पानी कर पाती है?

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