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राजस्‍थान में भंवरी का सियासी भंवर

अमरचंद का आरोप है कि प्रदेश के कैबिनेट मंत्री मदेरणा के फोन उसकी पत्नी भंवरी के पास आते थे. मदेरणा इस मामले को अपने खिलाफ सियासी साजिश मानते हैं.

रसूख वाले लोगों में अपनी ऊंची पहुंच के लिए चर्चित राजस्थान की एक एएनएम भंवरी देवी का अपहरण (या मौत!!) प्रदेश की अशोक गहलोत सरकार के लिए जी का जंजाल बन गया है. दो हफ्ते से लापता इस 36 वर्षीया सुघड़ नटनी के लटके-झ्टकों और उसकी भव्य जीवनशैली के किस्से अब लोगों की जबान पर आ गए हैं.

उसके पति अमरचंद राजनट ने अब प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री और जाट लॉबी के सशक्त नेता महिपाल मदेरणा पर सीधे-सीधे आरोप मढ़ा है. ''मदेरणा मेरे घर पर बीवी को फोन करते थे. हमने कहा भी कि साब हम छोटे आदमी हैं, हमें क्यों परेशान करते हो?'' अपनी गर्दन फंसने का अंदेशा दिखते ही गहलोत ने अप्रत्याशित तेजी दिखाते हुए मामला सीबीआइ को सौंप दिया.

प्रदेश के गृह मंत्री शांति धारीवाल ने तो हालांकि यही कहा कि मदेरणा की रजामंदी से मामला सीबीआइ को सौंपा गया है. पर यह सभी के लिए चौंकाने वाला था क्योंकि जोधपुर के आइजी उमेश मिश्र की अगुआई में पुलिस भंवरी के अपहरण के लिए लगाए गए लोगों को पकड़ चुकी थी. उन्हीं में से एक अशोक को सीकर जिले के रामगढ़ से पकड़ा गया था.

अब पुलिस भंवरी या उसकी लाश की तलाश में थी. कुछेक दिन और इंतजार करने की बजाए गहलोत ने मामला सीबीआइ के हवाले कर दिया. यहां बता दें कि भंवरी जोधपुर के बिलाड़ा क्षेत्र के जालीवाड़ा खुर्द उप-स्वास्थ्य केंद्र पर एएनएम थी. वहां वह बस दस्तखत करने जाती थी. किसी की मजाल नहीं हुई कि उसे कोई परेशान करे.

जोधपुर पुलिस को यकीन है कि भंवरी को स्वास्थ्य महकमे के ठेकेदार सोहनलाल विश्नोई ने फोन करके बुलाया था. वह कांग्रेस विधायक मलखान सिंह का रिश्तेदार और दिवंगत कांग्रेस नेता रामसिंह विश्नोई का बेटा है, जिन्हें गहलोत ने अपने पिछले कार्यकाल में मंत्री पद से हटा दिया था. उनका एक बेटा अवैध ड्रग फैक्टरी चलाते पकड़ा गया था.

पुलिस सूत्रों के मुताबिक हिरासत में लिया गया व्यक्ति यह नहीं उगल रहा है कि उसने भंवरी को मारा है या नहीं पर एक पुलिस अफसर के मुताबिक, ''सोहनलाल और इस शख्स ने कुछ निर्णायक सुराग दिए हैं, जो किसी वीसीडी से मामले के तार जोड़ते हैं.'' एक बार अपहर्ताओं ने लाश को झंसी के पास गाड़ देना कबूला पर वहां तालाब निकला.

इधर राजस्थान के खासकर मारवाड़ इलाके में हर कोई भंवरी और उसके कामकाज के बारे में अब ज्‍यादा से ज्‍यादा जानना चाहता है. तभी तो उसने गानों के एल्बमों की बिक्री भी धड़ल्ले से शुरू हो गई है, जिनमें भंवरी ने अभिनय किया है.

जोधपुर के श्रीकृष्णा कैसेट्स का बनाया एल्बम कुंवर तेजाजी जमकर बिक रहा है. राम भरोसे गाड़ी और नई जाउं सासरिए भी काफी चर्चा में हैं. इन एल्बमों के जरिए लोग भंवरी को करीब से देखने-जानने की कोशिश कर रहे हैं.

भंवरी और मदेरणा की वीसीडी की चर्चा तो महीनों से थी और गहलोत को भी इसके संकेत दे दिए गए थे. इस पर मदेरणा को उन्होंने सतर्क रहने को कहा था बताते हैं. पता नहीं, वीसीडी है भी या कि मदेरणा को नीचा दिखाने के लिए यह एक प्रोपेगैंडा है. गहलोत तो वैसे इससे खुश ही होंगे क्योंकि इससे उन्हें उनके पिता परसराम मदेरणा से हिसाब चुकता करने का मौका मिलेगा, जिन्होंने गहलोत को मुख्यमंत्री बनाए जाने का विरोध किया था.

भंवरी के फोन ब्यौरे बताते हैं कि वह ढेरों लोगों से बतियाती थी. इन्हीं में नागौर का भी एक शख्स था, जो पूछताछ के लिए आने में हिचक रहा है. पर हैरत की बात है कि पुलिस भंवरी के पिछले सालों के कॉल डीटेल नहीं देख रही है, जिससे पता चल सकता है कि मदेरणा उसके संपर्क में थे या नहीं.

कॉल डीटेल अगर एक फर्जी मुठभेड़ मामले में एडीजी अरविंद जैन और पूर्व मंत्री राजेंद्र राठौड़ के खिलाफ पर्याप्त सबूत दे देते हैं तो फिर इस मामले में पुलिस कॉल डीटेल के ब्यौरों के बारे में चुप्पी क्यों साधे हुए है? संदिग्ध कई दिनों से उसके कब्जे में हैं. ऐसे में उनसे पर्याप्त कारगर सबूत निकाले जा सकते हैं.

बेहतर होता कि गहलोत अपनी पुलिस से पेशेवर ढंग से इसकी जांच कराते और किसी नतीजे पर पहुंचते. पर लगता है कि हमेशा की तरह उन्होंने सियासी नतीजों की ज्‍यादा फिक्र की है. मामला सीबीआइ को देकर उन्होंने जाट मतदाताओं से अपनी तटस्थता जाहिर करने की कोशिश की है, जिसके कि मदेरणा प्रतिनिधि हैं. लेकिन उनके एक मंत्री का इस तरह घिरना उनके मुख्यमंत्रित्व पर भी सवाल खड़े करता है

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