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आइपीएस तबादले: माया के सितारे, किनारे सारे

मायावती के राज में कभी उनके दाहिने हाथ रहे आइपीएस अधिकारी तख्ता पलट के बाद अब हाशिए पर लगा दिए गए हैं.

अखिलेश यादव अखिलेश यादव

उत्तर प्रदेश की बागडोर संभालते ही मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा था कि उनकी सरकार किसी भी अधिकारी और नेता के खिलाफ राजनैतिक द्वेष से कार्य नहीं करेगी लेकिन सत्तानशीं होने के 48 घंटे तक भी यह भरोसा कायम न रह सका.

17 मार्च को मुख्यमंत्री ने पुलिस महकमे में तबादले की पहली सूची जारी की. इसमें उन दो अफसरों को 'ठिकाने' लगाया गया, जिन पर सपा कार्यकर्ताओं के उत्पीड़न का आरोप था. ये थे भारतीय पुलिस सेवा (आइपीएस) के अधिकारी और लखनऊ के डीआइजी पद पर तैनात डी.के. ठाकुर और प्रांतीय पुलिस सेवा (पीपीएस) के अधिकारी और मेरठ के एएसपी बी.पी. अशोक. इन्हें रिक्रूट ट्रेनिंग सेंटर, चुनार भेज दिया गया है.

ठाकुर उस वक्त सपा के निशाने पर आए, जब उन्होंने बीते वर्ष 9 मार्च को प्रदर्शन कर रहे सपा कार्यकर्ताओं को लाठियों से पीटकर सड़क पर गिरा दिया और लोहिया वाहिनी के प्रदेश अध्यक्ष आनंद भदौरिया को जूतों से रौंदा. अशोक की गिनती भी मायावती के बेहद प्रभावी अधिकारियों में होती है.Akhilesh Yadav

उनके पिता और रिटायर आइपीएस अफसर देवी सिंह अशोक भी बसपा संस्थापक कांशीराम और मायावती के करीबी थे. अशोक उस समय चर्चा में आए, जब जनवरी, 2008 में उन्होंने लखनऊ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आवास पर प्रदर्शन करने जा रहे सपा नेता शिवपाल सिंह यादव और अखिलेश यादव के साथ अभद्रता की. वे उस समय क्षेत्राधिकारी हजरतगंज के पद पर तैनात थे.

इसके बाद कई मौकों पर प्रदर्शन करने वाले सपा कार्यकर्ताओं से भी अशोक ने बदसलूकी की. बीते वर्ष 9 मार्च को लखनऊ में एएसपी पद पर तैनात अशोक ने अमौसी एयरपोर्ट पर अखिलेश से दुर्व्यवहार कर उन्हें गिरफ्तार किया था.

मायावती सरकार के साथ नजदीकी के कारण आइपीएस अधिकारी ब्रजलाल को पिछले वर्ष अन्य समकक्ष पुलिस अधिकारियों की वरिष्ठता को नजरअंदाज कर पुलिस महानिदेशक बनाया गया. इससे सपा ब्रजलाल के खिलाफ आक्रामक हो गई.

चुनाव की घोषणा होते ही सपा के वरिष्ठ नेताओं ने ब्रजलाल को पुलिस महानिदेशक पद से हटाने के लिए चुनाव आयोग का दरवाजा भी खटखटाया. आयोग ने उन्हें पुलिस महानिदेशक पद से हटाकर महानिदेशक (पीएसी) बना दिया. लेकिन अब सपा की सरकार बनने के बाद उन्हें महानिदेशक, भीमराव आंबेडकर पुलिस अकादमी, मुरादाबाद के पद पर भेज दिया गया है. इसी तरह आइपीएस विजय कुमार मायावती के खास सिपहसलार थे.

माया सरकार में आइजी (स्थापना) के पद पर काबिज रहे विजय कुमार नई सरकार में आइजी (अभियोजन) हो गए हैं. एस.आर.एस. आदित्य ने इटावा में एसपी पद पर रहते हुए जनवरी, 2008 में प्रदर्शन कर रहे सपा कार्यकर्ताओं पर गोली चलवा दी, जिसमें दो लोगों की मौत हो गई थी. अखिलेश के गद्दी संभालते ही उन्हें गोरखपुर के पुलिस ट्रेनिंग स्कूल में भेज दिया गया है.Vijay Bhushan

वर्ष 2009 में फिरोजाबाद में हुए लोकसभा उपचुनाव में अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल चुनाव हार गई थीं. उस वक्त वहां रघुवीर लाल एसपी पद पर तैनात थे. उपचुनाव में हार के बाद सपा ने उन्हें निशाने पर लेते हुए गड़बड़ी का आरोप लगाया, लेकिन सपा के इन आरोपों को दरकिनार कर मायावती ने रघुवीर लाल को इनाम के तौर पर गाजियाबाद का वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) बनाकर प्राइम पोस्टिंग दे दी. लेकिन अब सपा सरकार में वे पीएसी, आजमगढ़ में तैनात हो गए हैं.

मायावती के करीबी चंद्रप्रकाश और प्रेमप्रकाश भी इसी लिस्ट में थे जिनकी गिनती तेज-तर्रार आइपीएस अधिकारियों में होती है. प्रेमप्रकाश पिछले साल कानपुर में डीआइजी रहते हुए तब चर्चित हुए जब शहर में कक्षा छह की एक छात्रा के साथ दुष्कर्म के बाद मौत के मामले में उन्होंने एकतरफा कार्रवाई की. तब सपा ने उन्हें हटाने की मांग की, जिसे मायावती ने दरकिनार कर दिया. अब सत्ता में आते ही सपा ने प्रेमप्रकाश और चंद्रप्रकाश को महत्वहीन विभाग 'रूल्स ऐंड मैनुअल्स' का रास्ता दिखा दिया है.

पीपीएस अधिकारी विजय भूषण उस समय चर्चा में आए, जब उन्होंने 2 जून, 1995 को लखनऊ में हुए स्टेट गेस्ट हाउस कांड के दौरान हमलावर सपा कार्यकर्ताओं से मायावती को बचाया था. बसपा के शासन में उन्हें लखनऊ, वाराणसी और नोएडा जैसे जिलों में एएसपी की जिम्मेदारी मिली. लेकिन अब उन्हें नक्सलियों से निबटने के लिए चंदौली भेज दिया गया है. इन कुछ प्रमुख पुलिस अधिकारियों के अलावा मायाराज में अच्छे पदों पर आसीन 200 से अधिक अफसरों को चुन-चुनकर महत्वहीन पदों पर भेज दिया गया है.Brijlal

इसके पहले बसपा के शासन में भी इसी तरह तबादले हुए हैं, लेकिन इन तबादलों को लेकर आरोपों-प्रत्यारोपों का बाजार गर्म है. बसपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य कहते हैं, ''सपा सरकार राजनीतिक द्वेषवश अधिकारियों का तबादला कर रही है.'' और सपा के प्रदेश प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी कहते हैं, ''यह काम किसी राजनैतिक द्वेष की भावना से नहीं किया गया है.''

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