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सेना प्रमुख उम्र विवाद: मामला असम्मान का

सेना प्रमुख जनरल वी.के. सिंह ने सरकार को अब अदालत में घसीट लिया. उनकी जीत से सेना का उत्तराधिकार क्रम गड़बड़ा सकता है.

ए.के.एंटनी के साथ सेनाध्‍यक्ष वीके सिंह ए.के.एंटनी के साथ सेनाध्‍यक्ष वीके सिंह

जनरल वी.के. सिंह ने 64वें सेना दिवस पर सरकार की महत्वपूर्ण हस्तियों को दी जाने वाली परंपरागत चाय पार्टी की मेजबानी की. साउथ ब्लॉक के पास उनके विशाल बंगले में आमंत्रित विशिष्ट मेहमानों में राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी जैसी हस्तियां शामिल थीं. जब वे रक्षा मंत्री ए.के. एंटनी के साथ फोटो खिंचवा रहे थे तो ऐसा लगा कि जन्मतिथि के उनके विवादास्पद मुद्दे को सुलझा लिया गया है.

25 जनवरी 2012: तस्‍वीरों में देखें इंडिया टुडे

यह पेचीदा चाल थी. अगले ही दिन 16 जनवरी को जनरल सिंह सरकार को अदालत में घसीटने वाले पहले कार्यरत सेनाध्यक्ष बन गए. सुप्रीम कोर्ट में दायर उनकी याचिका ने सरकार के मई 1950 वाली जन्म तारीख को ही मंजूर किए जाने के फैसले को चुनौती दी. अगर वे जीतते हैं तो उन्हें सेनाध्यक्ष के रूप में 3 साल का कार्यकाल पूरा करने का मौका मिलेगा और वे इस साल 31 मई को रिटायर होने की जगह 2013 में अवकाश ग्रहण करेंगे. उनके दो वकीलों में से एक पुनीत बाली कहते हैं, यह 'उनके गौरव, सत्यनिष्ठा और सम्मान' का मामला है.

अपनी याचिका में जनरल सिंह का कहना है कि उन्होंने 'संस्था के हित में' 2006 और फिर 2008 में 1950 को अपनी जन्मतिथि स्वीकार की थी. सेना दिवस प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने इसे 'संस्था के हित में व्यक्तिगत मामला' बताया. सरकार ने अब तक इस मामले पर सोची-समझी चुप्पी साध रखी है. लगता नहीं कि वह सेनाध्यक्ष को बर्खास्त करेगी.

11 जनवरी 2012: तस्‍वीरों में देखें इंडिया टुडे

इस मामले पर वह अदालती लड़ाई ही लड़ेगी. उसका प्रतिवाद अटॉर्नी जनरल (एजी) गुलाम वाहनवती की राय पर निर्भर करेगा. एजी ने सरकार को 1951 की जन्मतिथि को मान्यता देने के खिलाफ अपनी सलाह दी थी. एजी का कहना है कि जनरल सिंह ने कोर कमांडर, आर्मी कमांडर और अंत में आर्मी चीफ के रूप में अपनी पिछली तीन नियुक्तियों के समय तब आपत्ति नहीं की जब 10 मई, 1950 को उनकी जन्मतिथि माना गया था.

04 जनवरी 2012: तस्‍वीरों में देखें इंडिया टुडे

सरकार अगले सेना प्रमुख की घोषणा भी कर सकती है. (पूर्वी कमान के लेफ्टिनेंट जनरल विक्रम सिंह भावी सैन्य प्रमुख हो सकते हैं.) उत्तरी कमान के लेफ्टिनेंट जनरल के.टी. परनाइक और पश्चिमी कमान के लेफ्टिनेंट जनरल एस.आर. घोष भी अपनी मर्जी के खिलाफ उत्तराधिकार की इस लड़ाई में घसीटे गए हैं. जनरल सिंह की याचिका का अंजाम यह फैसला कर सकता है कि इन तीनों कमांडरों में से अगला सेनाध्यक्ष कौन बनेगा. दुर्भाग्य से इस शीर्ष पद की चमक अर्से से चल रहे व्यक्तिगत जंग के चलते पिछले कुछ महीनों में फीकी पड़ गई है.

अदालत में एक कार्यरत सेनाध्यक्ष के सरकार से उलझने के निहितार्थ होते हैं. रक्षा मंत्रालय उनके जिन व्यक्तिगत रिकॉर्डों की जांच-पड़ताल करना चाहे, वे रिकार्ड ऐसे विभागों द्वारा रोके जा सकते हैं जो सीधे उसी के अधीनस्थ हैं. पूर्व जज एडवोकेट जनरल, मेजर जनरल नीलेंद्र कुमार का कहना है, 'यह सेना और रक्षा मंत्रालय की असैनिक नौकरशाही के बीच और अधिक कड़वाहट को जन्म दे सकता है.'

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