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वाराणसी ब्‍लास्‍ट को लेकर सियासी तकरार

चिदंबरम ने वाराणसी में हुए विस्फोट को राज्‍य सरकार की सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर चूक करार दिया, तो मायावती ने पलटवार करते हुए यह खंडन किया कि राज्‍य सरकार को ऐसे हमले की कोई पूर्व सूचना दी गई थी.

वाराणसी में गंगा किनारे हुआ शक्तिशाली विस्फोट न सिर्फ शीतला घाट को खून के छींटों, चीखों और आसपास के क्षेत्रों में हुई उसकी प्रतिध्वनि में डुबो गया बल्कि वाराणसीवासियों के मन में एक अमिट घाव भी छोड़ गया. तीन साल से भी कम अवधि में यह शहर में हुआ दूसरा आतंकवादी हमला था. 7 दिसंबर को शाम 6.30 बजे गंगा आरती के दौरान हुए इस हमले में कोई 35 लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे, जिनमें दो वर्ष की दुधमुंही बच्ची स्वास्तिका बाद में अस्पताल में दम तोड़ गई.

उसी रात को मुख्यमंत्री मायावती एक विशेष विमान से घटना स्थल पर पहुंचीं और बीएचयू स्थित सर सुंदरलाल अस्पताल जाकर घायलों का हालचाल पूछा. घायलों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा, ''सभी घायलों का सरकारी खर्चे पर इलाज किया जाए. यह एक दुखद घटना है. आतंकवाद का मुकाबला दलगत भावना से ऊपर उठकर करना चाहिए.''

पर हमले के कष्टभोगियों की पीड़ा अभी कम नहीं हुई थी और घाव अभी ताजा ही थे कि अगले दिन केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम भी घटना स्थल पर जा पहुंचे. उन्होंने कहा, ''यह राज्‍य सरकार की गंभीर चूक लगती है. आतंकी धमाके की बाबत केंद्र ने 10 माह पहले ही राज्‍य सरकार को आगाह कर दिया था. इस साल ही तीन दफा चेतावनी दी गई और दशाश्वमेध घाट पर हमले की भी आशंका जताई गई थी. और आखिरी चेतावनी तो विस्फोट से दो दिन पहले ही दी गई. यह वारदात निगरानी में कोताही का नतीजा है.''

{mospagebreak}इससे उन्होंने यह राजनैतिक संदेश देने की कोशिश की कि राज्‍य की बसपा सरकार आतंकी हमलों को रोक पाने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में सक्षम नहीं है. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रीता बहुगुणा-जोशी ने भी उसी सुर में सुर मिलाते हुए बसपा सरकार को दोषी ठहराया. दोनों नेता यह भूल गए कि मुंबई हमले के दौरान जब भाजपा ने यूपीए सरकार की आलोचना की थी तो केंद्र ने आतंकी हमले के समय 'एकजुटता न दिखाने' के लिए भाजपा को आड़े हाथों लिया था.

इस पर मायावती के सब्र का बांध टूट गया. उन्होंने कैबिनेट सचिव शशांक शेखर सिंह को तुरंत प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाकर चिदंबरम तथा कांग्रेस के खिलाफ मोर्चा खोलने का निर्देश दिया. चिदंबरम दिल्ली लौटे ही थे कि शशांक शेखर ने वार किया, ''उत्तर प्रदेश सरकार को इस बारे में कोई ऐसी सूचना नहीं मिली, जिस पर वह कार्रवाई करती.''

मुख्यमंत्री को उद्धृत करते हुए उन्होंने कहा कि आरोपों-प्रत्यारोपों के बजाए केंद्र को राज्‍य को ऐसे अत्याधुनिक उपकरण मुहैया कराने चाहिए जो उसने महाराष्ट्र को दिए थे. मुख्यमंत्री ने भी आतंकी खतरे का मुकाबला करने के लिए उत्तर प्रदेश को अर्द्ध-सैनिक बलों की 125 कंपनियां देने की मांग करते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पत्र लिखा है.{mospagebreak}

इन आरोपों-प्रत्यारोपों के बीच आतंकवादी, उनके समर्थक और चुपचाप पड़ी इकाइयां राज्‍य में खतरनाक तरीके से अपने फन फैला रही हैं. पिछले छह साल में राज्‍य में सात आतंकी हमले हो चुके हैं. वाराणसी को आतंकियों ने दूसरी बार निशाना इसलिए बनाया है क्योंकि हिंदुओं की यह पवित्र नगरी उनके सामाजिक, सांस्कृतिक और शैक्षिक स्तंभ का प्रतीक है. शहर में विदेशियों की भी खासी आबादी है, जो हिंदू संस्कृति, धर्म और कर्म-कांड सीखने के लिए बड़ी अवधि तक यहां रहते हैं. 2007 में आतंकियों ने इसी तरह संकटमोचन मंदिर समेत तीन स्थानों पर विस्फोट किए थे.

7 दिसंबर के बम विस्फोट की जिम्मेदारी लेने वाले इंडियन मुजाहिदीन नामक संगठन की पूर्वी उत्तर प्रदेश में गहरी जड़ें हैं, पर कानून लागू करने वाली एजेंसियां राजनैतिक वजहों से उनकी जड़ों पर गहरा प्रहार करने में नाकाम रही हैं. गत 18 साल में पुलिस ने देशी और विदेशी आतंकी संगठनों के लिए काम करने वाले कोई 270 संदिग्ध आतंकियों और 130 चुपचाप पड़ी इकाइयों को पकड़ा है, पर प्रत्यक्ष राजनैतिक कारणों के चलते वह उनका सफाया नहीं कर पाई है.

कुछ मीडिया संस्थानों को विस्फोट की जिम्मेदारी लेने वाली इंडियन मुजाहिदीन की मेल में दावा किया गया है कि यह विस्फोट 6 दिसंबर, 1992 को बाबरी मस्जिद ढहाने का बदला लेने के लिए किया गया है. यह संगठन राम जन्मभूमि की मिल्कियत को लेकर इलाहाबाद हाइकोर्ट के फैसले से भी खुश नहीं है. फैसले में इस विवादास्पद भूमि का दो-तिहाई भाग हिंदुओं को और एक-तिहाई मुसलमानों को दिया गया है.

{mospagebreak}जब शीतला घाट की सीढ़ियों पर दूध के कंटेनर में रखा बम फटा तो गंगा आरती समाप्ति की ओर थी. जबरदस्त विस्फोट होते ही घाट पर भगदड़ मच गई. वहां के मंदिर में फूल-माला बेचने वाले मदन के मुताबिक, ''कुछ समझ में ही नहीं आया कि क्या हुआ. आंखों के सामने अंधेरा-सा छा गया. कुछ लोग घायल अवस्था में इधर-उधर चीख चिल्ला रहे थे, तो बहुत से लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भाग रहे थे.''

विस्फोट कांड में अपनी बेटी स्वास्तिका को गंवा चुके संतोष शर्मा कुछ कहने की स्थिति में नहीं दिखे. कुछ पूछने पर उनकी आंखों से सिर्फ आंसू गिरने लगते हैं. उनकी आंखें यही पूछ रही लगती हैं कि आखिर नन्हीं-सी बच्ची ने किसी का क्या बिगाड़ा था. काशी विद्यापीठ, वाराणसी के हिंदी विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. सुरेंद्र प्रताप सवाल उठाते हैं, ''दो साल की स्वास्तिका को मारकर आतंकवादी क्या संदेश देना चाहते हैं? अपनी बात को कहने और मनवाने का दूसरा भी तरीका है. इस कायरतापूर्ण कार्य से उनकी बुजदिली का भी पता चलता है.''

इस कांड में विदेशियों को खास तौर से निशाना बनाया गया था. जिस स्थान पर विस्फोट हुआ उसी के पास के चबूतरे पर बैठकर विदेशी गंगा आरती का आनंद लिया करते हैं. मंगलवार को भी बड़ी संख्या में विदेशी वहां बैठकर गंगा आरती का लुत्फ उठा रहे थे कि अचानक विस्फोट हुआ जिसमें इटली की 40 वर्षीया अलेक्जेंड्रा और फ्रांस की 25 वर्षीया मिस राफेल बुरी तरह घायल हो गईं. घायलों और मृतकों की संख्या में और इजाफा हुआ होता यदि विस्फोटक स्थल के पास बड़ा पत्थर नहीं होता.{mospagebreak}

इटली के एंजिलो का कहना था, ''यह सीधे-सीधे भारत की धर्म एवं संस्कृति पर हमले के साथ उसकी हृदयस्थली को भेदने की कार्रवाई है जिसकी कड़ी निंदा की जानी चाहिए.''

जहां केंद्र और राज्‍य सरकारें एक-दूसरे पर आक्रामक मुद्रा में हैं, वहीं भाजपा केंद्र और राज्‍य दोनों सरकारों को इसके लिए दोषी मान रही है. भाजपा के वाराणसी के मेयर कौशलेंद्र सिंह कहते हैं, ''पिछले कुछ कांडों में पकड़े गए आतंक-वादियों को उनके अंजाम तक पहुंचाने के बजाए उन्हें एक तरह से सुरक्षा प्रदान की गई है, ऐसे में आतंकवादियों के हौसले पस्त होने के बजाए बढ़ेंगे. परिणामस्वरूप ऐसी घटनाएं सामने आएंगी ही. राज्‍य सरकार की भी अधिकारियों पर से पकड़ ढीली होती जा रही है, वरना उसी स्थान पर चेकिंग के बाद भी विस्फोट कैसे हो जा रहा है.''

मुख्यमंत्री मायावती अर्द्धसैनिक बलों की कमी का रोना भले ही रो रही हों, लेकिन ऐसा सचमुच लगता है कि अधिकारियों की नकेल पर से उनकी पकड़ ढीली होती जा रही है ऐसा मानते हुए प्रो. सुरेंद्र प्रताप कहते हैं, ''आरती से ठीक आधा घंटा पहले स्निफर डॉग ने आसपास के स्थलों की चेकिंग की थी. ऐसे में वहां अगर विस्फोट होता है तो यह बहुत बड़ी लापरवाही है जिसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए.'' सीओ दशाश्वमेध सुश्री कविता सा ने भी स्वीकार किया कि मंगलवार को आरती से पहले नियमित जांच की गई थी.{mospagebreak}

भारत की इस हृदयस्थली पर हुए आतंकवादी हमले के बाद काशी की जनता ने जिस तरह से धैर्य का परिचय देते हुए सामाजिक सौहार्द को कायम रखा वह काबिलेतारीफ है. कौशलेंद्र कहते हैं, ''देश की एकता-अखंडता और सामाजिक सौहार्द को बिगाड़ने के आतंकवादियों के मंसूबे पर काशी की जनता ने पानी फेर दिया. काशी की जनता अब जान चुकी है कि कुछ कौमें हमें लड़ाना चाहती हैं लेकिन हम उनके मंसूबे कभी पूरे नहीं होने देंगे.''

बहरहाल, दिल्ली से राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआइए) की टीम वाराणसी पहुंच चुकी है और इस रहस्य से परदा उठाने की कोशिश में लगी है कि इस विस्फोट के पीछे किसका हाथ है.

-साथ में राहुल यादव

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