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EXCLUSIVE: अमित शाह बोले- हम 2019 में और बड़े बहुमत के साथ लौटेंगे

बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह का कहना है कि लोकलुभावन नारों के आगे घुटने टेकने की बजाए इस सरकार ने अपनी योजनाओं के जरिए सही अर्थों में लोगों को सशक्त बनाने की कोशिश की है.

मिशन 2019 में जुटी बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने इंडिया टुडे के साथ खास बातचीत में अपनी रणनीति को लेकर कई खुलासे किए. अमित शाह ने कहा कि केंद्र की सरकार का फोकस गांवों से लेकर शहरों तक तेज विकास के साथ-साथ प्रगति का लाभ सभी लोगों तक पहुंचाने पर है. साथ ही व्यवस्था में पारदर्शिता भी हमारी सरकार की प्राथमिकता है.

प्रः दिल्ली और बिहार की जबरदस्त हार के बाद असम की जीत पर कैसा महसूस हो रहा है?

उः असम की हमारी जीत को महज एक पार्टी की चुनावी जीत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए. यह पूर्वोत्तर में बीजेपी की विचारधारा की स्वीकार्यता का संकेत है. यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शासन पर एक मुहर भी है. हमारा लक्ष्य कश्मीर से कन्याकुमारी और कच्छ से कामरूप तक बीजेपी की एक समान मौजूदगी दर्ज कराना है. बंगाल में हमारा वोट प्रतिशत अब 15 फीसदी है और केरल में हमने खाता खोल दिया है.

प्रः इसके पीछे इकलौता सबसे बड़ा कारक क्या है?

उः मोदी जी की लोकप्रियता और उनमें जनता का भरोसा. दिल्ली में 10 साल और असम में 15 साल तक चले कांग्रेस के कुशासन के बाद लोगों ने दो साल के दौरान बीजेपी के साफ-सुथरे और विकास केंद्रित शासन में एक विकल्प को देखा, जिसने भारी सत्ता विरोधी माहौल खड़ा कर दिया.

प्रः असम में राम माधव की भूमिका कितनी अहम थी?
 
उः रणनीति तैयार करने और उसे लागू करने में उन्होंने अहम भूमिका निभाई.

प्रः  आप कह रहे हैं कि कश्मीर से कन्याकुमारी और कच्छ से कामरूप तक अब बीजेपी की मौजूदगी हो गई है. उत्तर प्रदेश, पंजाब और ओडिशा जैसे राज्यों में अवरोधों के बारे में आपका क्या ख्याल है?

उः यूपी हमारे लिए अवरोध कतई नहीं है बल्कि वहां बीजेपी के लिए स्पष्ट बहुमत हासिल करने का एक सुनहरा अवसर है. हम इस बात को प्रचारित करेंगे कि समाजवादी पार्टी की गुंडागर्दी और सपा तथा बीएसपी दोनों के भ्रष्टाचार के साथ-साथ तुष्टीकरण की राजनीति के चलते राज्य में लोगों की जिंदगी कैसी बदहाल हो चुकी है. इन तीनों मसलों पर लोगों का जवाब बीजेपी के पक्ष में मिलेगा.

प्रः पंजाब में शिरोमणि अकाली दल के साथ आपके गठबंधन के खिलाफ  जनता में जबरदस्त माहौल है. कहा जा रहा है कि बीजेपी अकाली दल से नाता तोड़ सकती है.

उः बीजेपी और अकाली दल अच्छे और बुरे दिनों के सहयोगी हैं. अकाली दल हमारा पुराना दोस्त है, इसलिए सवाल ही नहीं उठता (उससे अलग होने का). लेकिन हां, पंजाब सरकार के खिलाफ एक दुष्प्रचार के चलते लोगों के दिमाग में नकारात्मक धारणा प्रवेश कर गई है. हम लोग प्रकाश सिंह बादल की सरकार के इन्फ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में किए गए अच्छे काम को लेकर चुनाव में उतरेंगे और बुरे वक्त में उनकी सरकार जिस तरह किसानों के साथ खड़ी रही है, वह हमारे आत्मविश्वास का कारण है.

प्रः ओडिशा में बीजू जनता दल के साथ किसी गठजोड़ की गुंजाइश है?
उः चुनाव अभी बहुत दूर है इसलिए अभी गठबंधन की बात करना जल्दीबाजी होगी लेकिन हम ओडिशा में बीजेपी का सुशासन लाने को कृतसंकल्प हैं.

प्रः उत्तराखंड में पिछले दरवाजे से कांग्रेस-मुक्त भारत बनाने का आपका प्रयास लगता है उलटा पड़ गया है...

उः मैं सहमत नहीं हूं. हमने एक ईमानदार विपक्ष की भूमिका अदा की. हमने बजट के खिलाफ वोट किया और कांग्रेस के नौ विधायकों ने भी यही किया. उत्तराखंड की सरकार जब इन नौ विधायकों को खरीदने की कोशिश कर रही थी तो हमने उन्हें सरकार के खतरे से सुरक्षा देने का काम किया. इसमें कुछ भी अनैतिक नहीं था. इसके उलट, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ही एक वीडियो में अपनी पार्टी के विधायकों को पैसे देने की पेशकश करते पकड़े गए थे.

प्रः आज आप बीजेपी और आरएसएस के रिश्ते को कैसे देखते हैं, क्योंकि संघ पार्टी के सियासी मसलों में अब ज्यादा से ज्यादा दखल देने लगा है.

उः बीजेपी और आरएसएस के बीच रिश्ता ऐसे दो संगठनों के बीच का रिश्ता है जो राष्ट्र की उन्नति के लिए काम करते हैं.

प्रः ऐसी धारणा है कि ताकतवर होती जा रही बीजेपी के चलते देश में सांप्रदायिक विभाजन बढ़ रहा है, जैसे बीफ के मसले पर, या भारत माता की जय को लेकर...

उः मुझे दुख होता है कि भारत माता की जय को सांप्रदायिक संदर्भों में लिया जा रहा है. मैंने भारत माता की जय पर अपने विचारों से मीडिया को बहुत साफ  तरीके से अवगत करा दिया है. इसका हमारे विकास के एजेंडे से कोई विरोधाभास नहीं है. दोनों एक साथ रह सकते हैं.

प्रः बहुत से लोग मानते हैं कि असहिष्णुता के मुद्दे से बीजेपी अपना पल्ला नहीं छुड़ा सकती. आप साक्षी महाराज, साध्वी निरंजन ज्योति और गिरिराज सिंह के अल्पसंख्यकों से जुड़े नफरत भरे बयानों को देखिए.

उः यह इस पर निर्भर करता है कि आप असहिष्णुता किसे कहते हैं. बिहार चुनाव के बाद असहिष्णुता का यह अभियान ठंडा क्यों पड़ गया? इसलिए क्योंकि यह हमारे खिलाफ  राजनैतिक दुष्प्रचार की रणनीति का हिस्सा था. जहां तक हमारे कुछ लोगों के मानने का सवाल है तो मेरा मानना है कि पिछली सरकारों के कार्यकाल में भी इस किस्म की बातें हुई हैं. मैंने कई बार स्पष्ट किया है कि हमारे कुछ लोगों के बयान पार्टी का पक्ष नहीं हैं.

प्रः बीजेपी के सहयोगी दल मानते हैं कि आजकल उन्हें हल्के में लिया जा रहा है...

उः ऐसा इसलिए क्योंकि सबसे बढ़कर हमारे बीच संवाद ठीक नहीं है. इसे हम और सुधारने की कोशिश करेंगे.

प्रः दो साल समाप्त होने पर आप मोदी सरकार को कैसे आंकेंगे?

उः यह पहली सरकार है जिसने लोकलुभावन नारों के सामने घुटने टेकने के बजाए वास्तव में सरकारी योजनाओं के रास्ते लोगों को सशक्त करने की कोशिश की है. बैंक में खाता होना गरीब आदमी का सपना हुआ करता था. जन धन योजना ने इसी को महसूस करते हुए 21 करोड़ गरीब परिवारों के खाते खोले हैं. 2019 तक ऐसे छह करोड़ गरीब परिवार जो लकड़ी या कोयले या किरासन तेल के चूल्हे पर खाना पकाते हैं और नतीजतन फेफड़े संबंधी बीमारियों से ग्रस्त हो जाते हैं, उन्हें एलपीजी के कनेक्शन मिल जाएंगे. आजादी के 70 साल बाद भी 18,000 गांवों में बिजली नहीं थी, जब हम सत्ता में आए. आज उनमें से 9,000 गांवों तक बिजली पहुंचा दी गई है और तकरीबन सभी गांव 2018 तक कवर कर लिए जाएंगे. मोदी सरकार ने रोजगार की परिभाषा को ही बदल डाला है. पहले इसका मतलब नौकरी हुआ करता था. आज स्टार्ट-अप इंडिया, स्टैंड-अप इंडिया और मुद्रा जैसी योजनाओं के माध्यम से 3.49 करोड़ से ज्यादा लोगों को रोजगार मिला है और हमने स्वरोजगार के नए रास्ते खोले हैं.

प्रः और विदेश नीति में?

उः पहली बार हमारी संस्कृति और व्यापार को विदेश नीति में अहम जगह मिली है. दो साल के भीतर भारत दुनिया के अग्रणी देशों की कतार में खड़ा हो गया, जो पहले पीछे खड़ा रहता था. पूरी दुनिया अगर किसी एक नेता को सबसे लोकप्रिय, दूरद्रष्टा और पारदर्शी नेता के रूप में देखती है तो वे नरेंद्र मोदी हैं.

प्रः आप 2019 में बीजेपी के लिए क्या संभावनाएं देखते हैं?

उः मोदी सरकार जिस तरह सिर्फ राष्ट्र की भलाई के अपने मूल एजेंडे पर काम कर रही है, हम और ज्यादा बहुमत के साथ लौटेंगे. इसकी नींव रख दी गई है.

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