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नकल माफियाओं पर योगी सरकार ने कसी नकेल

पिछले वर्ष मार्च में भाजपा सरकार के सत्ता में आने के दौरान यूपी बोर्ड परीक्षाएं चल रही थीं. उप मुख्यमंत्री शर्मा ने शपथ लेने के अगले दिन 20 मार्च से ही परीक्षाओं का निरीक्षण करना शुरू कर दिया था.

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सख्ती की मिसाल नकल कराने वालों की धर-पकड़ और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है
सख्ती की मिसाल नकल कराने वालों की धर-पकड़ और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान पिछले वर्ष 24 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बोर्ड परीक्षाओं में नकल के लिए कुख्यात गोंडा जिले में चुनावी रैली कर रहे थे. नकल के बहाने मोदी ने विपक्षियों पर निशाना साधा. वे बोले, ‘‘पूरे देश में परीक्षा में थोड़ी-बहुत चोरी होती है, लेकिन गोंडा में परीक्षा चोरी का बिजनेस चलता है.

यहां परीक्षा केंद्रों की नीलामी के लिए टेंडर निकलता है.’’ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार बनने के बाद नकल रोकने के लिए किए गए उपायों (देखें ग्राफिक्स) का असर देखने के लिए उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा 6 फरवरी को बोर्ड परीक्षा शुरू होने के पहले दिन अचानक गोंडा पहुंच गए.

शर्मा यहां शहर में कस्तूरबा गांधी बालिका इंटर कॉलेज में पटेल नगर में मौजूद मां फातिमा हाइस्कूल की 43 छात्राओं के परीक्षा केंद्र का निरीक्षण करने पहुंचे. वे परीक्षा केंद्र पर केवल एक ही छात्रा को परीक्षा देते देख दंग रह गए. इसी जिले के मसकनवां के बी.पी. इंटर कॉलेज, पटखौली के परीक्षा केंद्र पर 13 फरवरी को इंटर के वाणिज्य वर्ग प्रथम की परीक्षा थी. प्रधानाचार्य समेत दर्जन भर शिक्षक परीक्षार्थियों की राह तकते रहे लेकिन एक भी परीक्षा देने नहीं पहुंचा.

उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) की परीक्षाएं इस वर्ष परीक्षार्थियों की कुछ ऐसी ही बेरुखी का सामना कर रही हैं. इस बार बोर्ड परीक्षा में कुल 66.3 लाख परीक्षार्थी शामिल हुए हैं लेकिन नकल रोकने के कड़े बंदोबस्त (देखें ग्राफिक्स) के कारण 20 फरवरी तक 15 फीसदी से अधिक करीब साढ़े 11 लाख परीक्षार्थी परीक्षा छोड़ चुके थे जो पिछले वर्ष से तकरीबन दोगुना और यूपी बोर्ड के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है.

पुराने लखनऊ में सिटी स्टेशन से मेडिकल कॉलेज को जाने वाले रोड पर मौजूद तालीमगाह-ए-निस्वां इंटर कॉलेज में 20 फरवरी की सुबह हाइस्कूल विज्ञान की परीक्षा चल रही थी. प्रधानाचार्य तबस्सुम किदवई अपने ऑफिस में लगे सीसीटीवी मॉनिटर के जरिए परीक्षार्थियों पर नजर रख रही थीं.

किसी भी कक्ष में जरा भी नकल होती दिखी तो तुरंत माइक के जरिए वहां मौजूद शिक्षक को सचेत कर दिया जाता. नकल रोकने के लिए यूपी बोर्ड परीक्षाएं पहली बार सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में संचालित हो रही हैं.

नकल माफियाओं की नहीं चली

पिछले वर्ष मार्च में भाजपा सरकार के सत्ता में आने के दौरान यूपी बोर्ड परीक्षाएं चल रही थीं. उप मुख्यमंत्री शर्मा ने शपथ लेने के अगले दिन 20 मार्च से ही परीक्षाओं का निरीक्षण करना शुरू कर दिया था. इस दौरान उन्हें परीक्षा केंद्रों के निर्धारण में काफी गड़बड़ी मिली थी. परीक्षाओं पर नकल माफिया का कब्जा था. शर्मा बताते हैं, ‘‘दूसरे प्रदेशों के परीक्षार्थी नकल से पास होने के लिए यूपी बोर्ड परीक्षाओं में शामिल होते थे.’’

जिलों में निरीक्षण के बाद शिक्षकों और अधिकारियों से मिले फीडबैक के आधार पर शर्मा ने नकल रोकने का तानाबाना बुना. परीक्षा केंद्रों के निर्धारण में सख्ती बरती गई. पिछली बार 55 लाख परीक्षार्थितयों पर साढ़े ग्यारह हजार परीक्षा केंद्र थे जबकि इस बार 66.3 लाख परीक्षार्थियों पर साढ़े आठ हजार परीक्षा केंद्र ही बनाए गए.

यूपी बोर्ड परीक्षाओं में शिक्षा अधिकारियों से गठजोड़ करके नकल माफिया अपने पसंदीदा विद्यालयों को परीक्षा केंद्र बनवाते थे और इन केंद्रों में नकल का ठेका उठता था. इसके लिए नकल करवाने वाले सभी परीक्षा केंद्रों को डीबार कर दिया गया. परीक्षा केंद्रों में दूसरे विद्यालयों के शिक्षकों को सह व्यवस्थापक बनाया गया.

इन सह व्यवस्थापकों से परीक्षा केंद्र पर नकल होती मिलने पर उसकी मोबाइल से रिकॉर्डिंग करने का निर्देश दिया गया. इसी व्यवस्था के चलते चंदौली, गाजीपुर, आगरा, अलीगढ़ समेत एक दर्जन से अधिक जिलों के परीक्षा केंद्रों पर संगठित नकल होने का खुलासा संभव हो पाया.

‘सीसीटीवी कैमरों से रखेंगे पढ़ाई पर नजर’

उपमुख्यमंत्री और माध्यमिक शिक्षा विभाग के मंत्री दिनेश शर्मा यूपी बोर्ड परीक्षा में नकल रोकने के प्रयासों को लेकर चर्चा में हैं. विधान भवन के अपने कार्यालय में उन्होंने असिस्टेंट एडिटर आशीष मिश्र को शिक्षा के क्षेत्र में होने वाले सुधारों की जानकारी दी

-यूपी बोर्ड की साख लगातार गिरती जा रही है?

-हमारी सरकार ने यूपी बोर्ड में अभूतपूर्व सुधार की नींव डाली है. नकल पर रोक लगाई है. उन्हीं कॉलेजों को परीक्षा केंद्र बनाया गया है जहां सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं. परीक्षा के बाद भी सीसीटीवी कैमरे उतरेंगे नहीं. ये कैमरे कक्षाओं में पढ़ाई की निगरानी भी करेंगे.

 -यूपी बोर्ड शिक्षा माफियाओं की गिरक्रत में है?

-हमने इन पर लगाम लगाई है. माफियाओं-अधिकारियों का गठजोड़ तोड़ा है. पिछले आठ महीनों के दौरान गड़बड़ी करने वाले 11 जिला विद्यालय निरीक्षकों (डीआइओएस) को सस्पेंड और एक को बर्खास्त किया गया है, जबकि आजादी के बाद अब तक केवल 10 डीआइओएस ही सस्पेंड हुए थे.

 -स्कूलों में पढ़ाई न होने से ही नकल को बढ़ावा मिल रहा है?

-स्कूलों में दो महीने गर्मी की छट्टी, 15 दिन महापुरुषों की छुट्टी, इतवार, सेकंड सैटरडे की छुट्टी, जाड़े, दीपावली, दशहरे की लंबी छुट्टी के साथ करीब ढाई महीने तक बोर्ड की परीक्षाएं चलने से पढ़ाई के लिए कम ही अवसर बचता था. इसे ठीक किया जा रहा है. हम 220 दिन पढ़ाई कराएंगे. परीक्षा का पैटर्न ऐसा होगा कि किताब भी साथ रख लें तो भी नकल नहीं कर पाएंगे.

 -यूपी बोर्ड परीक्षाएं इतनी लंबी क्यों चलती हैं?

-बोर्ड परीक्षाएं कमाई का धंधा बन गई थीं. लंबी परीक्षा चलने पर इसमें कई सौ करोड़ रु. खर्च होते थे. हमने परीक्षा कार्यक्रम को ठीक से समायोजित किया. इस बार एक महीने में ही परीक्षा संपन्न हो जाएगी. अगली बार 15 दिनों में परीक्षा संपन्न करवाने का लक्ष्य है.

 -दूसरे बोर्ड के विद्यार्थी अधिक अंक पाकर यूपी बोर्ड के विद्यार्थी से आगे निकल जाते हैं?

-आजादी के बाद पहली बार हमने यूपी बोर्ड का पाठ्यक्रम बदला है. एनसीईआरटी का पैटर्न लागू किया है. अब यूपी बोर्ड का शैक्षिक सत्र भी 1 अप्रैल से शुरू होगा. अब ऐसी कोई वजह नहीं होगी कि यूपी बोर्ड का विद्यार्थी दूसरे बोर्ड के विद्यार्थी से पीछे रह जाए.

 -आपके कॉलेजों में शिक्षकों की बेहद कमी है?

-यूपी लोक सेवा आयोग 10,609 शिक्षकों की भर्ती कर रहा है. माध्यमिक शिक्षा चयन बोर्ड का जल्द ही गठन हो जाएगा. जब तक नए शिक्षक नहीं आते तब तक रिटायर्ड शिक्षकों की सेवाएं ली जाएंगी. बेसिक शिक्षा विभाग के अतिरिक्त शिक्षकों को भी माध्यमिक कालेजों में तैनात किया जाएगा.

 -आपके निर्णयों का विरोध भी खूब हुआ है?

-एनसीईआरटी का पैटर्न लागू करने से किताबों की आड़ में चलने वाले रैकेट पर प्रहार हुआ. एक भी परीक्षा केंद्र को नहीं बदला गया. शिक्षा में सुधार को रोकने के लिए काफी दबाव डाला गया पर कामयाबी नहीं मिली.पूर्व माध्यमिक शिक्षा निदेशक और अब समाजवादी पार्टी (सपा) के विधान परिषद सदस्य बासुदेव यादव कहते हैं, ''भाजपा सरकार केवल वाहवाही बटोरने के लिए नकल रोकने का दावा कर रही है.

परीक्षार्थियों का बड़ी संख्या में परीक्षा में शामिल न होना दूषित शिक्षा प्रणाली की ओर ही इशारा करता है.’’

शिक्षक भी हुए गायब

नकल पर सक्चती का असर शिक्षकों पर भी दिख रहा है. राजधानी लखनऊ की बानगी ही देखिए. यहां गौरी में मौजूद जीएसएम पब्लिक स्कूल के एक शिक्षक को श्री पटेल आदर्श इंटर कॉलेज, ऐन बतौर कक्ष निरीक्षक तैनात किया गया था. उन्होंने केंद्र व्यवस्थापक को बाकायदा लिखकर दिया कि ‘‘ड्यूटी नहीं करूंगा, जो करना हो कर लो.’’ 

इस बार हर शिक्षक को नियमानुसार कम से कम 20 ड्यूटी करना अनिवार्य किया गया है. बलिया, गोरखपुर, अलीगढ़, मैनपुरी समेत करीब आधे से अधिक जिलों में परीक्षा केंद्रों पर तैनात किए गए शिक्षकों में 30 फीसदी के गायब होने की शिकायतें मिल रही हैं. इन शिक्षकों के स्थान पर रिजर्व में रखे गए शिक्षक या बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों को तैनात कर काम चलाया जा रहा है.

लखनऊ के डीआइओएस मुकेश कुमार सिंह बताते हैं, ‘‘नकल न करा पाने के चलते शिक्षक परीक्षाओं से बीमारी का बहाना बनाकर मुंह मोड़ रहे हैं. ऐसे शिक्षकों से मेडिकल रिपोर्ट मांगी गई है. इसकी जांच के बाद इन पर कार्रवाई की जाएगी.’’ गोंडा में ड्यूटी से गायब रहने वाले करीब पांच शिक्षकों को निलंबित कर दिया गया है. बरेली के एक सरकारी इंटर कॉलेज के शिक्षक अजय पाल कम मानदेय का मुद्दा उठाते हैं.

पाल कहते हैं, ‘‘बोर्ड परीक्षा में ड्यूटी करने वाले शिक्षक को केवल 36 रुपए ही मानदेय मिलता है. इस पर उसे घंटों खड़ा रहना पड़ता है जिससे तबियत बिगडऩे की आशंका रहती है. इसी कारण शरीर से कमजोर कुछ शिक्षक परीक्षा ड्यूटी करने से कतरा रहे हैं.’’ बोर्ड परीक्षाओं में सुधार के क्रम में अगले वर्ष से हाइस्कूल और इंटरमीडिएट के सभी विषयों का एक ही पेपर होगा, जिससे परीक्षाएं काफी कम समय में समाप्त हो जाया करेंगी.

उधर, आधी से अधिक परीक्षाएं बीतने पर करीब छह सौ परीक्षार्थी नकल करते पकड़े गए हैं और 100 से अधिक के खिलाफ एफआइआर हुई है. लेकिन राज्य में केवल नकल रोककर ही शिक्षा में सुधार नहीं किया जा सकता. शिक्षण व्यवस्था को चाकचौबंद करने के साथ ही शैक्षिक क्रांति की शुरुआत होगी.

इस तरह कस रहा शिकंजा

परीक्षा केंद्र—परीक्षा केंद्र निर्धारण एक विशेष सॉफ्टवेयर के जरिए ऑनलाइन. सीसीटीवी, चारदीवारी, वैकल्पिक बिजली और पानी की व्यवस्था वाले कॉलेजों को ही परीक्षा केंद्र बनाया गया. केवल छात्राओं के लिए ही स्वकेंद्र की व्यवस्था.

सीसीटीवी कैमरा—परीक्षा केंद्रों के सभी कमरों में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए. इनकी रिकार्डिंग को परीक्षा शुरू होने से एक घंटा पहले और समाप्त होने के एक घंटे बाद तक 'सेव’ करके रखने का आदेश.

स्टैटिक मजिस्ट्रेट—परीक्षा केंद्रों में एक स्टैटिक मजिस्ट्रेट तैनात. अध्यापकों के अलावा इंजीनियर, लेखपाल को भी परीक्षा की निगरानी के लिए स्टैटिक मजिस्ट्रेट बनाया गया.

स्पेशल टास्क फोर्स—बोर्ड परीक्षाओं की निगरानी के लिए स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) की मदद ली गई.

परीक्षा केंद्र के बाहर पुलिस की तैनाती. जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, जिला विद्यालय निरीक्षक और संयुक्त निदेशक को परीक्षा के लिए निर्धारित नियमों को सख्ती से पालन कराने का जिम्मा.

प्रश्न-पत्र—पहली बार जोनवार हर विषय के अलग-अलग प्रश्नपत्र. हर प्रश्नपत्र के लिए भी अलग-अलग सेट.

प्रश्नपत्र और कॉपियों को लाने व ले जाने की निगरानी के लिए भी सीसीटीवी कैमरे लगाए गए.

आधार कार्ड—इस बार माध्यमिक शिक्षा परिषद के कॉलेजों में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों का पूरा ब्योरा आधार कार्ड से लिंक कर दिया गया. सभी संदिग्ध जिलों में यह व्यवस्था की गई.

कोडिंग-डीकोडिंग—अदला-बदली रोकने के लिए परीक्षा कॉपियों की जिलावार अलग-अलग कोडिंग और डीकोडिंग की गई.

केवल विभाग के दो शीर्ष अधिकारियों को ही इनकी जानकारी. 55 जिलों के लिए ऐसी कॉपियां छपवाई गईं.

केवल सरकारी अधिकारियों को ही इन कॉपियों के रखरखाव का जिम्मा.

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