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खास रपटः ‘टी’ कंपनी

मुकेश अंबानी के निवास के पास बम रखे जाने के केस में ठाणे महत्वपूर्ण कड़ी बनकर उभरा है. सभी संदिग्ध पुलिस वाले उत्तरी मुंबई के इसी उपनगर में तैनात थे. हत्यारा और उनका शिकार भी यही रहता था.

घेरे में वाझे को 14 मार्च को एनआइए अदालत ले जाते हुए घेरे में वाझे को 14 मार्च को एनआइए अदालत ले जाते हुए

उद्योगपति मुकेश अंबानी के निवास, ऐंटीलिया से कुछ ही दूर विस्फोटक लदी एसयूवी मिलने के करीब एक महीने बाद सभी जांच सूत्र मुंबई के उपनगर ठाणे की ओर इशारा कर रहे हैं. 

दो गाडिय़ां—एक सफेद इनोवा जिसे कथित रूप से सहायक पुलिस इंस्पेक्टर सचिन वाझे चला रहे थे, और हल्के हरे रंग की एक स्कॉर्पियो उनका एक सहयोगी चला रहा था, 20 फरवरी को ठाणे से करीब 30 किलोमीटर (किमी) दूर दक्षिण मुंबई की ओर चल पड़ी थीं. 24-25 फरवरी की रात, स्कॉर्पियो को अंबानी के निवास से करीब 500 मीटर दूर कारमाइकल रोड पर छोड़ दिया गया. उसमें वाणिज्यिक प्रयोजनों से विस्फोट के लिए प्रयोग होने वाली जिलेटिन की 20 छड़ें और अंबानी परिवार के नाम धमकी भरी चिठ्ठ थी.

अब इस घटना और स्कॉर्पियो के मूल मालिक व्यापारी मनसुख हिरन की हत्या की जांच कर रही राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआइए) का मानना है कि पूरी साजिश क्रॉफोर्ड मार्केट स्थित मुंबई पुलिस कमिशनर के कार्यालय से दो मंजिल नीचे, चौथी मंजिल पर वाझे के कार्यालय में रची गई. वाझे क्राइम ब्रांच की संवेदनशील क्राइम इंटेलिजेंस यूनिट (सीआइयू) का नेतृत्व कर रहे थे.

शहरी जोन क्षेत्र में होने वाले अपराध की जांच का दायित्व 20 अधिकारियों और 70 कांस्टेबलों वाली सीआइयू के जिम्मे रहता है. वाझे और हिरन एक-दूसरे को करीब पांच साल से जानते थे. दोनों ठाणे में रहते थे और उनके घर सिर्फ 4 किमी की दूरी पर थे. हिरन अपने घर के पास ही, सिविल अस्पताल के निकट आंबेडकर रोड पर, कार की सजावट की एक दुकान चलाते थे. पुलिस आयुक्त मुख्यालय के पास, क्रॉफोर्ड मार्केट में भी उनका कार्यालय था. 

स्कॉर्पियो मामले में कांडिवली अपराध शाखा से किसी ‘तावड़े’ का व्हाट्सऐप कॉल आने के बाद हिरन 4 मार्च की शाम को अपनी दुकान से निकले थे. हिरन ने अपनी पत्नी विमल को बताया कि उनका ‘पुलिस फ्रेंड’ भी, ठाणे को मुंबई के उत्तरी उपनगर से जोडऩे वाले 15 किमी लंबे घोड़बंदर रोड पर होने वाली इस मीटिंग में मौजूद होगा. घोड़बंदर या ‘घोड़ा बंदरगाह’ वह जगह है जहां सदियों पहले पश्चिम एशिया से आने वाले घोड़े मुंबई में उतारे जाते थे.

एक दशक पहले तक, यह सुनसान हाइवे एक ओर घने जंगल से घिरा हुआ था और दूसरी ओर की ठाणे क्रीक अपराधियों को खत्म करने के लिए 'एनकाउंटर स्पेशलिस्ट्स’ की पसंदीदा जगह होती थी. हाइवे के दोनों ओर बनी हाउसिंग सोसाइटी और कर्मशियल कॉक्वप्लेक्सों में प्रॉपर्टी की कीमत 12,000 रुपए प्रति वर्ग फुट है और यह उच्च मध्यम वर्ग का पसंदीदा रिहायशी इलाका बन गया है.

अगले दिन 5 मार्च को, हिरन का फूला हुआ शरीर उनके घर से करीब 10 किमी और घोड़बंदर से 20 किमी दूर मुंब्रा के पास ठाणे क्रीक के रेतीबंदर के खारे पानी में दिखाई दिया, जहां उन्हें आखिरी बार देखा गया था. हिरन के हाथ बंधे हुए थे और उनके मुंह में रूमाल ठूंसा हुआ था. 

इस बम प्रकरण को उजागर हुए एक महीना हो गया है, पर अब तक हम सचाई के करीब नहीं हैं. एनआइए ने स्कॉर्पियो में बम को रखने या हिरन की हत्या करने के पीछे वाझे के मकसद का खुलासा अब तक नहीं किया है. वे अभी तक नहीं जानते कि यह निलंबित पुलिस अधिकारी अपनी मर्जी से सारे काम कर रहा था या फिर यह सब किसी के इशारे पर हुआ. हम बस इतना जानते हैं कि वाझे को मुंबई के पूर्व पुलिस प्रमुख परमबीर सिंह की अध्यक्षता वाली समिति की सिफारिशों पर 6 जून, 2020 को फिर से पुलिस में बहाल किया गया था.

साथ ही, उन्हें तुरंत सीआइयू का प्रमुख भी बना दिया गया. एक हफ्ते के भीतर, उन्हें अपना पहला हाइ-प्रोफाइल केस—14 जून, 2020 को अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत का मामला—सौंप दिया गया. वाझे ने वास्तुकार अन्वय नाइक की आत्महत्या और नवंबर 2020 के टीआरपी घोटाले की भी जांच की, जिसमें रिपब्लिक टीवी के प्रधान संपादक अर्नब गोस्वामी एक आरोपी हैं.

एनआइए अपनी जांच का जाल फैला रही है और उसकी मामले के ठाणे कनेक्शन पर निगाह है. 30 मार्च को, एजेंसी ने नवी मुंबई में कमोठे से एक सात-सीट वाली मित्सुबिशी आउटलैंडर को जब्त किया. यह इस मामले में बरामद होने वाली सातवीं गाड़ी है. गाड़ी सचिन वाझे के नाम पर पंजीकृत है. एजेंसी यह पुष्टि करने की कोशिश कर रही है कि क्या इस गाड़ी का मालिक वही वाझे है जो उनकी हिरासत में है. वे यह भी जांच करेंगे कि क्या यह वही कार है जिसमें हिरन की हत्या की गई थी.

एनआइए को 24 मार्च को हिरन की हत्या का जांच का जिम्मा भी मिल गया और उसका मानना है कि 48 वर्षीय कारोबारी की हत्या इसलिए की गई क्योंकि उन्होंने ऐंटीलिया साजिश का हिस्सा बनने से इनकार कर दिया था. वाझे ने उन्हें समझाने की कोशिश की थी कि उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा पर जल्द ही वे जमानत पर बाहर आ जाएंगे. उन्होंने वाझे को साफ कर दिया कि उनकी भूमिका बस अपनी स्कॉर्पियो सौंपने तक सीमित थी. हो सकता है कि उन्होंने साजिश का खुलासा करने का भी संकेत दिया हो, और संभवत: यही उनकी मौत की वजह बनी. 

हिरन की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से पता चलता है कि उसके चेहरे पर चोट के निशान थे. ठाणे के एक सरकारी अस्पताल के एक वरिष्ठ डॉक्टर का कहना है कि उन्हें बंधक बनाने वालों ने मारने से पहले बेरहमी से पीटा था. एनआइए की जांच से पता चला है कि हिरन ने अपनी पत्नी से जिस 'पुलिस ऑफिसर फ्रेंड’ का जिक्र किया था वह वाझे थे. एजेंसी को संदेह है कि जब हिरन को मारकर नाले में फेंका गया तो वाझे वहां मौजूद थे.

वाझे ने जांच को गुमराह करने की पूरी कोशिश की. 4-5 मार्च को जब हिरन गायब हुए थे, वाझे ने रात 11.45 से 1.30 बजे के बीच डोंगरी में एक टिप्सी बार पर छापा मारा था. उन्होंने कोई कागजात जब्त नहीं किया और न ही कोई मामला दर्ज किया. एनआइए का मानना है कि उसने ऐसा यह साबित करने के लिए किया कि उस समय वे दक्षिण मुंबई में थे, जबकि वे छापे से दो घंटे पहले 40 किमी दूर ठाणे में मौजूद थे.

4 मार्च की शाम, वाझे ने अपना मोबाइल क्रॉफोर्ड मार्केट स्थिति अपने कार्यालय में अपने एक जूनियर अधिकारी के पास छोड़ दिया था, और तीन किमी दक्षिण जनरल पोस्ट ऑफिस तक पैदल चलकर गए, ताकि उस दिन उनका मोबाइल लोकेशन उनके कार्यालय का दर्शाए. लेकिन, आसपास के इलाके में लगे एक सीसीटीवी कैमरे ने उन्हें चलते हुए पकड़ लिया.

जांचकर्ताओं का मानना है कि हिरन ने वाझे के किसी व्यक्तिगत एहसान को चुकाने के लिए अपनी स्कॉर्पियो उधार दी होगी. मनसुख के बड़े भाई विनोद हिरन इससे इनकार करते हैं कि वे दोनों दोस्त थे और कहते हैं कि उनके बीच केवल व्यापारिक संबंध थे. विनोद ने बताया, ‘‘मनसुख, वाझे को सिर्फ अपने ग्राहक के रूप में जानते थे, वे दोस्त नहीं थे.

मनसुख उसे कभी घर नहीं लाए. मैं कभी वाझे से नहीं मिला.’’ कारों के प्रति दीवानगी रखने वाले वाझे ने एक बार पहले भी नवंबर 2020 में हिरन से उनकी हल्के हरे रंग की स्कॉर्पियो उधार ली थी. हिरन की दुकान बहुत बड़ी नहीं थी, पर वे अपनी त्वरित सेवा के लिए मशहूर थे. उनकी हत्या के बाद से दुकान बंद है. हालांकि, कथित हत्यारे और उसके शिकार के सह-स्थान के अलावा मुंबई के पूर्वोत्तर छोर पर बसे इस उपनगर के साथ और भी कई तार जुड़ते हैं.

एनआइए मुंबई के कई पुलिस अधिकारियों के कॉल डेटा रिकॉर्ड और सेलफोन लोकेशंस को खंगाल रही है. एनआइए को शक है कि ठाणे का ही एक पुलिस अधिकारी 4 मार्च की रात ईस्टर्न हाइवे से घोड़बंदर रोड तक वाझे के साथ गया था. उस रात अधिकारी का मोबाइल लोकेशन उस रात रेतिबंदर के पास पाया गया. यह अधिकारी, जिसका नाम अभी तक नहीं बताया गया है, ऐंटी एक्सटॉर्शन सेल में काम करता है.

उसका दावा है कि वह मुंब्रा के रास्ते कल्याण (ठाणे से 20 किमी उत्तर पूर्व) स्थित अपने घर लौट रहा था, इसलिए उसका सेलफोन रेतिबंदर के पास दिखा था. एनआइए सीआइयू अधिकारी से भी पूछताछ कर रहा है जिसने कथित तौर पर वास्तविक लोकेशन छुपाने के लिए 4 मार्च को वाझे का मोबाइल फोन अपने पास रखा था. 

सबूतों के ढेर बन रहे हैं. 28 मार्च को, वाझे ने एनआइए को बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स के पास उस स्थान पर पहुंचाया, जहां से उन्होंने हार्ड ड्राइव, प्रिंटर, लैपटॉप, दो सीपीयू और दो नकली नंबर प्लेट मीठी नदी में फेंक दिया था. गोताखोरों ने इस अत्यधिक प्रदूषित नदी में डुबकी मारकर सबूत निकाले. राज्य की फॉरेंसिक प्रयोगशाला के सलाहकार और फोरेंसिक विशेषज्ञ अमोल देशमुख का कहना है कि गैजेट से सबूत निकालने के लिए अतिरिक्त प्रयासों की जरूरत होगी क्योंकि वे लंबे समय से पानी में थे. 

ठाणे क्यों इतना मायने रखता है
ठाणे महाराष्ट्र की 10 पुलिस कमिशनरियों में से एक है. 147 वर्ग किमी में फैला यह शहर आकार में मुंबई के द्वीपीय शहर (माहिम से कोलाबा) का दोगुना और भारत का 15वां सबसे बड़ा शहर है. यहां अपराध मुंबई की तरह अधिक नहीं है. जहां मुंबई में हर महीने मारपीट और चोरी के 100 मामले दर्ज होते हैं, ठाणे में ऐसे केवल एक-तिहाई मामले सामने आते हैं. हालांकि, जबरन वसूली और भूमि सौदों से संबंधित मामलों की संख्या ठाणे में बहुत अधिक है क्योंकि यह रियल एस्टेट का नया गढ़ है.

मुंब्रा और भिवंडी जैसे क्षेत्रों में सांप्रदायिक तनाव के कारण यह लगातार निगरानी में रहता है, जहां अतीत में सांप्रदायिक दंगे हुए हैं. एक पूर्व पुलिस अधिकारी ठाणे को मुंबई और अन्य कमिशनरियों के लिए बाहरी दलान बताते हैं जहां उन पुलिस अधिकारियों की तैनाती के लिए आदर्श जगह है जिनका ‘अन्य इस्तेमाल’ किया जाता है. वे कहते हैं, ‘‘यह मुंबई पुलिस कमिशनरी की सीमा से बाहर है, पर महानगर से बहुत दूर नहीं है.’’ 

निलंबित होने और बाद में 13 मार्च को एनआइए की हिरासत में लिए जाने से पहले मुंबई क्राइम ब्रांच में अपने नौ महीने के कार्यकाल के दौरान वाझे क्राइम ब्रांच में कमान के चार स्तरों को दरकिनार करते हुए पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह को सीधे रिपोर्ट करते थे. परमबीर सिंह और वाझे दोनों ने कई वर्षों तक ठाणे पुलिस कमिशनरी में काम किया है. वाझे पहले ठाणे के एक उपनगर मुंब्रा में तैनात थे, और बाद में 1992 और 1997 के बीच ऐंटी-एक्सटॉर्शन सेल में तैनात किया गया था. परमबीर सिंह 2015 और 2018 के बीच ठाणे के पुलिस कमिशनर थे.

2015 में, भाजपा समर्थक तब भौचक्के रह गए थे जब तत्कालीन मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस ने परमबीर सिंह को ठाणे का पुलिस आयुक्त नियुक्त किया था. महाराष्ट्र के आतंकवाद निरोधी दस्ते में अतिरिक्त पुलिस आयुक्त के रूप में, परमबीर सिंह पर 2008 मालेगांव बम विस्फोट की आरोपी साध्वी प्रज्ञा को प्रताड़ित करने का आरोप लगा था.

तीन वरिष्ठ अधिकारियों को दरकिनार करके परमबीर सिंह को ठाणे का कमिशनर नियुक्त करने के फड़णवीस के फैसले से पुलिस विभाग में भी विभाजन साफ दिखता था. ठाणे में परमबीर सिंह का कार्यकाल चर्चित रहा, जहां उन्होंने एक अवैध कॉल-सेंटर और ड्रग्स रैकेट का भंडाफोड़ किया था. उनकी टीम ने अभिनेता ममता कुलकर्णी के पति और कथित मादक पदार्थ तस्कर विकी गोस्वामी को गिरफ्तार किया था.

एक अन्य आरोपी, मनोज जैन कथित रूप से ड्रग्स में प्रयोग होने वाले रसायन एफेड्रिन के निर्माण और निर्यात में शामिल था. फर्जी कॉल सेंटर को कई युवाओं की ओर से चलाया जाता था जो खुद को अमेरिका की आंतरिक राजस्व सेवा के कर्मचारियों के रूप में पेश करते हुए, मामलों को निपटाने के लिए अमेरिकी नागरिकों से पैसे की मांग करते थे.

वैसे, परमबीर सिंह और वाझे ने कभी साथ काम नहीं किया. घाटकोपर में 2003 के बेस्ट बस विस्फोट में एक संदिग्ध ख्वाजा यूनुस की हिरासत में मौत के बाद, वाझे 2004 से ही निलंबित चल रहे थे. पर एक अन्य शख्स जो उन दोनों को जानता था, वह ठाणे पुलिस कमिशनरी में परमबीर सिंह की टीम में शामिल हुआ. ऐंटी एक्सटॉर्शन सेल के प्रमुख प्रदीप शर्मा का दफ्तर ठाणे में पुलिस मुख्यालय के एक किमी के भीतर था.

'एनकाउंटर कॉप’ के रूप में चर्चित शर्मा 2001 में सीआइयू के प्रमुख के रूप में वाझे के बॉस थे. वाझे सीआइयू में एक साइबर विशेषज्ञ के रूप में शामिल हुए थे, पर उन्हें ऑपरेशन में लगाया गया. 2004 में पहली बदनामी के पहले उनके खाते में 63 एनकाउंटर दर्ज थे.

2006 के लखन भैय्या मामले में शर्मा का करियर लगभग खत्म हो गया था. शर्मा के पुलिस दस्ते ने नवी मुंबई स्थित इस गैंगस्टर का कथित तौर पर अपहरण कर लिया और वर्सोवा लाने के बाद गोली मारकर उसकी हत्या कर दी. 2013 में, उस मामले में 12 पुलिसकर्मियों को हत्या का दोषी ठहराया गया पर शर्मा सबूतों के अभाव में बरी हो गए. लखन भैय्या के वकील भाईराम प्रसाद गुप्ता ने 2014 में बॉम्बे हाइकोर्ट में शर्मा को बरी करने के फैसले को चुनौती दी. मामला अभी भी लंबित है. 

माना जाता है कि परमबीर सिंह ने शर्मा को खुली छूट दे रखी थी. 2018 में, शर्मा ने दाउद के भाई इकबाल कासकर को ‌‌ भिंडी बाजार के पास पाकमोडिया स्ट्रीट के उसके घर से गिरक्रतार किया था. यह इलाका मुंबई पुलिस के अधिकार क्षेत्र में आता है, पर कहा जाता है कि ठाणे में मामला दर्ज होने के कारण शर्मा ने उन्हें विश्वास में नहीं लिया था. मुंबई के पुलिस प्रमुख डी.डी. पडसलगीकर के आपत्ति दर्ज करने के बाद, फड़णवीस ने परमबीर सिंह को कड़ी चेतावनी दी थी. 

शर्मा ने अगस्त 2019 में शिवसेना के टिकट पर विधानसभा चुनाव लडऩे के लिए पुलिस बल से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली थी. उन्हें ठाणे के उत्तर में नालासोपारा विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र से उतारा गया था, जहां वाझे ने कथित तौर पर अपने पूर्व बॉस के लिए एक महीने तक चुनाव प्रचार किया था. शर्मा को बहुजन विकास अघाड़ी के क्षितिज ठाकुर ने 40,000 से अधिक मतों से हराया था. (शर्मा से संपर्क नहीं हो सका क्योंकि उनका सेल फोन पहुंच से बाहर था).

अभी तक ऐसा कुछ भी नहीं है जिससे शर्मा को हिरन की हत्या से जोड़ा जा सके, सिवाय इसके कि विनायक शिंदे जिसे एटीएस ने 4 मार्च को हिरन की हत्या के सिलसिले में गिरफ्तार किया था, कभी उनकी यूनिट में एक कांस्टेबल था. ठाणे के उपनगर कलवा का निवासी शिंदे भी लखन भैय्या के फर्जी एनकाउंटर में शामिल था, जिसके लिए हाइकोर्ट ने उसे 2011 में दोषी ठहराया था.

महामारी के कारण शिंदे एक साल से अधिक वक्त तक फरलो पर बाहर रहा. उसने कथित तौर पर काम की तलाश में जनवरी में वाझे के कार्यालय में मुलाकात की थी. एनआइए का मानना है कि यह उस बैठक में मौजूद था जिसमें बम प्रकरण की साजिश रची गई. जिस प्रिंटर पर अंबानी के लिए धमकी भरा पत्र तैयार किया गया था, और जो मीठी नदी से बरामद हुआ था, वह भी शिंदे का था. 

बम प्रकरण के खुलासे जारी हैं, 30 मार्च को बॉम्बे हाइकोर्ट के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश कैलाश चंडीवाल की एक सदस्यीय समिति मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की ओर से गठित की गई. गृहमंत्री अनिल देशमुख के खिलाफ परमबीर सिंह के रिश्वत के आरोपों की जांच के साथ, समिति को छह महीने का समय दिया गया है. हालांकि, सरकार को रिपोर्ट सार्वजनिक करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता क्योंकि इसे जांच आयोग अधिनियम के तहत गठित नहीं किया गया है. 2014 में सेवानिवृत्त हुए न्यायमूर्ति चंडीवाल ने 2006 में मरीन लाइन्स की पुलिस चौकी में नाबालिग से बलात्कार के आरोप में कान्स्टेबल सुनील मोरे को 2006 में 12 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी.

इस बीच, सियासी खींचतान जारी है. 27 मार्च को एनसीपी प्रमुख शरद पवार और उनके भरोसेमंद प्रफुल्ल पटेल ने कथित रूप से अहमदाबाद में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की. पटेल ने ऐसी बैठक से इनकार किया, तो शाह ने 28 मार्च को संवाददाताओं से कहा, ‘‘सभी चीजों को सार्वजनिक नहीं किया जाना चाहिए.’’

इस बीच, वाझे को फिर से बहाल करने के लिए परमबीर ङ्क्षसह पर बनाए गए सियासी दबाव को उजागर करते हुए फड़णवीस शिवसेना के खिलाफ बहुत गरजे. शिवसेना नेता संजय राउत ने 29 मार्च को संवाददाताओं को बताया कि वाझे की संदिग्ध छवि को देखते हुए उन्होंने अपनी पार्टी के नेताओं को उसे बहाल करने को लेकर चेताया था. राउत ने कहा, ‘‘मैंने उन्हें कहा था कि वाझे एक दिन गले की हड्डी बन जाएगा. सरकार ने इस पूरे प्रकरण से सबक सीखा है.’’

राउत का बयान इसकी मौन स्वीकारोक्ति है कि इस दागी पुलिस अधिकारी का बचाव करने में शिवसेना ने जल्दबाजी दिखाकर गलती की थी. मुख्यमंत्री ठाकरे ने 10 मार्च को वाझे का बचाव करते हुए कहा था कि वे 'ओसामा बिन लादेन नहीं थे कि उन्हें बिना मुकदमे के फांसी दी जा सके.’ व्यापक साजिश का खुलासा करने के लिए एनआइए की जांच के जारी रहने से शिवसेना विचलित है.

अगर एनआइए ऐंटीलिया मामले में किसी सियासी संबंध का पता लगाती है, तो इससे फरवरी 2022 में होने वाले अहम बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) चुनावों में शिवसेना की किस्मत प्रभावित हो सकती है. तब तक बम प्रकरण का पूरा खेल खुल चुका होगा और हकीकत उसके लिए शर्मिंदगी से कहीं अधिक  नुक्सान पहुंचा सकती है.

ठाणे का कनेक्शन
वे सभी पुलिस अफसर जिनके पास ऐंटीलिया-हिरन केस की महत्वपूर्ण जानकारियां हैं, डेढ़ साल पहले तक एक साथ इस उपनगर में तैनात थे

सचिन वाझे 
ठाणे के रहने वाले वाझे परमबीर सिंह का सबसे भरोसेमंद शक्चस थे. परमबीर सिंह को 17 मार्च को मुंबई पुलिस कमिशनर के पद से हटा दिया गया. वाझे निलंबित और गिरफ्तार हैं. वे मुकेश अंबानी के निवास के बाहर विस्फोटक लदी स्कॉर्पियो रखने और स्कॉर्पियो मालिक मनसुख हिरन की हत्या के मुख्य संदिग्ध हैं

मनसुख हिरन
एनआइए को संदेह है कि ठाणे निवासी हिरन को विस्फोटक रखने के लिए कूरियर की तरह इस्तेमाल किया गया. इन्हीं की गाड़ी में जिलेटिन छडिय़ां रखकर उसे ऐंटीलिया के पास खड़ी किया गया. यह अभी साफ नहीं है कि वे इसमें स्वेच्छा से शामिल हुए या उन्हें विवश किया गया. 5 मार्च को हिरन मृत पाए गए

परमबीर सिंह 
ठाणे में 2015 से 2018 तक पुलिस कमिशनर रहने के दौरान इन्होंने अपने मातहत भरोसेमंद अफसरों को प्रमुख पद दिए

प्रदीप शर्मा
परमबीर सिंह के कमिशनर रहने के दौरान 2017-19 तक यह ठाणे में ऐंटी-एक्स्टॉर्शन सेल के प्रमुख थे. अगस्त 2019 में विधानसभा चुनाव से एक महीने पहले जब शर्मा ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति को चुना तो परमबीर सिंह ने इन्हें तुरंत मुक्त करने की सिफारिश की

पराग मनेरे
ये डीसीपी (डिप्टी कमिशनर ऑफ पुलिस) ठाणे क्राइम ब्रांच में थे जब परमबीर सिंह कमिशनर थे. अभी मनेरे मुंबई पुलिस के आर्थिक अपराध शाखा में हैं. एनआइए का मानना है कि ये संदिग्ध अफसरों की कडिय़ों को जोडऩे में मददगार हो सकते हैं क्योंकि इनके पास उन अफसरों के पैसे के लेनदेन की अहम जानकारी हो सकती है. एजेंसी ने इन्हें साथ देने कहा है

संजय पाटिल
ये असिस्टेंट कमिशनर ऑफ पुलिस (सामाजिक सेवा शाखा) ठाणे में परमबीर सिंह की टीम में थे. 28 फरवरी, 2020 को मुंबई पुलिस कमिशनर बनने के बाद परमबीर सिंह ने इन्हें फिर अपनी टीम का सदस्य बना लिया. परमबीर सिंह ने 16 मार्च को पाटिल के साथ एक चैट को सबूत के रूप में पेश करते हुए आरोप लगाया कि गृह मंत्री अनिल देशमुख ने बार और रेस्तरां से हर महीने 100 करोड़ रु. वसूलने का लक्ष्य दिया था

विनायक ‌शिंदे
ये पूर्व कांस्टेबल ठाणे उपनगर के कोलवा में रहते हैं. हिरन की हत्या के आरोप में एटीएस ने इन्हें 24 मार्च को गिरफ्तार किया. रामनारायण गुप्ता उर्फ लखन भैय्या के फर्जी एनकाउंटर के लिए शिंदे को 12 अन्य पुलिसकर्मियों के साथ दोषी ठहराया गया था. उन दिनों ये शर्मा की टीम में थे.

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