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खास रपटः लव, सेक्स और जासूसी

पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी युवतियों के जरिए भारतीय सशस्त्र बलों के जवानों को ऑनलाइन प्रलोभन में फंसाकर उनसे सेना और सरकार से जुड़ी खुफिया जानकारियां जुटा रही है

पुलिस ने डीआरडीओ के एकीकृत परीक्षण रेंज में काम करने वाले संविदा कर्मियों को गिरफ्तार किया पुलिस ने डीआरडीओ के एकीकृत परीक्षण रेंज में काम करने वाले संविदा कर्मियों को गिरफ्तार किया

साल 2020 के मध्य में क्रुणाल कुमार बारिया को फेसबुक पर फ्रेंड रिक्वेस्ट मिली. रिक्वेस्ट भेजने वाली एक सुंदर, सलीकेदार महिला सिदरा खान थी, जिसकी उम्र 20 से 30 साल के बीच थी. फिरोजपुर छावनी में भारतीय सेना के आइटी सेल में तैनात बारिया को जरा भी संदेह नहीं हुआ. दोनों ने फोन नंबरों का आदान-प्रदान किया. सिदरा के पास तीन नंबर थे, जिनमें दो पाकिस्तानी और एक भारतीय था. दोनों ने बातचीत शुरू की, उसके बाद वे व्हाट्सऐप कॉल पर चले गए. धीरे-धीरे चीजें और अधिक अंतरंग होती गईं. उन्होंने फोन सेक्स भी किया. जल्द ही बारिया, सिदरा को वह सब बता रहे थे जो वह जानना चाहती थी.

करीब डेढ़ साल बाद, 23 अक्तूबर, 2021 को पंजाब पुलिस के अमृतसर के स्पेशल ऑपरेशन सेल की एक टीम ने गोपनीय जानकारी लीक करने के आरोप में बारिया को गिरफ्तार किया. 'सिदरा' को भारत का सैन्य खुफिया विभाग, पाकिस्तानी इंटेलिजेंस ऑपरेटिव (पीआइओ) या पाकिस्तानी जासूस मानता है. पीआइओ पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आइएसआइ) के लिए काम करते हैं. फिरोजपुर छावनी में गतिविधियों की सूचना के लिए सिदरा ने बारिया को 10,000 रुपए का भुगतान भी किया था, पर जानकारी निकालने का उसका प्राथमिक हथियार सेक्स ही था.

हनी ट्रैप या रूप जाल में फांसना जासूसी के खेल की सबसे पुरानी चालों में से एक है. 2,000 साल पहले लिखी अपनी पुस्तक अर्थशास्त्र में कौटिल्य ने बताया है कि कैसे महिला जासूस ने मौर्य साम्राज्य के लिए जानकारियां एकत्र की थीं. मौर्य साम्राज्य के जासूसी संगठन जानकारियां हासिल करने के लिए वेश्याओं का भी इस्तेमाल करते थे.

स्मार्टफोन और सोशल मीडिया में आई क्रांति ने आजकल के जासूसों का काम बहुत आसान कर दिया है. पिछले कुछ महीनों में जासूसी का भंडाफोड़ करने वाली भारतीय सेना की काउंटर-इंटेलिजेंस टीमों ने सोशल मीडिया के एक ऐसे रैकेट का खुलासा किया है जो बहुत पुख्ता तरीके से चलाया जा रहा था. जांच से पता चला है कि पीआइओ ने बड़ी मात्रा में गोपनीय सूचनाएं हासिल करने के लिए कई सैन्यकर्मियों के कंप्यूटर में मैलवेयर लगाया था. कुछ मामलों में पीआइओ ने पीड़ित व्यक्ति को जासूसी कांड में भागीदार बनने के लिए ब्लैकमेल भी किया था.

पिछले एक साल में पूरे भारत से 200 लोगों—आम नागरिक और सैन्यकर्मी—को आइएसआइ की महिला एजेंटों को कथित रूप से सैन्य-संबंधी जानकारियां लीक करने के लिए गिरफ्तार किया गया. पुणे स्थित दक्षिणी कमान की मिलिट्री इंटेलिजेंस (एमआइ) यूनिट ने हाल ही में कई मामलों को पकड़ा है. सितंबर और अक्तूबर में, उन्होंने ऐसे 10 मामलों का खुलासा किया.

एमआइ अधिकारियों का अनुमान है कि आइएसआइ सैन्यकर्मियों और आम नागरिकों को फंसाने के लिए सालाना कम से कम एक करोड़ रुपए खर्च करता है. ऐसा लगता है कि कम खर्च में ज्यादा जानकारी जुटाने के इस अभियान में सबसे अधिक प्राथमिकता भारतीय सेना की टुकड़ियों की आवाजाही से जुड़ी जानकारियां जुटाने को दी जाती है. सितंबर में, दक्षिणी कमान की एमआइ यूनिट ने राजस्थान के नरहर निवासी संदीप कुमार को धर दबोचा. संदीप कुमार, झुंझुनूं जिले में आर्मी कैंप के पास गैस एजेंसी चलाता था. कैंप में गैस सिलेंडर पहुंचाने के दौरान उसने कथित तौर पर अंदर के संवेदनशील स्थानों की तस्वीरें खींचीं. उसने कथित तौर पर वे संवेदनशील तस्वीरें एक पाकिस्तानी हैंडलर को 5 लाख रुपए में दे दीं. संदीप ने पुलिस को बताया कि उसे वे पैसे जयपुर निवासी पूजा राजपूत से मिले थे.

जासूसी की यह कार्यप्रणाली इस उपमहाद्वीप के लिए कोई नई चीज नहीं है. अमेरिकी सेना नियमित रूप से अपने कर्मियों को लगातार रूसी हनी ट्रैप से बचने के लिए आगाह करती रहती है. अमेरिकी राजनेताओं को चीनी हनी ट्रैप को लेकर सावधान किया गया है. हाल ही में चीन ने अपने छात्रों को ताइवान के नागरिकों से संभावित हनी ट्रैपिंग को लेकर विशेष सतर्क रहने की चेतावनी जारी की थी.

पैटर्न से पता चलता है कि आइएसआइ सैनिकों की तैनाती, उनकी गतिविधियां, उनको एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजे जाने के समय, वाहनों के मॉडल, उनके उपयोग किए जाने वाले मार्गों आदि के बारे में जानकारियां खरीदता रहा है. सामरिक जानकारियां पाने के लिए ये निम्न-स्तरीय ऑपरेशन प्रतीत हो सकते हैं लेकिन रक्षा क्षेत्र में सुधारों पर 2016 में एक रिपोर्ट लिखने वाले लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) डी.बी. शेकतकर का कहना है कि यह बड़ी चीजों के लिए शुरुआती बिंदु हो सकता है. वे बताते हैं, ''दुश्मन को अपनी पैठ बनाने में समय लगता है. वे पहले छोटी-छोटी जानकारियां मांगते हैं और फिर धीरे-धीरे अपने टारगेट को बड़े काम सौंपते हैं.''

कभी-कभी पीआइओ बड़ा हाथ भी मार लेते हैं. 2018 में 'निहा शर्मा' और 'पूजा रंजन' ने भारतीय सशस्त्र बलों की खातिर सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों का निर्माण करने वाले भारत-रूस के संयुक्त उद्यम ब्रह्मोस एयरोस्पेस के लिए काम कर रहे नागपुर के एक इंजीनियर को फंसा लिया था. निशांत अग्रवाल ने कथित तौर पर ब्रह्मोस मिसाइल की सटीकता से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी लीक की थी. वह नागपुर की जेल में बंद है और कठोर सरकारी गोपनीयता अधिनियम के तहत आरोपित है.
 
ऑपरेशन हैदराबाद

रावलपिंडी के एक विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर 2019 में एक विज्ञापन दिया गया, जिससे बड़े सोशल मीडिया ट्रैप ऑपरेशन का सुराग मिला. विज्ञापन में 'एक सैन्य स्वामित्व वाले मीडिया हाउस' में नौकरी के लिए 'सोशल मीडिया विशेषज्ञ (महिला)' पद के लिए आवेदन मांगे गए थे. मीडिया हाउस चाहता था कि महिला उम्मीदवार धारा प्रवाह अंग्रेजी बोलती हो और परामर्श, लेखन, संपादन और संचार कौशल में उत्कृष्ट हो. भारतीय एमआइ अधिकारियों का मानना है कि भर्ती का उद्देश्य, सेक्स चैट के दौरान पुरुषों को खुफिया जानकारी का आदान-प्रदान करने के लिए लुभाना था.

जिन सैन्य खुफिया अधिकारियों ने इंडिया टुडे से बात की, उनका मानना है कि यह विज्ञापन आइएसआइ के 'ऑपरेशन हैदराबाद' की शुरुआत थी जिसका कोडनेम पाकिस्तान के सिंध प्रांत के शहर के नाम पर रखा गया था. इस ऑपरेशन के तहत आइएसआइ रावलपिंडी, लाहौर और हैदराबाद जैसे शहरों से कॉल सेंटर चलाती है. निहा शर्मा, इशानिका अहीर और पूजा राजपूत जैसे भारतीय उपनाम वाली पाकिस्तानी लड़कियां हजारों डीपी (डिस्पले पिक्चर) को खंगालती हैं.

उन्हें रणनीतिक रूप से तैनात भारतीय सशस्त्र बलों के ऐसे लोगों की तलाश रहती है जिन्हें आसानी से फांसा जा सकता है. एक पीआइओ औसतन एक दिन में 50 भारतीय प्रोफाइल को 'हैंडल' करता है. पुलिस का कहना है कि उन्हें भारतीय लहजे में बोलने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है. एक एमआइ अधिकारी का कहना है कि सबसे प्रभावी पीआइओ में से एक 'पूजा राजपूत', भारतीय पंजाबी और हिंदी लहजे में धाराप्रवाह बातचीत करती है.

राजपूत पाकिस्तान स्थित हैदराबाद से काम करती है और अक्सर खुद को सैन्य नर्सिंग सेवा की पूर्व नर्स बताती है. वह बातचीत की शुरुआत हल्के-फुल्के हंसी-मजाक से करती है और धीरे-धीरे 'टारगेट' को भरोसे में ले लेती है. उसका अगला कदम टारगेट की निजी और पारिवारिक समस्याओं को जानना होता है. राजपूत कभी-कभी हवाला या बैंक खाते से साधारण ट्रांजैक्शन के जरिए अपने टारगेट को छोटी रकम की पेशकश भी करती है.

इनकी डीपी में बिंदी और कलाई पर कलावा बंधा दिखता है. वे जब वीडियो में आती हैं तो अमूमन बैकग्राउंड में भारतीय तिरंगे या महात्मा गांधी या हिंदू देवताओं के चित्र होते हैं. ये कई दफा नाम बदलते हैं पर प्रोफाइल फोटो वही रहती है. मसलन, 'इशानिका अहीर', कुछ 'टारगेट्स' के लिए 'नव्या चोपड़ा' तो कुछ के लिए 'मानसी दीक्षित' थी. इनकी संख्या बढ़ती जा रही है. भारतीय एमआइ अधिकारियों का कहना है कि आइएसआइ ने 'माताहारियों' के अपने दस्ते को विस्तृत करने के लिए पिछले साल, बांग्लादेश और ईरान के लोगों को भी शामिल करना शुरू किया है.

पीआइओ को कैसे पहचानें
पीआइओ को कैसे पहचानें

साल 2020 में सेना ने अपने कर्मियों के लिए सोशल मीडिया पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया. इसका उल्लंघन करते पाए जाने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाती है. फिर भी कुछ लोग उल्लंघन करते हैं और फंस जाते हैं. मुंबई के एक पुलिस अधिकारी याद करते हैं कि कैसे उन्होंने 2020 में सेना के एक जवान को आइएसआइ को कुछ महत्वपूर्ण जानकारी देते पकड़ा था. 'सोनिया पटेल' ने उससे फेसबुक पर दोस्ती की थी. उन्होंने फोन नंबरों का आदान-प्रदान किया और घंटों व्हाट्सऐप पर चैट करना शुरू कर दिया.

धीरे-धीरे वह सेक्स के बारे में बात करने लगी. अपना नाम न बताने की शर्त पर एक अधिकारी ने कहा, ''एक दिन, सोनिया ने उससे कहा कि वह यह साबित करे कि वह किसी भी औरत को संतुष्ट कर सकता है. इसके प्रमाण के रूप में वह अपनी पत्नी के साथ बिताए अंतरंग क्षणों के वीडियो रिकॉर्ड करके उसे भेजे.'' जवान ने वैसा ही किया. इसके बाद पीआइओ ने वीडियो वायरल करने की धमकी देते हुए ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया. 'सोनिया' उससे सैनिकों की गतिविधियों और यहां तक कि सैनिकों की शिफ्ट ड्यूटी तक के बारे में जानना चाहती थी.

मेजर मोहम्मद अली शाह (सेवानिवृत्त) कहते हैं, ''प्रतिपल हो रही चीजों पर नजर आधुनिक युद्ध के लिए जरूरी है. यह एक क्रिकेट मैच के सीधे प्रसारण की तरह है. अगर आपके पास दुश्मन की गतिविधियों की पल-पल की जानकारी है तो आप युद्ध आसानी से जीत सकते हैं.''

हालिया हुए खुलासे
हालिया हुए खुलासे

आभासी शत्रु के लिए एक गोली

सेना को अपने जवानों को सीमा पार बैठी 'मोहिनियों' से बचाने का तरीका खोजना होगा. इसका एक तरीका जागरूकता अभियान  है. एक सैन्य प्रतिष्ठान में लगे जागरूकता पोस्टर में लिखा है, ''कोई भी गोली किसी आभासी दुश्मन को नहीं मार सकती.'' साइबर सुरक्षा उल्लंघनों के मामले में क्या करें और क्या न करें, इस पर सेना ने 15-सूत्री दिशानिर्देश जारी किए हैं. दिशानिर्देशों का शीर्षक है, ''हम में से कोई भी सुरक्षा जीन के साथ पैदा नहीं हुआ है. हमें सुरक्षा के लिए कोशिश करनी होगी.'' एक अधिकारी कहते हैं, ''हम स्मार्टफोन पर प्रतिबंध नहीं लगा सकते क्योंकि जवानों को इस मुश्किल वक्त में अपने परिजनों के संपर्क में रहने की जरूरत है. हमें बीच का रास्ता खोजने और सुरक्षित नेटवर्क विकसित करने की जरूरत है.''

पिछले कुछ महीनों में एमआइ ने हनी ट्रैप की पहचान करने के लिए एक बड़ा अभियान छेड़ा है. काउंटर-इंटेलिजेंस टीमें मुखबिरों के नेटवर्क का उपयोग करके उन कर्मियों पर नजर रखती हैं जो दुश्मन के फंदे में फंस सकते हैं. जिन जवानों ने सेना में 10 साल से कम समय बिताया है उन्हें सबसे कमजोर माना जाता है जो जाल में फंस सकते हैं. एमआइ ने पीआइओ की कई फाइलें खंगाली हैं और पाकिस्तान में उनके इंटरनेट प्रोटोकॉल एड्रेस को ट्रैक करते हुए व्यक्तिगत एजेंटों के काम के तौर-तरीकों को गहराई से समझा है.

सेना ने 'शराब, शबाब और पैसे के लालच' को अपने कर्मियों पर हावी होने से रोकने के लिए कई उपाय किए हैं. कमजोर लोगों का पता लगाने के लिए एक आंतरिक सैन्य अभ्यास, 'मायाजाल', सोशल मीडिया के जरिए चलाया जाता है. शाम के रोल कॉल के दौरान जवानों को सोशल मीडिया और हनी ट्रैप के खतरों के बारे में शिक्षित किया जाता है. जवानों को सतर्क और सचेत बनाने के लिए नियमित अंतराल पर आयोजित 'सैनिक सम्मेलनों' का उपयोग भी किया जाता है.

जनरल शेकतकर ने हनी ट्रैप को एक 'खतरनाक' प्रवृत्ति बताया और कमजोर लोगों पर लगातार नजर रखने की वकालत की है, ''खासकर सीमावर्ती क्षेत्रों में युवाओं को संवेदनशील बनाने के लिए विशेष अभियान चलाने की जरूरत है. हमें उन्हें राष्ट्रवादी चरित्र निर्माण के लिए प्रोत्साहित करने की जरूरत है.'' सोशल मीडिया पर जीवन बिताने के लिए आपको निरंतर सतर्कता चाहिए.

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