scorecardresearch
 

खास रपटः दंगल में भला कौन सुशील

हत्या के मामले में एक ओलंपिक पदक विजेता की गिरफ्तारी ने भारतीय कुश्ती की ग्लैमरस दुनिया की कठोर वास्तविकताओं पर से परदा उठाया

खड़े-खड़े चित: सुशील कुमार 23 मई को दिल्ली में दिल्ली पुलिस के हाथों गिरफ्तार होने के बाद खड़े-खड़े चित: सुशील कुमार 23 मई को दिल्ली में दिल्ली पुलिस के हाथों गिरफ्तार होने के बाद

हरियाणा की फोगाट बहनों और उनके दबंग पिता-कोच महावीर के जीवन पर आधारित 2016 की फिल्म दंगल के साथ बॉलीवुड ने लोगों को कुश्ती से प्यार करना सिखाया. लेकिन बड़े पर्दे पर फिल्माने के लिहाज से एक प्रेरक, शून्य से शिखर तक पहुंचने की माकूल कहानी तो सुशील कुमार के पास थी. एक बस ड्राइवर का बेटा सुशील एकमात्र भारतीय एथलीट है, जो ओलंपिक में व्यक्तिगत स्पर्धा में दो पदक—2008 में कांस्य और 2012 में रजत—जीता और विश्व चैंपियनशिप का खिताब जीतने वाला एकमात्र भारतीय पहलवान है. उसके पास एशियाई खेलों में कांस्य, चार एशियाई चैंपियनशिप पदक और तीन राष्ट्रमंडल खेलों के स्वर्ण पदक भी हैं.

इधर, एक अरसे के बाद सुशील टोक्यो ओलंपिक के लिए क्वालीफाइ करके वापसी की उम्मीद कर रहा था, जो कोविड-19 महामारी के कारण साल भर के लिए टाल दिए गए थे. 23 वर्षीय पहलवान और पूर्व जूनियर राष्ट्रीय चैंपियन सागर धनखड़ की हत्या के आरोप में देश के सबसे चर्चित पहलवान के जेल पहुंचने के बाद उन योजनाओं पर पानी फिर गया है. दिल्ली पुलिस ने आरोप लगाया है कि 4 मई को दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम की पार्किंग में धनखड़ और दो अन्य के साथ मारपीट करने वाले गिरोह की अगुआई सुशील ने की थी. इस विवाद ने दो खिलाड़ियों के खेल करियर समाप्त कर दिए.

यह मामला न सिर्फ इसलिए चौंकाने वाला है क्योंकि इसमें कथित तौर पर खेल का एक नायक शामिल है, बल्कि इसलिए कि यह पहलवानों और दिल्ली के आपराधिक गिरोहों के बीच गठजोड़ को उजागर करता है. धनखड़ के सहयोगियों में से एक और सुशील तथा उसके गुर्गों के हाथों पिटने का दावा करने वाला सोनू महाल कुख्यात गैंगस्टर काला जठेड़ी का भतीजा है, जिसके खिलाफ राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली में आपराधिक मामले दर्ज हैं. 

उल्का पिंड सा उत्थान और पतन
उल्का पिंड सा उत्थान और पतन

संदिग्ध कड़ियां

फरार सुशील को 23 मई को दिल्ली में गिरफ्तार किया गया था. 4 मई की रात की घटना में उसे मदद करने वाले दिल्ली और आसपास के इलाकों के काला असौदा और नीरज बवाना गिरोह के गुर्गे बताए जाते हैं. दिल्ली पुलिस ने नौ लोगों को गिरफ्तार किया है. यह झगड़ा एक संपत्ति विवाद को लेकर शुरू हुआ, ऐसा अंदेशा है. उसी में सुशील ने गुर्गों से धनखड़ को दिल्ली के मॉडल टाउन के एक घर से उठाने और स्टेडियम लाने को कहा था. पुलिस के मुताबिक, फिर सुशील ने अपने गुर्गों से उन्हें कूटने को कहा, ताकि धनखड़ और उनके साथियों को सबक सिखाया जा सके.

14 साल की उम्र में प्रशिक्षण के लिए अकादमी में आने के बाद से छत्रसाल स्टेडियम ही एक मायने में सुशील का घर रहा. 2015 तक स्टेडियम चलाने वाले पूर्व पहलवान से कोच बने सतपाल सिंह की सेवानिवृत्ति के बाद उत्तर रेलवे ने सुशील को विशेष कार्य अधिकारी के रूप में नियुक्त किया, ताकि सतपाल की जगह भरते हुए उसे उभरते पहलवानों के लिए कोच बनाया जा सके. बताते हैं, सुशील ने स्टेडियम अपनी जागीर की तरह चलाया. यहां बाकी शिष्यों के साथ धनखड़ भी उसे आदर देते थे, जो उसी से प्रेरित होकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफल होने को स्टेडियम आए थे.

नाम न छापने की शर्त पर कुछ पुलिस अफसर बताते हैं कि सुशील के पहले जठेड़ी गिरोह से ताल्लुकात थे. हरियाणा पुलिस के साथ एक मुठभेड़ के बाद जठेड़ी की फरारी के दौरान सुशील उसके प्रतिद्वंद्वी असौदा और बवाना से जा मिला. पुलिस अफसरों का शक है कि दिल्ली पुलिस के एक हेड कांस्टेबल के बेटे धनखड़ का खुद जठेड़ी गिरोह से ताल्लुक था. दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता, डीसीपी (मुख्यालय) चिन्मय बिस्वाल का कहना है कि किसी भी धारणा को सच मान लेना जल्दबाजी होगी. उन्होंने कहा, ''हम सभी कोणों से जांच कर रहे हैं.''

दिल्ली पुलिस की जांच जारी है लेकिन सुशील की इज्जत को तो पलीता लग गया. निशानेबाज अभिनव बिंद्रा ने 2008 बीजिंग ओलंपिक में व्यक्तिगत श्रेणी में भारत का पहला स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा था, लेकिन सुशील की उपलब्धि भी कम न थी. 56 साल बाद भारत ने पहला कुश्ती पदक जीता था. दिल्ली के उपनगर नजफगढ़ के एक गांव बापरोला में जन्मे सुशील कुमार ने पिता दीवान सिंह को एक शौकिया पहलवान के रूप में अभ्यास करते देख कुश्ती के मैदान में कदम रखा था. दीवान सिंह ने अपना सब कुछ बेटे पर खर्च कर दिया और उसे सतपाल के अधीन प्रशिक्षण के लिए छत्रसाल स्टेडियम भेजा.

मेहनत से मिली सफलता

एक शर्मीले और समर्पित शिष्य सुशील की दुनिया कुश्ती के इर्द-गिर्द घूमती थी. स्टेडियम के साथी पहलवान याद करते हैं कि सुशील ने छुट्टियों और त्योहारों पर भी प्रशिक्षण से अवकाश नहीं लिया. उसके समर्पण ने कोच सतपाल और उनके सहयोगी रामफल मान का ध्यान खींचा. सुशील ने 2011 में सतपाल की बेटी सावी से उन दिनों राज्यसभा में विपक्ष के नेता दिवंगत अरुण जेटली के दिल्ली आवास पर शादी की. मान कहते हैं, ''यह एक गुरु से अपने शिष्य को एक अनूठा पुरस्कार है.''

मैट पर सुशील की वीरता ने उसे पहचान और दौलत दिलाई. उसे सरकार की ओर से 6 करोड़ रुपए से अधिक का नकद पुरस्कार मिला. उसने माउंटेन ड्यू, आयशर ट्रैक्टर्स, पतंजलि और नेशनल एग कोऑर्डिनेशन कमेटी (एनईसीसी) के विज्ञापनों में अभिनय करके भी कमाई की, जिसके बारे में कहा जाता है कि उन्होंने उसे सालाना रिटेनरशिप शुल्क के रूप में 1 करोड़ रुपए दिलाए.

लंदन ओलंपिक के बाद सुशील 66 से 74 किलोग्राम भार वर्ग में आ गया था. अब सुशील का दबदबा भी बढ़ा. फिलहाल हरियाणा के गोहाना में ओलंपिक पदक विजेता योगेश्वर दत्त की अकादमी में प्रशिक्षण दे रहे मान बताते हैं, ''छत्रसाल स्टेडियम में अपने कार्यकाल में मैंने कुछ संदिग्ध तत्वों को स्टेडियम में आते देखा था. मैंने उन्हें बाहर जाने के लिए कहा तो बीचबचाव के लिए सुशील आ पहुंचा. मैंने फिर इसे नजरअंदाज ही करने का फैसला लिया. अब सुन रहा हूं कि सुशील को इन [आपराधिक] गतिविधियों में धकेलने वाले वही लोग थे.''

इससे पहले भी सुशील अपने एक विरोधी पहलवान के साथ बहुत तीखे विवाद में शामिल रहा है. साल 2016 में रियो यानी लगातार तीसरे ओलंपिक में खेलने के अपने संकल्प के तहत सुशील ने नरसिंह यादव से अपनी एक बाजी कराने की मांग की थी. दरअसल, विश्व चैंपियनशिप पदक जीतकर नरसिंह यादव ने भारत के लिए रियो जाने का कोटा हासिल कर लिया था.

लेकिन जब भारतीय कुश्ती महासंघ ने सुशील को इनकार कर दिया तो वह दिल्ली हाइकोर्ट जा पहुंचा. लेकिन हाइकोर्ट में भी उसको हार का सामना करना पड़ा. नरसिंह यादव ने बाद में सुशील के गुर्गों पर उनके खाने में स्टेरॉयड मिला देने का आरोप लगाया. लेकिन, ड्रग मामले की वजह से ओलंपिक में खेलने का नरिंह यादव का सपना भी टूट गया और उनके खेलने पर चार साल का प्रतिबंध लगा दिया गया. हालांकि, इस मामले की सीबीआइ जांच में पिछले साल दायर क्लोजर रिपोर्ट में सुशील को दोषमुक्त करार दिया गया.

इंदौर में 2017 की राष्ट्रीय चैंपियनशिप में सुशील को क्वार्टर फाइनल से तीन वॉकओवर मिले, जिसमें से एक पहलवान ने तो उसके पैर तक छुए. दिसंबर 2017 में 2018 कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए दिल्ली में आयोजित ट्रायल के फाइनल में सुशील के प्रवीण राणा को हराने के बाद दोनों के समर्थक आपस में गुत्थमगुत्था हो गए थे. राणा ने आरोप लगाया कि सुशील ने उन्हें धमकी दी और प्रतियोगिता के अधिकारी भी पक्षपाती थे. कुश्ती बिरादरी में कइयों ने उस बेईमानी को भांप लिया था. लेकिन अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सुशील के मजबूत प्रदर्शन ने इन आरोपों को उभरने ही नहीं दिया.

हालांकि, पहलवान बिरादरी के कुछ सदस्यों के लिए सुशील अब भी एक आदर्श है. लंदन ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले साथी पहलवान अमित दहिया कहते हैं, ''जो हुआ वह एक 'दुर्घटना' है. लोग पहलवानों को गुंडा समझते थे. सुशील ने वह धारणा बदल दी.'' विडंबना देखिए कि वही शख्स (सुशील कुमार) अब उस रुढ़िवादी धारणा को मजबूत कर रहा है. दिल्ली और हरियाणा के कई पहलवानों ने इंडिया टुडे  से दावा किया कि सुशील ने रियल एस्टेट दिग्गजों को बाउंसर मुहैया किए और अपने गुर्गों से टोल प्लाजा, रेस्तरां और पबों को नियंत्रित किया.

मार्च 2021 में स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष के रूप में फिर से चुने जाने के बाद एक प्रशासक की भूमिका लेने के बावजूद सुशील ने कुश्ती से अपनी विदाई नहीं ली. वह अगर ऐसा करता तो उसे विज्ञापनों आदि से हाथ धोना पड़ता. दिसंबर 2017 में वह प्रो रेसलिंग लीग में सबसे महंगा खिलाड़ी था. दिल्ली सुल्तान्स ने उसके लिए 55 लाख रुपए की बोली लगाई थी. साल 2019 तक महासंघ ने उसे 'ग्रेड ए' अनुबंध से सम्मानित किया, जिसके लिए उसे 20 लाख रुपए का वार्षिक पारिश्रमिक मिला.

हालांकि, साल 2018 तक सुशील का करियर अंत की ओर था. वह उस वर्ष जकार्ता में एशियाई खेलों में पदक जीतने में नाकामयाब रहा और 2019 विश्व चैंपियनशिप के पहले ही दौर में वह बाहर हो गया था. जनवरी 2020 में कंधे की चोट के कारण उसने महासंघ से एशियाई चैंपियनशिप और ओलंपिक क्वालीफायर के लिए 74 किलो वर्ग के ट्रायल टालने का अनुरोध किया पर महासंघ ने इनकार कर दिया.

देश के प्रतिष्ठित पद्मश्री सम्मान और अर्जुन तथा राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार प्राप्त सुशील फिलहाल जेल से बाहर निकलने और अपने ऊपर लगे आरोपों से बेदाग निकलने की उम्मीद करेगा. लेकिन अतीत उसके पीछे लगा है. 30 मई को दिल्ली पुलिस ने मॉडल टाउन के एक दुकानदार की तरफ से पिछले सितंबर में दर्ज कराई प्राथमिकी में फिर से जांच शुरू कर दी है. उस दुकानदार ने 4 लाख रु. के किराने के सामान का बकाया मांगने पर सुशील और उसके गुर्गों पर छत्रसाल स्टेडियम में अपनी पिटाई कराने का आरोप लगाया था. ऐसे में हत्या, गैर-इरादतन हत्या और अपहरण सहित कई आरोपों के साथ यह पहलवान अब अनिश्चित राह पर है.

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें