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सफर के किस्से बयान करते इम्तियाज अली

इम्तियाज अली की फिल्में जिंदगी के किसी न किसी सफर का अफ साना बयान करती हैं. लेकिन हाइवे में राहें कुछ अलग ही मंजिलों की ओर बढ़ती हैं.

हाइवे नाम से रोड मूवी का एहसास होता है. लेकिन इसमें कुछ ऐसा है जो आपको हैरान करता है. 42 वर्षीय डायरेक्टर इम्तियाज अली ने अपने करियर के अहम मोड़ पर हाइवे  के रूप में ‘‘क्रॉसरोड फिल्म’’ पेश की है. यह उनकी सबसे कामयाब फिल्म नहीं है. इसने अपने दूसरे हफ्ते के अंत तक महज 23.75 करोड़ रु. की कमाई की जबकि उनकी पिछली फिल्म रॉकस्टार (2011) पहले हफ्ते में ही 64 करोड़ रु. कमा चुकी थी. फिर भी इसे उनकी सबसे बेहतरीन फिल्म माना जा रहा है.

सहज, सादे अंदाज में पेश सशक्त फिल्म जो स्टॉकहोम-सिंड्रोम (अपहर्ता से ही प्यार होना) रोमांस पर आधारित है, जिसमें आलिया भट्ट और रणदीप हुड्डा लीड रोल में हैं. इम्तियाज ने कमउम्र आलिया को गंभीर किरदार निभाने का मौका देकर उनके करियर को नई पहचान दी है.

इससे पहले वे आज के दो सुपरस्टारों दीपिका पादुकोण और रणबीर कपूर को भी डायरेक्ट कर चुके हैं. इम्तियाज का रंग इन दोनों की 2013 की कामयाब फिल्म ये जवानी है दीवानी  में निभाए उनके अभिनय में पर साफ नजर आता है.

उभरते सितारों से लेकर अनुराग कश्यप, तिग्मांशु धूलिया, श्रीराम राघवन जैसे फिल्म निर्माताओं तक उनका प्रभाव नजर आता है. इन लोगों के साथ उन्होंने टीवी सीरियल्स की शूटिंग करते हुए अपना करियर शुरू किया था.

पूर्व पत्नी फिल्ममेकर प्रीति अली-जो उनके टीवी धारावाहिकों की भी निर्माता रहीं हैं-से लेकर दिल्ली के हिंदू कॉलेज के अपने दोस्तों तक, इम्तियाज ने सफर में जुड़े लोगों को कभी भुलाया नहीं और उनकी भूमिकाओं को परदे पर उकेरा है. फिल्म सोचा न था (2005) को इम्तियाज अपने प्रतीकात्मक सफर की पहली कड़ी कहते हैं.

जबकि जब वी मेट (2007), लव आज कल (2009) और रॉकस्टार के जरिए उन्होंने हमसफर रहे लोगों के साथ के रिश्तों पर जोर दिया है. लेकिन हाइवे के बारे में इम्तियाज का मानना है कि यह उनके दिल के करीब रहने वाले सच से रू-ब-रू कराती है. वे कहते हैं, ‘‘इस फिल्म ने मुझे वह कोना दिया है, जहां मैं फिर से अपनी मर्जी का कुछ भी आजमा  सकता हूं.’’

फिल्म को अंतिम रूप देने से पहले ही ए.आर. रहमान ने इसे देखकर कहा था, ‘‘आपकी दौड़ अभी जारी है, फिर भी आप अपनी एक जगह बनाने में कामयाब हो चुके हैं.’’ अनुराग कश्यप के मुताबिक, इम्तियाज अकेले शख्स हैं जो रोमांटिक फिल्में बनाने के माहिर हैं. वे उनके सबसे पुराने दोस्त हैं जिन्होंने उनको छिपाकर सेंट जेवियर्स इंस्टीट्यूट में अपने हॉस्टल के कमरे में रखा था, संघर्ष के इन दिनों में उनके पास रहने के लिए कोई जगह नहीं होती थी.

उनका मानना है, ‘‘भावनात्मक और आध्यात्मिक तौर पर यह उनका सबसे अच्छा दौर है. वे जिस ओर बढ़ रहे हैं, वह मुझे पसंद है.’’ प्रीति के मुताबिक, इम्तियाज अब ऐसे मुकाम पर पहुंच चुके हैं जहां से वे मनचाही उड़ान भर सकते हैं.

प्रोड्यूसर्स ने उन्हें फिल्में बनाने के लिए ब्लैंक चेक दिए हैं. वास्तव में हाइवे को बड़े बजट की ऐक्शन फिल्म बनाने की योजना थी. लेकिन उन्होंने 20 करोड़ रु. के बजट पर ही फिल्म बनाने का फैसला किया. प्रीति कहती हैं, ‘‘हाइवे हमेशा से खास रही है. इसलिए यह मेरे मन में 18 साल से घूम रही थी.’’

बात फिल्म निर्माण की हो, दोस्ती की या कहानी कहने की, इम्तियाज घिसी-पिटी परंपराओं को तोडऩे के कायल हैं. सड़क ही सब कुछ है. वे कहते हैं, ‘‘अनजाने में आप उस भूमिका को निभाते हैं जो आपको दी गई है. सफर में लोग आपको नहीं जानते. सड़क ही ऐसी जगह है जहां आप अपनी वास्तविक शख्सियत को जीने के लिए आजाद हैं.

यहां आप कभी नाटकीय हालात से दो-चार हो सकते हैं.’’ हिंदू कॉलेज की हिंदी ड्रैमैटिक सोसाइटी इब्तिदा अपने नुक्कड़ नाटकों के लिए मशहूर है. इम्तियाज ने इसका गठन  हिंदू कॉलेज में पढ़ाई के दौरान किया था. यही दर्शन ये जवानी है दीवानी में दिखता है, जिसमें दीपिका और रणबीर अपने अतीत को अलग रखते हुए साथ-साथ एक सफर पर निकलते हैं.

दीपिका कहती हैं कि इम्तियाज ने ही लव आज कल के दौरान उनके अंदर छिपे चंचल बच्चे को ढूंढ निकाला था और फिर अपनी लिखी कॉकटेल (2012) में उस बच्चे को जी भरकर उधम मचाने के लिए खुला छोड़ दिया. रणबीर के साथ इम्तियाज क्रिएटिविटी साझ करते हैं.

आलिया का कहना है कि वे जिन भी कलाकारों के साथ काम कर चुके हैं, उनके साथ भावनात्मक ईमानदारी से पेश आते हैं. उनकी खासियत यह है कि सफर के दौरान आप जिस भी रूप में ढल जाएं, वे आपको उसी रूप में अपना लेते हैं, और यही बात उनके दोस्तों को उनके करीब रखती है. यही काबिलियत कलाकारों को पारंपरिक खांचे से बाहर निकालती है.

वे कहते हैं, ‘‘जब लोगों ने कहा कि जब वी मेट का मुख्य आकर्षण डायलॉग है, तब मैंने लव आज कल से लफ्ज हटा दिए. कई लोगों ने कहा कि जय और मीरा की चुप्पी ही सब कुछ कह जाती है. फिर रॉकस्टार में जॉर्डन कुछ कह नहीं पाता और हमेशा अल्फाज तलाशता रहता है.’’

हाइवे की रिलीज के एक हफ्ते बाद ही घुमक्कड़ इम्तियाज हमेशा की तरह नए सफर पर निकल पड़े. यानी अपनी अगली फिल्म की ओर. वे विंडो सीट नाम की कहानी पर काम कर रहे हैं जिसमें हाइवे की जोड़ी दिखने वाली है. ऐसा नहीं कि कायमाबी उनके लिए मायने नहीं रखती. यह उनके लिए मील के एक पत्थर को पार कर सफर में आगे बढ़ जाने जैसा है. वे कहते हैं, ‘‘मेरा सबसे बड़ा डर ठहराव या किसी एक जगह में फंसकर रह जाना है.’’

अपनी फिल्मों को ‘‘सफर के दौरान प्यार’’ की कहानी कहे जाने पर उन्हें दुख होता है क्योंकि साफ है कि समीक्षक बारीकियों को पढ़ नहीं पायाः उनकी फिल्मों में स्त्री और पुरुष के लिए हर सफर अलग है. वे कहते हैं, ‘‘मेरी हीरोइनों को सफर की शुरुआत से ही मंजिल पता होती है. सफर उनके लिए इस बात को और मजूबत करता है. वहीं हीरो को सफर से दिशा मिलती है. औरत को हमेशा बेहतर जानकारी होती है.’’

जमशेदपुर में जन्मे इम्तियाज को घूमने का शौक अपने पिता से मिला जिनके साथ वे अकसर पटना और अन्य छोटे शहरों में जाते रहते थे. जब वे भाई आरिफ के साथ वापस जमशेदपुर में अपनी चाची के पास रहने लगे तो यह सब छूट गया. उनके सफर की शुरुआत की ज्यादातर यादें उनकी बचपन की दोस्त, उनकी पूर्व पत्नी प्रीति के साथ जुड़ी हैं.

अंधेरी के उनके घर, जहां कभी वे दोनों साथ रहते थे, उसके कोने से प्रीति बड़ा-सा ट्रंक बाहर खींचती हैं और उसमें से कविताओं की कॉपी ढूंढकर निकालती हैं जिनमें इम्तियाज के सफर की कहानी और मायने दर्ज हैं. ट्रंक चिट्ठियों, कविताओं और कहानियों से भरा है, जो उन्होंने प्यार के दिनों में लिखे थे. उन दिनों इम्तियाज दिल्ली में थे और प्रीति जमशेदपुर और फिर मुंबई में थीं.

प्रीति के साथ दो दिन बिताने के लिए वे ट्रेन की लंबी और थकाऊ यात्रा कर वहां पहुंचते. प्रीति कहती हैं, ‘‘इम्तियाज का सफर आप पर जादू कर देता है. मुझ पर भी हुआ. लेकिन औरतें इस बात को लेकर ज्यादा व्यावहारिक होती हैं कि सफर किस दिशा में जा रहा है. फिर भी मुझे इसके हर पहलू से प्यार है.’’

इम्तियाज कहते हैं, ‘‘अगर लोगों ने यह समझ लिया कि वास्तव में मेरी फिल्मों में प्यार केंद्रीय बिंदु नहीं है, तो मैं खुश हूं.’’ सफर और प्यार उनके लिए कभी आसान नहीं रहा. उनके किरदार जटिल प्रेम संबंधों में फंसे होते हैः भागने के लिए बेचैन लोग जो बहाव के साथ चल रहे हैं. उसमें तय चीज तो सिर्फ एक ही है-सड़क. 

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