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अभी का हाल कुछ आगे बढ़ीं कुछ अटक गईं

पर्यावरण मंत्रालय के पैनलों ने अपनी ऑनलाइन बैठकों में कुछ परियोजनाओं को तो हरी झंडी दे दी, लेकिन ज्यादातर पर फैसला टाल दिया.

प्रोजेक्ट  नया संसद भवन  दिल्ली प्रोजेक्ट नया संसद भवन दिल्ली

प्रोजेक्ट

पर्यावरण बचे कैसे?

आंध्र प्रदेश में कुरनूल जिले के अमराबाद जंगल के बीच स्थित श्रीशैलम बांध

अमराबाद टाइगर रिजर्व के भीतर

83 वर्ग किमी में यूरेनियम सर्वे और खनन. तेलंगाना स्थित एटॉमिक मिनरल्स डायरेक्टरेट फॉर एक्प्लोरेशन ऐंड रिसर्च यह काम करेगा

चिंता का सबब नल्लामला हिल्स पर फैला अमराबाद टाइगर रिजर्व खासी जैवविविधता वाला है. बेहद नाजुक मानी जाने वाली चेंचू आदिम जनजाति इसी पहाड़ी की तलहटी में रहती है. पर्यावरणवादियों का कहना है कि यूरेनियम के खनन से यहां की पारिस्थितिकी को अपूरणीय क्षति होगी, जैवविविधता तो नष्ट होगी ही, कृष्णा नदी भी प्रदूषित हो जाएगी. इसके अलावा चेंचू समाज का जीवन भी खतरे में पड़ जाएगा.

मौजूदा स्थिति वन सलाहकार समिति ने प्रस्ताव को फिलहाल मुल्तवी कर दिया है और राज्य सरकार से इस बारे में और जानकारी मांगी है.

चिंता का सबब कई वैज्ञानिकों और वन्य जैवविज्ञानियों ने चेताया है कि इस प्रोजेक्ट के तहत सदाबहार और वर्षा वनों तथा एक अहम टाइगर रिजर्व के कम से कम 2,70,000 पेड़ काट दिए जाने की शर्त की वजह से इस इलाके में जैवविविधता का भारी नुक्सान होगा. दिबांग घाटी भूकंपीय दृष्टि से सबसे सक्रिय क्षेत्रों में से एक में पड़ती है. ऐसे में यह बड़े रिजर्वायर वाले ऊंचे बांधों के लिए तबाही का सबब बन सकता है. इस प्रोजेक्ट को इलाके की जनजातियों की पहचान और उनके अधिकारों के लिए खतरे के तौर पर भी देखा जा रहा है.

मौजूदा स्थिति पर्यावरण मंत्रालय की वन सलाहकार समिति ने इस प्रोजेक्ट पर अपने फैसले को टाल दिया है. उसने ऊर्जा मंत्रालय से यह बताने को कहा है कि क्या यह प्रोजेक्ट अपने मौजूदा स्वरूप में व्यावाहारिक है? उसने अरुणाचल प्रदेश सरकार को इस आशय का एक विश्लेषण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं कि प्रोजेक्ट से आखिर लाभ ज्यादा होगा या हानि.

अभी का हाल

कुछ आगे बढ़ीं कुछ अटक गईं

पर्यावरण मंत्रालय के पैनलों ने अपनी ऑनलाइन बैठकों में कुछ परियोजनाओं को तो हरी झंडी दे दी, लेकिन ज्यादातर पर फैसला टाल दिया

प्रोजेक्ट

3,097 मेगावाट इतालिन हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट

दिबांग घाटी, अरुणाचल प्रदेश

अनुमानित लागत

25,296.95 करोड़ रु.

प्रोजेक्ट

नया संसद भवन

दिल्ली

चिंता का सबब कुछ नागरिक संगठनों ने इसे मिली मंजूरी का विरोध किया है क्योंकि यह इमारत प्रस्तावित सेंट्रल विस्टा का हिस्सा होने के बावजूद पर्यावरण सलाहकार समिति के सामने तो इसे पूरी तरह से एक अलग प्रोजेक्ट के रूप में ही दिखाया गया है. सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के लिए भूमि उपयोग के बदलाव से संबंधित विशेष अनुमति याचिका सुप्रीम कोर्ट में लंबित है.

अनुमानित लागत

922 करोड़ रु.

मौजूदा स्थिति पर्यावरण सलाहकार समिति ने कहा है कि 22-24 अप्रैल की बैठक में नए संसद भवन की इमारत को मिली मंजूरी सुप्रीम कोर्ट के फैसले और दूसरी कई शर्तों से जुड़ी हुई है. शर्तें यही कि पेड़ कम से कम काटे जाने चाहिए और पर्यावरण के प्रति जवाबदेही का पालन किया जाना चाहिए.

प्रोजेक्ट

कोल इंडिया की सहायक एनईसीएफ की तिकोक ओपन कास्ट कोल माइनिंग

यह असल के देहिंग पतकाइ एलिफैंट रिजर्व में प्रस्तावित सलेकी रिजर्व फॉरेस्ट के भीतर 98.59 हेक्टेयर में होगा

चिंता का सबब एनईसीएफ बिना किसी मंजूरी के पहले से ही 57.17 हेक्टेयर के एक टुकड़े पर खुदाई कर रहा है. यहां तक कि 41.3 हेक्टेयर के एक और टुकड़े में से भी नौ हेक्टेयर में खुदाई हो चुकी है; इसके अलावा 7 हेक्टेयर को और मंजूरी मिल गई है. एनईसीएफ की दबंगई देखिए कि 57.17 हेक्टेयर वाले टुकड़े पर खुदाई शुरू करने के बाद ही सही, उसकी मंजूरी मांगने की बजाए उसने पूरे 98.5 हेक्टेयर इलाके का नियमितीकरण करने की कोशिश की.

मौजूदा स्थिति एनबीडब्ल्यूएल ने एनईसीएफ से खनन क्षेत्रों के सुधार की एक योजना पेश करने को कहा है, जिससे कि खनन हो चुके इलाकों को बिना मंजूरी के ही नियमित करने के प्रस्ताव पर विचार किया जा सके. असम सरकार ने एनईसीएफ पर पेनाल्टी लगाने के अलावा उन वन अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही भी शुरू की है, जिन्होंने बिना मंजूरी के 2003 से ही इस इलाके में खनन की इजाजत दे रखी थी.

प्रोजेक्ट

एनएच 4ए पर भगवान महावीर वन्यजीव अभयारण्य के बीच 12 किमी के हिस्से को 4 लेन करने का और 11.54 हेक्टेयर संरक्षित वन क्षेत्र में 10 किमी पावर ट्रांसमिशन लाइन, गोवा

चिंता का सबब मौजूदा राजमार्ग के इस हिस्से को फोरलेन करने के लिए 12,000 से ज्यादा पेड़ काटने पड़ेंगे. यह पारिस्थितिकीय तबाही जैसा होगा. इससे वन्यजीवों के गलियारे तो बदलेंगे ही, भूस्खलन होगा और जमीन का उपजाऊपन भी नष्ट होगा. पर्यावरणवादियों का दावा है कि इससे जंगल की 32 हेक्टेयर जमीन नष्ट हो जाएगी और यही कोई 3,660 लाख रुपए के बराबर का पर्यावरणीय नुक्सान होगा. तांबडी-सुरला के बीच हाइ टेंशन वायर खींचे जाने से यह शिकारी पक्षियों और हॉर्नबिल सरीखे बड़े परिदों के लिए खतरनाक होगा. इसके अलावा दुर्लभ किस्म के 4,139 वृक्षों के काटे जाने से जैवविविधता को खासा नुक्सान होगा.

मौजूदा स्थिति एनबीडब्ल्यूएल की स्थायी समिति ने इसे इस शर्त पर मंजूरी दी है कि राज्य वन्यजीव बोर्ड की ओर से तय किए गए नियम-कानूनों के पालन की नियमित रिपोर्ट भेजी जाएगी.

पिपरवार अंडरग्राउंड प्रोजेक्ट. सेंट्रल कोलफील्ड्स के 464.69 हेक्टेयर में. टंडवा, झारखंड

अनुमानित लागत

335.32 करोड़ रु.

चिंता का सबब खदान के दक्षिण पूर्व की सीमा की रेखा खींचती दामोदर नदी है.

मौजूदा स्थिति पर्यावरण सलाहकार समिति की उप समिति पहले मौक का मुआयना करेगी और फिर दामोदर नदी की रक्षा तथा खदान के पूरे पर्यावरणीय प्रबंधन के लिए कुछ अतिरिक्त प्रावधान सुझाएगी. पर्यावरणीय सलाहकार समिति ने यह भी सुझाया है कि प्रस्तावित प्रोजेक्ट से उस पूरे इलाके के जलीय प्रबंधन पर पडऩे वाले असर का भी आकलन किया जाना चाहिए.

यह फुर्ती है या गैरजरूरी हड़बड़ी?

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प्रोजेक्ट की पड़ताल की, वन और पर्यावरण मंत्रालय की समिति ने अप्रैल-मई के बीच अपनी ऑनलाइन बैठकों में, इन्हें पर्यावरणीय मंजूरी देने के वास्ते

108

दिन में ले लिए गए पर्यावरणीय मंजूरी से संबंधित फैसले. 2014 में इसमें 640 दिन लगे थे. अब लक्ष्य यह है कि इसे और घटाकर

70-80 दिन पर ले आया जाए

2,256

प्रोजेक्ट वन और पर्यावरण मंत्रालय की समिति अब तक मंजूर कर चुकी है, उसे जुलाई 2014 से अप्रैल 2020 के बीच पर्यावरणीय मंजूरी के लिए मिले 2,592 प्रस्तावों में से

87 %

प्रस्तावों को मंजूरी मिल रही

270

प्रस्ताव जैवविविधता वाली जगहों, राष्ट्रीय उद्यानों में या उसके आसपास के हैं

409 वर्ग किमी

वन क्षेत्र अब तक दिया जा चुका है 2014 से, विभिन्न परियोजनाओं के लिए

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