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उज्ज्वला से अमीरों का भला

उज्ज्वला में बीपीएल श्रेणी की महिलाएं ही कनेक्शन के लिए पात्र लेकिन राजस्थान में 30 लाख से ज्यादा सामान्य श्रेणी की महिलाओं को दे दिए गए उज्ज्वला कनेक्शन

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भीलवाड़ा जिले की भौली पंचायत की मंजू ने एक साल से उज्ज्वला योजना में मिला गैस चूल्हा और सिलिंडर छप्पर के ऊपर रख दिया भीलवाड़ा जिले की भौली पंचायत की मंजू ने एक साल से उज्ज्वला योजना में मिला गैस चूल्हा और सिलिंडर छप्पर के ऊपर रख दिया

आनंद चौधरी

सरकारी योजनाओं का उद्देश्य चाहे जितना अच्छा हो लेकिन उनका क्रियान्वयन और अंतिम व्यक्ति तक उसका लाभ हमेशा संदिग्ध रहता है. राजस्थान में प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के कुछ ऐसे ही हालात हैं. यहां एक तरफ कलकी, मौसमी, पूजा जैसी महिलाएं हैं जो गैस कनेक्शन जारी होने के बाद दूसरा सिलिंडर नहीं भरवा पाईं, वहीं टीना और नानी बाई जैसे लोग भी हैं जिन्हें बीपीएल श्रेणी में नहीं होने के बावजूद गैस कनेक्शन जारी कर दिया गया. इंडिया टुडे की पड़ताल में यह सामने आया है कि राजस्थान में गरीबी रेखा के नीचे (बीपीएल) सूची में शामिल नहीं होने के बावजूद 30,61,620 सामान्य उपभोक्ताओं को प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना में गैस कनेक्शन जारी कर दिए गए. राजस्थान में 8 अप्रैल, 2022 की स्थिति के अनुसार, बीपीएल परिवारों की कुल संख्या 22,47,546 है. इसी समयावधि तक राजस्थान में एपीएल और बीपीएल श्रेणी के राशन कार्ड धारकों की संख्या 35,49,652 है. 1 जनवरी, 2022 तक राजस्थान में प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के 66,11,272 उपभोक्ता हैं. ऐसे में 30,61,620 कनेक्शन ऐसे हैं जो सामान्य श्रेणी के उपभोक्ताओं को जारी किए गए हैं.

नियंत्रक एवं महालेखा परिक्षक (कैग) की रिपोर्ट में भी इसे लेकर सवाल उठाए गए हैं. कैग की रिपोर्ट के अनुसार, राजस्थान के भतरपुर और धौलपुर जिलों में ही प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना में करीब 50 हजार से ज्यादा गैस कनेक्शन अनियमित बांटे गए हैं. ये कनेक्शन उन लोगों को बांट दिए गए जो बीपीएल की श्रेणी में शामिल नहीं थे और जिनके पास पहले से एक या दो गैस कनेक्शन मौजूद थे. जिन कंपनियों की ओर से ये फर्जी कनेक्शन बांटे गए हैं उन्हें वसूली के निर्देश दिए गए हैं. बताया जा रहा है कि इस गड़बड़झाले के मुख्य सूत्रधार गैस डीलर्स हैं.

ऑयल कंपनियों के गैस डीलर्स को परिवार की महिला मुखिया के नाम गैस कनेक्शन जारी करने से पहले पूरे परिवार के वयस्क सदस्यों के आधार कार्ड की केवाइसी करनी थी. इसमें यह पता चलता कि परिवार के किसी अन्य सदस्य के नाम पहले से गैस कनेक्शन तो नहीं है. लेकिन लक्ष्य पूरा करने के लिए कंपनियों से जुड़े डीलर्स ने परिवार में जिस महिला के नाम से कनेक्शन नहीं था, उसी के आधार कार्ड के आधार पर उज्ज्वला योजना का कनेक्शन जारी कर दिया. जब कोरोना लॉकडाउन के दौरान केंद्र सरकार की ओर से उज्ज्वला योजना के तहत चिन्हित परिवारों को तीन सिलिंडर मुफ्त देने की घोषणा की गई तब इसका खुलासा हुआ.

काबिलेगौर है कि 1 मई, 2016 को शुरू हुई प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना में 18 वर्ष से अधिक उम्र की बैंक खाता धारक और बीपीएल कार्डधारी महिलाओं को मुफ्त गैस कनेक्शन प्रदान किया जाता है. पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की ओर से चलाई जा रही इस योजना में बीपीएल परिवारों की महिला को एक एलपीजी कनेक्शन के लिए 1,600 रुपए की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाती है. 1,600 रुपए में सिलिंडर, प्रेशर रेगुलेटर, बुकलेट और सेफ्टी होज उपलब्ध कराए जाते हैं. लाभार्थियों की पहचान जनगणना 2011 के आधार पर की गई है. प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के प्रथम चरण में देशभर में पांच करोड़ गैस कनेक्शन उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया था. यह लक्ष्य निर्धारित समय से पहले ही 2018 में पूरा हो गया. 2020 तक आठ करोड़ गैस कनेक्शन का लक्ष्य निर्धारित किया गया, जिसमें 7.4 करोड़ कनेक्शन जारी किए गए. जनवरी 2022 तक देश में 8,96,36,485 उज्ज्वला कनेक्शन जारी किए जा चुके हैं.

इस योजना को लेकर कैग ने पूर्व में भी सवाल उठाए हैं. कैग की ऑडिट के दौरान यह सामने आया कि उज्ज्वला योजना में जारी किए गए कनेक्शन का इस्तेमाल व्यावसायिक उपयोग के लिए किया जा रहा है. कैग ने माना कि देशभर में 1 करोड़ 98 लाख लाभार्थी साल में औसतन 12 से अधिक सिलिंडरों की खपत कर रहे हैं. इस रिपोर्ट में यह सामने आया कि 3.44 लाख उपभोक्ता तो ऐसे थे जिन्होंने एक दिन में 2 से 20 सिलिंडर रीफिल कराए जबकि योजना के नियमों के तहत कनेक्शन की वैधता सिर्फ एक सिलिंडर तक सीमित है. ऑ

डिट रिपोर्ट में यह सामने आया कि 1.88 लाख कनेक्शन तो ऐसे थे जो महिलाओं के नहीं बल्कि पुरुषों के नाम से जारी कर दिए गए. देशभर में 8.59 लाख कनेक्शन ऐसे थे जो 18 वर्ष से कम उम्र की महिलाओं को जारी कर दिए गए, वहीं 12,465 मामले ऐसे थे जिनमें एक लाभार्थी को दो-दो कनेक्शन जारी कर दिए गए. उत्तर प्रदेश (1,65,72,562), पश्चिम बंगाल (1,08,97,685), बिहार (1,00,92,761) और मध्य प्रदेश (79,29,952) के बाद राजस्थान में प्रधानमंत्री उज्ज्वला गैस कनेक्शन के सर्वाधिक कनेक्शन जारी किए गए हैं. राजस्थान में कुल 1 करोड़ 67 लाख 3 हजार घरेलू गैस उपभोक्ता हैं. 

थम गई रीफिल की रफ्तार

उज्ज्वला योजना शुरू होने से पहले देश में 14.86 करोड़ घरेलू गैस कनेक्शन थे. वर्ष 2016 में उज्ज्वला योजना शुरू होने के बाद कनेक्शन की संख्या 13.25 फीसद बढ़कर 16.63 करोड़ पहुंच गई. 2017 में गैस कनेक्शन की संख्या में 17.95 फीसद का उछाल आया और यह संख्या बढ़कर 19.85 करोड़ हो गई. वर्ष 2018 और 2019 में भी यह बढ़ोतरी क्रमश: 13 और 18 फीसद की रफ्तार से जारी रही. घरेलू गैस सिलिंडर के दाम 800 रुपए के पार पहुंचने के बाद 2020 में गैस कनेक्शन की संख्या में कमी आई. 2020 में उज्ज्वला योजना के कनेक्शन में सिर्फ 4.74 फीसद बढ़ोतरी हुई. इतना ही नहीं, 2021 और 2022 में तो यह बढ़ोतरी महज 4 फीसद ही रही. 

राजस्थान में उज्ज्वला योजना में सिलिंडर रीफिल कराने के मामलों में बहुत बड़ी गिरावट आई है. हालात ये हैं कि राजस्थान के कुल एक करोड़ 67 लाख घरेलू गैस उपभोक्ताओं में से सिर्फ 78 लाख ने ही सिलिंडर फिर से भरवाया है. प्रदेश भर में करीब 90 लाख परिवार ऐसे हैं जो नियमित सिलिंडर रीफिल नहीं करवा पा रहे हैं. राजधानी जयपुर में ढाई लाख घरेलू गैस उपभोक्ताओं में से 1.80 लाख लोगों ने सिलिंडर लेना बंद कर दिया है. जयपुर में अब करीब 70 हजार परिवार ही नियमित सिलिंडर ले रहे हैं.

ये परिवार अब लकड़ी या अन्य किसी ईंधन पर निर्भर हो गए हैं. रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर कॉम्पैशनेट इकोनॉमिक्स (आरआइसीई) के एक अध्ययन के अनुसार, राजस्थान में उज्ज्वला योजना के लाभार्थी कच्चे चूल्हे पर भोजन पका रहे हैं. 85 फीसद बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान में किए गए इस अध्ययन के अनुसार, ये परिवार गैस सिलिंडर की जगह ठोस ईंधन और मिट्टी के चूल्हे का उपयोग कर रहे हैं.

जाहिर है, महंगाई, गरीबी, भ्रष्टचार और व्यावहारिक रवैये की कमी नेक इरादे वाली योजनाओं को भी मजाक बना सकती है.

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