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उत्तर प्रदेशः क्या 'राज' दिला पाएंगे राजभर

अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव से हाथ मिला लिया है. इनका गठबंधन सत्ताधारी भाजपा को कितनी चुनौती दे पाएगा?

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अब साथ-साथ मऊ में 27 अक्तूबर की रैली में ओम प्रकाश राजभर और अखिलेश यादव
अब साथ-साथ मऊ में 27 अक्तूबर की रैली में ओम प्रकाश राजभर और अखिलेश यादव

उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रभारी के रूप में सितंबर के दूसरे हफ्ते में जिम्मेदारी संभालने वाले केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भाजपा के वोट बैंक को बढ़ाने की रणनीति बनाई थी. प्रधान ने कुछ छोटी पार्टियों से गठबंधन की संभावनाएं भी तलाशी, जिनमें ओम प्रकाश राजभर की सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) भी शामिल थी. कभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करीबी नौकरशाह रहे और अब यूपी विधान परिषद में भाजपा के सदस्य अरविंद कुमार शर्मा ने राजभर और प्रधान के बीच लिंक का काम किया. शर्मा के प्रयास से राजभर और प्रधान के बीच 16 अक्तूबर को संभावित गठबंधन को लेकर बातचीत हुई, लेकिन सीटों के बंटवारे पर भाजपा की तरफ राजभर को कोई ठोस आश्वासन नहीं मिल सका. चार दिन बाद इन अटकलों पर अचानक विराम लगा जब राजभर ने 20 अक्तूबर को अपने ट्विटर हैंडल से समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखि‍लेश यादव से मुलाकात करते हुए एक फोटो जारी की जिसके ऊपर 'अबकी बार, भाजपा साफ' नारा लिखा हुआ था.

इसके कुछ देर बाद सपा के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से भी अखिलेश यादव और राजभर की मुलाकात का वीडियो जारी होते ही यह स्पष्ट हो गया कि 2022 के विधानसभा चुनाव की जंग में सपा को सुभासपा का साथ मिल गया है. 27 अक्तूबर को सुभासपा के 19वें स्थापना दिवस के अवसर पर मऊ जिले के हलधरपुर इलाके के ढोलवन मैदान में आयोजित रैली में बतौर मुख्य अतिथि अपनी मौजूदगी दिखाकर अखिलेश यादव ने राजभर की पार्टी से सपा के गठबंधन पर मुहर लगा दी. अखिलेश यादव ने अपने भाषण में कहा, ''सपा की लाल टोपी और सुभासपा की पीली टोपी अब लाल-पीली होकर एक हो गई है. अगर बंगाल के चुनाव में 'खेला' हुआ है तो पूर्वांचल के लोग भी 'खदेड़ा' यानि भाजपा को सत्ता से भगाकर दिखाएंगे.''

यूपी की सत्ता में वापसी की कोशिश कर रहे अखिलेश यादव के लिए पूर्वांचल में सुभासपा का साथ काफी महत्वपूर्ण है. यूपी विधानसभा की 153 सीटों पर राजभर या इनकी समकक्ष जातियों का प्रभाव है. (देखें ग्राफिक्स) इन सीटों पर 20 हजार से लेकर 90 हजार तक इन जातियों के मतदाता हैं. पूर्वांचल और अवध के 24 जिलों में राजभर समाज से जुड़े मतदाताओं की अच्छी तादाद है. सुभासपा ने वर्ष 2017 का विधानसभा चुनाव भाजपा के साथ गठबंधन करके आठ सीटों पर लड़ा था. इनमें चार पर सुभासपा ने जीत हासिल की थी. मार्च, 2017 में यूपी में भाजपा सरकार बनने के बाद ओम प्रकाश राजभर को पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग का मंत्री बनाया गया था. इसके बाद से लगातार वे पिछड़ों की उपेक्षा का आरोप लगाकर योगी आदित्यनाथ सरकार की आलोचना कर रहे थे. वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में राजभर ने भाजपा से गठबंधन तोड़कर 39 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे. अब वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव के लिए सपा और सुभासपा का गठबंधन कई मायनों में महत्वपूर्ण है.

क्यों महत्वपूर्ण हैं राजभर वोट
क्यों महत्वपूर्ण हैं राजभर वोट

बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष और प्रोफेसर शशिकांत पांडे कहते हैं, ''सुभासपा का न केवल राजभर समाज पर प्रभाव है बल्कि बंशी, अर्कवंशी, बिंद, प्रजापति, पाल, विश्वकर्मा जैसी अति पिछड़ी जातियों पर भी उसकी पकड़ है. अगर सपा के मुस्लिम-यादव गठजोड़ को इन जातियों का समर्थन मिलता है तो निश्चित ही सपा-सुभासपा गठबंधन पूर्वांचल में भाजपा के सामने बेहद कठिन चुनौती पेश करेगा.''

रैली से शक्ति प्रदर्शन

वर्ष 2019 का लोकसभा चुनाव सुभासपा ने 39 सीटों पर लड़ा था. इन सभी सीटों पर भले ही सुभासपा उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई हो, पर पूर्वांचल की मछलीशहर, गाजीपुर और बलिया लोकसभा सीट पर सुभासपा के प्रदर्शन ने चौंका दिया था. मछलीशहर लोकसभा सीट पर भाजपा के बी.पी. सरोज ने बसपा के त्रिभुअन राम को बेहद नजदीकी मुकाबले में 181 वोटों से हराया था. इस सीट पर सुभासपा को 11,000 से अधि‍क वोट मिले थे. इसके बाद अक्तूबर 2019 के जलालपुर विधानसभा उपचुनाव में सुभासपा प्रत्याशी को मिले कुल वोट विजयी सपा उम्मीदवार की जीत के अंतर से काफी अधिक थे. शशिकांत पांडे कहते हैं, ''अकेले चुनाव लड़ने पर भले ही सुभासपा को कम वोट मिले हों लेकिन विधानसभा चुनाव में बड़ी पार्टिंयों के बीच नजदीकी मुकाबलों में सुभासपा का वोटबैंक अंतर पैदा कर सकता है.'' 27 अक्तूबर को मऊ में रैली करने के बाद राजभर 14 नवंबर को बस्ती, 17 नवंबर को कुशीनगर और 27 नवंबर को हरदोई में सपा-सुभासपा गठबंधन की बड़ी रैली करने की तैयारी में जुटे हैं.

स्पष्ट हो रही सपा गठबंधन की तस्वीर

सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव लगातार अपने बयानों में बड़ी पार्टियों की बजाय छोटी पार्टियों से गठबंधन करने की बात कह रहे हैं. राजभर की सुभासपा से गठबंधन के बाद सपा की छोटी पार्टियों से सपा के गठबंधन की तस्वीर कुछ साफ हो रही है. गैर-यादव ओबीसी जातियों को सपा की ओर खींचने के लिए अखिलेश यादव ने स्थानीय रूप से जाति‍ विशेष में प्रभाव रखने वाली छोटी पार्टियों से गठबंधन करने की रणनीति बनाई है. सपा ने केशव देव मौर्य की पार्टी महान दल और संजय चौहान की जनवादी पार्टी (सोशलिस्ट) के साथ गठबंधन का ऐलान कर दिया है.

महान दल का यूपी में सियासी आधार बरेली, बदायूं, शाहजहांपुर, पीलीभीत, आगरा, बिजनौर और मुरादाबाद जिले की शाक्य, सैनी, कुशवाहा, मौर्य, कंबोज जैसी अति पिछड़ी जातियों के बीच है. इसी तरह संजय चौहान की जनवादी पार्टी (सोशलिस्ट) का सियासी आधार पूर्वांचल के मऊ, आजमगढ़, गाजीपुर, चंदौली, देवरिया जिलों की नोनिया पिछड़ी जाति में है.

प्रोफेसर शशिकांत पांडे बताते हैं, ''जिस प्रकार सपा ने छोटी पार्टियों के साथ गठबंधन की रणनीति बनाई है उससे वर्ष 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव की लड़ाई भी सपा और भाजपा गठबंधन के बीच सिमटती जा रही है. ऐसा इसलिए भी क्योंकि कांग्रेस और बसपा जैसी पार्टियों के प्रति छोटी स्थानीय पार्टियों का झुकाव नहीं है.''

भाजपा का आक्रामक प्रत्युत्तर

ओम प्रकाश राजभर की भाजपा से नाराजगी मार्च 2018 के राज्य सभा चुनाव के बाद शुरू हो गई थी. पूर्वांचल के राजभर वोटरों को लुभाने के लिए भाजपा ने बलिया के नेता सकलदीप राजभर को राज्यसभा भेजा था. तब से सुभासपा और भाजपा के बीच दूरियां बढ़ने लगी थीं. राजभर समाज बहराइच जिले के पौराणिक राजा सुहेलदेव को अपना आदर्श मानता है. कहा जाता है कि उन्होंने वर्ष 1034 में महमूद गजनवी के सेनापति सैयद सालार मसूद गाजी को युद्ध में हरा कर मार डाला था.

ओम प्रकाश राजभर और भाजपा के बीच विवाद उस वक्त चरम पर पहुंच गया जब 28 दिसंबर, 2019 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गाजीपुर में रैली करके सुहेलदेव पर डाक टिकट जारी किया था. सुहेलदेव के जरिए राजभर वोटरों के बीच पैठ बनाने की भाजपा की कोशि‍श ओम प्रकाश राजभर को पसंद नहीं आ रही थी, इसलिए वह गाजीपुर में मोदी की रैली में शामिल नहीं हुए थे. इसी वर्ष मोदी ने 16 फरवरी को बहराइच में सुहेलदेव के स्मारक का वर्चुअल शिलान्यास किया था. लोकसभा चुनाव के बाद 21 अगस्त को हुए योगी सरकार के पहले मंत्रिमंडल विस्तार में वाराणसी की शिवपुर विधानसभा सीट से भाजपा विधायक अनिल राजभर को राज्यमंत्री पद से प्रमोशन देकर कैबिनेट मंत्री बना दिया गया था.

दो महीने बाद 22 अक्तूबर को अनिल राजभर को योगी सरकार के प्रवक्ता की जिम्मेदारी भी देकर पूर्वांचल में राजभर वोटरों को सकारात्मक संदेश देने की कोशि‍श की गई थी. इसके बाद से अनिल राजभर लगातार पूर्वांचल के राजभर बाहुल्य क्षेत्रों में बैठक कर रहे हैं. सपा और सुभासपा के बीच गठबंधन होने के बाद अनिल राजभर मऊ में 'पर्दाफाश रैली' के आयोजन की तैयारियों में जुटे हैं. अनिल राजभर ओम प्रकाश राजभर पर बांदा जेल मंआ बंद माफिया और मऊ सदर से विधायक मुख्तार अंसारी से मिलीभगत का आरोप लगा रहे हैं. अनिल राजभर कहते हैं, ''पर्दाफाश रैली के जरिए ओम प्रकाश राजभर की असलियत राजभर समाज को बताई जाएगी कि किस तरह मुख्तार अंसारी के सहयोग से इनकी विधानसभा क्षेत्र में आने वाले मऊ जिले के हरधरपुर इलाके में 27 अक्तूबर को रैली हुई थी. 'पर्दाफाश रैली' में आने वाली भीड़ यह स्पष्ट कर देगी कि पूर्वांचल के राजभर मतदाता किसके साथ हैं.'' इस तरह राजभर मतदाताओं को रिझाने की होड़ शुरू हो चुकी है.

बातचीत / ओम प्रकाश राजभर

''योगी सरकार में मैं अपने समधी का तबादला तक न करवा पाया था.''

सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने सपा से गठबंधन के बाद इंडिया टुडे के एसोसिएट एडिटर आशीष मिश्र से अपनी राय साझा की. प्रमुख अंश:

गठबंधन के लिए आपकी पहली प्राथमिकता भाजपा थी, इसीलिए आप भाजपा के वरिष्ठ नेताओं से मिले थे?

2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने मुझे 22 सीटें देने का वादा किया था, पर केवल आठ ही सीटें दी थीं. इसको मैंने स्वीकार कर लिया था. वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में मैं भाजपा से केवल एक ही सीट मांग रहा था. उन्होंने नहीं दी तो मैंने राजभर समाज के स्वाभिमान को ध्यान में रखकर गठबंधन छोड़ दिया. भाजपा के कई नेताओं से मेरे व्यक्तित संबंध हैं तो मैं उनसे मिलता रहता हूं.

भाजपा सरकार से आपकी नाराजगी क्या है? आप यह भी कह चुके हैं कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के रहते मैं भाजपा से गठबंधन नहीं करूंगा?

मुख्यमंत्री योगी ने विधानसभा सत्र के दौरान यह घोषणा की थी उनकी सरकार पिछड़ी जाति के आरक्षण से जुड़ी 'सामाजिक न्याय समिति-2001' की रिपोर्ट लागू करेगी. इससे पहले भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह भी यही घोषणा कर चुके थे. योगी सरकार रिपोर्ट लागू करने की मेरी मांग से दूर भागने लगी. इतना ही नहीं कैबिनेट मंत्री के तौर पर मैं 200 मीटर सड़क तक नहीं बनवा पाया. मेरे समधी जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआइओएस) थे मैं उनका तबादला तक नहीं करवा पाया था. मेरी यही हैसियत रह गई थी.

आपके पास सपा के पास जाने के अलावा कोई चारा नहीं रह गया था?

उत्त प्रदेश में भाजपा 14 साल का वनवास काट रही थी, उन्हें जब कोई साथी नहीं मिला था तभी वह मेरे पास आए थे. भाजपा ने मेरा समर्थन लेकर राजभर समाज की पीठ में छुरा भोंकने का काम किया. वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को सबक सिखाने के लिए सुभासपा ने सपा से गठबंधन किया है.

एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें आप सपा को वोट न देने की अपील कर रहे?

मेरे पुराने वीडियो जारी किए जा रहे हैं. जब मैं भाजपा के साथ था तब सपा को वोट देने से मना कर रहा था.

भाजपा सुहेलदेव के जरिए राजभर वोटरों को लुभाने की कोशिश कर रही है?

आज से 19 साल पहले कोई सुहेलदेव को नहीं जानता था. भाजपा ने सुहेलदेव को तब जाना जब वे ओम प्रकाश राजभर के संपर्क में आए. अब राजभर समाज को लुभाने के लिए भाजपा सरकार जो भी काम कर रही है वह सब मेरी ही देन है. सारे महापुरुषों के डाकटिकट दिल्ली से जारी होते हैं पर सुहेलदेव पर डाकटिकट प्रधानमंत्री मोदी ने ओम प्रकाश राजभर के विधानसभा क्षेत्र जहूराबाद से जारी किया था.

सपा से गठबंधन के बाद आपके नेतृत्व में बना भागीदारी संकल्प मोर्चा बिखरता हुआ दिखाई दे रहा है?

भागीदारी संकल्प मोर्चा में केवल सात दल ही शामिल थे. कोई ऐसी प्रेस वार्ता बताइए जिसमें मोर्चा के सदस्य और एआइएमआइएम के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी, आज समाज पार्टी के चंद्रशेखर आजाद या प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) के अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव भी शामिल रहे हों. भागीदारी मोर्चा पूरी तरह एकजुट है. केवल जन अधिकार पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बाबू सिंह कुशवाहा को शामिल करना बाकी रह गया है. मेरा प्रयास है कि जो भी दल भाजपा को हराना चाहते हैं वह भागीदारी संकल्प मोर्चा के साथ आएं.

अखिलेश यादव ने अपने चाचा शिवपाल यादव को साथ लेने पर बहुत सकारात्मक रवैया नहीं दिखाया है?

ये अखिलेश यादव के परिवार का मामला है. मेरा मानना है कि परिवार को एक साथ रहना चाहिए. मैं अपनी तरफ से अखिलेश और शिवपाल में एका कराने का प्रयास करूंगा.

सपा से सीटों के तालमेल पर क्या बातचीत हुई है?

हम एक सीट पर लड़ें या 10 पर, हमें तो मंत्री बनकर रह जाना है. सीएम तो बन नहीं सकता. गठबंधन में जितनी भी सीटें मिलेंगी उनमें ज्यादा जीतने का प्रयास होगा. सरकार बनने पर मंत्री बनकर अपनी पार्टी का प्रसार करूंगा.

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