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समाजवादी पार्टीः चेहरा बदलने की सधी चाल

प्रदेश में आसन्न विधानसभा चुनाव के मद्देनजर पार्टी की छवि को पूरी तरह से बदलने के लिए समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने कसी कमर. नए आकर्षक नारे, युवाओं को खास प्रोत्साहन और जातिगत समीकरण साधने को निर्णायक गठजोड़.

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तगड़ी तैयारी लखनऊ में समाजवादी पार्टी के प्रदेश मुख्यालय में कार्यकर्ताओं के साथ बैठक करते अखिलेश यादव तगड़ी तैयारी लखनऊ में समाजवादी पार्टी के प्रदेश मुख्यालय में कार्यकर्ताओं के साथ बैठक करते अखिलेश यादव

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पहली बार देश और प्रदेश के लोगों को संबोधित दो पेज का पत्र जारी किया. इसमें उन्होंने जनता से नया संकल्प लेकर नया कल बनाने की अपील की. पत्र में अखिलेश ने ''अनुशासन से शासन’’ (सरकार के संचालन में अनुशासन का पालन) का वचन भी दिया.

कोरोना काल में पीड़ित लोगों की मदद के लिए अखिलेश ने ‘‘संपर्क, संवाद, सहयोग, सहायता’’ का जनसेवा-सूत्र भी सपा के कार्यकर्ताओं को दिया. उन्होंने पत्र में ''पहुंचे हर घर-द्वार, सपा के मददगार’’ शीर्षक से पिछली समाजवादी पार्टी की सरकार के दौरान प्रदेश में शुरू की गई विकास योजनाओं का जिक्र किया है.

''नव यूपी’’ के निर्माण के लिए पत्र में ''बाइस में बाइसिकिल’’ के संकल्प के साथ सपा की सरकार बनाने की अपील की गई है. अखिलेश ने पत्र का अंत पार्टी के नए नारे ''नयी हवा है-नयी सपा है, बड़ों का हाथ-युवा का साथ’’ के साथ किया है.

वोटों का गुणा-गणित
वोटों का गुणा-गणित

पंद्रह अगस्त को जब देश आजादी के 75वें वर्ष में प्रवेश कर रहा था उस वक्त अखिलेश यादव के इस पत्र ने सपा की नीतियों में कई तरह के बदलाव की ओर इशारा किया. लखनऊ के जय नारायण डिग्री कालेज में राजनीति शास्त्र विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर ब्रजेश मिश्र बताते हैं, ''अनुशासन से शासन की बात कहकर अखिलेश यादव ने सपा की उस छवि को बदलने की कोशिश की है जिसमें विरोधी दल सपा की सरकार बनने पर प्रदेश में अराजकता फैलने की बात कह रहे हैं.

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की जमीनी रणनीति से निबटने के लिए अखिलेश ने सपा कार्यकर्ताओं को भी घर-घर जाकर लोगों की मदद करने की अपील की है. इस तरह अखिलेश ने अपने पत्र के जरिए यह बताने की कोशिश की है कि सपा अब एक नया रूप अक्चितयार कर चुकी है.’’ हालांकि सपा के मुख्य प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी अखिलेश के पत्र में कुछ नया न होने की बात कहते हैं.

उनके अनुसार, ''सरकार चलाने में अनुशासन का पालन करना समाजवाद का ध्येय वाक्य है. सपा पहले भी इसका पालन करती आई है और भविष्य में भी करेगी.’’ 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस से गठबंधन करने के बावजूद सपा महज 47 सीटें ही जीत सकी थीं. यह 1992 में सपा के गठन के बाद पार्टी का सबसे खराब प्रदर्शन था. अखिलेश यादव अब 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा को भारी जीत दिलाकर खराब प्रदर्शन की यादें मिटाना चाहते हैं. सपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने जनाधार को बढ़ाने की है.

गैर यादव ओबीसी जातियों को सपा की ओर खींचने के लिए अखिलेश ने स्थानीय रूप से जाति विशेष में प्रभाव रखने वाली छोटी पार्टियों से गठबंधन करने की रणनीति बनाई है. सपा ने केशव देव मौर्य की पार्टी महान दल और संजय चौहान की जनवादी पार्टी (सोशलिस्ट) के साथ गठबंधन का ऐलान कर दिया है.

 

महान दल का यूपी में सियासी आधार बरेली, बदायूं, शाहजहांपुर, पीलीभीत, आगरा, बिजनौर और मुरादाबाद जिले की शाक्य, सैनी, कुशवाहा, मौर्य, कांबोज जैसी अति पिछड़ी जातियों के बीच है. 2017 के विधानसभा चुनाव में महान दल ने 14 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ा था. हालांकि वह कोई सीट जीतने में कामयाब तो न हो सका लेकिन पार्टी ने कुल मिलाकर 97,087 वोट हासिल किए थे.

इसी तरह संजय चौहान की जनवादी पार्टी (सोशलिस्ट) का सियासी आधार पूर्वांचल के मऊ, आजमगढ़, गाजीपुर, चंदौली, देवरिया आदि जिलों की नोनिया पिछड़ी जाति में है. 2019 के लोकसभा चुनाव में अखिलेश ने चौहान को चंदौली जिले से सपा के टिकट पर उम्मीदवार बनाया था. इस चुनाव में वे एक नजदीकी मुकाबले में भाजपा के महेंद्र नाथ पांडेय से 14,000 मतों से हार गए थे.

खास बात यह थी कि 2019 के लोकसभा चुनाव में चंदौली सीट पर 2014 के मुकाबले भाजपा के मत प्रतिशत में 4.84 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई थी जबकि सपा का मत प्रतिशत 24.97 प्रतिशत बढ़ा था. ब्रजेश मिश्र बताते हैं '' 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले जिस तरह भाजपा ने कम जनसंक्चया वाली पिछड़ी जातियों का समर्थन जुटाकर एक बड़ी राजनीतिक ताकत को जन्म दिया था, उसी तर्ज पर अखिलेश भी सपा के लिए छोटी-छोटी पिछड़ी जातियों का समर्थन जुटा रहे हैं.’’

सपा के गठबंधन दलों ने यात्राओं के जरिए भाजपा सरकार के खिलाफ माहौल बनाने की रणनीति बनाई है. 16 अगस्त को एक तरफ महान दल के अध्यक्ष केशव देव मौर्य ने पीलीभीत से जनाक्रोश यात्रा की शुरुआत की, जिसे सपा के प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम ने झंडी दिखाकर रवाना किया, वहीं दूसरी ओर जनवादी पार्टी (सोशलिस्ट) ने बलिया जिले से जनक्रांति यात्रा की शुरुआत की जिसे सपा विधानमंडल दल के नेता और विधानसभा में नेता विरोधी दल रामगोविंद चौधरी ने झंडी दिखाकर रवाना किया.

मौर्य बताते हैं ''भाजपा सरकार की नीतियों से प्रदेश की पिछड़ी जातियों में नाराजगी है. सपा सरकार में हुए विकासकार्यों को अब ये जातियां याद कर रही हैं. '' पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 12 जिलों से गुजर कर महान दल की जनाक्रोश यात्रा का समापन 27 अगस्त को इटावा में हुआ. 15 जिलों से गुजरती हुई जनवादी पार्टी (सोशलिस्ट) की जनक्रांति यात्रा 31 अगस्त को अयोध्या में समाप्त होगी.

अखिलेश के निर्देश पर सपा के पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष राजपाल कश्यप ने 9 अगस्त से अगस्त क्रांति दिवस के अवसर पर कानपुर से ओबीसी सम्मेलन की शुरुआत की थी. झांसी, महोबा, हमीरपुर जिलों के बाद 15 अगस्त को फतेहपुर के जहानाबाद विधानसभा क्षेत्र में पिछड़ा वर्ग सम्मेलन का समापन हुआ. इस सम्मेलन में पिछड़ी जाति के लोगों को सपा की पूर्ववर्ती सरकार की उपलब्धियों के साथ योगी और मोदी सरकार की जनता विरोधी नीतियों की जानकारी दी गई.

कश्यप इस संदर्भ में अपनी बात कुछ यूं रखते हैं, ''कोरोना की दूसरी लहर के दौरान गांव काफी प्रभावित हुए थे. इनमें रहने वाली पिछड़ी जातियों की बड़ी संक्चया प्रदेश सरकार के कुप्रबंध का शिकार हुई है. इससे पिछड़ी जातियों में भाजपा सरकार के खिलाफ गुस्सा है. इसीलिए सपा के ओबीसी सम्मेलन को भारी समर्थन मिला है.’’ ओबीसी सम्मेलन से पहले सपा के पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ ने 23 जुलाई से एक अगस्त तक यूपी के 20,000 गांवों में चौपाल का आयोजन किया.

वर्ष 2017 के विधानासभा चुनाव से पहले जिस तरह भाजपा ने बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करके अभूतपूर्व जीत हासिल की थी उसी तर्ज पर समाजवादी पार्टी ने भी अपनी सक्रियता बढ़ा दी है. बूथ प्रबंधन के लिए सपा ने 'हर बूथ पर यूथ’ अभियान शुरू किया है. राजेंद्र चौधरी कहते हैं, ''पंचायत चुनाव में जिस तरह से भाजपा ने लोकतंत्र की हत्या कर लोकतंत्र का मजाक उड़ाया उससे जनता के बीच बेहद नाराजगी है.

इससे सतर्क होकर सपा प्रत्येक बूथ पर नौजवानों की मजबूत टीम बना रही है ताकि विपक्षी दल कोई गड़बड़ी न कर सकें.’’ अब सपा हर बूथ पर 20 युवाओं की एक टीम गठित कर रही है जो न केवल नए मतदाताओं को पार्टी से जोड़ने का काम करेगी बल्कि विपक्षी पार्टियों की गतिविधियों पर भी नजर रखेगी. यानी 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले सपा बूथ स्तर पर पार्टी संगठन को बेहद मजबूत करने में जुट गई है.

सपा ने सभी जिला अध्यक्षों से विधानसभावार बूथ कमेटियों की रिपोर्ट मंगवाई है. इस रिपोर्ट को फ्रंटल संगठनों के प्रभारियों को सौंपा गया है. ये पदाधिकारी 'हर बूथ पर यूथ’ अभियान के तहत अपने प्रभार वाले विधानसभा क्षेत्रों मे बूथ कमेटियों का सत्यापन कर रहे हैं और साथ ही किसी प्रकार की गड़बड़ी मिलने पर उसे दुरुस्त भी कर रहे हैं.

बूथ कमेटियों के गठन में जिस विधानसभा क्षेत्र में ज्यादा गड़बड़ी पायी जाएगी उसके लिए उस क्षेत्र के अध्यक्ष को जिक्वमेदार माना जाएगा. इस पदाधिकारी को न केवल पद से हटा दिया जाएगा बल्कि उसे भविष्य में कोई जिम्मेदारी देने के लिए भी ब्लैकलिस्ट कर दिया जाएगा.

जनाधार बढ़ाने की कोशिशों में लगी सपा की निगाह दलित वोटबैंक पर भी है. दलितों को लुभाने के लिए सपा ने 14 अप्रैल को डॉ. भीमराव आंबेडकर जयंती धूमधाम से मनाई थी. सपा के लखनऊ स्थित प्रदेश कार्यालय से लेकर सभी जिला कार्यालयों में दीपोत्सव का आयोजन किया गया था. इस अवसर पर अखिलेश ने सपा के एक अग्रिम पंक्ति के संगठन लोहिया वाहिनी की तर्ज पर बाबा साहेब वाहिनी के गठन की घोषणा की थी.

कोरोना की दूसरी लहर बीतने के बाद अब सपा बाबा साहेब वाहिनी की कमान दलित युवाओं को देने की तैयारी में जुट गई है. सपा का राष्ट्रीय नेतृत्व इस वाहिनी की कमान ऐसे युवा दलित नेता को सौंपना चाहता है जो सर्वमान्य होने के साथ उच्च शैक्षणिक योग्यता भी रखता हो.

अलग-अलग वर्गों को लुभाने में जुटी सपा आदिवासी समाज की लंबे समय से चली आ रही जल, जंगल, जमीन पर अधिकार की मांग को मुद्दा बनाकर संघर्ष करने की रणनीति बना रही है. नौ अगस्त को राष्ट्रीय आदिवासी दिवस पर सपा ने सोनभद्र में पटवध स्थित राजा बलदेव दास बिड़ला इंटरमीडियट कालेज में आदिवासी सम्मेलन का आयोजन किया.

समाजवादी अनुसूचित जनजाति प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष व्यासजी गोंड की अध्यक्षता में आयोजित इस सम्मेलन में सपा के प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद थे. सोनभद्र का उम्भा गांव 17 जुलाई 2019 को उस वक्त चर्चा में आया था जब यहां एक सोसाइटी की जमीन पर कब्जे को लेकर हुए विवाद में दबंगों ने 11 आदिवासियों की गोली मार कर हत्या कर दी थी.

उस वक्त भी सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उम्भा कांड के पीड़ितों को आर्थिक मदद की थी. सोनभद्र में आदिवासियों की संख्या सबसे ज्यादा है. साथ ही पड़ोस के चंदौली, मिर्जापुर में भी आदिवासी मतदाता काफी संख्या में हैं. 

वर्ष 2022 के विधानासभा चुनाव में सपा की सरकार बनाने की कोशिशों में जुटे अखिलेश ने सपा का थीम सांग जारी किया है. इसके बोल हैं ''भाजपा ने महंगाई का दे दिया ऐसा घाव है, पेट्रोल का नया भाव 25 रुपया पाव है.’’ जाहिर है जाति समीकरण साधने के साथ सपा भाजपा सरकार के दौरान बढ़ी महंगाई को भी मुद्दा बना रही है. ठ्ठ

...और सपा के सामने जो चुनौतियां हैं

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