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काले सोने की काली हकीकत

लॉकडाउन के दौरान लचर निगरानी और आर्थिक तंगहाली की वजह से राज्य के विभिन्न जिलों में अफीम की अवैध खेती के मामलों में अचानक इजाफा. मारवाड़ बना गढ़

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नशे की खेती : चित्तौडगढ़ बड़ी सादड़ी गांव अफीम की फसल नशे की खेती : चित्तौडगढ़ बड़ी सादड़ी गांव अफीम की फसल

आनंद चौधरी

ब्रिटिश राज में चाहे किसान काला सोना यानी, अफीम की खेती करने से डरते और कतराते रहे हों लेकिन आज राजस्थान के किसान अफीम की खेती करने के लिए जेल जाने से भी नहीं डर रहे. नियम-कायदों को ताक पर रखकर राजस्थान के ये किसान चोरी छिपे अफीम की खेती करने से बाज नहीं आ रहे. राजस्थान में काले सोने की अवैध खेती इस साल 240 किसानों को जेल पहुंचा चुकी है. ये तो वही मामले हैं जो पुलिस और नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की पकड़ में आ गए. इसके अलावा सैकड़ों की तादाद में ऐसे मामले भी हैं जो पुलिस और नार्कोटिक्स ब्यूरो की पकड़ से दूर हैं. पिछले साल भी अवैध रूप से अफीम की खेती किए जाने के 200 से ज्यादा मामले सामने आए थे. राजस्थान पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में एनडीपीएस ऐक्ट से जुड़े अपराधों के मामलों में पिछले पांच साल (2017-22 तक) में 87 फीसद बढ़ोतरी हुई है.

किसान किस तरह चोरी-छिपे अफीम की खेती कर रहे हैं, उसका कुछ अंदाजा हाल में उजागर हुए इन मामलों से लगता है:

नागौर जिले के मौलासर थाने इलाके के केरपुरा गांव में पिछले माह एक किसान राजूराम के खेत से पुलिस ने 31 किलो 400 ग्राम अफीम का डोडा बरामद किया. पुलिस टीम को देखते ही राजूराम खेत में प्याज के बीच खड़े अफीम के पौधे नष्ट कर उन्हें जमीन में दबाने लगा.

पाली जिले की जैतारण तहसील के रामपुरा कला गांव में किसान चिमन सिंह ने जीरे की फसल के बीच अफीम की खेती उगा दी. अफीम के डोडे भी निकल आए लेकिन तभी किसी ने पुलिस को सूचित कर दिया. पुलिस ने मौके पर पहुंचकर अफीम के करीब 3,000 हजार पौधे नष्ट करवा दिए.

बूंदी जिले की हिंडौली तहसील के लुहारिया गांव में एक किसान ने सरकारी जमीन पर 700 वर्ग मीटर क्षेत्र में अफीम की फसल बो दी.

जोधपुर जिले के हीरादेसर गांव में एक किसान ने खेत में अफीम बोकर चारों तरफ तारों में करंट छोड़ रखा था. करंट के डर से कोई खेत के आस-पास नहीं जाता था. 21 फरवरी को नार्कोटिक्स ब्यूरो और पुलिस की टीम ने छापा मारकर किसान के खेत से अफीम के 4,000 पौधे बरामद किए. ग्रामीणों ने पुलिस को बताया कि किसान उमाराम के चार बेटे कई साल से अफीम की खेती कर रहे हैं.

जोधपुर के लूणी इलाके के शिकारपुरा गांव में 20 मार्च को पुलिस टीम ने आरोपी डूंगरराम पटेल के ठिकाने पर छापा मारकर 77 पौधे अफीम, 99 पौधे गांजा, गांजे के 400 सूखे पत्ते और 380 ग्राम अफीम जब्त की.

जोधपुर, नागौर, पाली जिलों के ये चार उदाहरण तो बानगी हैं. राजस्थान में इस बार अफीम की अवैध खेती के 200 से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं. दो साल के कोरोना लॉकडाउन के दौरान सख्ती नहीं हुई तो राजस्थान में बड़े पैमाने पर किसानों ने चोरी-छिपे अफीम की खेती करना शुरू कर दिया.

राजस्थान अफीम किसान विकास समिति के अध्यक्ष रामनारायण जाट का कहना है कि सरकार लाइसेंस की संख्या बढ़ाएगी तभी अफीम की अवैध खेती और तस्करी के मामलों पर लगाम लग सकती है. रामनारायण पिछले कई साल से राजस्थान में अफीम की खेती के लिए चार लाख किसानों को लाइसेंस दिए जाने की मांग कर रहे हैं. रामनारायण का कहना है कि राजस्थान में अफीम खेती के लाइसेंस बढ़ाए जाते हैं तो सरकार को विदेशों से अफीम, कोडीन और मॉर्फीन नहीं मंगवानी पड़ेगी और हमारे किसानों की आमदनी भी बढ़ेगी. रामनारायण के मुताबिक, राजस्थान में अफीम की खेती के नए लाइसेंस देने की जगह पिछले कुछ साल में सरकार ने करीब 15 हजार से ज्यादा लाइसेंस कैंसिल कर दिए हैं.

गौरतलब है कि राजस्थान के पांच जिलों में अफीम की खेती के लिए लाइसेंस जारी किए जाते हैं. इस बार चित्तौडगढ़, प्रतापगढ़, भीलवाड़ा, झालावाड़ और कोटा जिलों के 34,402 किसानों को अफीम की खेती के लिए लाइसेंस जारी किए गए हैं. पूरे प्रदेश में 3,142 हेक्टेयर क्षेत्र में अफीम की वैध खेती हुई है. राजस्थान में हर साल करीब 150 टन अफीम का उत्पादन होता है.

इस बार सरकार ने पहली बार 12 हजार किसानों को विदेशों की तर्ज पर कॉन्सेंट्रेट ऑफ पॉपी स्ट्रॉ (सीपीएस) पद्धति से अफीम की खेती के लिए अलग से लाइसेंस जारी किए हैं. इस पद्धति में डोडे में चीरा लगाकर नहीं बल्कि मशीन से अफीम निकाली जाती है. किसान को आठ इंच के तने के साथ बिना चीरा लगाए हुए डोडा नार्कोटिक्स ब्यूरो को सौंपना होता है. 3.7 से 4.2 किलो मॉर्फीन प्रति हेक्टेयर की उपज देने वाले किसानों को सीपीएस पद्धति से अफीम की खेती करने के लिए छह आरी के लाइसेंस जारी किए गए हैं. राजस्थान के चित्तौडगढ़, प्रतापगढ़ और भीलवाड़ा जिलों के 1,433 किसानों को सीपीएस पद्धति से खेती करने के लिए लाइसेंस जारी किए गए हैं. यह पद्धति सफल रही तो अगले वर्ष इस तरह से खेती के पट्टो की संख्या में बढ़ोतरी होगी. इससे अफीम व डोडा चूरा की तस्करी पर भी रोक लगने की संभावना है. 

राजस्थान में अफीम की लाइसेंसशुदा खेती तो हाड़ौती और मेवाड़ में होती है लेकिन पिछले कुछ वर्षों में मारवाड़ अफीम की अवैध खेती का गढ़ बन गया है. इस तरह के बढ़ते मामलों ने नार्कोटिक्स ब्यूरो और पुलिस को पसोपेश में डाल दिया है. बताया जा रहा है कि अफीम की अवैध खेती के नियमों में स्पष्टता नहीं होने के कारण भी इसका प्रचलन बढ़ा है. अफीम की तस्करी करते हुए पकड़े जाने पर गैर जमानती और कड़ी सजा का प्रावधान है जबकि खेती करते हुए पकड़े जाने पर आसानी से जमानत मिल जाती है. अफीम की खेती पर सजा का प्रावधान भी कम है जिसके कारण लोग अपने खेतों में चोरी-छिपे अफीम उगा लेते हैं और गिरफ्तार किए जाने के बाद जल्दी ही जमानत पर रिहा भी हो जाते हैं. 

मिसाल के तौर पर नार्कोटिक्स ब्यूरो और पुलिस ने राजसमंद जिले के चारभुजा थाना क्षेत्र के किसान हमीर सिंह को खुद के खेत में 1,175 अफीम के पौधे उगाने पर गिरफ्तार किया था. हमीर सिंह कुछ अरसे बाद ही हाइकोर्ट से जमानत लेकर बाहर आ गया. इसी तरह बांसवाड़ा जिले के कुशलगढ़ थाना क्षेत्र के किसान रणजी को 632 अफीम के पौधों की अवैध खेती के आरोप में गिरफ्तार किया था. इसका वजन 59.62 किलो था. उसे भी 18 मई, 2021 को जमानत मिल गई. जोधपुर जिले के देचू के भागीरथ राम पर 386 अफीम के पौधों की खेती का आरोप है. उसे भी 1 अप्रैल को जमानत मिल गई. वहीं चांपासर गांव में केसुराम जाट से अफीम के 500 पौधे बरामद हुए और वह भी जमानत पर छूटकर बाहर आ गया. 

हालांकि, राजस्थान हाइकोर्ट ने केंद्र सरकार के 19 अक्तूबर, 2001 को जारी किए गए नोटिफिकेशन को कानून के विपरीत बताया है. हाइकोर्ट ने अवैध खेती के मामलों पर संज्ञान लेते हुए कहा कि नोटिफिकेशन के बिंदु संख्या 3 में अफीम की खेती से जुड़ी कम मात्रा व वाणिज्यिक मात्रा को अलग से निर्धारित नहीं किया गया है. ऐसे मामले एनडीपीएस (नार्कोटिक्स ड्रग्स ऐंड साइकोट्रॉपिक सब्सटांसेज) ऐक्ट की धारा 18सी के तहत आते हैं. अदालत का कहना है कि कानून की धारा 18 में बिना लाइसेंस अफीम की खेती प्रतिबंधित है तो नोटिफिकेशन पूरी तरह से कानून के विपरीत है.

गौर तलब है कि केंद्र सरकार ने अपने नोटिफिकेशन में यह स्पष्ट नहीं किया कि कितने पौधे तक अफीम की खेती कम मात्रा में और कितने तक वाणिज्यिक मात्रा में मानी जाएगी. ऐसे में 500 से ज्यादा पौधे उगाकर अवैध खेती करने वाले लोग पकड़े जाने पर नोटिफिकेशन का हवाला देकर चंद दिनों में ही जमानत पर छूट रहे हैं. इसमें ए, बी व सी उप धारा बनाई गई. उप धारा ए प्रतिबंधित चीज की स्मॉल कैटेगरी मानी गई है जिसमें एक साल की सजा और 10 हजार रुपए जुर्माने का प्रावधान है. वहीं बी में प्रतिबंधित चीज कॉमर्शियल कैटेगरी में मानी जाती है जिसमें 10 साल की सजा और 1 लाख रुपए का जुर्माने का प्रावधान है. इसमें सजा को 20 साल तक बढ़ाया जा सकता है. 

अफीम की अवैध खेती की तरफ लोगों का रुझान इसलिए भी बढ़ रहा है क्योंकि अन्य फसलों को तैयार होने में जहां 200-250 दिन लगते हैं वहीं अफीम 120 दिन में पककर तैयार हो जाती है. अफीम के बीज की बुआई सर्दी में नवंबर और दिसंबर माह में की जाती है. 70 से 80 दिन में इस पर फूल आना शुरू हो जाते हैं. फूल झड़ने के 15 से 20 दिन बाद डोडे निकलना शुरू हो जाते हैं. तेज धूप के कारण डोडे जल्द पकना शुरू हो जाते हैं. इन डोडों पर दोपहर से शाम तक के बीच में चीरा लगाया जाता है. चीरा लगते ही डोडे से दूधिया रस निकलने लगता है जो सूखने पर काला हो जाता है और इसे अफीम या दूध भी कहा जाता है. अगले दिन धूप निकलने से पहले इसे इकट्ठा कर लिया जाता है.

डोडे से यह दूध तब तक इकट्ठा किया जाता है जब तक वह सूख नहीं जाता अथवा दूध निकलना बंद नहीं हो जाता. डोडे को तोड़कर उससे बीज निकाल लिए जाते हैं जिसे पोस्तदाना या खसखस भी कहते हैं. डोडे का चूरा बनाकर लोग इसका नशा भी करते हैं. पिछले कुछ वर्षों से राजस्थान में डोडा पोस्त पर रोक लगी हुई है. मरवाड़ संभाग में लोग सबसे ज्यादा डोडा-पोस्त का नशा करते हैं, इस कारण भी इस इलाके में अफीम की अवैध खेती बढ़ रही है. मारवाड़ के ग्रामीण क्षेत्र में सदियों से अफीम की मनुहार का प्रचलन रहा है. राजस्थान के एडीजी क्राइम रवि प्रकाश मेहरड़ा का मानना है कि अफीम की अवैध खेती के पीछे ''नशे की प्रवृत्ति बढ़ना इसका मुख्य कारण है.'' राज्य के ग्रामीण क्षेत्र में बड़ी संख्या में लोग अफीम के नशे की गिरफ्त में हैं. 

अफीम की अवैध खेती लॉकडाउन के दौरान लचर निगरानी की वजह से भी बढ़ी है. लेकिन यह बड़े पैमाने पर बेरोजगारी और तंगहाली की ओर भी इशारा करती है. इसके लिए सरकार को सख्ती के साथ ही किसानों के लिए दूसरी लाभदायक फसलों को बढ़ावा देने पर विचार करना होगा.

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