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हिंदू अचेतन की पूजा नहीं करते: स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती

द्वारका-शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद कहते हैं कि साईं असत्य हैं क्योंकि उनकी मौत हो चुकी है. हिंदू मरने वाले किसी अचेतन की पूजा नहीं करते.

द्वारका-शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद ने साईं बाबा की पूजा न करने की बात कह कर विवाद को जन्म दे दिया. इस मुद्दे पर आजतक की अंजना ओम कश्यप ने उनसे बातचीत की. पेश हैं प्रमुख अंशः
 
साईं पूजा पर शंकराचार्य को क्या आपत्ति है?
सनातन धर्म में अयोग्य की उपासना नहीं होती. अयोग्य की उपासना का फल उलटा होता है. साईं असत्य हैं क्योंकि उनकी मौत हो चुकी है. हिंदू मरने वाले किसी अचेतन की पूजा नहीं करते. हम मूर्ति पूजा करते भी हैं तो मूर्ति में प्राण प्रतिष्ठा करने के बाद. साईं में ऐसी कोई योग्यता नहीं कि उनकी पूजा हो. साईं चिलम पीते थे और मांसाहार करते थे. वे एकादशी पर ब्राह्मणों को जबरन मांस खिलाते थे.

साईं कहते थे सबका मालिक एक है. वे खुद को भगवान नहीं कहते थे.
साईं कहते थे कि सबका अल्लाह एक है. जिसका मालिक कोई दूसरा हो, उसकी पूजा कैसे हो सकती है?

आपत्ति साईं की शख्सियत से है या उनके इर्द गिर्द रचे जा रहे आडंबर से?
हमारी आपत्ति साईं से नहीं, उनके भक्तों की पूजा से है. उनके भक्त उनके ही सिद्धांतों का पालन नहीं करते. साईं के नाम पर लोगों को भ्रमित किया जा रहा है.

आपके विरोध के पीछे धर्म का अर्थशास्त्र तो नहीं? क्योंकि ज्यादा चढ़ावा अब साईं मंदिरों में जाता है.
साईं को चढऩे वाले चढ़ावों से हमें कोई आपत्ति नहीं. धन से कोई बड़ा नहीं होता, भगवान नहीं बनता, नहीं तो अंबानी देश में सबसे अमीर हैं, वह भगवान बन जाते. साईं दर्शन से मनोकामना पूरी होने का भ्रम फैलाया जाता है, पहले साईं को इतना चढ़ावा क्यों नहीं मिलता था?

आपको कांग्रेसाचार्य भी कहा जाता है.
मैंने ‘अंग्रेजो भारत छोड़ो’ आंदोलन में हिस्सा लिया था. मैं एकमात्र ऐसा शंकराचार्य हूं जिसने आजादी की लड़ाई में हिस्सा लिया. मुझे कांग्रेस का करीबी बताना सिर्फ साजिश है. छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह मेरे चेले हैं. मैं उनके घर रुकता हूं. दिग्विजय सिंह मेरे चेले हैं, मैं उनका चेला नहीं.

मोदी प्रधानमंत्री बने हैं. आपकी राय?
जब वे वादे पूरे करेंगे तब उन पर राय बनेगी. अच्छा काम करेंगे तो उनका समर्थन करेंगे. हिंदी को वे बढ़ावा दे रहे हैं. इस मुद्दे पर उनके साथ हूं.

उमा भारती कहती हैं कि साईं में विश्वास निजी आस्था है.
राम को छोड़ साईं भक्त कैसे हो गईं उमा? उनको मैं बचपन से जानता हूं. राम कथा कह कर बड़ी हुई हैं. वे आज जो भी हैं, राम नाम की ही वजह से हैं. उमा राम भक्त बनी रहें, किसी भ्रम में न रहें. उनके गुरु मेरे पक्ष में हैं और ये उनकी चेली होकर मेरा विरोध कर रही हैं, ये ठीक नहीं.

कहां तक जाएगी ये लड़ाई?
साईं भक्तों के प्रदर्शन और विरोध से विवाद और प्रतिक्रिया बढ़ रही है. सारे साधु-संत और अखाड़े मेरे पक्ष में सड़कों पर उतरने को तैयार हैं. मैंने कोई आपत्तिजनक बात नहीं की है. यह मुझे बदनाम करने की साजिश है. हिंदू धर्म को बदनाम किया जा रहा है. मैंने रिपोर्टर को मारा नहीं, सिर्फ दूर भगाया था. मैं राजनैतिक व्यक्ति नहीं. सरकार अच्छा करे हम समर्थन करेंगे.

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