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भर्तियों में धांधली, भाजपा में खलबली

उत्तराखंड में भर्तियों में धांधली को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को विपक्ष के बजाय अपनी ही पार्टी के नेताओं से बड़ी चुनौती मिल रही है

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उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी

उत्तराखंड में हुई भर्तियों में धांधली के आरोपों के बीच प्रदेश की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी की आंतरिक खींचतान सतह पर आने लगी है. इस पूरे मामले में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को विपक्ष के बजाए अपनी पार्टी के भीतर से ज्यादा बड़ी चुनौती मिल रही है. दरअसल, 46 साल के पुष्कर धामी के लिए बतौर मुख्यमंत्री सबसे बड़ी चुनौती यह है कि उनकी पार्टी में ही छह पूर्व मुख्यमंत्री हैं. ये हैं: भगत सिंह कोश्यारी, भुवन चंद्र खंडूरी, रमेश पोखरियाल निशंक, त्रिवेंद्र सिंह रावत, तीरथ सिंह रावत और विजय बहुगुणा. पूर्व मुख्यमंत्रियों में से कुछ से धामी को मिल रही चुनौती के बारे में देहरादून के वरिष्ठ पत्रकार अजीत सिंह कहते हैं, ''पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और तीरथ सिंह रावत ने सीबीआइ जांच का समर्थन किया है. यह सीएम धामी के लिए असहज स्थिति है.''

भगत सिंह कोश्यारी अभी महाराष्ट्र के राज्यपाल हैं लेकिन बताया जाता है कि आज भी वे देवभूमि की राजनीति को प्रभावित करते हैं. मुख्यमंत्री धामी को कोश्यारी का करीबी बताया जाता है. पार्टी के नेता इस बात की पुष्टि करते हैं कि उन्हें मुख्यमंत्री पद तक पहुंचाने में कोश्यारी की प्रमुख भूमिका रही. कोश्यारी के बारे में यह भी बताया जाता है कि प्रदेश संगठन पर आज भी उनकी पकड़ मजबूत है और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से भी उनके रिश्ते ठीक हैं.

लेकिन इसके बावजूद उनके करीबी माने जाने वाले मुख्यमंत्री धामी को मजबूत चुनौती पार्टी के अंदर से ही मिल रही है. पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत भर्तियों में हुई धांधली को लेकर काफी मुखर हैं. जब उत्तराखंड कर्मचारी चयन आयोग (यूकेएसएसएससी) समेत अन्य परीक्षाओं और विधानसभा भर्तियों में धांधली के मामले ने तूल पकड़ा तो इस बीच त्रिवेंद्र सिंह रावत ने दिल्ली आकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की. इसके पहले वे पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा से भी मिले. देहरादून लौटने के बाद त्रिवेंद्र सिंह रावत लगातार सक्रिय हैं और जगह-जगह पर उनके कार्यक्रम हो रहे हैं. 

उल्लेखनीय है कि विधानसभा भर्तियों में गड़बड़ी का मामला जब सामने आया था, तब भी त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा था कि उस समय के विधानसभा स्पीकर प्रेमचंद्र अग्रवाल के 74 पदों को स्वीकृति देने के प्रस्ताव को उन्होंने यह कहते हुए दो बार लौटा दिया था कि इनका चयन आयोग के जरिए होना चाहिए. हालांकि जब वे मुख्यमंत्री पद से हट गए तो अग्रवाल ने ये नियुक्तियां कर दीं और धामी इसे रोक नहीं पाए. इस बयान से त्रिवेंद्र रावत ने नैतिक बढ़त लेने की कोशिश की है और उनके उत्साहित समर्थक मान रहे हैं कि नवरात्र में त्रिवेंद्र रावत को बड़ी जिम्मेदारी मिलने वाली है. 

त्रिवेंद्र सिंह रावत के बाद मुख्यमंत्री बने तीरथ सिंह रावत ने भी इस मामले पर कड़ा रुख अख्तियार किया है. उन्होंने अपने सार्वजनिक बयानों में बार-बार कहा है कि भर्तियों में धांधली की जांच सही चल रही है लेकिन जरूरत पड़े तो सीबीआइ से जांच कराई जा सकती है.

प्रदेश के एक और पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूरी इस मामले में प्रत्यक्ष तौर तो सक्रिय नहीं हैं लेकिन उनकी बेटी रितु खंडूरी भूषण विधानसभा की स्पीकर हैं. विधानसभा भर्तियों की जांच के लिए रितु खंडूरी ने तीन सेवानिवृत्त आइएएस अधिकारियों की जो समिति बनाई है, उन तीनों को भुवन चंद्र खंडूरी का विश्वस्त बताया माना जाता है. समिति के अध्यक्ष डी.के. कोटिया खंडूरी के प्रधान सचिव होते थे. एस.एस. रावत मुख्यमंत्री कार्यालय में उनके सचिव थे. उल्लेखनीय है कि 2022 के विधानसभा चुनावों में जब धामी विधायकी का चुनाव हार गए तो जिन लोगों को मुख्यमंत्री बनाने की चर्चा थी, उनमें रितु खंडूरी भी शामिल थीं. समिति के सदस्यों के चयन को लेकर भाजपा के अंदर और बाहर यह बात भी चल रही है कि रितु खंडूरी इस मामले को अपने लिए एक राजनैतिक अवसर के तौर पर देख रही हैं. 

पुष्कर धामी भी इन स्थितियों को समझ रहे हैं और अपने लिए बचाव का रास्ता तैयार करते हुए भर्तियों में निष्पक्ष जांच कराके जरूरी कार्रवाई करना चाहते हैं. इसकी पुष्टि करते हुए उत्तराखंड बेराजगार संघ के प्रवक्ता लूशुन टोडरिया बताते हैं, ''जब हम लोग मुख्यमंत्री से मिले तो उनका कहना था कि सीबीआइ जांच की सिफारिश तो मैं कर दूंगा लेकिन कई भर्तियां अधर में लटक जाएंगी. उन्होंने हम लोगों को आश्वस्त करने की कोशिश की कि एसटीएफ के जरिए निष्पक्ष और समयबद्ध जांच होगी और दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी.'' इससे साफ है कि धामी यह समझ रहे हैं कि इन धांधलियों के कसूरवारों खिलाफ कार्रवाई करके ही वे पार्टी के अंदर अपने खिलाफ चल रही आंतरिक राजनीति को मात दे सकते हैं.

भाजपा के अंदर चल रही इस खींचतान पर पार्टी विधायक विनोद चमोली कहते हैं, ''पूरी पार्टी को यह सोचना चाहिए कि हम अपनी आंतरिक राजनीति की वजह से अगर इस मामले में कड़ी कार्रवाई नहीं करेंगे तो पूरे प्रदेश के युवाओं का भरोसा खो देंगे.'' प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे रमेश पोखरियाल निशंक और कांग्रेस से भाजपा में आए पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा हालिया सियासी उठापटक में दर्शक बताए जा रहे हैं. 

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