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दुर्ग बचाने की चुनौती

यूपी के रामपुर और आजमगढ़ में लोकसभा का उपचुनाव सपा के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बना, तो रामपुर के नतीजे आजम खान के लिए भी बेहद अहम साबित होंगे.

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मजबूत साथ : आजम खान के साथ रामपुर के सपा उम्मीदवार आसिम रज़ा मजबूत साथ : आजम खान के साथ रामपुर के सपा उम्मीदवार आसिम रज़ा

रामपुर जिले के मशहूर किला मैदान में 12 जून को समाजवादी पार्टी (सपा) के नेता आजम खान 27 महीने जेल में बिताने के बाद पहली बार जनसभा कर रहे थे. रामपुर उपचुनाव में सपा उम्मीदवार आसिम रज़ा के समर्थन में आजम को सुनने के लिए बड़ी संख्या में लोग जुटे थे.

मुस्लिम बाहुल्य रामपुर लोकसभा सीट पर मतदाताओं से भावनात्मक संबंध जोड़ते हुए आजम ने कहा, ''अगर 27 महीनों के दुखों की एक-एक रात का बदला लेना चाहते हो तो 23 तारीख को अपने घरों में न बैठना. मेरे मुंह पर कालिख न पुतवा देना, कहीं यह न हो कि यह सदमा मेरे लिए कहीं ज्यादा गहरा हो जाए.’’ बगल में खड़े रज़ा और मैदान में मौजूद लोगों ने अपने दोनों हाथ खड़े करके आजम का अभिवादन किया. 

दरअसल, 20 मई को सीतापुर जेल से रिहा होने के बाद आजम और सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के बीच रिश्तों को लेकर अटकलें लगाई जा रही थीं. इसी दौरान अखिलेश ने आजम को सुप्रीम कोर्ट से राहत दिलवाने में अहम भूमिका निभाने वाले वरिष्ठ वकील और कांग्रेस के पूर्व नेता कपिल सिब्बल को निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में राज्यसभा भेजा.

अखिलेश बीते दिनों तबियत बिगड़ने के बाद दिल्ली के गंगाराम अस्पताल में भर्ती हुए आजम को देखने भी पहुंचे. इसके बाद अखिलेश ने आजम के करीबी रज़ा को न सिर्फ रामपुर में सपा उम्मीदवार बनाया बल्कि इनके दो करीबियों को विधान परिषद सदस्य भी निर्वाचित कराया. इस रणनीति से अखिलेश ने आजम के जरिए मुस्लिम वोटबैंक को साथ जोड़े रखने की कोशिश की है, जिसका एकतरफा समर्थन विधानसभा चुनाव में सपा को मिला था.

आजम और अखिलेश के बीच रिश्तों में जमी बर्फ 12 जून की जनसभा में काफी हद तक पिघल चुकी थी. आजम ने जनसभा में कहा, ''मैंने कहा था कि टीपू को सुल्तान बना दो (अखिलेश यादव को दोस्त टीपू बुलाते हैं.), आपने बना दिया और अब कह रहा हूं कि आसिम को राजा बना दो. मेरी बात रखना.’’

रामपुर की तरह आजमगढ़ लोकसभा उपचुनाव में भी मुस्लिम मतदाता सपा के प्रदर्शन में निर्णायक भूमिका निभाएंगे. मुस्लिमों को सपा से तोड़ने की रणनीति के तहत ही बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने रामपुर में तो उम्मीदवार नहीं उतारा, पर आजमगढ़ में पार्टी के सबसे प्रभावी नेता शाह आलम उर्फ गुड्डू जमाली को मैदान में उतारा है. आजमगढ़ में मुस्ल्मि बाहुल्य मुबारकपुर विधानसभा सीट से पूर्व विधायक जमाली ने सपा से टिकट की आस में बसपा से इस्तीफा दे दिया था.

सपा से टिकट नहीं मिला तो उन्होंने असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिममीन (एआइएमआइएम) से चुनाव लड़ा. चुनाव हारने के बाद जमाली वापस बसपा में आ गए और मायावती ने फौरन उन्हें आजमगढ़ उपचुनाव में पार्टी का उम्मीदवार बना दिया. जमाली की पकड़ को देखते हुए आजमगढ़ उपचुनाव में सपा उम्मीदवार धर्मेंद्र यादव मुबारकपुर इलाके में खासा ध्यान दे रहे हैं.

यहां के सठियांव इलाके की जनसभा में धर्मेंद्र ने बसपा को भाजपा का मददगार बताया और मुस्लिमों को उससे सचेत रहने की अपील की. महाराष्ट्र में सपा के प्रदेश अध्यक्ष और आजमगढ़ निवासी अबु आजमी आजमगढ़ के मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में कैंप करके समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहे हैं. वहीं, जमाली धर्मेंद्र बाहरी उम्मीदवार बताकर चुनाव बाद आजमगढ़ की उपेक्षा की आशंका जताकर मतदाताओं का समर्थन पाने की कोशिश कर रहे हैं. 

आजमगढ़ के प्रतिष्ठित शिबली नेशनल कॉलेज के पूर्व प्राचार्य और राजनीति शास्त्र विभाग के पूर्व प्रमुख ग्यास असद खान कहते हैं, ''रामपुर और आजमगढ़ का उपचुनाव सपा के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न है. इसके नतीजे न केवल मुस्लिमों के रुख का मुजाहिरा करेंगे बल्कि यह भी बताएंगे कि बसपा-सपा के साथ उनका परंपरागत दलित-यादव वोटबैंक कितनी मजबूती से खड़ा है.

वहीं, विधानसभा चुनाव में प्रचंड बहुमत पाने वाली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अपने परंपरागत वोटों के अलावा दलित और यादव वोट में कितनी सेंधमारी कर पाती है, इससे भगवा दल का प्रदर्शन भी तय होगा.’’ आजमगढ़ में यादवों पर पकड़ मजबूत करने के लिए अखिलेश ने यहां के निवासी लाल बिहारी यादव को विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष बनाया है. 2020 में विधान परिषद सदस्य चुने गए बिहारी ने उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा संघ (वित्त विहीन गुट) की स्थापना की.

लाल बिहारी इंटर कॉलेज, आजमगढ़ में प्रधानाचार्य रहे बिहारी की आजमगढ़ और आसपास के जिलों में शिक्षकों पर अच्छी पकड़ है. आजमगढ़ जिले की अतरौलिया से विधायक संग्राम सिंह यादव और मुबारकपुर से विधायक अखिलेश यादव के साथ युवा नेता अभिषेक यादव धर्मेंद्र के लिए समर्थन जुटा रहे हैं.

आजमगढ़ में सपा के यादव वोटबैंक को भाजपा उम्मीदवार दिनेश लाल यादव 'निरहुआ’ से चुनौती मिल रही है. विपक्ष गाजीपुर निवासी निरहुआ पर बाहरी होने का आरोप लगा रहा है. निरहुआ कहते हैं, ''मैं 2007 से लगातार आजमगढ़ में रह रहा हूं. यहां मैंने 8-10 फिल्में बनाई हैं. आजमगढ़ में मैं बच्चों को फिल्मों में काम करने की ट्रेनिंग भी दे रहा हूं.’’

आजमगढ़ लोकसभा सीट में दलित मतदाताओं की अच्छी-खासी संख्या है. विधानसभा क्षेत्रवार स्थिति देखें तो मेहनगर में एक लाख से अधिक, मुबारकपुर में 80 हजार, सगड़ी में 85 हजार, गोपालपुर में 50 हजार से अधिक दलित मतदाता हैं. यादव-मुस्लिम समीकरण के साथ दलित मतदाताओं को सकारात्मक संदेश देने के लिए सपा ने आजमगढ़ में बसपा के संस्थापक सदस्यों में से एक रहे बलिहारी बाबू के बेटे सुशील आनंद को विधान परिषद सदस्य निर्वाचित कराया है.

विधानसभा चुनाव से पहले बलिहारी बाबू भी सपा में शामिल हो गए थे. असल में सपा ने पहले सुशील आनंद को ही आजमगढ़ लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाने की तैयारी की थी, पर उनका नाम दो विधानसभा क्षेत्र में दर्ज होने के कारण पर्चा खारिज होने की आशंका थी. इसलिए सपा ने धर्मेंद्र को उम्मीदवार बनाया. रामपुर में बसपा ने कोई उम्मीदवार नहीं उतारा है, इसलिए सपा यहां भी दलितों को अपनी ओर खींचने का भरसक प्रयास कर रही है.

पार्टी ने वरिष्ठ दलित नेताओं को इसकी जिम्मेदारी सौंपी है जिनमें इंद्रजीत सरोज, मिठाई लाल भारती और रमाशंकर शामिल हैं. सरोज बताते हैं, ''दलित नेता अपनी जाति के गांवों में जनसभाएं और रात्रि विश्राम करेंगे. इस दौरान यह बताया जाएगा कि केवल सपा ही डॉ. भीमराव आंबेडकर और राम मनोहर लोहिया के आदर्शों को साथ लेकर चल रही है.’’ रामपुर में सरदार और दलित भी कुछ क्षेत्रों में काफी प्रभावी हैं.

किसानों पर प्रभाव रखने वाली सरदार जाति का समर्थन जुटाने के लिए सपा ने सरदार अमरजीत सिंह और लखबिंदर सिंह को स्टार प्रचारक बनाया है. अमरजीत बिलासपुर विधानसभा सीट से 2022 का विधानसभा चुनाव लड़े थे और इन्हें भाजपा के बलदेव सिंह औलख से हार का सामना करना पड़ा. लखबिंदर रामपुर में सपा के जिला सचिव हैं. इसी तरह मिलक (सुरक्षित) विधानसभा सीट से सपा के दलित नेता विजय सिंह चुनाव हार गए थे, फिर भी उन्हें स्टार प्रचारकों की सूची में रखा गया है.

रामपुर में आजम के दो शागिर्दों में टक्कर है. आजम के करीबी रज़ा सपा उम्मीदवार हैं, तो सपा से नाता तोड़कर भाजपा में गए घनश्याम लोधी भी कभी आजम के करीबी थे. 2016 में विधान परिषद चुनाव में सपा ने अंतिम वक्त में लोधी को टिकट दिया था. उस वक्त आजम की हनक के चलते लोधी के लिए पार्टी सिंबल लखनऊ से हेलिकॉप्टर से बरेली मंगाया गया था.

इस उपचुनाव में भाजपा उम्मीदवार लोधी अपनी सभाओं में आजम का नाम बड़े सम्मान के साथ लेते हैं. कांग्रेस के इस उपचुनाव में कोई प्रत्याशी न खड़ा करने से रामपुर के नवाब खानदान की प्रतिष्ठा भी दांव पर है. कांग्रेस से टिकट न मिलने पर पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता नवाब काजिम अली खां उर्फ नावेद मियां ने भाजपा का समर्थन कर दिया है.

सियासी विश्लेषक और रामपुर के वरिष्ठ वकील अफरोज अली कहते हैं, ''नावेद मियां के बेटे हमजा मियां ने स्वार विधानसभा सीट से भाजपा की सहयोगी अपना दल के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था. पर वे आजम के बेटे अब्दुल्ला आजम से हार गए थे. उस चुनाव के नतीजे ने साबित कर दिया था कि रामपुर के नवाब खानदान की मुस्लिमों पर पकड़ कमजोर पड़ती जा रही है. ऐसे में नावेद मियां की भाजपा को समर्थन की घोषणा मुस्लिम मतदाताओं में बहुत असरदार नहीं साबित होगी.’’

रामपुर का उपचुनाव ऐसे वक्त में हो रहा है जब देश में मुस्लिम राजनीति में शून्यता प्रवेश कर रही है. आजम की मुस्लिम नेता के रूप में पहचान तो है, पर रामपुर उपचुनाव के नतीजे मुस्लिमों में आजम के प्रभाव में इजाफा करेंगे. ऐसे में रामपुर का यह चुनाव जितना आजम के लिए अहम है, उतना ही अखिलेश यादव के लिए आजमगढ़ का चुनाव. अगर सपा दोनों सियासी किले बचाने में सफल होती है तो यह जीत 2024 के लोकसभा चुनाव में उसकी तैयारियों के लिए उत्प्रेरक का काम करेगी.

आजमगढ़ लोकसभा सीट

 वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में सपा-बसपा गठबंधन के प्रत्याशी अखिलेश यादव ने भाजपा उम्मीदवार दिनेश लाल यादव 'निरहुआ’ को ढाई लाख से अधिक मतों से हराया था. 

 वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में मैनपुरी की करहल सीट जीतकर विधायक बने अखिलेश यादव ने आजमगढ़ लोकसभा सीट से इस्तीफा दे दिया. 

 आजमगढ़ लोकसभा सीट के अंतर्गत गोपालपुर, सगड़ी, मुबारकपुर, आजमगढ़ व मेहनगर (सुरक्षित) विधानसभा सीटें आती हैं. 2022 के विधानसभा चुनाव में इन पांचों पर सपा जीती थी.

 आजमगढ़ लोकसभा उपचुनाव-2022 में दिनेश लाल यादव 'निरहुआ’ भाजपा उम्मीदवार, धर्मेंद्र यादव सपा उम्मीदवार और गुड्डू जमाली बसपा उम्मीदवार हैं.

रामपुर लोकसभा सीट
 वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में सपा-बसपा गठबंधन के प्रत्याशी आजम खान ने भाजपा उम्मीदवार जयाप्रदा को एक लाख से अधिक वोटों से हराया था. 

 वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में रामपुर सदर विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर आजम खान विधायक बने और रामपुर लोकसभा सीट से इस्तीफा दे दिया. 

 रामपुर लोकसभा सीट में स्वार, चमरौआ, बिलासपुर, रामपुर और मिलक (सुरक्षित) विधानसभा सीटें आती हैं. 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा ने स्वार, चमरौआ और रामपुर सीटें जीतीं तो भाजपा ने बिलासपुर और मिलक (सुरक्षित) सीट जीती थीं.

 रामपुर लोकसभा उपचुनाव-2022 में आसिम रज़ा सपा के तो घनश्याम लोधी भाजपा के उक्वमीवार हैं. बसपा ने कोई उम्मीदवार नहीं उतारा है.

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