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उत्तर प्रदेशः नई पहचान बनाता योगी का शहर

मुख्यमंत्री योगी ने यूपी की सत्ता संभालने के बाद गोरखपुर में बड़े पैमाने पर विकास योजनाओं की शुरुआत की थी. साल 2022 के विभानसभा चुनावों से पहले 30 हजार करोड़ रुपए से अधिक लागत वाली ये योजनाएं अब आकार ले चुकी हैं.

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सबसे ऊंचा टावर गोरखपुर यूरिया प्लांट सबसे ऊंचा टावर गोरखपुर यूरिया प्लांट

गोरखपुर से सोनौली की ओर जाने वाले फोरलेन हाइवे पर छह किलोमीटर (किमी) दूर से ही चिलवाताल के किनारे नए बने खाद कारखाने की प्रिलिंग टावर दिखायी देने लगती है. यह 149.5 मीटर की ऊंचाई वाली दुनिया की सबसे ऊंची प्रिलिंग टावर है. गोरखपुर के खाद कारखाने की प्रिलिंग टावर की ऊंचाई कुतुबमीनार (72.5 मीटर) के दोगुने से भी अधिक है. प्रिलिंग टावर के अत्यधिक ऊंचा होने का असर यहां यूरिया के उत्पादन पर पड़ा है.

मानक के मुताबिक, यूरिया के एक दाने की मोटाई 0.3 एमएम से अधिक नहीं होनी चाहिए. गोरखपुर के खाद कारखाने में बनने वाली यूरिया के दाने की मोटाई 0.2 एमएम होगी. दानों का आकार छोटा होने से यूरिया मिट्टी में जल्दी घुलेगी और इसका असर खेती पर पड़ेगा. 8,600 करोड़ रुपए की लागत से बने इस खाद कारखाने की क्षमता रोजाना 3,850 मीट्रिक टन नीम कोटेड यूरिया का उत्पादन करने की है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 22 जुलाई, 2016 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह जिले गोरखपुर में हिंदुस्तान उर्वरक एवं रसायन लिमिटेड (एचयूआरएल) के खाद कारखाने का शिलान्यस किया था. पांच साल बाद 7 दिसंबर को प्रधानमंत्री मोदी ने गोरखपुर में खाद कारखाने का उद्घाटन करने के साथ गोरखपुर जिले को विश्वपटल पर एक नई पहचान भी दी.

598 एकड़ जमीन में फैले इस कारखाने में विश्व का सबसे बड़ा प्रिलिंग टावर है, तो पानी की उपलब्धता के लिए चिलवाताल में अत्याधुनिक कोरियन तकनीक से 30 करोड़ रुपए की लागत से यूपी का पहला बुलेटप्रूफ रबर डैम बनाया गया है. अत्याधुनिक मशीनों से लैस यह डैम प्लांट को पानी की जरूरत होने पर फेफड़े की तरह फूलेगा और पिचकेगा.

प्रसिद्ध गोरखनाथ मंदिर के महंत और मुख्यमंत्री योगी ने मार्च, 2017 में उत्तर प्रदेश की सत्ता संभालने के बाद गोरखपुर में बड़े पैमाने पर विकास योजनाओं की शुरूआत की थी. 30 हजार करोड़ रुपए से अधिक लागत वाली ये योजनाएं अब आकार ले चुकी हैं (देखें ग्राफिक्स) जिन्होंने गोरखपुर को एक नई पहचान दी है.

गोरखपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजेश सिंह कहते हैं, ''गोरखपुर उत्तर प्रदेश के पूर्वी जिलों के विकास की धुरी बनकर उभर रहा है. गोरखपुर में शुरू हुई विकास योजनाओं से पूर्वांचल के करीब डेढ़ दर्जन जिले सीधे तौर पर लाभान्विभत होंगे.’’ 

शहर से करीब 30 किमी दूर लखनऊ-गोरखपुर हाइवे पर कलेसर जीरो पॉइंट गोरखपुर समेत पूर्वी उत्तर प्रदेश की चमचमाती फोरलेन सड़क से जुड़ाव का गवाह बना है. यहां 'ट्रम्पेट फ्लाइओवर’ के जरिए गोरखपुर नेपाल को जोड़ने वाला नया फोरलेन मिलता है तो दूसरी ओर कुशीनगर को जाने वाला फोरलेन हाइवे भी निकलता है.

कलेसर पॉइंट गोरखपुर में बनीं रिंग रोड का एक अहम हिस्सा है जहां लखनऊ के अलावा पूर्वांचल तक सड़क से पहुंचने की राह आसान हो गई है. कलेसर जीरो पॉइंट को पार करके राप्ती नदी के किनारे फोरलेन में तब्दील हो चुके गोरखपुर-पैडलेगंज रोड के दाहिनी ओर जैतपुर इलाके से करीब 5,900 करोड़ रूपए की लागत वाला 91 किमी लंबा गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे का निर्माण चल रहा है. यह संतकबीर नगर, आंबेडकर नगर होते हुए आजमगढ़ में पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से मिलेगा. 

इंसेफ्लाइटिस से होने वाली मौतों ने योगी के गृह जिले को विश्वभर में कुख्यात कर दिया था. गोरखपुर में मेडिकल कॉलेज रोड स्थित गांव मानबेला में हर वर्ष दिमागी बुखार से 10 से 15 बच्चों की मौत हो जाती थी, पर पिछले तीन वर्षों से यहां एक भी बच्चा इस आपदा का शिकार नहीं हुआ. मानबेला में क्लिनिक चलाने वाले डॉ. रमेश कुशवाहा बताते हैं, ''योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने का असर इंसेफ्लाइटिस के रोकथाम पर दिखा है.

इंसेफ्लाइटिस से बच्चों की मौतों के लिए विश्वभर में बदनाम रहा गोरखपुर अब विकास के लिए जाना जाने लगा है.’’ वर्ष 2017 में गोरखपुर में इंसेफ्लाइटिस से 114 बच्चों की मौत हुई थी जबकि वर्ष 2020 में यह आंकड़ा घटकर 13 हो गया है. वर्ष 2021 में अब तक इंसेफ्लाइटिस से मरने वाले बच्चों की संख्या केवल 10 है. गोरखपुर में बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. गणेश कुमार बताते हैं, ''वर्ष 2017 में मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी आदित्यनाथ ने इंसेफ्लाइटिस की रोकथाम के लिए दो स्तरों पर कार्य शुरू किया.

गोरखपुर में 9 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) और 13 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) हैं. सभी सीएचसी पर छह बेड वाला पीड्रियाटिक्स इंटेंसिव केयर यूनिट (पीआइसीयू) और पीएचसी पर दो बेड की इंसेफ्लाइटिस केयर यूनिट तैयार की गई. इससे मरीज में इंसेफ्लाइटिसके लक्षण आते ही तुरंत प्राथमिक इलाज शुरू किया गया.

दूसरे स्तर पर गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में इलाज की सुविधाएं बढ़ायी गईं.’’ योगी की पहल पर बीआरडी कॉलेज में छह बेड की आइडिपेंसी यूनिट बढ़कर 80 बेड की हो गई है. आइसीयू में पहले 60 वेंटीलेटर थे, जो अब बढ़कर 120 हो गए हैं. बाल रोग विभाग में बिस्तरों की संख्या 154 थी, जो अब 450 हो गई है.

गोरखपुर पूर्वी यूपी में पर्यटन का बड़ा केंद्र बनकर उभर रहा है. यहां के होटल व्यवसायी संकेतमणि त्रिपाठी बताते हैं, ''गोरखपुर में पर्यटन का दायरा गोरखनाथ मंदिर तक सिमट कर रह जाता था, पर रामगढ़ताल के किनारे बसा तारामंडल इलाका गोरखपुर के पर्यटन हब के रूप में उभर रहा है. रामगढ़ताल को मुंबई के मरीन ड्राइव जैसा संवारा गया है. यहां बना नया सवेरा और नौकायन जेटी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है.’’

गोरखपुर मंदिर के अलावा जिले में कई आध्यात्मिक धरोहर उपेक्षा का दंश झेल रहे थे. योगी ने इन सभी धार्मिक केंद्रों के जीर्णोद्धार की एक बड़ी योजना शुरू की. गोरखपुर में क्राइस्टचर्च, इमामबाड़ा, जटाशंकर गुरुद्वारा और रामगढ़ताल क्षेत्र स्थित राजकीय बौद्ध संग्रहालय को नए सिरे से संवारा गया है. गोरखपुर विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रसंघ महामंत्री और प्रदेश भाजपा के प्रवक्ता समीर सिंह बताते हैं.

''गोरखपुर में मोहद्दीपुर-जंगल कौड़िया फोरलेन बाइपास निर्माण के लिए गोरखनाथ मंदिर की दुकानें तुड़वाकर मुख्यमंत्री योगी ने विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जाहिर की है. जिले की सभी सड़कों के चौड़ीकरण में 1,000 करोड़ रुपए से अधिक खर्च हुए हैं.’’ पर्यटन के विकास के लिए गोरखपुर को हवाई मार्ग के जरिए दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद, कोलकाता और प्रयागराज से जोड़ा गया है.

इससे हवाई मार्ग से गोरखपुर आने वाले यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ रही है. 2014-15 में गोरखपुर एयरपोर्ट से 26,000 लोगों ने सफर किया था तो 2019-20 में यह आंकड़ा 5.50 लाख पहुंच गया. कोराना संक्रमण के बावजूद 2020-21 में गोरखपुर एयरपोर्ट से सात लाख लोग सफर कर चुके हैं. यात्रियों की संख्या बढऩे से गोरखपुर एयरपोर्ट में नए और अत्याधुनिक टॢमनल-3 का निर्माण कराया जा रहा है.

बड़े पैमाने पर विकास कार्यों ने रोजगार की संभावनाएं भी विकसित की हैं. पूर्वांचल में कंस्ट्रक्शन कंपनी चलाने वाले विपुल सिंह बताते हैं ''गोरखपुर में बड़े पैमाने निर्माण कार्यों से यहां मजदूर से लेकर तकनीकी दक्ष युवकों समेत 10 हजार से ज्यादा लोगों को रोजगार मिला हुआ है.’’

गोरखपुर के बड़हलगंज निवासी हरवंश तिवारी चेन्नै के तीरपुर स्थित देश के सबसे बड़े टेक्सटाइल पार्क में एक फैक्ट्री के मालिक हैं. वे कहते हैं, ''तीरपुर में काम कर रहे कई उद्यमी यूपी के हैं. गोरखपुर में मेगा टेक्साटाइल क्लस्टर बनने पर ये उद्यमी यूपी लौटना चाहेंगे. अगर यहां 1,000 टेक्सटाइल इंडस्ट्री लगती है तो कम से कम 50 हजार लोगों को रोजगार मिलेगा.’’ 

वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले गोरखपुर की विकास योजनाओं को समय से पूरा करने के लिए 'गवर्नमेंट प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग सिस्टम’ नाम से एक वेबसाइट और मोबाइल ऐप का सहारा लिया गया. गोरखपुर जिलाधिकारी कार्यालय में तैनात अधिकारियों की एक टीम सभी प्रोजेक्ट की प्रगति रिपोर्ट 'गवर्मेंट प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग’ ऐप और वेबसाइट में रोजाना अपडेट करती है. प्रोजेक्ट के निर्माणकार्य की गति के हिसाब से इसे तीन श्रेणी लाल, पीला और हरा में बांटा गया है.

इन्हीं श्रेणियों के हिसाब से धीमे विकास कार्यों को अतिरिक्त जोर लगाकर पूरा किया गया. जिलाधिकारी विजय किरण आनंद बताते हैं, ''वर्ष 2017 से लेकर अब तक छोटी और बड़ी कुल 800 योजनाओं का लाकार्पण किया जा चुका है. 31 दिसंबर तक 100 और योजनाओं का लोकार्पण किया जाएगा.’’ 

वहीं, गोरखपुर में समाजवादी पार्टी (सपा) के जिला अध्यक्ष नगीना प्रसाद साहनी कहते हैं, ''गोरखपुर में जितने भी प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य पूरा हुआ है, वह सभी सपा के शासनकाल में शुरू हुए थे. वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में सपा ने गोरखपुर में केवल एक विधानसभा सीट जीती थी, इसके बावजूद पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने यहां पर एक दर्जन से अधिक बड़ी विकास योजनाएं शुरू की थीं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर में एक भी नए प्रोजेक्ट की शुरुआत नहीं की है. योगी के शासनकाल में गोरखपुर का विकास अवरुद्ध हुआ है.’’

गोरखपुर जिले में कुल नौ विधानसभा सीटें हैं. वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने यहां पर केवल तीन सीट ही जीती थीं. लेकिन वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने यहां आठ सीटें जीती थीं. प्रधानमंत्री मोदी के लिए योगी का गृह जिला गोरखपुर बेहद लकी है. वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव और वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले मोदी ने यूपी में अपने चुनाव अभियान की शुरुआत गोरखपुर से ही की थी.

2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने यूपी में 71 सीटें तो 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 312 सीटें जीती थीं. प्रधानमंत्री ने एक बार फिर 7 दिसंबर को गोरखपुर में 10,000 करोड़ रूपए की विकास योजनाएं शुरू करने के साथ यूपी में अपना चुनावी अभियान भी शुरू किया. इस बार भी गोरखपुर मोदी के लिए लकी साबित होता है या नहीं, यह वर्ष 2022 में विधानसभा चुनाव के नतीजे ही बताएंगे.


7 लाख
लोग सफर कर चुके हैं 2020-21 में गोरखपुर एयरपोर्ट से

गोरखपुर की छवि बदलने वाली विकास योजनाएं
 एम्स:
गोरखपुर के कूड़ाघाट क्षेत्र में 45 हेक्टेयर जमीन पर 1,800 करोड़ रुपए की लागत से ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एम्स) का निर्माण किया गया है. पिछले वर्ष ओपीडी शुरू होने के बाद 7 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्वस में आंतरिक रोगी विभाग का उद्घाटन किया है. 750 बेड वाले सुपर-स्पेशिएलिटी विंग की भी शुरुआत हुई है. 

 प्राणि उद्यान: गोरखपुर में रामगढ़ताल इलाके में शहीद अशफाक उल्ला खां प्राणि उद्यान पूर्वी यूपी का पहला चिडिय़ाघर है. यूपी के इस तीसरे प्राणि उद्यान का निर्माण 250 करोड़ रूपए की लागत से कराया गया है. इसमें 58 प्रजातियों के 387 वन्यजीव रखे जा रहे हैं. चिडिय़ाघर में 48 सीटर 7-डी थियेटर भी बनाया गया है जो यूपी में सरकारी क्षेत्र का पहला 7-डी थियेटर है.

 पिपराइच चीनी मिल: वर्ष 2010 से बंद पड़ी पिपराइच चीनी मिल को नवंबर 2019 में दोबारा शुरू किया गया. 417 करोड़ रूपए की लागत से 50 हजार क्विंटल क्षमता की चीनी मिल शुरू हुई. बिजली उत्पादन के साथ ही प्रदेश में पहली बार सल्फरलेस चीनी का भी उत्पादन पिपराइच मिल में शुरू हुआ है. 

 बाल रोग चिकित्सा संस्थान: गोरखपुर मेडिकल कॉलेज परिसर में 274 करोड़ रूपए की लागत से बने 500 बिस्तरों वाला बाल रोग चिकित्सा संस्थान अगले कुछ महीनों में शुरू हो जाएगा. मेडिकल कॉलेज के तहत डेढ़ सौ करोड़ रूपए की लागत से बने सुपर-स्पेशिएलिटी सेंटर में सात से अधिक विभागों की ओपीडी सेवा शुरू हो गई है.. 

 रीजनल मेडिकल रिसर्च सेंटर: जीन मैपिंग से लेकर वायरस और बैक्टीरिया की पहचान, वायरस जनित बीमारियों पर शोध के लिए गोरखपुर मेडिकल कॉलेज परिसर में 50 करोड़ की लागत से रीजनल मेडिकल रिसर्च सेंटर (आरएमआरसी) की स्थापना की गई है. एम्स दिल्ली और एनआइवी पुणे के बाद आरएमआरएसी, गोरखपुर देश का तीसरा जीनोम ‌सिक्वेंसिंग केंद्र बन गया है.

 रामगढ़ताल: रामगढ़ताल को यूपी का पहला वेटलैंड घोषित किया गया है. वाटर स्पोर्ट्स ऐक्विविटी, झील मनोरंजन की सुविधा विकसित करने के साथ रामगढ़ताल में गिरने वाले नालों को टैप किया गया है. इन पर 150 करोड़ रुपए से अधिक खर्च हुए हैं. ताल के किनारे लंदन आइ जैसा झूला लगाने का भी प्रस्ताव है. 

 प्रेक्षागृह: रामगढ़ताल के सामने 50 करोड़ रुपए की लागत से तीन एकड़ जमीन पर ओपेन थियेटर और प्रेक्षागृह का निर्माण कराया गया है. 'योगी राज बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह एवं सांस्कृतिक केंद्र, गोरखपुर’ नामक यह प्रेक्षागृह पूर्वी यूपी का सबसे बड़ा प्रेक्षागृह है. यहां 1,076 दर्शकों के बैठने के लिए एक बड़ा हॉल और 250 दर्शकों की क्षमता वाला एक अन्य हॉल भी बनाया गया है.

 रिंग रोड: गोरखपुर-लखनऊ मार्ग पर कलेसर से जगदीशपुर तक 37 किमी फोरलेन बन चुका है. कलेसर से जंगल कौडिय़ा तक 17 किमी लंबे बाइपास का निर्माण हुआ है. जंगल कौडिय़ा से जगदीशपुर तक 25 किमी फोरलेन बनने के साथ गोरखपुर का करीब 81 किलोमीटर लंबा रिंग रोड पूरा हो जाएगा. इसमें 1500 करोड़ से अधिक खर्च होंगे.

पंख लगने को तैयार प्रोजेक्ट

 गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे: करीब 91 किलोमीटर लंबा यह एन्न्सप्रेसवे गोरखपुर बाइपास एनएच-27 पर स्थित ग्राम जैतपुर के पास शुरू होकर आजमगढ़ के पास पूर्वांचल एन्न्सप्रेसवे से जुड़ेगा. 5,867 करोड़ रूपए की लागत से बन रहे इस एक्सप्रेस वे का निर्माण दिसंबर 2022 तक पूरा करने का लक्ष्य है. 

 सीवर लाइन: शहर के नालों का पानी रामगढ़ताल, राप्ती और रोहिणी नदी में गिरने से बचाने के लिए अमृत मिशन के तहत 650 करोड़ रू. से ज्यादा की लागत से 247 किमी लंबी सीवर लाइन बिछाई जा रही है. नालों के पानी को साफ करने के लिए नेताजी सुभाष चंद्र बोस नगर में एसटीपी का निर्माण होना है. 

 राजघाट और रामघाट: राप्ती नदी के किनारे राजघाट स्थित अंत्येष्टि स्थल को राजस्थानी शैली 'गजीबो’ और 'पालकी’ के जरिए नया रूप दिया जा रहा है. 150 मीटर लंबे इस घाट पर शिव मंदिर आकर्षण का केंद्र होगा. राजघाट के दूसरी तरह रामघाट का निर्माण हो रहा है. इस योजना में 40 करोड़ रुपए खर्च होंगे. 

 लाइट रेल: योगी कैबिनेट ने गोरखपुर महानगर में यातायात व्यवस्था को सुगम एवं सुचारू बनाने के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम के रूप में लाइट रेल ट्रांजिट (एलआरटी) परियोजना के क्रियान्वयन तथा डीपीआर को अनुमोदन प्रदान कर दिया है. इस परियोजना की कुल लागत 4,672 करोड़ रुपये है.

 आयुष विश्वविद्यालय: गोरखपुर के भटहट, पिपरी इलाके में प्रदेश के पहले आयुष विश्वविद्यालय का निर्माण कराया जा रहा है. एक हजार करोड़ रू. की लागत से बनने वाले इस विश्वविद्यालय से प्रदेश के सभी 94 आयुष संस्थान संबद्ध कर दिए जाएंगे. मार्च 2023 तक यह विश्वविद्यालय संचालित होने लग जाएगा.
 
 सैनिक स्कूल: फर्टिलाइजर कारखाना काम्प्लेक्स क्षेत्र में 50 एकड़ जमीन पर सैनिक स्कूल का निर्माण हो रहा है. इस निर्माणाधीन सैनिक स्कूल पर करीब 154 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है. यह यूपी का पांचवां सैनिक स्कूल होगा. यहां आवासीय व्यवस्था के तहत कक्षा 6 से 12 के छात्र-छात्राएं पढ़ सकेंगे. 

 वेटनरी मेडिकल कॉलेज: चरगवां में प्रदेश का दूसरा वेटनरी मेडिकल कॉलेज बनेगा. मेडिकल कॉलेज की इमारत के लिए कृषि विभाग की 30 एकड़ जमीन पशुपालन विभाग के नाम ट्रांसफर की जा चुकी है. 250 करोड़ रूपए से बनने वाले वेटनरी मेडिकल कॉलेज में 80 सीटों पर प्रवेश मिलेगा. 

 जीआइएस बिजली घर: खोराबार क्षेत्र में अत्याधुनिक तकनीकी पर आधारित 220 केवी जीआइएस ट्रांसमिशन बिजली घर का निर्माण होने जा रहा है. 101 करोड़ रूपए की लागत से बनने वाला यह बिजली घर महानगर की 12 लाख की आबादी को निर्बाध बिजली की आपूर्ति करेगा.

सैफई: विकास की रफ्तार पर ब्रेक

इटावा जिले से मैनपुरी को जाने वाले हाइवे पर 23 किमी चलने के बाद दाहिनी ओर एक चौड़ी सड़क सैफई गांव की ओर जाती है. यह सपा के संस्थापक मुलायम सिंह यादव का पैतृक गांव है. भीतर दाखिल होते ही लगता है, यह गांव दो मीटर व्यास वाली, कंक्रीट की सीवर पाइपलाइन का डंपिंग ग्राउंड बन गया है. बेकार पड़े ये हजारों पाइप 'अरबन डेवलपमेंट प्रोजेक्ट’ के तहत यहां सीवेज सिस्टम के विकास के लिए लाए गए थे.

पूर्ववर्ती अखिलेश यादव सरकार ने अप्रैल, 2016 में सैफई को अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस करने के लिए 300 करोड़ रू. की लागत वाले इस प्रोजक्ट की शुरुआत की थी. इसके तहत सीवेज और ड्रेनेज की व्यवस्था, बिजली के तार अंडरग्राउंड करने, सड़कें चौड़ी करने, साइकिल ट्रैक निर्माण और प्लांटेशन जैसे काम किए जाने थे. 2018 तक प्रोजेक्ट पूरा होना था.

मार्च, 2017 तक तेजी से काम चला और आधे सैफई गांव में सीवेज और ड्रेनेज के लिए अंडरग्राउंड पाइपलाइन बिछा दी गई. मार्च, 2017 में भाजपा की सरकार बनते ही सैफई का विकास प्रोजेक्ट धीमा हो गया. और 2018 से यह अधूरा पड़ा है. प्रोजेक्ट के निर्माण से जुड़ी एजेंसी 'राजकीय निर्माण निगम’ के एक अधिकारी नाम न छापने की शर्त पर बताते हैं, ''सीवेज और ड्रेनेज के लिए 40 करोड़ रु., भूमिगत तार बिछाने को 19 करोड़ रु. बजट की मांग सरकार से की गई है. सारे भूमिगत कार्य पूरे होने तक दूसरे चरण का निर्माण नहीं शुरू किया जा सकता.’’

सिर्फ यही नहीं, सैफई में 2,000 करोड़ रु. की लागत से बने दर्जन भर बड़े प्रोजेक्ट बंद पड़े हैं. सैफई पिछले पांच वर्षों से विकास योजनाओं के शुरू होने की प्रतीक्षा कर रहा है. इन योजनाओं में सैफई में बना अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम, ऑलवेदर स्वीमिंग पूल, सुपर-स्पेशिएलिटी अस्पताल जैसे बड़े प्रोजेक्ट शामिल हैं.

सैफई निवासी और सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के चचेरे भाई धर्मेंद्र यादव कहते हैं, ''सबका साथ-सबका विकास का नारा देने वाली योगी सरकार की असलियत सैफई में देखी जा सकती है. जनता के पैसे से बनी विकास योजनाओं को बंद करके सरकार ने अपनी असलियत जाहिर कर दी है.’’

इटावा जिले के आठ विकासखंडों में सैफई एक विकासखंड (ब्लॉक) और छह तहसीलों में एक तहसील भी है. सैफई विकासखंड में कुल 60 गांव हैं जिनमें से एक गांव सैफई भी है, जिसकी आबादी 7,141 है. यहां विकास योजनाओं में भेदभाव के आरोपों पर इटावा से भाजपा सांसद रामशंकर कठेरिया कहते हैं, ''सैफई में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम, ऑल वेदर स्वीमिंगपूल जैसी योजनाओं का औचित्य क्या था?

यह सपा सरकार के दौरान जनता के पैसे की बर्बादी की मिसाल है. यहां के उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय की सेवाओं को दुरुस्त करने का कार्य मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया है.’’

मार्च, 2017 में मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी चार बार इटावा आ चुके हैं. कोरोना की दूसरी लहर के दौरान 22 मई को योगी ने पहली बार सैफई का दौरा किया था. यह पहला मौका था जब सपा के विरोधी दल का कोई नेता यहां पहुंचा था. योगी ने सैफई के आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय का निरीक्षण कर यहां ऑक्सीजन प्लांट शुरू करवाने के साथ कोविड बेड की संख्या भी बढ़वाई थी.

इटावा में के.के. पीजी कॉलेज में अर्थशास्त्र विभाग की प्रमुख पद्मा त्रिपाठी बताती हैं, ''सैफई इटावा ही नहीं, आसपास के मैनपुरी, फिरोजाबाद, औरेया समेत कई जिलों की राजनीति का केंद्रबिंदु है. योगी ने पिछले साढ़े चार साल में इटावा में 2,000 करोड़ रु. से ज्यादा की विकास योजनाओं की शुरुआत की है. इटावा से बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे की शुरुआत, यमुना नदी पर पुल निर्माण जैसी योजनाओं के जरिए योगी संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि विकास पर केवल सैफई का ही नहीं, पूरे इटावा जिले का हक है.’’

6 नवंबर को इटावा पहुंचकर योगी ने 467 करोड़ रू. की लागत वाली 21 परियोजनाओं का लोकार्पण और 27 परियोजनाओं का शिलान्यास किया. इनमें सैफई ब्लॉक के महोला गांव में बनी यूपी की छठी सेंट्रल जेल का उद्घाटन भी शामिल है. 183 करोड़ रुपए की लागत से बनी इस जेल का निर्माण 2015 में अखिलेश यादव सरकार ने शुरू कराया था.

सैफई मुलायम सिंह के संसदीय क्षेत्र मैनपुरी और शिवपाल सिंह यादव के विधानसभा क्षेत्र जसवंतनगर का हिस्सा है. जसवंतनगर को जोड़कर इटावा में कुल तीन विधानसभा सीटें हैं. 2012 के विधानसभा चुनाव में जीत हासिल करने वाली सपा ने ये तीनों सीटें जीती थीं. वर्ष 2017 में भाजपा ने इटावा और भरथना सीट सपा से छीन ली. 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने इटावा संसदीय सीट भी जीती.

पर इटावा में भाजपा की विजय यात्रा मई में हुए पंचायत चुनाव में थम गई. इटावा के 24 जिला पंचायत सदस्यों के चुनाव में भाजपा का केवल एक सदस्य चुनाव जीत पाया था. वहीं, सपा और शिवपाल यादव की प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) ने कुल 20 सीटें जीती थीं. इसके बाद जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर सपा और प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) के संयुक्त प्रत्याशी के तौर पर अंशुल यादव ने जीत हासिल की थी.

वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले इटावा में विकास योजनाओं के जरिए योगी भाजपा की सियासी जमीन मजबूत करने का प्रयास कर रहे हैं. योगी सरकार ने उड्डयन के क्षेत्र में प्रशिक्षण कार्यक्रमों के लिए फ्लाइंग क्लब और अकादमियों को सैफई हवाई पट्टी के उपयोग की इजाज़त दे दी है.

अखिलेश यादव के ड्रीम प्रोजेक्ट इटावा लायन सफारी को दर्शकों के लिए खोल दिया गया है. 300 करोड़ रूपए की लागत से 350 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले इटावा लायन सफारी में अभी 18 शेर हैं. योगी ने 28 अक्तूबर को ताज नेचर वॉक-चंबल सफारी-सफारी-लायन सफारी के नए इको टूरिज्म सर्किट का वर्चुअल उद्घाटन किया है. अब 2022 के चुनाव नतीजे ही बता पाएंगे कि सैफई की लंबित पड़ी विकास योजनाओं का इंतजार कब खत्म होगा.

2 हजार करोड़ रूपए की लागत के में बंद पड़े हैं

दर्जन भर प्रोजेक्ट सैफई

अधर में लटके प्रोजेक्ट 


 हवाई पट्टी: वर्ष 1997 में 50 करोड़ रू. की लागत से सैफई में 2.7 किमी लंबी हवाई पट्टी का निर्माण कराया गया था. 2016 में तत्कालीन अखिलेश यादव सरकार ने इसे हवाई अड्डे में तब्दील करने का प्रस्ताव एयरपोर्ट अथारिटी ऑफ इंडिया को भेजा था. पर अब तक कोई निर्णय नहीं हो सका.

 सुपर-स्पेशिएलिटी अस्पताल: अखिलेश यादव सरकार ने ही 2014 में सैफई में 500 बेड का प्रदेश का सबसे बड़ा सुपर-स्पेशिएलिटी अस्पताल बनाने का निर्णय लिया था. प्रोजेक्ट की शुरुआती लागत 333 करोड़ रु. थी जो अब बढ़कर 537 करोड़ रुपए हो गई है. बिल्डिंग बन गई पर मशीनरी का काम लंबित.

 जच्चा-बच्चा अस्पताल: सैफई में 204 करोड़ की लागत से बन रहे 300 बेड वाले जच्चा-बच्चा अस्पताल का निर्माण कार्य काफी धीमा है. मुख्यमंत्री योगी ने सितंबर, 2020 में अस्पताल का निर्माण एक वर्ष में पूरा करने का निर्देश दिया था पर अभी तक भवन का निर्माण पूरा नहीं हो पाया है. 

 हॉस्टल भवन: करीब 40 करोड़ रु. की लागत से टाइप-2 से लेकर टाइप-5 तक पांच और आठ मंजिला हॉस्टल भवन का निर्माण 2015 में शुरू होना था. 150 कमरे वाले भवन का निर्माण 2018 तक पूरा होना था. निर्माण लागत बढ़ने के कारण अतिरिक्त बजट का आवंटन न होने से निर्माण अधूरा पड़ा.

 क्रिकेट स्टेडियम: सैफई में 200 करोड़ रू. की लागत से 45,000 दर्शकों की क्षमता वाला क्रिकेट स्टेडियम वर्ष 2018 में बनकर तैयार. आस्ट्रेलिया की बरमूडा घास युक्त इस स्टेडियम में 17 मीटर लंबा और 9 मीटर चौड़ा देश का सबसे बड़ा स्कोर बोर्ड है. पर स्टेडियम बंद पड़ा है.

 ऑल वेदर स्वीमिंग पूल: सैफई में 207 करोड़ रू. की लागत से ऑल वेदर स्वीमिंग पूल अक्तूबर, 2016 में बनकर तैयार हो गया था. 107 मीटर चौड़े और 188 मीटर लंबे इस स्वीमिंग पूल में 4,000 दर्शकों के बैठने की क्षमता है. बिजली कनेक्शन न होने कारण पांच साल तक यह बंद पड़ा रहा. जून में राजकीय निर्माण निगम ने इसे खेल विभाग के हवाले किया.

 गेस्ट हाउस: सैफई में पर्यटन विभाग ने 42 करोड़ रू. की लागत से एक गेस्ट हाउस का निर्माण 2015 में शुरू कराया था. इस आधुनिक गेस्ट हाउस में मल्टीस्टोरी पार्किंग के साथ 100 कमरों की व्यवस्था है. 2017 में इसका निर्माण कार्य 90 फीसद पूरा हो गया था पर उसके बाद से इसके अन्य कार्य लंबित हैं.

 मॉडल तालाब: सैफई में मुलायम सिंह यादव की कोठी से सटे मॉडल तालाब का निर्माण जनवरी 2005 में 12 करोड़ रू. में कराया गया. 5,000 वर्ग मीटर में फैले इस तालाब के चारों ओर लाइटें और बीच में फव्वारा लगाकर सौंदर्यीकरण किया गया. बीते पांच वर्षों में देखरेख के अभाव में तालाब बदहाल पड़ा है.

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