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उत्तर प्रदेशः टूट गया चोर बाजार का तिलिस्म

मेरठ के सोतीगंज में 25 साल से चल रहा चोरी की गाड़ियों काट कर निकाले गए कलपूर्जों का 1,000 करोड़ रुपए से अधिक का सालाना कारोबार अब ठप हो चुका है

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काम का कबाड़ सोतीगंज में हाजी इकबाल के जब्त किए गए गैराज में वाहनों के कलपुर्जों की जांच करते सहायक पुलिस अधीक्षक सूरज राय और अन्य पुलिस कर्मी काम का कबाड़ सोतीगंज में हाजी इकबाल के जब्त किए गए गैराज में वाहनों के कलपुर्जों की जांच करते सहायक पुलिस अधीक्षक सूरज राय और अन्य पुलिस कर्मी

मेरठ में सदर कोतवाली से सटे सोतीगंज इलाके के बीचोबीच दिल्ली रोड गुजरती है. इसी रोड के एक किनारे पर पिछले 15 सालों से मोटर पार्ट्स बेचने की दुकान चला रहे हाजी रफीक (65) ने अब जूते बेचने का नया धंधा शुरू किया है. हाजी रकीक कहते हैं ''गाड़ियों के कलपुर्जे बेचने से पहले पुलिस को उनकी खरीद की रसीद दिखानी पड़ेगी. इसलिए यह धंधा बंद करके यह काम शुरू किया है जिसमें हर सामान की रसीद रखी जा सके.''

सोतीगंज में हाजी रफीक जैसे 100 से अधिक मोटर पार्ट्स की बिक्री करने वाले दुकानदार अब दूसरे काम-धंधे की खोज में जुट गए हैं. चोरी के वाहनों को काटकर उनके स्पेयर पार्ट्स के अवैध धंधे के लिए पूरे देश में कुख्यात सोतीगंज में केवल जरायम का ही सिक्का चलता था. ग्राहकों से पटी सड़कें और सड़कों के बीचोबीच तक बेतरतीब रखे मोटर पार्ट्स सोतीगंज की पहचान थी. करीब चार हजार मकानों वाले सोतीगंज में मोटर पार्ट्स बेचने की 400 से अधिक दुकानें हैं. किसी भी गाड़ी का कैसा भी मोटर पार्ट्स हो सोतीगंज में बिकता मिल जाता था. यही वजह थी कि देश भर के लोग सोतीगंज में मोटर पार्ट्स खरीदने पहुंचते थे.

यह सोतीगंज का आपराधिक तिलिस्म ही था जिससे मेरठ का पुलिस-प्रशासन भी खौफ खाता था. चोरी की गाड़ियों के कलपुर्जे अवैध रूप से बेचे जाने की सूचना पर 23 जनवरी, 2015 को पहली बार मेरठ के सोतीगंज में दिल्ली पुलिस की स्पेशल क्राइम ब्रांच की टीम और सदर पुलिस बड़ी छापेमारी करने पहुंची थी. पुलिस के सोतीगंज पहुंचने पर हथियारों से लैस कबाड़यों ने हमला कर दिया. पुलिस को घेर कर पीटा और गाड़ियों के अवैध कटान में शामिल जान मोहम्मद को पुलिस कस्टडी से छुड़ा लिया. पुलिस को जान बचाकर भागना पड़ा. बाद में पुलिस ने सात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया. इससे पहले भी 16 नवंबर, 2014 को मेरठ के सदर थाने की पुलिस ने सोतीगंज में चल रहे अवैध मोटर गैराज की जांच के लिए अभियान शुरू किया. पहले ही दिन पुलिस को कबाड़ियों ने घेरकर मारपीट की. नतीजा पुलिस को अभियान बंद करना पड़ा.

बॉलीवुड फिल्म सरीखी ये घटनाएं बताती हैं कि मेरठ में सदर थाने से सटा हुआ सोतीगंज इलाके में कबाड़ माफिया किस कदर बेखौफ थे. अब सोतीगंज का माहौल पूरी तरह से बदल चुका है. यहां चल रहीं मोटर पार्ट्स की दुकानें पहली बार 12 दिसंबर से बंद हैं. ग्राहकों से पटी रहने वाली सड़कों पर सन्नाटा है. कबाड़ माफिया के गोदाम और घर पर कुर्की के नोटिस चस्पा हैं. पुलिस दबिश मारकर सोतीगंज के मोटर गैराज में रखे सामानों की जांच में जुटी है. इन सोतीगंज में हुआ यह अभूतपूर्व बदलाव उस वक्त चर्चा में आया जब 18 दिसंबर को शाहजहांपुर में गंगा एक्सप्रेसवे के शि‍लान्यास के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण में इसका जिक्र किया. मोदी ने कहा, ''कहीं भी गाड़ी की चोरी होती थी तो वह कटने के लिए मेरठ ही आती थी. बरसों से यह चल रहा था लेकिन पूर्व की किसी सरकार ने इसे रोकने की इच्छाशक्ति नहीं दिखाई. यह काम कर दिखाया योगी सरकार ने.''

मेरठ में सदर थाने के पास और दिल्ली रोड के इर्दगिर्द बसा सोतीगंज इलाके में आजादी के बाद से कोयला, रद्दी और पशुओं के चारे का व्यवसाय होता था. मेरठ कालेज में अर्थशास्त्र विभाग के प्रोफेसर डॉ. मनोज सिवाच बताते हैं, ''वर्ष 1991 के बाद उदारीकरण के दौर में भारतीय बाजार महंगी 'इंपोर्टेड' गाड़ियों के लिए खुला. चार और दो पहिया गाड़ियों की अचानक बाजार में आवक बढ़ी. दिल्ली, पंजाब, हरियाणा में मोटर बाइक और कारों की बिक्री में इजाफा हुआ. इसी के साथ मेरठ के सोतीगंज इलाके में गाड़ियों की मरम्मत का धंधा भी शुरू हुआ.'' वर्ष 1995 तक सोतीगंज में गाड़ियों की मरम्मत करने के लिए छोटे-बड़े करीब 25 ही गैराज थे जो ढाई दशक बाद वर्ष 2021 में बढ़कर 1000 से अधिक हो गए हैं.

दिल्ली-एनसीआर, पंजाब, हरियाणा समेत देश के कई हिस्सों से गाड़ियां चोरी होकर सोतीगंज कटने को पहुंचती थीं. डॉ. मनोज सिवाच बताते हैं, ''चोरी की गाड़ियों को सस्ते में खरीद कर उनके पार्ट्स बेचकर कबाड़ कारोबारी 20 से 30 गुना मुनाफा कमाते थे. तेजी से इस अवैध कारोबार के बढ़ने के पीछे यही अर्थशास्त्र था.'' पुलिस के मुताबिक सोतीगंज में एक वर्ष चोरी की गाड़ियां काट कर निकाले गए मोटर पार्ट्स का सालाना कारोबार 1000 करोड़ रुपए से अधिक है.

सोतीगंज में वर्ष 1993 में गैराज खोलने वाले मोटर मैकेनिक हाजी गल्ला ने सबसे पहले चोरी की गाड़ियां खरीदकर उन्हें काटकर कलपुर्जे बेचने का अवैध कारोबार शुरू किया. दिल्ली में वाहनों की बढ़ती संख्या और सुरक्षिहत पार्किंग की जगह न होने से वाहन चोरी करना आसान हुआ और हाजी गल्ला ने इसका पूरा फायदा उठाकर गाड़ियों की कटान के धंधे का सरताज बन बैठा. हाजी गल्ला पर पहली सख्त कार्रवाई जनवरी, 2015 में तत्कालीन युवा सहायक पुलिस अधीक्षक और 2011 बैच के आइपीएस अधिकारी अभिषेक सिंह ने की. अभिषेक ने हाजी गल्ला के वेस्ट एंड रोड स्थिेत गोदाम पर छापा मारकर बड़ी संख्या में वहां से गाड़ियों के अवैध कलपुर्जे बरामद किए थे. इसके बाद 10 फरवरी, 2015 को हाजी गल्ला को गिरफ्तार कर लिया गया था. हालांकि बाद में हाजी गल्ला न केवल जमानत पर रिहा हो गया बल्कि उसने अपनी राजनैतिक पहुंच का फायदा उठा कर प्रोन्नत होकर मेरठ के एसपी सिटी के पद पर तैनात हुए अभिषेक सिंह का दूसरे जिले में तबादला भी करवा दिया. इसके बाद हाजी गल्ला बिना किसी डर के अपने अवैध कारोबार में लगा रहा.

2 दिसंबर, 2020 को आइपीएस अधिकारी सूरज राय मेरठ के सहायक पुलिस अधीक्षक और क्षेत्राधिकारी सदर के पद पर तैनात हुए. तैनाती के अगले दिन सूरज अपनी मां के साथ मेरठ के प्रतिष्ठित औघड़नाथ मंदिर दर्शन करने गए. सूरज बताते हैं, ''औघड़नाथ मंदिर परिसर में कृष्ण मंदिर के पुजारी अपने बेटे की पैशन मोटर बाइक चोरी होने पर काफी दुखी थे. उन्होंने ही मुझे सोतीगंज में गाड़ियों के कटने की जानकारी दी.'' इसके बाद सूरज ने बाइक चोरी करने वालों के खिलाफ अभियान छेड़ दिया. सूरज ने सोतगंज में सक्रिय दोपहिया वाहनों के कबाड़ माफिया मन्नू कबाड़ी और इरफान उर्फ राहुल काला पर शिकंजा कसना शुरू किया. 20 दिसंबर को मन्नू कबाड़ी को गि‍रफ्तार कर लिया गया. सबसे बड़ी चुनौती उस दुरुस्त कागजी कार्रवाई की थी जिसके अभाव में अभी तक ये कबाड़ माफि‍या जेल से छूट जाते थे. इसके लिए सूरज ने गैंगेस्टर एक्ट के सेक्शन 14 (1) का सहारा लिया. इस सेक्शन के अनुसार अगर विवेचक को यह जानकारी मिलती है कि अपराधी ने अपनी संपत्ति अपराध के बल पर अर्जित की है तो उसे जब्त किया जा सकता है.

सूरज राय ने मन्नू कबाड़ी की फाइल खोली. इनसे संपत्ति की जानकारी, पिछले दस साल के इंकम टैक्स रिटर्न, बैंक स्टेटमेंट मांगे गए तो पाया गया कि मन्नू कबाड़ी के पास संपत्ति से जुड़े कोई भी दस्तावेज मौजूद नहीं हैं. सूरज राय ने सबसे पहले गैंगेस्टर एक्ट के सेक्शन 14 (1) का उपयोग करके मन्नू कबाड़ी की छह बीघा जमीन, दो बसें और 1 करोड़ से अधिक की बेनामी संपत्ति जब्त कर ली. मन्नू कबाड़ी को पिछले वर्ष दिसंबर में गिरफ्तार करने के बाद तहसील से जमीन का कागज, रजिस्ट्रार आफिस से रजिस्ट्रेशन के पेपर, संभागीय परिवहन कार्यालय से वाहनो की जानकारी के साथ नगर निगम और आयकर विभाग से जानकारी जुटाने में छह माह से अधिक समय लग गया.

सूरज ने हर विभाग से जानकारी जुटाने के लिए अलग-अलग टीम का गठन किया. इसी प्रक्रिया के तहत मार्च में गिरफ्तार हुए राहुल काला के सोतीगंज में गोदाम और उसके मकान की कुर्की कराई गई है. इस कड़ी कार्रवाई के बाद मेरठ और आसपास के जिलों दोपहिया वाहनों की चोरी में 70 फीसद की गिरावट आई है. मन्नू के भाई जावेद और आकिब भी दोपहिया वाहन काटने के धंधे में सहयोग करते थे लेकिन इनका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है. सूरज ने जावेद और आकिब को गुंडा एक्ट में नामजद किया और हिस्ट्रीशीट खुलवाकर छह महीने के लिए दोनों को जिलाबदर करा दिया. सोतीगंज में एक वर्ष में 10,000 से 12,000 दोपहिया वाहन काटे जाते थे जिसे अब पूरी तरह से बंद करा दिया गया है.

इस वर्ष मई तक दोपहिया वाहनों की कटान भले ही बंद हो गई हो लेकिन चौपहिया वाहनों की कटान अभी भी जारी थी. इसी बीच जून में प्रभाकर चौधरी ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) की कमान संभालने के बाद सोतीगंज में चार पहिया वाहनों की चोरी और अवैध कटान के धंधे को नेस्तोनाबूद करने का अभियान शुरू किया. प्रभाकर ने कबाड़ माफिया के खिलाफ अभियान चलाने का यह जिम्मा भी सूरज राय को सौंपा. सबसे पहले दो बड़े माफि‍या हाजी गल्ला और हाजी इकबाल के कारोबार से जुड़ी सारी जानकारियां जुटाई गई. इसके बाद हाजी गल्ला के पूरे परिवार को और हाजी इकबाल के तीनों बेटों पर गैंगेस्टर एक्ट तामील कर दिया गया. इन दोनों को जेल भेजा गया. हाजी गल्ला और हाजी इकबाल पर कार्रवाई के बाद तीसरे बड़े कबाड़ माफिया शाकिब उर्फ गद्दू पर कार्रवाई की गई. गैंगेस्टर एक्ट सेक्शन 14 (1) के तहत गद्दू की पांच करोड़ की संपत्ति जब्त करने की कार्रवाई की जा रही है. सोतीगंज में गाड़ियों को काटकर उनके मोटर पार्ट्स बेचने की तह तक जाने के लिए प्रभाकर चौधरी ने सितंबर के महीने में गाजियाबाद स्थित पुलिस फोरेंसिक लैब की एक टीम को भी सोतीगंज बुलाया.

फोरेंसिंक टीम ने यहां बिक रहे गाड़ियों के 110 इंजन की जांच की. जांच में पता चला कि इनमें से 70 से ज्यादा इंजन पर दर्ज नंबर से छेड़छाड़ की गई थी. फोरेंसिक टीम ने 30 गाड़ियों के मूल इंजन नंबर भी प्राप्त कर लिए जिनके आधार पर यह पता चला कि ये इंजन चोरी की गाड़ियों से निकाले गए हैं. इसके बाद सोतीगंज में चोरी की गाड़ियों सोतीगंज में गाड़ियों के अवैध कटान से जुड़े 50 कबाड़ कारोबारियों की गिरफ्तारी की जा चुकी है. इन कार्रवाइयों के चलते गाड़ियों की चोरी में 70 फीसदी से अधिक की गिरावट आ चुकी है. बावजूद इसके मेरठ और आसपास के इलाकों में अभी भी गाड़ियां चोरी की छिटपुट जानकारी पुलिस के मिल रही है. इस पर नजर रखने के लिए एसएसपी प्रभाकर चौधरी ने सोतीगंज में मोटर पार्ट्स बेचने वाली 300 दुकानों की एक सूची तैयार कर सभी दुकानों की अलग-अलग फाइल बनाई है. इन सभी दुकानों का ब्योरा वाणिज्यकर विभाग को भेज इनका जीएसटी रि‍जस्ट्रेशन कराने का अनुरोध किया है ताकि इन दुकानों से बिकने वाले मोटर पार्ट्स पर नजर रखी जा सके.

कागजी कार्रवाई को दुरुस्त रखने के लिए दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) के सेक्शन 91 और 149 का सहारा लिया गया है. 91 सीआरपीसी के अनुसार विवेचक किसी भी अपराध से संबंधित सूचना किसी से भी मांग सकता है. इसके तहत सोतीगंज में 101 दुकानदारों को नोटिस जारी कर उनके यहां बिकने वाले सभी सामानों की जानकारी मांगी गई है. सीआरपीसी के सेक्शन 149 में पुलिस को संज्ञेय अपराध रोकने के लिए कार्रवाई करने की शक्ति दी गई है. इसके तहत दुकानदारों को जारी नोटिस में निदेश दिया गया कि जांच जारी रहने तक प्रतिष्ठान में रखे मोटर पार्ट्स व अन्य सामानों से कोई भी छेड़छाड़ न की जाए. इसी नोटिस के चलते सोतीगंज में मोटरपार्ट्स की दुकानें पहली बार 12 दिसंबर से लगातार बंद हैं.

पुलिस की इस कार्रवाई पर सवाल भी उठ रहे हैं. सोतीगंज में टायर का काम करने वाले मोहम्मद आबिद के बाबा मोहम्मद असलम ने वर्ष 1947 में चमन टायर के नाम से दुकान खोली थी. मोहम्मद आबिद बताते हैं, ''हम लोग बीमा कंपनी से वो गाड़ियां खरीदते हैं जिनका 'रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट' रद्द हो चुका होता है. इन गाडिय़ों के सही पार्ट्स निकालकर उसे ही बेचा जाता है. पुलिस इन निकाले गए पार्ट्स के बिल मांग रही है जो कि उपलब्ध होना संभव ही नहीं है.'' सोतीगंज को वाहन कटने के कलंक से मुक्ति दिलाने के बाद पुलिस की जिम्मेदारी यहां पर बेरोजगार हुए लोगों के पुनर्वास का माहौल बनाने की भी है. अगर ऐसा नहीं हुआ तो सोतीगंज में फिर गाड़ियां कटने को पहुंचने लगेंगी.

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