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बुलडोजर: सरकार का नया हथियार

योगी सरकार के उत्साही अधिकारियों ने भू-माफिया के खिलाफ जोरदार कार्रवाई कर अरबों रुपए की सरकारी जमीन खाली कराई. कुछ भूखंडों पर गरीबों के लिए मकान बनाए जा रहे हैं

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...और ढहा दिया लखनऊ के जरतगंज इलाके में अवैध रूप से बने अपार्टमेंट को ढहाता बुलडोजर ...और ढहा दिया लखनऊ के जरतगंज इलाके में अवैध रूप से बने अपार्टमेंट को ढहाता बुलडोजर

संगम नगरी के नाम से विख्यात प्रयागराज में सिविल लाइंस चौराहे से करीब 3 किलोमीटर दक्षि‍ण में चकिया चौराहे से केसारी-मसारी रोड पर कदम-कदम पर ध्वस्त पड़ी इमारतें रूस-यूक्रेन जैसी किसी जंग का प्रतिफल नहीं है, इन इमारतों में माफिया अतीक अहमद और उसके गुर्गों का वर्षों से चला आ रहा रसूख जमींदोज है. केसारी-मसारी रोड पर अल हसन फारूकी गर्ल्स इंटर कॉलेज के ठीक सामने माफिया अतीक अहमद के पुश्तैनी मकान पर 28 मार्च को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के तीसरे दिन एक बार फिर प्रयागराज विकास प्राधिकरण (पीडीए) का बुलडोजर गरजने लगा. पुश्तैनी मकान में हुए अस्थाई अवैध निर्माण को धवस्त कर दिया गया.

करीब डेढ़ साल पहले 22 सितंबर, 2020 को 10 हजार वर्ग मीटर जमीन पर फैला अतीक का किलानुमा पुश्तैनी घर बुलडोजर के बाहुबल के आगे जरा भी नहीं ठहर सका. पीडीए ने जांच में पाया था कि यह पूरी कोठी बगैर नक्शा पास कराए अवैध रूप से बनी थी. पहले नोटिस पर नोटि‍स भेजे गए और अंत कोठी को जमींदोज करने के रूप में सामने आया. बीते दो वर्ष के दौरान केवल अतीक अहमद और उसके गुर्गे ही नहीं बल्कि पूर्व विधायक और माफिया विजय मिश्र समेत कई अन्य अपराधियों के शजापुर, अल्लापुर, नैनी, कालिंदीपुरम, अतरसुइया, रसूलाबाद, धूमनगंज इलाकों में अवैध कब्जे से 75 संपत्तियों और जमीनों पर कार्रवाई करके 1,000 बीघा से अधिक सरकारी भूखंडों को मुक्त कराया गया है. पीडीए के मुख्य गेट के बगल में खड़े रहने वाले तीन बुलडोजर इस वक्त अतिक्रमणकारियों और अपराधि‍यों के खि‍लाफ सबसे बड़े हथि‍यार के रूप में समाने आए हैं. 

प्रयागराज की तरह ही गंगा के किनारे बसे कानपुर जिले की खासियत यह है कि यहां नगर निगम की सीमा में आने वाले गांव कानपुर विकास प्रधिकरण (केडीए) की जद में हैं. इस कारण यहां केडीए के पास दूसरे प्राधिकरणों की तुलना में कहीं अधि‍क बड़ा ''लैंड बैंक'' था. जुलाई, 2021 में केडीए के उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभालने वाले अरविंद सिंह ने जब प्राधिकरण की जमीनों का सर्वे कराया तो पाया कि बड़े पैमाने पर इन पर अवैध कब्जे हैं. कारणों की तह तक जाने पर पता चला कि प्राधिकरण के कर्मचारियों की लापरवाही और प्रवर्तन विभाग की बेहद कमजोर हालत जमीनों को अवैध कब्जे से मुक्त करने में रोड़ा थी. अरविंद ने सेना से रिटायर हो चुके 55 पूर्व सैनिकों और दो पूर्व जूनियर कमिशंड ऑफिसर्स को केडीए के प्रवर्तन दस्ते में शामिल किया. प्रवर्तन दल के इन सदस्यों को कमांडो की वर्दी पहनाई. जमीन को अवैध कब्जे से मुक्त कराने की प्रक्रियाओं का प्रशि‍क्षण दिलाया.

यह पूरा प्रवर्तन दस्ता सीधे अरविंद की निगरानी में काम करता है. उसने जमीन पर अवैध कब्जेदारों को नोटिस भिजवाना शुरू किया. विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद 14 मार्च से केडीए ने जमीन के अवैध कब्जेदारों के खिलाफ अभियान छेड़ दिया. एक महीने के भीतर दो दर्जन से अधि‍क अवैध संपत्तियों को बुलडोजर से ढहाया जा चुका है. इनसे 165 करोड़ रुपए की एक लाख वर्ग मीटर जमीन खाली करा ली गई है. खास बात यह है कि अवैध कब्जे से मुक्त हुई जमीनों में 39 हजार वर्ग मीटर निजी भूमि भी है.

विधानसभा चुनाव के बाद प्रयागराज, मेरठ, गाजीपुर, कानपुर समेत पूरे प्रदेश में जमीन से अवैध कब्जे हटाने और अवैध बनी इमारतों पर कार्रवाई के लिए बुलडोजर का सहारा लिया जा रहा है. गृह विभाग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले एक महीने में बुलडोजर के डर से ही 30 से अधिक अपराधी या तो आत्मसमर्पण कर चुके हैं या फिर अपनी जमानत रद करवा कर जेल जा चुके हैं. असल में 2017 में पहली बार यूपी के मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालने वाले योगी आदित्यनाथ ने अप्रैल, 2017 में गृह विभाग की पहली समीक्षा बैठक में अलग-अलग अपराधि‍यों और माफियाओं को उनकी श्रेणी के हिसाब से चिन्हित कर सूची बनाने का निर्देश दिया था. इसके बाद हर जिले में भूमाफिया, खनन माफि‍या, शराब माफिया, वन माफि‍या जैसी श्रेणियों में अपराधि‍यों को सूचीबद्ध किया गया. इसी के साथ 1 मई, 2017 से चार स्तरीय—राज्य, मंडल, जनपद और तहसील स्तर पर ऐंटी भूमाफिया टास्क फोर्स का गठन किया गया. लोकसभा चुनाव के बाद 17 जुलाई, 2019 को सोनभद्र के उम्भा गांव में हुए नरसंहार के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भूमाफि‍या समेत सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा करने वाले अपराधि‍यों पर कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे.

योगी आदित्यनाथ ने अपराधियों पर जमीनी कार्रवाई में तेजी लाने के लिए सक्षम अधिकारियों की एक टीम उतारी. उन्होंने अवनीश अवस्थी को गृह विभाग की कमान सौंपी तो पश्चिमी यूपी में अपराधियों में भय भरने वाले आइपीएस अफसर प्रशांत कुमार को अपर पुलिस महादेशक, कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी सौंपी. मुख्यमंत्री कार्यालय में सचिव रहे सुरेंद्र सिंह को मेरठ, राजशेखर को कानपुर, दीपक अग्रवाल को वाराणसी, अमित कुमार गुप्ता को आगरा, गौरव दयाल अलीगढ़, दिनेश कुमार सिंह चित्रकूट एवं अजय शंकर पांडेय को झांसी मंडल का कमिशनर बनाकर माफियाओं के अवैध कब्जे से सरकारी जमीन खाली कराने का स्पष्ट आदेश दिया गया.

इसके साथ ही विकास प्राधिकरणों में प्रमोटी अफसरों को उपाध्यक्ष पद पर तैनात न करके युवा आइएएस अधिकारियों को कमान सौंपी गई. अनुभवी और युवा अधिकारियों के परस्पर तालमेल से अवैध संपत्तिधयों और सरकारी जमीनों को माफियाओं के चंगुल से मुक्त कराने के अभि‍यान ने तेजी पकड़ी. इसके साथ ही सियासत भी गरमाने लगी. पिछले वर्ष 14 सितंबर को समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखि‍लेश यादव ने मुख्यमंत्री योगी पर तंज कसते हुए कहा, ''भाजपा को अपना चुनाव चिन्ह बुलडोजर कर देना चाहिए.'' इसके बाद विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान अखिलेश यादव ने योगी आदित्यनाथ को कई बार ''बुलडोजर बाबा'' नाम से भी पुकारा. कांग्रेस भी पीछे नहीं रही.

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी योगी को ''बुलडोजरनाथ'' नाम दिया. मेरठ कॉलेज में अर्थशास्त्र विभाग के प्रोफेसर मनोज सिवाच कहते हैं, ''बुलडोजर के बहाने घेरने की विपक्षी दलों की चाल की काट के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुलडोजर को यूपी की कानून व्यवस्था का प्रतीक बना दिया. उन्होंने लगातार अपने भाषणों में चुनाव खत्म होते ही अपराधियों पर फिर से बुलडोजर चलाने की घोषणा की. इस तरह बुलडोजर ने योगी की छवि को सख्त प्रशासक के रूप में तब्दील करने में बड़ी भूमिका निभाई.'' योगी की चुनावी जनसभा में बुलडोजर खड़ा करके उनकी सख्त छवि को और पुख्ता किया जाने लगा. 

दस मार्च को विधानसभा चुनाव के नतीजों में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को दोबारा बहुमत मिलते ही अपराधि‍यों पर बुलडोजर दोबारा गरजने लगे. अपराधियों पर कार्रवाई की सीधी निगरानी कर हर हफ्ते कब्जा मुक्त हुई सरकारी भूमि की रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी के सामने रखने वाले गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव अवनीश अवस्थी ने लोकभवन के सी-ब्लॉक के पांचवें तल पर अपने दफ्तर को ही कंट्रोल रूम में तब्दील कर लिया है. अवस्थी बताते हैं, ''अब तक 2,000 करोड़ रुपए से अधिक की कीमत वाली कुल जमीन को अपराधियों के अवैध कब्जे से मुक्त कराया जा चुका है.'' पिछले पांच वर्ष में प्रदेश के ऐंटी भूमाफिया पोर्टल पर अवैध कब्जे से संबंधित कुल 3,19,708 शिकायतें प्राप्त हुई हैं, जिनमें से 3,17,462 शिकायतें निस्तारित की गईं और 2,246 निस्तारण के लिए बाकी हैं. ऐंटी भूमाफिया अभियान के तहत साढ़े 64 हजार हेक्टयर भूमि को मुक्त कराया गया है.

यूपी में अपराधियों से निबटने में बुलडोजर की सफलता अब दूसरे प्रदेशों के सामने भी मिसाल बन रही है. मध्य प्रदेश में 30 मार्च की रात रीवा में एक नाबालिग लड़की से रेप के बाद चौतरफा नाराजगी थी. इसी बीच एक सार्वजनिक कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री गुस्से से कहते हैं, ''कलेक्टर, एसपी, आइजी, सब कहां हैं, ये हमारे बुलडोजर कब काम आएंगे? करो इन्हें जमींदोज.'' अगले ही दिन पुलिस ने आरोपी के घर को बुलडोजर से जमींदोज कर दिया. गुजरात के आणंद जिले में 15 अप्रैल को सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण को बुलडोजर से ढहाया गया. दिल्ली के जहांगीपुरी में हिंसा के बाद 20 अप्रैल को दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) की ओर से अवैध निर्माण और आरोपियों की संपत्तियों पर बुलडोजर चला. कुछ देर बाद मामला सुप्रीम कोर्ट की चौखट पर पहुंच गया. सुप्रीम कोर्ट ने जहांगीरपुरी में बुलडोजर की कार्रवाई पर रोक लगाते हुए दिल्ली और यूपी सरकार से जवाब मांगा है. हालां‍कि यूपी में बुलडोजर की कार्रवाई के वि‍रोध में हाइकोर्ट ने एक दर्जन याचिकाओं पर कोई राहत नहीं दी है.

इलाहाबाद हाइकोर्ट में निर्माण को बुलडोजर से ढहाने के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ रहे वकील मनोजकांत राय बताते हैं, ''पुलिस गैंगेस्टर ऐक्ट के तहत संपत्ति केवल कुर्क कर सकती है, उस पर बुलडोजर नहीं चला सकती. यह गैर कानूनी है. अरबन डेवलपमेंट ऐक्ट-1973 के तहत अगर अतिक्रमण या सार्वजनिक जगह पर कोई निर्माण किया तो बिना नोटिस उस पर कार्रवाई नहीं कर सकते. अगर कोई अपनी जमीन पर बिना नक्शा निर्माण कराता है तो विकास प्राधिकरण धारा-32 समन जारी करेगा. प्राधिकरण आर्थिक दंड दे सकता है. केवल सड़क के किनारे अतिक्रमण पर ही ढहाने की कार्रवाई हो सकती है.'' अपराधि‍यों के अवैध कब्जे से जमीन मुक्त कराने के लिए योगी सरकार ने अपने पहले कार्यकाल में ''उत्तर प्रदेश गिरोहबंद और समाज विरोधी क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम-1986'' या गैंगेस्टर ऐक्ट में संशोधन किया था. उच्च न्यायालय में फौजदारी मामलों के वकील शैलेंद्र प्रताप बताते हैं, ''2021 में योगी सरकार ने गैंगेस्टर ऐक्ट में संशोधन कर आरोपी की संपत्ति जब्त करने का प्रावधान भी किया था.

गैंगेस्टर ऐक्ट में पहले भी संपत्ति जब्त करने का प्रावधान था लेकिन यह वैकल्पिक ही होता था. अलग-अलग केस के आधार पर इसका निर्णय लिया जाता था.'' संशोधन के बाद गैंगेस्टर ऐक्ट तहत अपराधी की संपत्ति‍ जब्त करने के जिलाधिकारी के अधिकार में भी इजाफा किया गया है. अब जिलाधिकारी के पास यह अधिकार है कि एक ही अपराध करने पर आरोपी पर गैंगेस्टर ऐक्ट की कार्रवाई की जा सकती है. पहले इसके लिए आरोपी पर कम से कम दो मुकदमे दर्ज होना जरूरी था. पहले गैंगेस्टर ऐक्ट की कार्रवाई उसी पर होती थी जिसका नाम गैंग चार्ट में दर्ज होता था. जांच के दौरान विवेचक नाम नहीं बढ़ा सकता था. नई नियमावली में अपराध में संलिप्तता मिलने पर या अपराधी का सहयोग करने का सबूत मिलने पर किसी का भी नाम बढ़ाया जा सकता है, बस इसके लिए जिलाधिकारी की अनुमति लेनी होगी. गैंगेस्टर ऐक्ट के तहत अब यूपी में डिप्टी कमिशनर रैंक का अधिकारी भी आरोपी की संपत्ति अटैच करने का आदेश दे सकता है.

जानकार केवल गैंगेस्टर ऐक्ट में संशोधन मात्र से सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे के मामले रुकने पर संदेह जाहिर कर रहे हैं. रजिस्ट्री विभाग में प्रशासनिक अधिकारी पद से सेवानिवृत्त हुए मुकेश सिंह बताते हैं, ''रजिस्ट्री ऑफि‍स में कोई संपत्ति की रजिस्ट्री कराने आता है तो उसकी यह जांच नहीं होती है कि उसने जमीन से जुड़े जो कागजात पेश किए हैं वे असली हैं कि नहीं. भूमाफिया इसी का फायदा उठाते हैं. वे सरकारी जमीनों के फर्जी कागजात तैयार करके उसकी अपने या किसी दूसरे के नाम रजिस्ट्री करवा लेते हैं. इस तरह उन पर काबिज हो जाते हैं.''

गाजीपुर के पूर्व पुलिस अधीक्षक ओम प्रकाश सिंह ने जून 2019 में जब जिले में मौजूद एयरस्ट्रिप के समीप मुख्तार अंसारी के हॉटमिक्स प्लांट की जांच की तो पता चला कि प्लांट का एक बड़ा हिस्सा सरकारी जमीन पर काबिज है. मुख्तार अंसारी के अवैध कब्जों पर कार्रवाई की शुरुआत इसी हॉटमिक्स प्लांट को ढहाकर की गई. ओम प्रकाश सिंह‍ बताते हैं, ''भूमाफि‍या सरकारी जमीन के बगल में जमीन का एक छोटा टुकड़ा खरीदते हैं. इस पर कुछ निर्माण शुरू करते हैं और धीरे धीरे सरकारी जमीन को भी अपने कब्जे में ले लेते हैं.''

जमीनों को ऐसे अवैध कब्जे से बचाने के लिए विकास प्राधि‍करण कई तरह की तकनीक का सहारा ले रहे हैं. आगरा विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष राजेंद्र पैंसिया बताते हैं, ''रिमोट सेंसिंग तकनीकी के जरिए विकास प्राधिकरण की सारी जमीनों और संपत्तियों की सीमाओं और निर्माण की वर्ष में चार बार जांच करने की योजना शुरू की गई है. इससे वर्ष में दो बार तुलनात्मक रिपोर्ट तैयार होगी.''

माफियाओं के अवैध कब्जे से मुक्त कराई गई जमीन पर गरीबों के लिए मकान बनाने का देश का पहला प्रोजेक्ट प्रयागराज के लूकरगंज इलाके में आकार ले रहा है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा चुनाव की घोषणा से पहले 26 दिसंबर को लूकरगंज पहुंचकर 14 हजार वर्ग मीटर में फैली इस आवास योजना का भूमिपूजन और शिलान्यास किया था. प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत यहां पर चार मंजिला दो ब्लॉक में कुल 76 फ्लैट तैयार किए जाएंगे. इस योजना को 18 महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. इसी तर्ज पर यूपी के अन्य विकास प्राधिकरण भी अपने इलाकों में मुक्त भूखंडों पर गरीबों के लिए आवास योजनाओं का खाका तैयार करने में जुटे हैं.

इस तरह योगी सरकार भूमाफियाओं का नुक्सान करके गरीबों का फायदा कराने और उनकी वाहवाही लूटने में लगी है.

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