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खास रपटः घरों में होने लगी घुसपैठ

अगले विधानसभा चुनावों के लिए पाले अब साफ-साफ खिंचने लगे. भाजपा ने सपा के मजबूत इलाकों में तो सपा ने भाजपाई गढ़ों में घुसपैठ के दांव चलने शुरू किए

नींव हो मजबूत आजमगढ़ में पिछले हफ्ते विश्वविद्यालय की आधारशिला रखते केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, साथ में अन्य भाजपा नेता नींव हो मजबूत आजमगढ़ में पिछले हफ्ते विश्वविद्यालय की आधारशिला रखते केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, साथ में अन्य भाजपा नेता

पूर्वी उत्तर प्रदेश का राजनैतिक तापमान 13 नवंबर को आम दिनों की तुलना में कहीं ज्यादा था. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के संसदीय क्षेत्र आजमगढ़ में बनने वाले राज्य विश्वविद्यालय का शिलान्यास करने के लिए उपस्थित थे. आजमगढ़ के यशपालपुर-आजमबांध गांव में 108 करोड़ रु. की लागत से 49.42 एकड़ में बनने वाले विश्वविद्यालय के शिलान्यास कार्यक्रम के दौरान जनसभा को संबोधि‍त करते हुए शाह ने कहा, ''मैं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अपील करूंगा कि नए बनने वाले विश्वविद्यालय का नाम विदेशी आक्रांताओं से मुक्ति दिलाने वाले महाराजा सुहेलदेव के नाम पर रखा जाए. अब आजमगढ़ में भी परिवर्तन की शुरुआत होगी और सभी विधानसभा सीटों पर कमल खिलेगा.'' शाह के प्रस्ताव पर सहमति जताते हुए मुख्यमंत्री योगी ने फौरन मंच से विश्वविद्यालय का नाम ''सुहेलदेव राज्य विश्वविद्यालय'' करने का ऐलान कर दिया.

सपा के गढ़ आजमगढ़ में सुहेलदेव के नाम पर विश्वविद्यालय की स्थापना सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की रणनीति का हिस्सा है. 2017 का विधानसभा चुनाव भाजपा के साथ मिलकर लड़ने वाले, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर राजा सुहेलदेव को अपना आदर्श मानते हैं. भाजपा से प्लग निकालकर सुभासपा ने अबकी सपा से तार जोड़े हैं. 27 अक्तूबर को सपा और सुभासपा की एक बड़ी रैली मऊ में हो चुकी है. अखिलेश के संसदीय क्षेत्र आजमगढ़ में सुहेलदेव के नाम पर विश्वविद्यालय की स्थापना का ऐलान कर भाजपा ने एक तीर से दो निशाने साधने की कोशिश की है.

शाह और योगी 13 नवंबर को जिस समय आजमगढ़ में विश्वविद्यालय का शिलान्यास कर रहे थे उसी समय वहां से 100 किलोमीटर दूर गोरखपुर में अखिलेश सपा की ''विजय यात्रा'' का श्रीगणेश कर रहे थे. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह जिले में यात्रा की शुरुआत से पहले शंखनाद और मंत्रोच्चार से अखिलेश का स्वागत किया गया. गोरखपुर के कुसुंभी बाजार में आयोजित जनसभा में अखि‍लेश ने मुख्यमंत्री योगी पर तंज कसा. उन्होंने कहा ''योगीजी ने युवाओं को लैपटॉप इसलिए नहीं दिया क्योंकि उन्हें खुद लैपटॉप चलाना नहीं आता. यूपी को योगी सरकार नहीं, योग्य सरकार की जरूरत है. वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में बाबा जी (योगी) के इलाके में भी बदलाव दिखाई पड़ेगा.''

योगी और अखि‍लेश ने एक दूसरे के गढ़ में रैलियां करके 2022 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले यह साफ करने की कोशिश की है कि सियासी मैदान पर आमने-सामने ताल ठोंकने वाले आखिर कौन हैं? आजमगढ़ के प्रतिष्ठित शिबली नेशनल कॉलेज में राजनीति शास्त्र के पूर्व विभागाध्यक्ष और पूर्व प्राचार्य ग्यास असद खान कहते हैं, ''यह स्पष्ट हो गया है कि 2022 के विधानसभा चुनाव में योगी आदित्यनाथ ही भाजपा का चेहरा होंगे. यही वजह है कि अखिलेश यादव सीधे उन्हीं पर हमला करके प्रदेश की भाजपा सरकार के खिलाफ जनमत तैयार करने की कोशिश कर रहे हैं. गोरखपुर से पूर्वांचल में सपा की विजय यात्रा की शुरुआत इसी रणनीति का हिस्सा है. 2022 के चुनाव में भाजपा कुछ ऐसी सीटें हारेगी जिन पर 2017 में जीती थी. इन्हीं हारने वाली सीटों को बैलेंस करने के लिए योगी ने सपा के गढ़ में नई सीटें जीतने की योजना तैयार की है. सपा के गढ़ में योगी की सक्रियता से यही निष्कर्ष निकल रहा है.''

मार्च, 2017 में मुख्यमंत्री बनने के साल भर बाद ही योगी आदित्यनाथ ने सपा के गढ़ में भाजपा की पकड़ मजबूत करने के प्रयास शुरू कर दिए थे. इसी रणनीति के तहत 1 जून, 2018 में योगी ने पहली बार सपा के संरक्षक मुलायम सिंह यादव के गृह जिले का दौरा किया. इस दौरान मुख्यमंत्री ने 665 करोड़ रुपए की विकास योजनाओं का शिलान्यास किया. इसके बाद योगी चार बार इटावा का दौरा कर चुके हैं. योगी अपने हर दौरे में न केवल विकास योजनाओं की शुरुआत करते हैं बल्कि सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश और परिवारवाद की आलोचना भी करते हैं.

योगी ने 6 नवंबर को इटावा पहुंचकर यूपी में नवनिर्मित छठी सेंट्रल जेल का लोकार्पण किया. इस मौके पर आयोजित जनसभा में योगी ने कहा, ''यूपी में पहले एक परिवार का ही विकास हो रहा था, अब प्रदेश की 25 करोड़ जनता को विकास योजनाओं का लाभ मिल रहा है.'' सपा के गढ़ में योगी की सक्रियता को अखिलेश के चचेरे भाई और बदायूं से पूर्व सांसद धर्मेंद्र यादव बेनतीजा रहने वाली कवायद बता रहे हैं. वे कहते हैं, ''योगी आदित्यनाथ जनता का समर्थन खो चुके हैं, इसलिए सपा के गढ़ में रैलियां करके अपनी खीज मिटा रहे हैं. 2022 के विधानसभा चुनाव में इन इलाकों में भाजपा एक भी सीट नहीं जीत पाएगी.''

खास रपटः घरों में होने लगी घुसपैठ
खास रपटः घरों में होने लगी घुसपैठ

वर्ष 2022 के चुनाव से पहले मुख्यमंत्री योगी ने हारी हुई विधानसभा सीटों पर ध्यान केंद्रित किया है. 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 384 सीटों पर चुनाव लड़कर 312 सीटें जीती थीं. बीते साढ़े चार साल के दौरान हुए विधानसभा उपचुनाव में वे चार सीटें हार चुकी है. राजभर से गठबंधन टूटने के बाद भाजपा ने 2017 के विधानसभा चुनाव में सुभासपा को दी गई आठ सीटों को भी हारी हुई सीटों की संख्या में शामिल किया है. इस तरह योगी ने कुल 84 विधानसभा सीटों पर फोकस किया है. इसी रणनीति के तहत मुख्यमंत्री योगी ने बदायूं जिले में 1,358 करोड़ रु. की लागत से 350 विकास योजनाओं का लोकार्पण सहसवान विधानसभा क्षेत्र में किया. 2017 में भाजपा ने इस जिले की पांच में से चार विधानसभा सीटों पर जीत हासिल की थी लेकिन सहसवान सीट सपा के हाथ लगी थी. सहसवान इलाके में आयोजित जनसभा में योगी ने मंच से कहा, ''बदायूं में सहसवान सपा का आखिरी किला बचा है, 2022 के विधानसभा चुनाव में इसे भी ढहा देना.'' जवाब में मौजूद भीड़ ने हुंकार भरते हुए योगी की अपील का समर्थन किया.

पश्चिमी यूपी का मुरादाबाद मंडल मुख्यमंत्री योगी के लिए सिरदर्द बना हुआ है. मुरादाबाद मंडल में अमरोहा, बिजनौर, मुरादाबाद, संभल और रामपुर जिले आते हैं. 2019 के लोकसभा चुनाव में मुरादाबाद मंडल की सभी पांच लोकसभा सीटों पर भाजपा को सपा-बसपा गठबंधन से हार का सामना करना पड़ा था. अमरोहा और बिजनौर सीट बसपा ने जीती थी जबकि सपा ने संभल, रामपुर और मुरादाबाद सीट पर जीत हासिल की थी. 2017 के विधानसभा चुनाव में मुरादाबाद मंडल की सीटों पर भाजपा को सपा से सीधी चुनौती मिली थी. यहां की 27 सीटों में से भाजपा 14 पर जीती थी जबकि 13 सीटों पर सपा के उम्मीदवार विजयी रहे थे. 2022 के विधानसभा चुनाव में मुरादाबाद मंडल में सपा के गढ़ को भेदने के लिए योगी ने पूरी ताकत लगा दी है.

खास रपटः घरों में होने लगी घुसपैठ
खास रपटः घरों में होने लगी घुसपैठ

मुख्यमंत्री का कार्यभार संभालने के दो महीने बाद 21 मई, 2017 को योगी ने मुरादाबाद जिले का पहला दौरा किया था. उसके बाद से अब तक योगी 11 बार मुरादाबाद आ चुके हैं जो पश्चिमी यूपी के किसी जिले में उनका सर्वाधि‍क दौरा है. इनमें आठ दौरे 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद किए गए हैं. सपा के गढ़ में योगी की सक्रियता के प्रत्युत्तर में सपा ने भी भाजपा के गढ़ में ध्यान केंद्रित किया है. अखिलेश ने 8 जनवरी को चित्रकूट का दौरा कर पहली बार यहां पर कामदगिरि पर्वत की परिक्रमा भी की थी. इसके बाद अगले दो महीनों के दौरान अखि‍लेश ने वाराणसी, प्रयागराज, मथुरा जैसे भाजपा के गढ़ माने जाने वाले जिलों का दौरा कर सपा की रणनीति को अमलीजामा पहनाने की कोशि‍श शुरू कर दी थी. कोरोना की दूसरी लहर के दौरान अखिलेश ने दौरा स्थगि‍त रखा. उसके बाद उन्होंने भाजपा के गढ़ में जनाधार मजबूत करने के लिए सपा के ''फ्रंटल ऑर्गेनाइजेशन'' को जिम्मेदारी सौंपी है.

बीते एक महीने के दौरान गोरखपुर, वाराणसी, प्रयागराज, समेत भाजपा की मजबूत पकड़ वाले सभी जिलों में सपा पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ, महिला सभा, व्यापार प्रकोष्ठ की बैठकें हो चुकी हैं. भाजपा के गढ़ वाले इलाकों में वरिष्ठ नेताओं को पार्टी में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देकर अखिलेश ने भाजपा के ''हिंदुत्व एजेंडे'' को निष्प्रभावी करने की रणनीति बनाई है. अयोध्या के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक जयशंकर पांडेय को सपा का उपाध्यक्ष बनाया गया है. पांडेय अयोध्या, आंबेडकर नगर समेत आसपास के जिलों में लगातार जनसंपर्क कर रहे हैं. पांडेय दावा करते हैं कि ''2017 के विधानसभा चुनाव में जिन जिलों की सभी सीटें भाजपा ने जीती थीं वहां पर विकास का कोई भी कार्य नहीं हुआ है. यह बात जनता को अच्छी तरह से समझ में आ चुकी है. इन जिलों में आयोजित हो रहे सपा के कार्यक्रमों में उमड़ने वाली भीड़ यह इशारा भी कर रही है.''

बहरहाल, इतना तय है कि एक-दूसरे के गढ़ में सेंध लगाने की होड़ में जो पार्टी आगे निकलेगी, वही 2022 के विधानसभा चुनाव में भी अगुआ रहेगी.

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