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''जब मैंने बिना एक भी मौत के 1989 में कोलकाता में दिल का 100वां ऑपरेशन किया...

...मैं समझ गया था कि देश में हृदय की सर्जरी में एक क्रांति लाई जा सकती है.’’

देवी शेट्टी देवी शेट्टी

जिंदगी का निर्णायक पल
देवी शेट्टी, 67 वर्ष


इस हार्ट सर्जन ने भारत के लाखों लोगों को विश्वस्तरीय लेकिन सस्ती स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना, अपने जीवन का उद्देश्य बना लिया. उनकी शुरू की गई मल्टी-स्पेशिएलिटी अस्पतालों की शृंखला, नारायण हेल्थ आज 18 शहरों में मौजूद है और उसी उद्देश्य के साथ आगे बढ़ रही हैं

जब देवी शेट्टी मात्र 14 साल के थे, उस समय चिकित्सा की दुनिया में कुछ उल्लेखनीय हुआ. दक्षिण अफ्रीकी कार्डिएक सर्जन क्रिस्टियान बर्नार्ड ने दुनिया का पहला मानव-से-मानव में हृदय प्रत्यारोपण किया और मरीज 18 दिनों तक जीवित रहा. शेट्टी, जो कर्नाटक के मैंगलोर में एक स्कूल में पढ़ रहे थे, इसके बारे में सुनकर इतने उत्साहित थे कि उन्होंने फैसला किया कि वे कार्डिएक सर्जन ही बनेंगे. अपने शहर में डॉक्टरों को मिलने वाले सम्मान को उन्होंने अपनी आंखों से देखा था. इससे उनकी यह लालसा और प्रबल होती गई. वे याद करते हैं, ''लोग डॉक्टरों को ऐसे देखते थे जैसे कि वे देवता हों.’’

अपनी उस महत्वाकांक्षा को पूरा करने के लिए शेट्टी ने एमबीबीएस और सर्जरी में पीजी की पढ़ाई मैंगलोर के कस्तूरबा मेडिकल कॉलेज से पूरी की. लेकिन भारत में हार्ट सर्जरी के लिए कोई प्रशिक्षण सुविधा और बुनियादी ढांचा उपलब्ध नहीं होने के कारण, वे एफआरसीएस करने के लिए इंग्लैंड गए और वहां के दो अस्पतालों में कार्डिएक सर्जन के रूप में प्रशिक्षित हुए. उन्होंने असाधारण रूप से कड़ी मेहनत की और अपने समर्पण और कौशल के कारण अपने शिक्षकों के चहेते बन गए. वे चाहते थे कि शेट्टी वहीं बने रहें. लेकिन जैसा कि डॉ. शेट्टी बताते हैं, उनकी पत्नी शकुंतला 'भारत लौटने के दिन गिना करती थीं’. 

जब वे वापस लौटे, तो शेट्टी के लिए नौकरी मिलनी मुश्किल हो गई क्योंकि देश में हृदय की शल्य चिकित्सा अभी अपने शैशव काल में ही थी. अंतत:, बी.एम. बिड़ला फाउंडेशन, जिसने कलकत्ता में एक अस्पताल स्थापित किया था, ने उन्हें 1989 में एक कार्डिएक सर्जन के रूप में नौकरी की पेशकश की. उन्होंने इसे गंभीरता के साथ लिया और जल्द ही नौ दिन के एक बच्चे की हार्ट सर्जरी करके देश का पहला सफल नीओनैटल (नवजात शिशु) हार्ट सर्जरी करने का गौरव हासिल किया.

इंग्लैंड में उनके पास उपलब्ध सुविधाओं की तुलना में भारत में जटिल सर्जरी के लिए आवश्यक अस्पताल में सुविधाओं की कमी के कारण, शेट्टी को तब भारत में सर्जरी 'बहुत अधिक तनावपूर्ण’ लगती थी. वे याद करते हैं कि उन दिनों ज्यादातर लोग दिल का ऑपरेशन कराने से पहले अपनी वसीयत तक लिख दिया करते थे. उनके लिए, जीवन का निर्णायक मोड़ 1989 में आया.वे बताते हैं, ‘‘मैंने दिल के 100 ऑपरेशन पूरे किए और खुशकिस्मती से एक भी मरीज की मौत नहीं हुई. यह मेरे जीवन का सबसे खुशी का दिन था और मैं समझ रहा था कि देश में कार्डिएक सर्जरी में क्रांति लाई जा सकती है.’’

इसी दौरान उन्हें मदर टेरेसा के इलाज के लिए बुलाया गया था और वे उनसे बहुत प्रभावित हुए थे. वे कितनी प्रसिद्ध थीं इसका अहसास शेट्टी को तब हुआ जब उन्हें पता चला कि उनकी मिजाजपुर्सी के लिए व्हाइट हाउस सहित दुनिया भर से फोन आए थे. लोग उन्हें इलाज के लिए अमेरिका ले जाने को तैयार थे. लेकिन मदर टेरेसा ने दुनिया भर के लोगों की चिंताओं को नजरअंदाज करते हुए डॉ. शेट्टी से इलाज कराए जाने पर जोर दिया. डॉ. शेट्टी ने उसे एक बहुत ही सरल व्यक्ति पाया और वे स्वीकार करते हैं, ''मुझे उनके व्यक्तित्व में दिव्यता की झलक मिलती थी.’’

जब डॉ. शेट्टी से उनका इलाज चल रहा था, उस दौरान एक बार उन्होंने राउंड पर उनके साथ चलने की इच्छा जताई. एक अवसर पर, उन्होंने डॉ. को एक बच्चे की जांच करते देखा जो दिल में छेद के साथ पैदा हुआ था और उसका डॉ. शेट्टी ने ऑपरेशन किया था. मदर टेरेसा ने तब उनसे कहा, ''जब बच्चे दिल की बीमारियों के साथ पैदा होते हैं, तो ईश्वर कहता है कोई बात नहीं. अगर समस्या पैदा हुई है तो इसके निदान की जिम्मेदारी के साथ भी किसी को भेजना होगा.

तब उन्होंने तय किया कि वे आपके जैसे लोगों को यह काम करने भेजेंगे.’’ उस घटना को याद करते ही शेट्टी भावुक हो जाते हैं और उनकी आंखें नम हो जाती हैं. वे कहते हैं, ''इसने सचमुच मेरे दिल को छू लिया था. जब उनके जैसा व्यक्तित्व कहता है कि यह एक बड़ा उद्देश्य है, तो काम के प्रति आपका पूरा दृष्टिकोण बदल जाता है.’’

शेट्टी को जैसे अपने जीवन का मकसद मिल गया था और उन्होंने फैसला किया कि वे कम लागत पर विश्व स्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करेंगे ताकि गरीब लोग भी उसका लाभ उठा सकें. उन्होंने तय किया कि वे कभी भी सर्जरी से इसलिए नहीं मना नहीं करेंगे क्योंकि मरीज इसके लिए भुगतान में सक्षम नहीं है. उन्होंने कभी भी उन माता-पिता से फीस नहीं मांगी, जो अपने शिशुओं को हृदय की जटिलताओं के लिए इलाज के लिए लेकर आए थे. वे स्वेच्छा से देना चाहें तो अलग बात है.

जब उन्होंने 1996 में एक अस्पताल स्थापित करने के लिए कोलकाता छोडऩे का फैसला किया, तो पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री ने उन्हें एक अस्पताल बनाने के लिए एक बड़ा भूखंड, बाजार दर के दसवें हिस्से में देने की पेशकश की. यह बात डॉ. शेट्टी के दिल को छू गई.

जब वे बेंगलूरू चले आए, तो उन्होंने लाखों लोगों को गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाएं सस्ते में उपलब्ध कराने का अपना सपना सच कर दिखाया. 2001 में, उन्होंने नारायण हृदयालय नामक 280 बिस्तरों वाले एक हार्ट हॉस्पिटल की स्थापना की, जिसमें देश की सबसे कम लागत वाली कुछ हृदय शल्यचिकित्साएं उपलब्ध कराई गईं. उन्होंने कर्नाटक के किसानों के लिए एक अनूठी सूक्ष्म स्वास्थ्य बीमा योजना शुरू की.

जिसमें उन्हें हर महीने 5 रुपए का योगदान करना होता था और बदले में उन्हें राज्य के चुनिंदा अस्पतालों में मुक्रत में सर्जरी कराने का अधिकार मिलता था. कर्नाटक सरकार ने इस योजना, जिसे यशस्विनी के रूप में जाना जाता है, का समर्थन किया और बीमा के लिए सहमत हुई. इस योजना में 40 लाख से अधिक लोगों ने पंजीकरण कराया.

इस बीच शेट्टी ने नारायण हेल्थ, इसे अब इसी नाम से जाना जाता है, को विस्तार देते हुए इसे मल्टीस्पेशिएलिटी हॉस्पिटल चेन का स्वरूप दिया है और देशभर के 18 शहरों में, जिसमें केमैन द्वीप पर भी एक अस्पताल शामिल है, अस्पताल खोले हैं. नारायण हेल्थ के अब कुल 21 अस्पताल और छह एक्सक्लूसिव हार्ट सेंटर हैं. वे गर्व के साथ कहते हैं, ‘‘आज मैं इलाज के लिए आने वाले किसी भी मरीज को यह कहने की स्थिति में हूं कि उसके लिए जितना संभव है उतना ही भुगतान करे...

और अगर वह बिल्कुल सक्षम नहीं है, तो भी हम उसका ऑपरेशन मुफ्त में करेंगे.’’ फिर भी, शेट्टी भारत में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के कारण निराश हैं. उनका कहना है कि भारत में हर साल में 20 लाख हार्ट सर्जरी करने की जरूरत है, लेकिन सभी हार्ट हॉस्पिटल मिलकर भी केवल 1,50,000 ऑपरेशन करने की क्षमता रखते हैं. अन्य प्रकार की सर्जरी के लिए तो स्थितियां और भी विकट हैं.

कोई व्यक्ति स्वस्थ रहे, इसके लिए उनके पास क्या सुझाव हैं? उनके मुताबिक, आध्यात्मिक होना सबसे महत्वपूर्ण है—यह विश्वास बने रहना चाहिए कि वास्तव में एक दिव्य शक्ति है जो हमारी रक्षा करती है. दूसरा यह है कि अपने शरीर से प्यार करें, इसका भरपूर ध्यान रखें. और तीसरा, खुश रहें और अपने प्रियजनों के बीच रहें. एक डॉक्टर से जिसने हजारों लोगों को बीमारी और मौत से बचाया है, के ये सुझाव वाकई बहुमूल्य हैं. 

 

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