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विशेषांकः परपंराओं का कायापलट

अपनी कला में सब कुछ समेट लेने वाले पंडित बिरजू महाराज ने न केवल कथक के भंडार को आमूलचूल बदला बल्कि उसका जीवनकाल भी बढ़ाया.

पंडित बिरजू महाराज पंडित बिरजू महाराज

75वां स्वतंत्रता दिवस विशेषांक-पथ प्रवर्तक / कला, संगीत और नृत्य

पंडित बिरजू महाराज, 83 वर्ष

अदिति मंगलदास

पंडित बिरजू महाराज की कलात्मक शख्सियत ऐसी है, जो तर्क से परे चली जाती है. वे गुरु, नर्तक, कोरियोग्राफर, गायक और कंपोजर हैं. जैसे इतना काफी न हो, तो वे तालवाद्य बजाते, कविता लिखते और चित्र बनाते हैं.

कथक नृत्य जितनी प्राचीन परंपरा के कायापलट के लिए जीनियस की जरूरत पड़ती ही है. महाराज जी के मामले में तो और भी बहुत ज्यादा, जो कथक के प्रख्यात कालका-बिंदादीन घराने के वंशज और ध्वजवाहक हैं और इस घराने में उनसे पहले कई महान कलाकार हुए.

बचपन से प्रतिभा संपन्न महाराज जी की नृत्य की जन्मजात समझ, प्रकृति और मानवता का गहरा अवलोकन और व्यापक कल्पनाशीलता कथक को उसके भौगोलिक संदर्भ से आगे ले गई और उच्च क्षमता के शास्त्रीय नृत्य के रूप में न केवल भारत बल्कि दुनिया भर में मंच के बीचोबीच ले आई.

उन्होंने न केवल कथक के भंडार को बल्कि उसकी प्रस्तुति, तालीम, जीवनकाल को भी आमूलचूल बदला और यह सब उसके सार तत्व को साबुत रखते हुए किया. वे विरासत में मिली परंपरा और उसकी समकालीन शक्ति के मूर्त रूप हैं. उनके शिष्य अब जाने-माने कलाकार हैं और दुनिया भर में फैले हैं.

वे कथक के अकेले कलाकार हैं, जिन्हें भारत सरकार से पद्म विभूषण मिला. इस विद्वतापूर्ण मस्तिष्क, हृदय और शरीर में जो कुछ भी प्रवेश करता है, नृत्य में बदल जाता है. कथक की उनकी खोजों में भिन्न-भिन्न क्षेत्रों के सत्यजित राय, बालसरस्वती, जाकिर हुसैन, केलूचरण महापात्र और संजय लीला भंसाली जैसे महान कलाकारों के साथ मिलकर किए गए कई काम शामिल हैं.

उनकी शिष्या होने के नाते मैं हमेशा यह देखकर चकित रह जाती हूं कि कैसे उनका हर पल नृत्य में डूबा रहता है, हर प्रेरणा नृत्य में बदल जाती है और हर सांस नृत्य की लय बन जाती है. यह यकीनन उन्हें महान बनाता है.

अदिति मंगलदास कथक नृत्यांगना और कोरियोग्राफर हैं.

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