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आवरण कथाः नई राहों के अन्वेषक

अपने 75वें स्वतंत्रता दिवस पर हम उन दिग्गज शख्सियतों को याद कर रहे हैं, जिन्होंने अब तक का यह सफर पूरा करने में मदद की, जिन्होंने राजनीति में और खेल में, कारोबार में और साहित्य में अपने असाधारण कार्यों से हमें रास्ता दिखाया

महात्मा गांधी महात्मा गांधी

75 वां स्वतंत्रता दिवस विशेषांक

राज चेंगप्पा

दुनिया को बदल देने वाले दो अन्वेषियों का जिक्र करते हुए अमेरिकी नागरिक अधिकार आंदोलन के अगुआ मार्टिन लूथर किंग जूनियर ने कहा था, ''हमारी सदी में इनसान ने दो बार सोचा, एक बार अल्बर्ट आइंस्टीन के रूप में और फिर महात्मा गांधी के रूप में. आइंस्टीन के विचार ने भौतिक दुनिया की समझ को आमूलचूल बदल डाला, तो गांधी के विचार ने राजनैतिक दुनिया की समझ का कायापलट कर दिया.’’

आइंस्टीन ने गांधी के बारे में कहा था, ''घोर नैतिक पतन के हमारे समय में गांधी अकेले सच्चे राजनेता थे, जो हमारे राजनैतिक दायरे में उच्चतर मानव संबंधों के हक में खड़े हुए. आने वाली पीढ़ियां मुश्किल से ही यकीन कर पाएंगी कि हाड़-मांस का ऐसा एक शख्स कभी इस धरती पर चला था.’’

वह क्या था जिसने गांधी को इस युग की सबसे प्रभावशाली शख्सियतों में से एक बनाया? हार्वर्ड के मनोवैज्ञानिक होवार्ड गार्डनर अपनी किताब लीडिंग माइंड्स: ऐन एनाटॉमी ऑफ लीडरशिप में गांधी को उन दूरदर्शी नेताओं की बिरली श्रेणी में रखते हैं, जो उनकी परिभाषा के मुताबिक ''फिलहाल चल रही कोई कहानी सुनाकर या हालिया अतीत से ली गई कोई कहानी दोबारा सुनाकर संतुष्ट नहीं होते.

यह शख्स असल में नई कहानी गढ़ता है, ऐसी कहानी जो ज्यादातर लोगों को पहले से पता न हो, और यह कहानी असरदार तरीके से दूसरों को बताकर वह कम से कम कुछ हद तक कामयाबी हासिल कर ही लेता है.’’ गार्डनर इस श्रेणी में और किन लोगों को रखते हैं? यीशु, बुद्ध और पैगंबर मुहम्मद!

तो जिस वक्त आइंस्टीन की अगुआई में पश्चिम की वैज्ञानिक दुनिया दूसरे विश्व युद्ध में एडोल्फ हिटलर की अगुआई वाली फौजों को नाकाम करने के लिए मैनहटन प्रोजेक्ट के मार्फत मानवजाति का ईजाद किया गया अब तक का सबसे विनाशकारी हथियार—एटम बम—बनाने में मशगूल थी, गांधी दुनिया की सबसे बड़ी औपनिवेशिक ताकत का तख्ता पलटने के लिए पूर्णत: नया हथियार विकसित कर रहे थे.

अहिंसा का सिद्धांत. गांधी को यकीन था कि ब्रिटिश साम्राज्य की समूची ताकत शांतिपूर्ण प्रतिरोध से उपजी श्रेष्ठतर नैतिक और आध्यात्मिक ताकत को कुचल नहीं पाएगी. उन्होंने कहा भी था, ''आत्मा की शक्तियां सदैव प्रगतिशील और अंतहीन होती हैं. इसकी पूर्ण अभिव्यक्ति इसे दुनिया के लिए अपराजेय बना देती है.’’

गांधी सही साबित हुए जब 15 अगस्त, 1947 को उनकी अगुआई में चले सत्याग्रह और असहयोग के माध्यम से भारत ने आजादी पाई. ऐसा करते हुए उन्होंने मार्टिन लूथर किंग जूनियर और नेल्सन मंडेला से लेकर दलाई लामा तक नेताओं की एक समूची पीढ़ी को प्रेरित किया.

भारत के 75वें स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष में इंडिया टुडे ने गांधी के साथ जीवन के कई क्षेत्रों के 114 अन्य पथ प्रवर्तकों को प्रस्तुत करने का फैसला किया, जिन्होंने खुद अपने सम्मोहक अफसाने गढ़े और राष्ट्र की वृद्धि और विकास पर असर डाला. वे राजनीति में रहे हों या कारोबार, विज्ञान, रक्षा, कला, मनोरंजन या अवकाश में, इन असाधारण अगुआओं में बहुत कुछ साझा है.

उनमें गजब की स्पष्टता और ऊर्जा है, वे साहसी दूरदृष्टि का अनुसरण करने से डरते नहीं, उसे हासिल करने के लिए किसी भी रुकावट पर पार पाने के लिए तैयार हैं, अपने-अपने ढंग से विद्रोही हैं, नियमों से नहीं बंधे हैं, अलग ढंग से सोचते हैं और यथास्थिति को बदलने के मिशन में वस्तुत: किसी के रोके रुकने वाले नहीं.

उनकी उपलब्धियों की नीरस फेहरिस्त बनाने की बजाए हमने तय किया कि उनके काम से परिचित प्रमुख शख्सियतों से आग्रह किया जाए कि वे अपनी अंतर्दृष्टि और परख से इन असाधारण शख्सियतों के बारे में हमें बताएं खासकर यह कि किस चीज ने उन्हें कामयाब बनाया.

मदर टेरेसा के जीवनीकार नवीन चावला बताते हैं कि शुरुआत में उन्हें अपने जिस सबसे बड़े डर को जीतना पड़ा, वह जरूरतमंदों के लिए खाना और दवाइयां मांगने के अपमान का डर था. तिस पर भी 1997 में जब उनकी मृत्यु हुई, वे बेसहारा और दीन-हीन लोगों के लिए 123 देशों में बहुराष्ट्रीय अनुकंपा व्यवस्था कायम कर चुकी थीं.

उन्होंने कहा था, ‘‘हम बड़ी चीजें नहीं कर सकते, बहुत प्यार से बस छोटी चीजें कर सकते हैं.’’ अगले पन्नों पर हम असाधारण कहानियां लेकर आए हैं, जो इन नई राहों के अन्वेषियों का अनुकरण करने के लिए नई पीढ़ियों को यकीनन प्रेरित करेंगी.

इन पथप्रवर्तकों में गजब की स्पष्टता और ऊर्जा है, वे साहसी दूरदृष्टि काअनुसरण करने से डरते नहीं.

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