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विशेषांकः अगली श्रमिक क्रांति

डिजिटल कामकाज का भविष्य कर्मचारियों के काम के बारे में अनुभव समझने और उसे बेहतर करने के लिए तकनीक के इस्तेमाल पर टिका है

भविष्य के रुझान 2022: डिजिटल वर्क भविष्य के रुझान 2022: डिजिटल वर्क

रोहन मूर्ति

दैनिक सक्रिय उपयोगकर्ता जैसी मेट्रिक्स से संचालित कंपनियां सभी को ऑनलाइन कॉमर्स, मीडिया, मनोरंजन और सोशल कनेक्शंस आदि में शामिल करने की कोशिश करती हैं. लेकिन ये सारी ऐसी गतिविधियां हैं जो हम अपने काम (नौकरी) के अतिरिक्त करते हैं. यकीनन रोजाना हम अन्य गतिविधियों की तुलना में काम में अधिक वक्त बिताते हैं. काम हमारी बौद्धिक और भावनात्मक जिंदगी का अहम हिस्सा है. यह हमें वित्तीय सुरक्षा उद्देश्य, प्रयोजन और पहचान का एहसास कराता है. लिहाजा काम के दौरान हम क्या करते हैं और कैसे करते हैं, यह मायने रखता है.

आजकल ऑफिस का कामकाज डिजिटल हो गया है और महामारी ने इस बदलाव को तेज कर दिया है. संचार और उत्पादकता उपकरणों ने डिजिटल कार्य को अधिक कुशल और कम बोझिल के साथ उसे कारगर बनाने में मदद की है. हालांकि, जो बात अच्छी तरह से नहीं समझी गई वह है कि हम कैसे काम करते हैं—क्या हम सभी एक तरह से काम करते हैं, हम कहां अलग होते हैं, किस चीज में मजा आता है, हमें क्या उबाऊ, निराशाजनक या कष्टदायक लगता है आदि. काम पर अपने अनुभव को बदलने के लिए पहले यह समझना जरूरी है कि हम कैसे काम करते हैं.

विशेषांकः अगली श्रमिक क्रांति
विशेषांकः अगली श्रमिक क्रांति

लोगों से जुड़ने, नौकरी तलाशने, बिल्ली की तस्वीरें साझा करने आदि में हमारी मदद के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म बनाने में अरबों रुपए निवेश किए गए हैं. लेकिन इसकी तुलना में कामकाज के मानवीय अनुभव को समझने और बेहतर बनाने की तकनीक में काफी कम निवेश किया गया है. मिसाल के तौर पर—आपने आखिरी बार ऐसे तकनीकी नवाचारों के बारे में कब सुना था जिनसे टीमों को काम पर परामर्श के अवसर खोजने, निराशाओं को कम करने, मदद तलाशने या दुख साझा करने में सहायता मिल सके?

यह समस्या कितनी बड़ी है? दुनिया भर में अनुमानित 50 करोड़ से अधिक ऑफिस कर्मचारी हैं जो हर दिन कम-से-कम 5 घंटे डिजिटल काम पर बिताते हैं. दुनिया ऑफिस के काम पर खरबों डॉलर खर्च करती है, फिर भी कर्मचारियों के अनुभव में सुधार एक अनिवार्य आर्थिक मुद्दा नहीं बन सका है जिसे तकनीक सहज कर सकती है. आखिर में, महामारी ने ऑफिस कर्मचारियों के बड़े हिस्से को घर में आइसोलेट कर दिया. इससे उन्हें दुनिया भर में नौकरियां बदलने के अधिक अवसर मिले. ऐसे में प्रतिभा को एक जगह बांधे रखना कठिन हो गया है. इसलिए, कर्मचारियों के अनुभव की परवाह करना पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है.

संस्थान इन चिंताओं पर ध्यान तो देते हैं, लेकिन तकनीक में पर्याप्त नवाचार की कमी की वजह से ये बेअसर साबित होती हैं. मिसाल के तौर पर, कंपनियां ऐसे लोगों को रखती है जो विभिन्न टीमों में से कुछ लोगों का मैन्युअली इंटरव्यू लेते हैं, इंटरव्यू के जरिये आंकड़े इकट्ठा करते हैं और फिर सलाह देते हैं कि काम को किस तरह कारगर बनाया जाए. लेकिन यह तरीका अपूर्ण, साधारण और अपनाने योग्य नहीं है. क्या तकनीक बेहतर समाधान पेश कर सकती है? यहां एक संभावना है. कंप्यूटिंग और मशीन लर्निंग में हालिया प्रगति कर्मचारियों के अनुभव को समझने और सुधारने के लिए आंकड़ों का इस्तेमाल करने के नए साधन प्रदान करती है. इस तरीके में शामिल है: (1) नमूने लेना कि टीमें काम के दौरान सॉफ्टवेयर के साथ कैसे पेश आती हैं, (2) इस डेटा के बारे में मशीन लर्निंग से टीम के काम का पैटर्न समझना और (3) इन पैटर्न से टीम की समस्याओं की पहचान करना और टीम के अनुभव में सुधार करना. इस पद्धति में गोपनीयता की खातिर व्यक्ति को अनाम रखकर टीम पैटर्न पर ध्यान केंद्रित किया जाता है.

इसमें मुख्य अंतर्दृष्टि काम को डेटा के स्रोत के रूप में मानना है, जबकि पारंपरिक तरीकों में केवल काम के नतीजे को ही डेटा माना जाता है (जैसे, किसी टीम ने कितने लेनदेन पूरे किए?). यह डेटा तब कार्यस्थल पर बदलाव लाने के लिए उपयोगी होता है. इस नजरिये के केंद्र में 'वर्क ग्राफ' हैं—ऐसा खाका जो चरणों का जुड़ा हुआ क्रम है जिसे टीमें काम पूरा करने के लिए निष्पादित करती हैं. काम के दौरान टीमें सॉफ्टवेयर के साथ किस तरह पेश आती हैं, इसे समझने के लिए मशीन लर्निंग का इस्तेमाल करते हुए वर्क ग्राफ अपने आप बनते हैं और किसी भी पैमाने पर काम को समझने के लिए एक आधार का निर्माण करते हैं. टीमें किस तरह किसी कार्य को पूरा करती हैं, इसका खाका वर्ल्ड वाइड वेब के ग्राफ की तरह होता है जो सर्च इंजनों को ताकत देता है या लोगों के बीच जुड़ाव (सोशल ग्राफ्स) को जो अधिकतर सोशल प्लेटफॉर्म को क्षमता प्रदान करती हैं. 

डिजिटल काम कैसे होता है, वर्क ग्राफ इसके डीएनए की तरह है. यह डीएनए की तरह ही वर्क ग्राफ डेटा के जरिये विभिन्न समस्याओं को समझने, उनका इलाज और समाधान करने के लिए सूचनाओं का एकमात्र स्रोत है. 

वर्क ग्राफ के पैटर्न से काम पर किसी टीम के अनुभव को सुधारा जा सकता है. इस तरह, विभिन्न तरह की गहरी समझ हासिल की जा सकती है: उदाहरण के रूप में, आइटी और टेक्नोलॉजी को लेकर निराशा जो टीम के दैनिक अनुभवों को चोट पहुंचाती है, विभिन्न टीमों में काम के पैटर्न समान हैं इसलिए मार्गदर्शन या सीखने के अवसर, काम के टूटे हुए पैटर्न से टीमों के थकाऊ और अनावश्यक जटिलताओं का खुलासा होता है. काम के ग्राफ के विकल्प मं  लोगों के इंटरव्यू पर निर्भर रहना, अनुमान लगाना, तत्काल समझ लेने का गुण और संगठनों में बदलाव से उम्मीद करना शामिल है. हार्वर्ड बिजनेस रिव्यू में हाल ही के एक लेख में वर्क ग्राफ का इस्तेमाल करके खुलासा किया गया कि प्रबंधन टीमों से कैसे काम करने की अपेक्षा करता है और हकीकत में लगभग 60 फीसद का अंतर होता है. इसलिए, टीम को लाभ पहुंचाने के लिए बदलाव करने से पहले इन संगठनों को पहले अपनी टीम के काम के अनुभवों को बेहतर ढंग से समझना चाहिए.


वर्क ग्राफ के डेटा सोशल मीडिया से भी बड़ा लगता है. सोशल मीडिया को व्यापक रूप से बड़ी मात्रा में डेटा पैदा करने के लिए जाना जाता है जो व्यवसायों को ऊर्जा देता है. मिसाल के लिए, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर हर एक इंटरैक्शन (उदाहरण के लिए, किसी उपयोगकर्ता ने ''जॉब तलाश करें'' पर क्लिक किया या ''कोई कमेंट लाइक'' किया), की तुलना में काम पर 40 गुना अधिक डिजिटल इंटरैक्शन होते हैं (उदाहरण के लिए,''एक ईमेल भेजा गया''). आखिरकार, दुनिया काम के दौरान डिजिटल उपकरणों पर रोजाना 6-8 घंटे बिताती है और इन गतिविधियों के पीछे डेटा होता है.

अब तक दुनिया ने यह नहीं देखा है कि हम तकनीकी समस्या के रूप में काम को किस तरह अनुभव करते हैं. लेकिन महामारी ने इसे बदल दिया है. दुनिया में ऑफिस कार्य के पैमाने को देखते हुए, कार्यस्थल के भीतर यह कंज्यूमर स्केल का अवसर है. मेरा मानना है कि यह साल 2022 का एक मुद्दा होगा.

रोहन मूर्ति सोरोको के संस्थापक और मुख्य टेक्निकल ऑफिसर हैं

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