scorecardresearch
 
डाउनलोड करें इंडिया टुडे हिंदी मैगजीन का लेटेस्ट इशू सिर्फ 25/- रुपये में

पत्रकारिता का पालना

मीडिया में बदलावों के लिहाज से खुद को तैयार रखना, वह मुख्य वजह है जिसके चलते मीडिया संस्थानों में आइआइएमसी के छात्रों की मांग रहती है 

X
खबरों की बारहखड़ी : आइआइएमसी के महानिदेशक संजय द्विवेदी संस्थान के छात्र-छात्राओं के साथ खबरों की बारहखड़ी : आइआइएमसी के महानिदेशक संजय द्विवेदी संस्थान के छात्र-छात्राओं के साथ

भारत के बेस्ट कॉलेज 2022 : मास कम्युनिकेशन

नंबर 1- भारतीय जनसंचार संस्थान (आइआइएमसी), नई दिल्ली

भारतीय विज्ञान संस्थान, बेंगलूरू से भूविज्ञान और पर्यावरण (अर्थ ऐंड एन्वायरमेंटल साइंसेज) में स्नातक नंदिनी एस. फिलहाल नई दिल्ली के भारतीय जनसंचार संस्थान (आइआइएमसी) से अंग्रेजी पत्रकारिता में अपना नौ महीने का स्नातकोत्तर डिप्लोमा कर रही हैं. लेकिन अंग्रेजी पत्रकारिता पाठ्यक्रम के 10 अन्य छात्रों के साथ, उन्होंने पहले ही बहुराष्ट्रीय मीडिया समूह थॉमसन रॉयटर्स में एक नौकरी पा ली है. केरल के एर्णाकुलम की रहने वाली नंदिनी को एक प्रशिक्षु संवाददाता के रूप में, सालाना पांच लाख रुपए का वेतन दिया जाएगा. 

रेडियो और टेलीविजन पत्रकारिता पाठ्यक्रम में उनके सहपाठी ऋषभ वत्स को भी एक नए चैनल ने नौकरी की पेशकश की है, हालांकि उन्होंने अभी इसके लिए मन नहीं बनाया है. रांची के रहने वाले वत्स का मानना है कि आइआइएमसी, बहुआयामी प्रशिक्षण में उन्हें बेहतर अवसर खोजने में सक्षम बनाता है. उनके पास इस आत्मविश्वास की वजह भी है. आधिकारिक कैंपस प्लेसमेंट अभी शुरू नहीं हुए हैं. जून में अंतिम परीक्षाएं होने के बाद कैंपस प्लेसमेंट जुलाई में शुरू होगा, लेकिन वत्स के पास नौकरी का प्रस्ताव है. 

आइआइएमसी के छात्रों के लिए यह असामान्य नहीं है. पिछले कुछ वर्षों में संस्थान का प्लेसमेंट रिकॉर्ड काफी प्रभावशाली रहा है. पिछले साल कोविड महामारी के दौरान भी, जब संस्थान वर्चुअली चल रहा था, तब इसके पांच पाठ्यक्रमों—अंग्रेजी पत्रकारिता, हिंदी पत्रकारिता, रेडियो और टीवी पत्रकारिता, विज्ञापन और जनसंपर्क और उर्दू पत्रकारिता—में नामांकित 358 छात्रों में से 82 प्रतिशत को नौकरी मिल गई थी. उच्चतम वेतन की पेशकश 8.6 लाख रुपए प्रति वर्ष थी, जबकि औसत वेतन 4 लाख रुपए सालाना था. 

प्लेसमेंट सेल के प्रमुख प्रो. प्रमोद कुमार का मानना है कि इस साल प्लेसमेंट की संख्या काफी अधिक होगी क्योंकि पिछली बार कैंपस प्लेसमेंट नहीं हुआ था. उनके छात्र आश्वस्त हैं. वत्स बताते हैं, ''हमें प्रिंट, रेडियो, टीवी और मल्टीमीडिया सहित पत्रकारिता के हर पहलू में प्रशिक्षित किया जाता है. यह हमें मल्टीटास्कर बनाता है. इसके अलावा, हमें पत्रकारिता के कई दिग्गजों के साथ बातचीत करने का अवसर मिलता है जो अतिथि व्याख्याताओं के रूप में नियमित रूप से परिसर में आते रहते हैं. हमारे लिए जगह बनाना आसान हो जाता है क्योंकि उद्योग को पता होता है कि हम क्या करने में सक्षम हैं.’’ 

उनके शिक्षक सहमत हैं और दावा करते हैं कि आइआइएमसी में पढ़ाई के दौरान का अनुभव भी एक सक्रिय न्यूज रूम से कम नहीं है. आइआइएमसी के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी कहते हैं, ''आइआइएमसी में प्रैक्टिकल लर्निंग और उद्योगपरक शिक्षण बहुत अधिक है. हमारे पास अतिथि संकाय के रूप में लगभग 80 पेशेवरों का एक पैनल है, और उनके पास अपने क्षेत्रों में शानदार करियर रिकॉर्ड हैं. उद्योग के दिग्गजों के साथ ऐसी नियमित बातचीत के कारण, हमारे छात्र काम के पहले दिन से ही किसी भी न्यूज रूम में फिट हो सकते हैं.’’ 

हालांकि, आइआइएमसी प्रशासन अपनी ऐसी उपलब्धि पर संतुष्ट होकर बैठ जाने को तैयार नहीं है. एक अत्याधुनिक पुस्तकालय, दो ऑडिटोरियम, छात्रावास की सुविधा और कई प्रयोगशालाओं पर इतराने वाला संस्थान लगातार अपने बुनियादी ढांचे का विस्तार करता रहता है. महामारी अभी भी एक खतरा है, सो संस्थान ने 75 लाख रुपए की लागत से सभी कक्षाओं को स्मार्ट क्लासरूम में बदल दिया है, ताकि परिस्थिति और जरूरत के मुताबिक शिक्षण कक्षाओं में या वर्चुअल रूप से या फिर हाइब्रिड मोड यानी दोनों तरीके से हो सके.

प्रिंट, ऑडियो, टीवी और वेब के लिए मौजूदा और उभरते हुए एडिटिंग सॉफ्टवेयर में छात्रों को प्रशिक्षित करने के लिए एक नई प्रयोगशाला बनाई गई है. विशेष रूप से डिजिटल मीडिया के लिए, एक और प्रयोगशाला भी शुरू होने वाली है. ये प्रयोगशालाएं प्रत्येक विभाग को सौंपी गई कंप्यूटर प्रयोगशालाओं के अतिरिक्त हैं. संस्थान के अपने सामुदायिक रेडियो स्टेशन के लिए स्टूडियो का आधुनिकीकरण किया गया है. पिछले दो वर्षों में 16 नए संकाय सदस्य शामिल हुए हैं और अब दिल्ली परिसर में सभी पाठ्यक्रमों में नामांकित 301 छात्रों के लिए शिक्षकों की कुल संख्या 27 हो गई है. 


अगला लक्ष्य रेडियो और टीवी पत्रकारिता के लिए मौजूदा प्रयोगशाला को और आधुनिक बनाना है. आइआइएमसी के डीन (अकादमिक) प्रो. गोविंद सिंह कहते हैं, ''हम इसे पहले करना चाहते थे, लेकिन कोविड के कारण योजना रोकनी पड़ी थी. अब हम इसे शुरू कर रहे हैं और इसमें लगभग 5 करोड़ रुपए खर्च हो सकते हैं.’’ आइआइएमसी अब मानद विश्वविद्यालय बनने की राह पर है और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के आवश्यक पांच नए पाठ्यक्रम शुरू करने की योजना बना रहा है.

इन स्नातकोत्तर डिग्री पाठ्यक्रमों में डिजिटल मीडिया; मीडिया, कम्युनिकेशन ऐंड गवर्नेंस (संचार और शासन); हेल्थ कम्युनिकेशन (स्वास्थ्य संचार); स्ट्रैटेजिक कम्युनिकेशन (सामरिक संचार); और फोक ऐंड ट्रेडिशनल मीडिया (लोक और पारंपरिक मीडिया) जैसे विषय शामिल होंगे. प्रो. गोविंद सिंह कहते हैं, ''हम इस साल डिजिटल मीडिया का कोर्स शुरू कर रहे हैं. मानद विश्वविद्यालय घोषित होने के बाद अन्य चार पाठ्यक्रम चालू हो जाएंगे. इस प्रक्रिया में कुछ समय लग सकता है.’’ 

पत्रकारिता के क्षेत्र में तेजी से हो रहे बदलावों से तालमेल बिठाने के लिए आइआइएमसी सभी कोर्स के सिलेबस की समीक्षा कर रहा है. नई शिक्षा नीति के अनुसार, जल्द ही यह एकेडमिक क्रेडिट सिस्टम शुरू करेगा. इस साल प्रवेश प्रक्रिया नई शुरू की गई केंद्रीय विश्वविद्यालयों की प्रवेश परीक्षा (सीयूईटी) के तहत आयोजित की जाएगी. और जहां सभी छात्राओं के लिए परिसर के छात्रावासों में जगह मिल जाती है, संस्थान लड़कों के लिए छात्रावास की सीटों की संख्या बढ़ाने की योजना बना रहा है. वर्तमान में, केवल 14 छात्रों के लिए ही कमरे उपलब्ध हैं. 

गुरु वाणी
‘‘आइआइएमसी में प्रैक्टिल लर्निंग और मीडिया क्षेत्र की जरूरतों के हिसाब से पढ़ाई होती है. इसके साथ ही मीडिया के दिग्गजों के साथ छात्र-छात्राओं का नियमित संवाद होता है. इस वजह से हमारे छात्र-छात्राएं पहले दिन से ही न्यूज रूम में फिट होने लायक होते हैं’’
प्रो. संजय द्विवेदी, महानिदेशक, भारतीय जनसंचार संस्थान (आइआइएमसी)
 

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें