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विशेषांकः जनसेवा का क्षेत्र आपसे बहुत अधिक अपेक्षाएं रखता है

परिजनों, दोस्तों के साथ बिताया गया पल मुझे बेहद खुशी देता है क्योंकि मेरे पास उनके साथ ज्यादा समय बिताने की सुविधा नहीं है

कोनराड के. संगमा, मुख्यमंत्री, मेघालय कोनराड के. संगमा, मुख्यमंत्री, मेघालय

''जनसेवा का क्षेत्र आपसे बहुत अधिक अपेक्षाएं रखता है और गलती पर अक्सर माफी भी कम ही मिलती है. सभी को खुश रखना बहुत कठिन है. जनसेवा में शत-प्रतिशत देने और उनके भले के लिए प्रतिबद्धता की खातिर व्यक्ति को उन सारी चीजों का आनंद लेना चाहिए जो कुछ भी वह करता है. लेकिन मैं बहुतों के जीवन में सकारात्मक और ठोस बदलाव ला सकता हूं, यह एहसास मुझे बहुत खुशी देता है.

एक लंबी ड्राइव, दोस्तों के साथ लंच या परिवार के साथ डिनर भी बहुत खुशी देने वाला हो सकता है. परिजनों, दोस्तों के साथ बिताया गया पल मुझे बेहद खुशी देता है क्योंकि मेरे पास उनके साथ ज्यादा समय बिताने की सुविधा नहीं है. संगीत सुनने या सुबह की सैर जैसे खुद के साथ बिताए पल भी खुशी देने वाले हो सकते हैं. प्रियजनों के साथ लाइव संगीतमय प्रस्तुति देखने को मिल जाए तो फिर बात ही क्या!''

कोनराड के. संगमा, मुख्यमंत्री, मेघालय

''खुशी तो हमारे भीतर ही है, हालांकि हम में से ज्यादातर लोग इसे बाहर, दूसरे लोगों के साथ और तरह-तरह की स्थितियों में खोजते-तलाशते हैं. मेरी व्यक्तिगत खुशी आंतरिक रूप से मेरे जीवन से संतुष्ट होने और यह जानने से जुड़ी है कि जिन लोगों से मैं प्यार करती हूं वे खुश हैं, या कम से कम दुखी नहीं हैं. पेशे के लिहाज से मेरी खुशी सीधे तौर पर उन लोगों के लिए किए गए मेरे कार्यों से जुड़ी है जिनका मैं प्रतिनिधित्व करती हूं.

कोई भी पद और पदवी हो लेकिन मेरी अपनी कोई व्यक्तिगत उपलब्धि न हो तो उसका मेरे लिए कोई अर्थ नहीं. यह जानकर कि मेरे लोगों की मुझसे जो अपेक्षाएं थीं, उन्हें पूरी करने में मैंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, मुझे इस बात से बड़ी खुशी मिलती है''

सुष्मिता देव, तृणमूल कांग्रेस नेता

''दुनिया में खुशी और उसकी प्राप्ति को अमूमनन गलत संदर्भों में समझा जाता है. खुशी ही सही मायनों में जीवन को पूर्णता देती है. खुशी और आनंद के बीच फर्क को कम ही लोग समझते हैं. खुशी किसी वस्तु या व्यक्ति पर निर्भर करती है पर आनंद भीतर से उपजता है. मैंने दो तरह के खुशमिजाज लोग देखे हैं—पहले, जिनमें मेरे बेटे नेवान की तरह स्पष्टता और कृतज्ञता का भाव पैदाइशी है; दूसरे, जिन्होंने जीवन यात्रा के दौरान कृतज्ञता और प्रशंसा के भाव आत्मसात किए. मैं दूसरी श्रेणी का हूं. आनंद को आत्मा से महसूस किया जाता है. यह बहुत सुकून देने वाला होता है.''

सोनू निगम, गायक

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