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जगमग गांव

ऐसे बांटी खुशी: टिकाऊ रहन-सहन की असाधारण मिसाल पेश करते हुए गुजरात का मोढेरा अक्षय ऊर्जा उत्पादक बन गया है

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सुनहरा समय : मोढेरा के एक गांव में छत पर सोलर पैनल साफ करती एक महिला
सुनहरा समय : मोढेरा के एक गांव में छत पर सोलर पैनल साफ करती एक महिला

सूर्यग्राम प्रोजेक्ट, स्थापना: 2019-20, गुजरात

इक्कीस वर्षीय अजयसिंह सोलंकी इस साल गर्मियों का स्वागत एयर कंडिशनर (एसी) के साथ करने की उम्मीद कर रहे हैं. एसी उनके गांव में अब तक एक 'लग्जरी' रहा है जिसे शायद ही कोई खरीद पाता. सोलंकी का 20 सदस्यों का संयुक्त परिवार है. गुजरात में महेसाणा जिले के मोढेरा गांव में उनके मामूली एक मंजिले घर की छत पर भारतीय ठेठ ग्रामीण परिवार की सामान्य चीजें हैं:

धूप में सूखने के लिए रखे गए अचार और मसाले, कपड़े सुखाने की रस्सी, कभी-कभी रखी जाने वाली पुआल की एक चटाई. लेकिन, इनमें 1 किलोवाट के चार चमकदार सोलर पैनल भी शामिल हैं, जिन्हें घर के सदस्य बारी-बारी से साफ करते हैं. बिना किसी भारी-भरकम भुगतान के करीब एक साल पहले लगाए गए इन सौर पैनलों की वजह से अब सोलंकी अपने मासिक बिजली बिल कम करते हुए अतिरिक्त 500 रु. की बचत कर पा रहे हैं. उन्हें उम्मीद है कि उस पैसे से उनकी बहनों की पढ़ाई में मदद मिलेगी. मोढेरा में अन्य लोगों की भी ऐसी ही कहानियां हैं. कुछ परिवार तो अब पूरी तरह मुफ्त बिजली हासिल कर रहे हैं. 

मोढेरा में करीब 1,700 घर हैं और उनमें 1,350 घरों में अब रूफटॉप फोटोवोल्टिक सिस्टम हैं. गुजरात सरकार ने सूर्यग्राम परियोजना के तहत एक साल पहले इस गांव में आरटीपीवी सिस्टम लगाने का काम पूरा किया. परियोजना की लागत 80.66 करोड़ रु. है और केंद्र तथा राज्य सरकार दोनों ने इसमें योगदान दिया है. हर घर केंद्रीय बिजली ग्रिड से जुड़ा हुआ है, अधिकतर घरों में बिजली खर्च में 40 से 100 फीसद की कमी आई है.

करीब छह महीने से गांव ने ग्रिड से बिजली नहीं ली है और उसके बजाय हरित बिजली की आपूर्ति कर रहा है. यह भारत का शुद्ध-नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादक पहला गांव बन गया है. प्रोजेक्ट का संचालन करने वाले गुजरात पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड के एक अधिकारी के मुताबिक, रोज करीब 6,332 किलोवाट घंटे (किलोवाट ऑवर) बिजली का उत्पादन हो रहा है. मोढेरा में रोजाना 6,000 किलोवाट घंटे बिजली की खपत होती है और बाकी बिजली ग्रिड को दे दी जाती है. सरकारी भवनों पर भी सौर पैनल लगाए गए हैं और प्रसिद्ध सूर्य मंदिर अब पूरी तरह से सौर्य ऊर्जा से संचालित है. यहां वाहनों के लिए इलेक्ट्रिक चार्जिंग की मुफ्त सुविधा भी है और पर्यटक अक्सर इसका उपयोग करते हैं. दिन में सोलर पैनल से बिजली की आपूर्ति की जाती है. सूर्यास्त के बाद बैटर एनर्जी स्टोरेज सिस्टम के जरिये बिजली की आपूर्ति की जाती है. इसके लिए मोढेरा से करीब 6 किमी दूर सुजानपुरा गांव में संयंत्र स्थापित है. 

मोढेरा में बहुत सारे लोग अब जीवन की थोड़ी बेहतर गुणवत्ता का ख्वाब देख सकते हैं. गांव में अधिकतर लोग छोटे किसान, खेतिहर मजदूर या पशुपालक हैं. यहां के सरपंच जतनबेन ठाकोर का कहना है, ''प्रत्येक परिवार की औसत आय 8,000 रु. से 10,000 रु. तक. करीब 500 घर शिक्षित हैं जिनके युवा आसपास की ऑटोमोबाइल फैक्ट्रियों में काम करते हैं. उनकी आय करीब 15,000-25,000 रु. है.'' यहां तक कि हर महीने के आखिर में बचाए गए कुछ सौ अतिरिक्त रूपए भी परिवारों के लिए काफी होते हैं. 

मिसाल के तौर पर, पर्यटन विभाग से सेवानिवृत्त क्लर्क अमृतलाल प्रजापति अपने घर को पूरी तरह से नया रूप देने की तैयारी कर रहे हैं तो उनकी पत्नी सविता परिवार के खानपान में अधिक सब्जियों और फलों को शामिल करने की उम्मीद कर रही हैं. जर्जर छत पर सौर पैनल की वजह से प्रजापति को चार महीने में बिजली बिल नहीं देना पड़ा है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अक्तूबर 2022 में मोढेरा का दौरा किया और इसे सौर ऊर्जा से अपनी ऊर्जा जरूरतें पूरा करने वाला भारत का पहला गांव घोषित किया. इसके बाद, संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस भी वहां गए और उन्होंने उन प्रयासों की सराहना की: ''यह आश्चर्यजनक है कि यहां मानव जाति और पृथ्वी के बीच एक सामंजस्य है, और हमें इस गांव के लोगों, गुजरात सरकार और भारत सरकार को बहुत भावनात्मक रूप से धन्यवाद देना चाहिए.''  मोढेरा में बदलाव की बयार ने गांव को पूरी दुनिया में संभावनाओं के प्रतीक के रूप में रोशन कर दिया है.

खुशी के सूत्र

''विश्व में जब भी सौर ऊर्जा की चर्चा होगी, मोढेरा अलग खड़ा दिखेगा''
—प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
अक्तूबर, 2022

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