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अनमोल बोल गांधी के

अक्सर कई मौकों और राजनैतिक बहसों के लिए गांधी का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन इन सारे 'चातुर्य औऱ पांडित्य' के लिए महात्मा उत्तरदायी नहीं हैं.

डॉ. के.बी. हेडगेवार पर आरआरएस पर आरएसएस की कॉमिक बुक का एक रेखाचित्र डॉ. के.बी. हेडगेवार पर आरआरएस पर आरएसएस की कॉमिक बुक का एक रेखाचित्र

इंडिया टुडे  टीम

आरएसएस और हिंदू धर्म पर

''गांधीजी का मानना था कि कोई भी संगठन जो [आरएसएस] की तरह सेवा और आत्म-बलिदान के आदर्शों से प्रेरित है उसकी शक्ति में वृद्धि होना स्वाभाविक है. लेकिन उस शक्ति को वास्तव में उपयोगी होने के लिए, उसे आत्म-उत्सर्ग को प्रयोजन की शुचिता और यथार्थ ज्ञान के साथ जोड़ा जाना चाहिए. इन दोनों गुणों से वंचित बलिदान समाज के लिए विध्वंसकारी सिद्ध होता रहा है.''

—हरिजन, 16 सितंबर, 1947

''मैं बार-बार कहता रहा हूं कि मैं आधुनिक अर्थों में जाति में विश्वास नहीं करता. यह अंग में विकृति सरीखा और प्रगति में एक बाधा है. किसी भी व्यक्ति द्वारा, किसी दूसरे व्यक्ति पर अपनी श्रेष्ठता को थोपना ईश्वर और मानवता के विरुद्ध किया गया एक पाप है. इसलिए जाति, चूंकि इसी भेदभाव को दर्शाती है, एक बुराई है.''

—यंग इंडिया, 4 जून, 1931

यौन क्रियाओं और लिंग पर

''भारत में, फिलहाल संतानोत्पत्ति को न्यूनतम करने की आवश्यकता है [इसलिए] हर चिंतनशील भारतीय का यह कर्तव्य है कि वह विवाह न करे... [या] अपनी पत्नी के साथ संसर्ग से बचे.''

—इंडियन ओपिनियन, दिसंबर 28, 1907

''नारी का सच्चा आभूषण उसका चरित्र, उसकी पवित्रता है.''

— महात्मा गांधी की संग्रहीत कृतियों में से एक उद्धरण, खंड 56, जनवरी 1943

डॉ. के.बी. हेडगेवार पर आरएसएस की कॉमिक बुक का एक रेखाचित्र

1930 के दशक में एक अपमानजनक अमेरिकी कार्टून

लाहौर से प्रकाशित सिविल ऐंड मिलिटरी गजट में 1939 में गांधी की 70वीं जयंती पर उनका मजाक उड़ाता कार्टून

हिंदुस्तान टाइम्स में 1935 में प्रकाशित कार्टून में गांधी लॉर्ड लिनलिथगो से भारतीय कृषि को बढ़ावा देना जारी रखने की याचना करते हुए

'विदेशी माल का बहिष्कार': 1944 में इटली में भारतीय सैनिकों के बीच गिराया गया जर्मन प्रोपेगैंडा वाला पर्चा

गांधी की तो नहीं हैं!

अप्रमाणित बातें जिन्हें गांधी के मत्थे मढ़ा जाता रहा है

''हमारे परिसर में आने वाला सबसे महत्वपूर्ण आगंतुक ग्राहक होता है. वह हम पर आश्रित नहीं है, हम उस पर आश्रित हैं. वह हमारे काम में बाधक नहीं है. हमारा काम उसी से है. वह हमारे व्यवसाय का बाहरी व्यक्ति नहीं है. वह इसका हिस्सा है. हम उसकी सेवा करके उसका उपकार नहीं कर रहे हैं. वह हमें ऐसा करने का अवसर देकर हम पर उपकार कर रहा है.''

(वास्तव में यह कथन स्टडबेकर कॉर्पोरेशन के वाइस प्रेसिडेंट और कंपनी में सेल्स के इंचार्ज केनेथ बी. इलियट का है)

''आप दुनिया में जो परिवर्तन देखना चाहते हैं, वह परिवर्तन खुद करें''

पत्रकार: ''पाश्चात्य सभ्यता के बारे में आपके क्या ख्याल हैं?''

गांधी: ''मुझे लगता है कि यह अच्छा विचार होगा''

समृद्धि और प्रगति पर

''मेरा आर्थिक मत है कि विदेशी वस्तुओं के आयात पर पूर्ण नियंत्रण लगा दिया जाना चाहिए, उनका आयात हमारे देसी हितों के लिए नुक्सानदेह साबित हो सकता है. इसका अर्थ है कि हमें किसी भी सूरत में उन वस्तुओं का आयात नहीं करना चाहिए जिसकी पर्याप्त आपूर्ति हम अपने देश से भी कर सकते हैं.''

— सेंट पर सेंट स्वदेशी, 1948

''धरती ने मनुष्य की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए तो पर्याप्त दिया है लेकिन हर व्यक्ति के लोभ की पूर्ति के लिए नहीं''

—प्यारेलाल द्वारा महात्मा गांधी: द लास्ट फेज, खंड दो, 1958 में उद्धृत

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