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क्रिकेटः टीम इंडिया की तलाश

वर्ष 2022 हर भारतीय खिलाड़ी के लिए खुद को साबित करने का या उस खेल की नई परिभाषा गढ़ने का मौका होगा

भविष्य के रुझान 2022: खेल भविष्य के रुझान 2022: खेल

शारदा उगरा

आखिर 2022 में भारत खेल जगत की बड़ी तस्वीर क्या होगी, इस पर नजर दौड़ाने के लिए उस मर्द खिलाड़ी की ओर रुख करना होगा. जी नहीं, वह विराट कोहली नहीं, नीरज चोपड़ा है. यह ओलंपिक पदक विजेता, भाला (जेवलिन) फेंकने वाले की स्टीरियोटाइप छवि वाला, हमारे अब तक के अधूरे सपने का हीरो है. चोपड़ा के लिए 2022, भारत में खेल की तरह ही, सांस थामे जीने का वर्ष है. ओमिक्रोन संक्रमण चाहे बढ़े या नहीं, चोपड़ा को अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी परीक्षा देनी है कि टोक्यो उनके लिए आरंभ बिंदु था या संतुष्ट होकर आराम फरमाने का मौका. जुलाई 2022 में चोपड़ा को अपनी पहली सीनियर वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप में दुनिया के चौथे नंबर के जेवलिन थ्रो खिलाड़ी के नाते स्पर्धा में हिस्सा लेना है. इस पैमाने उनसे पहले के तीन खिलाड़ी उस भारतीय पर अपनी श्रेष्ठता साबित करने को उतावले होंगे, जिसने महज ध्यान लगाने की कुटिया सरीखी जगह से निकलकर टोक्यो में हर मानक को पछाड़ दिया.

चोपड़ा के लिए 2022 हर तरह के दबाव का चरम बिंदु लेकर नमूदार हुआ है. उन्हें आगामी स्पर्धा में अपना बेहतरीन शरीरिक क्षमता का प्रदर्शन की तरकीब खोजनी होगी, वह भी एक नहीं, बल्कि साल में तीन बार. वर्ल्ड चैंपिनयशिप के बाद 60 दिनों के भीतर ही चोपड़ा को दो और अंतरराष्ट्रीय खिताबी मुकाबलों में महारत दिखानी होगी, जो उनके माथे बंधी हुई है, यानी कॉमनवेल्थ गेम्स (सीडब्ल्यूजी) और एशियाई चैंपियनशिप में. उनके पास विकल्प था कि वर्ल्ड चैंपियनशिप में खिताब हासिल करके दो बड़ी स्पर्धाओं में से कम से कम एक में हिस्सा न लेते, लेकिन उन्होंने यह विकल्प नहीं चुना. टोक्यो से लौटकर चारों ओर वाहवाहियों से घिरे होने के दौरान ही उन्होंने मुझसे कहा, ''मैं एथलीट हूं. मेरा काम जुटे रहना है.''

वर्ष 2022 में प्रदर्शन के लिहाज से-नीरज 2.2-यानी उनके और सुधरे, संशोधित स्वरूप की उम्मीद है. उन्हें अपने बेहतरीन प्रदर्शन (88.07 मीटर) से आगे बढ़कर 90 मीटर के उस विरले मार्क को छूना है और खेल के मौजूदा महारती जोहानेस वेटर के साथ कंधा से कंधा मिलाकर खड़ा होना है, जो 90 मीटर का निशान ऐसा छूता है, जैसे कोई आराम से सड़क पार कर रहा हो. चोपड़ा वाहवाहियों के लाल कालीन से दिसंबर के पहले हफ्ते में ही उतर गए और विदेशी प्रशिक्षण की अक्लमंदी हासिल करने के लिए भारत से रवाना हो गए. वे अभी अमेरिका में हैं. 2022 भले ही भारी तनाव के क्षण लेकर आया हो पर उनकी सबसे बड़ी ताकत तो लचीलापन है. 

हमारे सभी खेलों के एथलीटों से 2022 ऐसी तेजी से अपने में सुधार लाने और कायाकल्प की मांग करता है, जिसके वे आदी नहीं होंगे. कोविड के पहले के दौर में ओलंपिक के बाद अमूमन 12 महीने की अवधि होती थी, जिसमें वे सीडब्ल्यूजी और एशियाई चैंपियनशिप की तैयारी के लिए अपनी फिटनेस वगैरह पर पूरा ध्यान दे पाते हैं. लेकिन ओलंपिक में देर होने से वह साल भर की अवधि खो गई और सब कुछ एक साथ आन पड़ा.

टोक्यो की यादें ताजा हैं इसलिए सुस्ती बरतना कोई विकल्प नहीं है: जो चमकदार खिताबों से रोशन है, उन्हें उसी आभा के पीछे छिपने के लिए पुकारा जाएगा. जो ओलंपिक में कुछ खास नहीं कर पाए, 2022 उनमें उम्मीद जगा सकता है. खासकर निशानेबाज, जिनके सीडब्ल्यूजी पदक चमक बिखेर चुके हैं, उनके लिए अब यह हासिल करना संभव नहीं होगा, क्योंकि यह खेल ही सीडब्ल्यूजी कार्यक्रम से बाहर कर दिया गया है. उनके लिए एशियाई चैंपियनशिप मुकाबला कड़ा हो जाएगा और उसके बाद वर्ल्ड शूटिंग चैंपियनशिप में होड़ लेना होगा. देश में (क्रिकेट के बाद) सबसे खास खेल का रुतबा निशानेबाजी की जगह अब चोपड़ा, बैडमिंटन और हॉकी ने ले ली है. इसी वजह से 2022 निशानेबाजी के लिए खोई जमीन और साख वापस पाने का मौका है. 
यह साल एक और खेल फुटबॉल पर नया फोकस लेकर आया है क्योंकि दो बड़े आयोजन एएफसी वूमेंस एशियन कप और फीफा यू-17 वूमेंस फुटबॉल वर्ल्ड कप हो रहा है. चमक-दमक से दूर छिटक गए हमारी फुटबॉल की दिलचस्पी उसके सब जगह एक समान आसान खेल की वजह से है, बड़े आयोजनों की कड़ी समीक्षा की दरकार है. उनका सेलेब्रेटी मॉडल उस जरूरत को नजरअंदाज करता है, जो जमीनी स्तर पर लाखों लड़के, लड़कियां 'पहचान और प्रदर्शन' के बगैर गुमनामी में स्थानीय, राज्य और राष्ट्रीय स्तर की लीग में खेलते हैं. वे तो मुट्ठी भर एलिट खिलाड़ियों के शोपीस इवेंट की खातिर 'तैयारी' टूर का आयोजन करते हैं.

इस पूरे साल भारतीय खेल (फिर क्रिकेट के अलावा) के नए हब के रूप में ओडिशा के उदय पर मुहर लगेगी. मार्च 2021 में भारत में खेल शहरों के ग्रांट थॉर्टन सर्वे में भुवनेश्वर नंबर 3 पर था, उसके आगे दिल्ली और मुंबई थे. उसके बाद बेंगलूरू और अहमदाबाद का नंबर था. हालांकि प्रकाशित सर्वे में न जाने कैसे अहमदाबाद और बेंगलूरू के बाद भुवनेश्वर चौथे स्थान पर पहुंच गया. लेकिन इन टाइपिंग की गलतियों के अलावा ओडिशा ने खेल प्रोफाइल में बाकी सभी ताकतवर खेल ठिकानों को पीछे छोड़ दिया. राज्य ने खेल में मौके पर काफी पैसा लगाया है, राष्ट्रीय हॉकी टीमों का उसका प्रायोजन खबरों से दूर नहीं हो पाया क्योंकि टोक्यो में हॉकी अभियान कामयाब जो रहा. जनवरी 2023 में होने वाले हॉकी वर्ल्ड कप के लिए राउरकेला में 20,000 सीटों का हॉकी स्टेडियम बनाया जा रहा है. 

आखिर में,  देश के दिलो दिमाग में सबसे ज्यादा छाया रहने वाला भारी-भरकम गोरिल्ला यानी क्रिकेट है. 2022 में 10 टीमों वाले आइपीएल के साथ भारी मंथन होने वाला है. आइपीएल का 15वां सीजन क्रिकेट के कायाकल्प का अगला चरण होगा, राष्ट्रीय पुरुष टीम और दुनिया में उसकी छाप दोनों मदों में. रुझानों का संकेत तो यही है कि पुरुष टीम स्पष्ट दो हिस्सों में बंट जाएगी-अलग-अलग कप्तानों के तहत रेड बॉल टीम और ह्वाइट बॉल टीम. दो अलग फॉर्मेट के लिए दो कप्तानों की बात भारत में पहली बार नहीं होगी, लेकिन इस बार दायरे साफ-साफ बंटे होंगे. पहले कुंबले-धोनी या धोनी-कोहली का फॉर्मूला महज थोड़े अंतराल के लिए हुआ था, ताकि आखिरकार एक को सभी तीनों कमान सौंप दी जाए.

33 साल के कोहली अपने करियर के उत्तरार्ध में हैं और अपनी कप्तानी के थोड़े-बहुत विस्तार के साथ अपनी बल्लेबाजी कला को दोबारा हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं. तीनों फॉर्मेट में माहिर और कप्तानी की रेस में आगे फिलहाल मुट्ठी भर ही खिलाड़ी हैं: 34 वर्षीय रोहित शर्मा, 31 वर्षीय मोहम्मद शामी, 29 साल के के.एल. राहुल, 28 वर्षीय जसप्रीत बुमराह और 24 साल के ऋषभ पंत. नया साल ऑस्ट्रेलिया में आइसीसी मेन्स टी20 वर्ल्ड कप के रूप में आइसीसी खिताब का एक और मौका लाएगा. कोहली ने कहा है कि वे कप्तानी की दौड़ में नहीं होंगे और जो भी चुना जाता है, वही टीम की भविष्य की पटकथा लिखेगा.

लेकिन आइपीएल शुरू होने के काफी पहले, 2022 की पहली तिमाही में उलट-फेर होना तय है, अगर यूएई क्रिकेट छह टीमों की 34 मैच वाले टी20 लीग की शुरुआत होती है. मैनचेस्टर यूनाइटेड के प्रबंधकों ने यूएई के साथ फ्रेंचाइजी करार की बात पुष्ट की है और कम से कम दो भारतीय टी20 फ्रेंचाइजी ने टीम भेजने में दिलचस्पी दिखाई है. ये हैं मल्टीनेशनल हो चुकी नाइट राइडर्स और रिलायंस की मुंबई इंडियंस. दोनों जुड़ जाती हैं तो सब कुछ बदल जाएगा.

शारदा उगरा वरिष्ठ खेल पत्रकार हैं, जो तीन दशकों से प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं

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