scorecardresearch
 
डाउनलोड करें इंडिया टुडे हिंदी मैगजीन का लेटेस्ट इशू सिर्फ 25/- रुपये में

राजस्थानः पकवानों का राजसी ठाठ

मीठी रसीली जलेबी को एक स्टील जग में मसल दिया जाता है और फिर उसमें आधा गिलास दूध मिलाकर उसके ऊपर मलाई की मोटी परत बिछा दी जाती है. मुलायम और कुरकुरी जलेबियों में मिला यह दूध बहुत स्वादिष्ट हो जाता है.

तरावट अजमेर की स्वादिष्ट और तरावट देने वाली लस्सी तरावट अजमेर की स्वादिष्ट और तरावट देने वाली लस्सी

यदि आप स्ट्रीट फूड की तलाश में हैं और उसकी तलाश में आपको अलग-अलग जगहों की खाक छाननी पड़े और वह भी जयपुर जैसे बड़े शहर में तो हो सकता है, कुछ देर बार आपका मन उचट जाए. इतने बड़े शहर में खाने के लिए भटकना, थकाऊ हो सकता है. इसको समझते हुए, मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने जयपुर में स्ट्रीट फूड्स के लिए एक जगह आवंटित कर दी जहां जयपुर के सभी लोकप्रिय स्ट्रीट फूड इकट्ठे एक जगह पर मिल जाते हैं.

अल्बर्ट हॉल कॉम्प्लेक्स के पास स्थित इस जगह को मसाला चौक के रूप में जाना जाता है जहां जयपुर के सबसे लोकप्रिय स्ट्रीट फूड विक्रेताओं के 21 कियोस्क हैं. प्रेम प्रकाश समोसा, सम्राट-प्याज की कचौरी, मसाला चाय और जलेबी, रामकृष्ण कलकत्ती चाट, गोपाल सिंह पताशी भंडार, शंकर समोसा, सेठानी का ढाबा, सोमीलाल का रावत मिष्ठान भंडार, इंडियन आइसक्रीम फालूदा, रमन डोसावाला, श्री झारखान नाथ पोहा और चाट, गुलाब जी चाय वाले, दिल्ली चाट और कैफे, वाह! बन्ना, भगत मिष्ठान भंडार, ब्रजवासी फालूदा केसर कुल्फी, पावन राजस्थानी व्यंजन, जयपुरी चटकारा, हाउस ऑन फायर, अंडेवालाज और आइसक्रीम ऐंड शेक्स जैसे जयपुर के सारे लोकप्रिय स्ट्रीट फूड बेचने वालों की स्टॉल्स यहां मौजूद हैं.

जाहिर है, यहां हर समय भीड़-भाड़ रहती है. जयपुर के जायके का मजा लेने लोग यहां रोजाना उमड़ते हैं. कभी-कभी खाने-पीने का आनंद बढ़ाने के लिए यहां शाम को संगीत कार्यक्रम भी कराए जाते हैं, पर कुछ दुकानें ऐसी भी हैं जहां गुणवत्ता की गारंटी नहीं है. कुछ दुकानों पर ताजा समोसा नहीं मिलता. अक्सर पहले के समोसे को तेल में दोबारा गर्म करके परोस दिया जाता है.

अगर आप शहर में घूमकर कुछ और व्यंजन चखना चाहते हैं तो राजा पार्क जा सकते हैं, जो हाल के समय में खाने-पीने के नए स्थान के रूप में उभरा है. मुख्य रूप से पंजाबी लोगों की बहुतायत वाले इस इलाके की संकरी गलियों में पुराने रोशन और हनुमान ढाबे के अलावा भारतीय व्यंजनों की कई नई दुकानें भी सजती हैं. यहां आपको स्वादिष्ट अमृतसरी कुल्चे, भठूरे, अलग-अलग फ्लेवर वाली ताजी आइसक्रीम, विभिन्न प्रकार के वेज और नॉन-वेज रोल, पनीर टिक्का, पानी पताशे मिल जाएंगे. पुराने शहर की विभिन्न गलियों में तो आपको परंपरागत व्यंजन मिल ही जाते हैं, उनके अलावा एमआइ रोड पर लस्सीवाले, आमेर किले और गोविंदजी मंदिर के पास भी राजस्थानी भोजन का आनंद लिया जा सकता है.

अजमेर में ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह में दो विशाल देग—नियाज (पूरी तरह से शाकाहारी) पकाने के लिए लगती हैं. नियाज को चावल, घी, बादाम, केसर और चीनी से पकाया जाता है. लंगर में एक बड़ी प्लेट में, ताजा और स्वादिष्ट बिरयानी और मीठे चावल परोसे जाते हैं. अनंत जैन लस्सी दुकान में कुल्हड़ में मलाई की मोटी परत वाली लस्सी मिलती है, जिसे ऊपर से रबड़ी और केसर जल से सजाया जाता है. वैशाली नगर में धन्ना की मसालेदार दाल, कचौड़ी को छाछ से तैयार कढ़ी के साथ परोसा जाता है.

इस दुकान को दो भाई, दुर्गेश और कन्हैया चलाते हैं. कचैडिय़ों के ऊपर मसले हुए आलू और धनिया भी छिड़का जाता है. अजमेर में अकबरी संग्रहालय के बगल में आमने-सामने स्थित दो प्रसिद्ध दुकानें हैं—शंकर चाट और अनंत जैन लस्सी की दुकान. शंकर की दुकान कचौड़ी और साखे के लिए बहुत प्रसिद्ध है. मैदे में अजवाइन मिलाकर उसे गूंथने के बाद तेल में अच्छे से तलकर साखे तैयार होते हैं, जिसे भारत के विभिन्न शहरों में मठरी के नाम से भी जाना जाता है.  

अजमेर का सोहन हलवा गेहूं, घी, चीनी और बादाम से बनता है. आप चम्मच से थोड़ा-सा हलवा जीभ पर रखें पूरा मुंह घी से भर जाएगा. पुरानी मंडी में मूलचंद बुद्धामल, अजमेर के सबसे पुराने मिठाई निर्माता हैं, लेकिन दरगाह बाजार की मिठाई की हर दुकान में आपको सोहन हलवा मिल जाएगा. इसके अलावा एक और प्रसिद्ध दुकान है भूतिया हलवाई, जहां की दूध जलेबी और गोंद के लड्डू बहुत प्रसिद्ध हैं. मीठी रसीली जलेबी को एक स्टील जग में मसल दिया जाता है और फिर उसमें आधा गिलास दूध मिलाकर उसके ऊपर मलाई की मोटी परत बिछा दी जाती है. मुलायम और कुरकुरी जलेबियों में मिला यह दूध बहुत स्वादिष्ट हो जाता है.

खाने के बाद मीठे के रूप में आपको केसर पिस्ता आइसक्रीम मिल जाएगी, जिसे केसर पिस्ता कुल्फी के ऊपर रबड़ी, ड्राई फ्रूट और गुलाबजल छिड़कर एक शीशे के कटोरे में परोसा जाता है. नसीराबाद रोड पर स्थित महादेव ढाबा अजमेर के प्रसिद्ध भोजनालयों में से एक है जहां गट्टे की सब्जी, केर संगरी, सेव टमाटर, पापड़ सब्जी जैसे कुछ परंपरागत राजस्थानी व्यंजन मिल जाते हैं. मदार गेट के पास की कचैरी आकार में बड़ी होती है और इसका वजन 650 ग्राम तक होता है.

यहां से आधे घंटे की दूरी पर स्ट्रीट फूड के लिए एक आदर्श स्थान है पुष्कर. आपको शहर के हर नुक्कड़, हर कोने में मालपुए की दुकानें मिल जाएंगी. इसकी लेई में पानी की जगह रबड़ी मिलाई जाती है, जिससे इसका स्वाद अद्भुत हो जाता है. पुष्कर की सबसे लोकप्रिय दुकान हलवाई गली में स्थित सर्वदिया मिष्ठान भंडार है. पुष्कर में गौ घाट की हलवाई गली, मिठाई विक्रेताओं के लिए एक समर्पित गली है. चंद कदमों की दूरी पर एक और दुकान है पुष्कर चाट भंडार-मोहन जी भुजिया वाले जो सुबह में खुलती है और पकौड़ी के लिए बहुत प्रसिद्ध है, जिसे यहां भजिया भी कहा जाता है. पालक और बेसन से बने सामान्य छोटे आकार के पकौड़ों के ऊपर कढ़ी (इसे करी समझने की भूल न करें) डालकर परोसा जाता है. राजस्थान के अजमेर जिले में मिलने वाली बेसन और पानी को मिलाकर बनाई गई पकौडिय़ां स्वाद में कुछ हटकर होती हैं.

लालाजी की पराठे की दुकान पर तरह-तरह के पराठे बिकते हैं. कुमावत लस्सी दुकान पर मखनिया गुलकंद लस्सी खाने के साथ जायका और सेहत दोनों भर देती है. कुमावत लस्सी दुकान की लस्सी के ऊपर मलाई, रबड़ी और गुलकंद (गुलाब की पंखुडिय़ों, चीनी और मसालों से बनती है) डाली जाती है.

वाराह घाट के पास ब्रेकफास्ट कॉर्नर की गाड़ी पर पिज्जा पकवान यानी, मठरी और दाल के साथ पोहा बेचा जाता है. नीचे मठरी होती है उसके ऊपर पोहा, दाल डाली जाती है और फिर उसे सेव, नमकीन, प्याज, चटनी, चाट मसाला और ताजा धनिया से सजाया जाता है. दाल पकवान एक प्रामाणिक सिंधी नाश्ता है जिसमें मैदे से बनी बड़े आकार वाली मठरी को दाल के साथ परोसा जाता है. इसे बाड़मेर में भी व्यापक रूप से खाया जाता है. इसके अलावा जयपुर में टपरी जैसी कुछ लोकप्रिय दुकानों के मेन्यू में भी यह शामिल है. उगमा जी की दुकान में आम चटनी के साथ स्वादिष्ट कचौड़ी का भी आनंद ले सकते हैं.

गंगा रेस्तरां में मिलने वाला लाफा भी बहुत स्वादिष्ट होता है जिसका आनंद लिया जा सकता है. यहां दुनियाभर के लोगों की पसंद और जायके के हिसाब से व्यंजन परोसने वाले कैफे और रेस्तरां मिल जाएंगे जिनमें जर्मन बेकरी या फिर फलाफेल, हुमस और पश्चिम एशिया के दूसरे व्यंजन परोसने वाले कई अन्य रेस्तरां शामिल हैं. सबसे मशहूर पकवान लाफा है. यह हुमस, फालाफेल, लहसुन सॉस, मशरूम, प्याज, टमाटर, पोटैटो वेजेस, काली मिर्च, नमक के साथ भरकर तैयार होता है. इसे जैतून के तेल में पकाया जाता है और इसे पकते हुए देखना एक अच्छा अनुभव रहा.

कोटा की कचौडिय़ों का स्वाद अन्य जगह की कचौडिय़ों से अलग होता है इसीलिए इसे कोटा कचौड़ी कहा जाता है. वैसे कोटा कचौडिय़ां जयपुर और जैसलमेर जैसे अन्य स्थानों में भी मिल जाती हैं. पर कोटा में हर जगह मिल जाएंगी ये कोटा कचौडिय़ां. कोटा में दाल-बाफला भी आपको खूब मिल जाएगा जो मूल रूप से मध्य प्रदेश का व्यंजन है लेकिन इसमें थोड़ा राजस्थानी तड़का लगाकर राजस्थानी रंग दे दिया जाता है. यहां तो दाल-बाफला राजस्थानी व्यंजन दाल बाटी से ज्यादा लोकप्रिय है. बाटी के विपरीत बाफला को उबालने के बाद सेंका जाता है. पाठक स्वीट्स यहां की प्रसिद्ध मिठाई की दुकान है.

बूंदी अपनी कचौडिय़ों के लिए भी प्रसिद्ध है. यहां की दूध जलेबी की दुकान गादमल स्वीट्स शॉप और नैनावाला पेठा बहुत मशहूर हैं.

लेकिन जब स्वाद की बात आती है तो जोधपुर का कोई जवाब नहीं है. नई सड़क पर स्थित पोखर स्वीट्स में मिर्च वड़ा समेत तमाम स्थानीय व्यंजन और मिठाइयां परंपरागत स्वाद में मिल जाएंगी. स्वस्ति गेट की किम बेकरी भी बहुत लोकप्रिय है जिसकी सरदारपुरा वाली दुकान को 15ए.डी के रूप में जाना जाता है. यह बेकरी अपने बिस्किट, पेस्ट्री, पैटी और केक जैसे स्ट्रीट फूड के लिए बहुत प्रसिद्ध है. घंटाघर स्थित अरोड़ा नमकीन में शाही समोसे मिलते हैं. अपनी कचौडिय़ों और मिर्ची वड़ा के लिए प्रसिद्ध राजस्थान में जो समोसा आपको जोधपुर में मिल जाएगा, वैसा लजीज समोसा पूरे प्रदेश में कहीं और शायद ही मिले. अलवर के मिल्क केक भी बहुत प्रसिद्ध हैं. सेंद्रा टाउन मार्केट में दही वड़े खाने के लिए लाइन लगती है.

उदयपुर में गुजरात का प्रभाव ज्यादा दिखता है और यहां के नटराज होटल समेत कुछ अन्य जगहों पर परोसी जाने वाली थालियां बहुत लोकप्रिय और लजीज हैं. इसके अलावा कई रेस्तरां में परंपरागत राजस्थानी भोजन भी परोसा जाता है. यह स्थान मक्के से बने पकवानों के लिए भी खासतौर से जाना जाता है. चित्तौडग़ढ़ में नाश्ते में हरी मिर्च के साथ लंबी पापड़ी बड़े चाव से खाई जाती है.

जैसलमेर के किले की गलियों से गुजरने का अनुभव अविस्मरणीय रहता है. यहां कई दुकाने हैं जहां परंपरागत मिठाइयां मिलती हैं लेकिन घरों के अंदर और छतों पर बनी चाय की दुकानें व रेस्तरां, आपको किले के अंदर के जीवन का अद्भुत अनुभव प्रदान करते हैं.

बीकानेर अपनी मिठाइयों की विभिन्न किस्मों के लिए जाना जाता है लेकिन छोटू मोटू जोशी ऐसी चंद पारंपरिक मिठाइयों की दुकानों में से एक है जो अपने रसगुल्ले और बीकानेरी नमकीन के लिए बहुत प्रसिद्ध है. यहां के गोंद के लड्डू भी खासे प्रसिद्ध हैं. स्थानीय लोग ताजा-ताजा भुजिया और अन्य नमकीन ज्यादा पसंद करते हैं जो पैकिंग में बिकने वाले नमकीन से कहीं ज्यादा कुरकुरा होता है. बीकानेर में बीकानेरी भुजिया की अनेक दुकानें हैं, ऐसे में आपको स्थानीय लोगों से पूछकर स्वादिष्ट भुजिया और नमकीन खरीदनी चाहिए. राजस्थानी थाली और खाने का स्वाद आपको यहां आसानी से मिल जाएगा.

टेस्ट जंक्शन जयपुर के मसाला चौक में व्यंजनों की भरमार

तरावट अजमेर की स्वादिष्ट और तरावट देने वाली लस्सी

पुष्कर का टेस्ट पुष्कर में सर्वदिया मिष्ठान भंडार के लजीज मालपुए

किंग साइज कचौड़ी 650 ग्राम की सबसे बड़ी कचौड़ी अजमेर के महाकाल स्वीट्स में

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें
ऐप में खोलें×