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ऊंचे और असरदारः बेमिसाल क्षत्रप

वे दो बार मुख्यमंत्री बने और राज्य में कांग्रेस का किला मजबूत बनाए रखा है. इसमें उन्हें पार्टी आलाकमान से ज्यादा मदद की जरूरत नहीं पड़ती. उन्होंने पहले ही पंथ के एजेंडा—सिख धर्म और खेती-बाड़ी—को शिरोमणि अकाली दल (एसएडी) के हाथ से छीन लिया

अमरिंदर सिंह, 78 वर्ष मुख्यमंत्री, पंजाब अमरिंदर सिंह, 78 वर्ष मुख्यमंत्री, पंजाब

क्योंकि वे दो बार मुख्यमंत्री बने और राज्य में कांग्रेस का किला मजबूत बनाए रखा है. इसमें उन्हें पार्टी आलाकमान से ज्यादा मदद की जरूरत नहीं पड़ती. उन्होंने पहले ही पंथ के एजेंडा—सिख धर्म और खेती-बाड़ी—को शिरोमणि अकाली दल (एसएडी) के हाथ से छीन लिया है.

इसमें कांग्रेस की पारंपरिक लाइन यानी सतलज-यमुना लिंक (एसवाइएल) में पानी छोडऩे पर बातचीत रोकने से हटना, सिख प्रदर्शनकारियों पर पुलिस फायरिंग की जांच को तेज करना और अब कृषि विधेयकों का विरोध करना शामिल हैं

क्योंकि उन्होंने पार्टी और सरकार को वनमैन शो की तरह चलाया है. असंतुष्टों और बागियों को उन्होंने अपनी छवि पर दाग लगाने का मौका नहीं दिया है

क्योंकि वे सियासी रूप से संवेदनशील पंजाब के मुखिया हैं जहां सिखों का वर्चस्व है और आतंकवाद के जख्म अभी पूरी तरह नहीं भरे हैं. राज्य की घटनाओं की गूंज प्रवासी सिखों तक जाती है

कहीं और होते: 1997 के विधानसभा चुनावों में वे अपनी पार्टी एसएडी (पंथिक) का विलय प्रकाश सिंह बादल की एसएडी में करने को बेताब थे. वह हुआ नहीं. कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में सोनिया गांधी की वापसी के बाद उन्होंने कांग्रेस में विलय किया, राज्य इकाई के मुखिया बने

सुखबीर बादल

58 वर्ष एसएडी, अध्यक्ष

वापसी पर जोर

क्योंकि उन्होंने पंजाब की सियासत में विपक्ष की भूमिका फिर से हासिल कर ली है. वे आप और कांग्रेस के पाले में चले गए अपने समर्थकों को वापस लाकर अपनी पार्टी को फिर से खड़ा कर रहे हैं.

क्योंकि पंजाब की व्यक्ति आधारित राजनीति में वे मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह की मुखालफत में खड़े विपक्ष के एकमात्र दिखने वाले चेहरे हैं.
क्योंकि वे अभी भी सिख धर्म की राजनीति के सबसे बड़े अकाली नेता हैं और देश के अधिकतर हिस्सों में गुरुद्वारों के प्रबंधन पर उनका नियंत्रण है.

पसंद और लंबी पारी: उन्हें डाइट कोक बहुत पसंद है.

एसएडी के 100 साल के इतिहास में, वे दूसरे सर्वाधिक कार्यकाल (12 साल) वाले पार्टी अध्यक्ष हैं. उनसे अधिक सिर्फ उनके पिता प्रकाश सिंह बादल (13 साल) ही इस पद पर रहे हैं.

प्रताप सिंह बाजवा

63 वर्ष सांसद, राज्यसभा

कुशल रणनीतिकार

क्योंकि वे पंजाब में कांग्रेस के नंबर दो नेता हैं. वे निडर होकर अमरिंदर के शासन का विरोध करते हैं

क्योंकि वे तीन बार विधायक और दो बार सांसद रहे हैं. उनका पंजाब के माझा और दोआबा क्षेत्र में हिंदुओं व सिखों में बहुत समर्थन आधार है

क्योंकि उन पर पार्टी आलाकमान का वरदहस्त है. आलाकमान उन्हें अमरिंदर की बेहतर काट मानता है

तरकीब: 2004 के आम चुनाव में गुरदासपुर में उन्होंने अभिनेता और भाजपा उम्मीदवार विनोद खन्ना की फिल्म मेरा गांव, मेरा देश के क्लिप्स चलाने लगे थे जिसमें खन्ना डकैत बने थे. ग्रामीण वोटर खन्ना से दूर हो गए व खन्ना चुनाव हार गए थे

दिनकर गुप्ता
 

56 वर्ष डीजीपी

विनी महाजन
 

56 वर्ष मुख्य सचिव


दो का दम
 

क्योंकि देश में वे एकमात्र दंपती हैं जो पुलिस और नागरिक प्रशासन की कमान संभाल रहे हैं. विनी राज्य की पहली महिला मुख्य सचिव हैं

क्योंकि दोनों मुख्यमंत्री के विश्वासपात्र हैं. दोनों मिलकर न सिर्फ कोविड के खिलाफ राज्य की लड़ाई की अगुआई कर रहे हैं, विधि-व्यवस्था कायम रख रहे हैं बल्कि इसके साथ ही राज्य के पुनर्निमाण के लिए उद्योग जगत के साथ मिलकर काम कर रहे हैं

क्योंकि उनके राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल के साथ भी निकट संबंध हैं. गुप्ता 2012 तक आइबी में थे, जबकि विनी ने पीएमओ में संयुक्त सचिव के तौर पर काम किया है

सबसे आगे: गुप्ता और महाजन दोनों को शीर्ष पद तक पहुंचाने के लिए उन्हें तीन से अधिक अफसरों पर तरजीह दी गई
—अनिलेश एस. महाजन

राजस्थान

अशोक गहलोत

69 वर्ष राजस्थान के मुख्यमंत्री

मजबूत दीवार

क्योंकि उन्होंने जून से अगस्त के बीच कट्टर प्रतिद्वंद्वी सचिन पायलट की अगुआई में अपने खिलाफ भाजपा समर्थित विद्रोह का पहले से अंदाजा लगाकर उसे कामयाबी से कुचल दिया. उन्होंने कांग्रेस के इने-गिने ताकतवर जमीनी नेताओं में अपनी स्थिति और मजबूत कर ली. उन्होंने सौ से ज्यादा विधायकों को अपने साथ जोड़े रखा, जो मंत्रियों के खिलाफ भले शिकायतें करें लेकिन मुख्यमंत्री के खिलाफ कभी नहीं करते


क्योंकि आलाकमान ने फिर उनके नेतृत्व और सियासी हुनर, गांधी परिवार के प्रति वफादारी और मोदी-शाह के खिलाफ डटे रहने की क्षमता का लोहा माना, विधायकों को अपने साथ जोड़े रखने के लिए उनका आभार जताया, अपनी सुविधा से मंत्रिमंडल विस्तार करने और सियासी नियुक्तियां करने की छूट दी.

उनकी यह बात भी मान ली कि पायलट ने पीसीसी प्रमुख होने के बावजूद पार्टी तोड़ने और सरकार गिराने की कोशिश करके भद्दी मिसाल कायम की है और इसलिए उन्हें राजस्थान से दूर रखा जाना चाहिए


क्योंकि उन्होंने अपना प्रशासनिक हुनर भी साबित किया, कोरोना से लडऩे की खातिर अव्वल दर्जे का बुनियादी ढांचा खड़ा करने के लिए हर मुमकिन संसाधन जुटाए.

मसलन 33 में से 22 जिलों में 52,000 कोरोना टेस्ट सुविधाएं स्थापित कीं, निर्धनतम लोगों के लिए भोजन का बंदोबस्त किया, वित्त मंत्री के रूप में अर्थव्यवस्था में जान फूंकने के कदम उठाए, गृह मंत्री के रूप में अपराधों और कानून व्यवस्था पर नियंत्रण बनाए रखा, और सूचना के अधिकार, पारदर्शिता तथा लैंगिक समानता के प्रति प्रतिबद्धता दोहराया


गीत-संगीत: उन्हें पुराने हिंदी गाने सुनना पसंद है. वे 18-18 घंटे काम करते हैं और मुख्यमंत्री के तौर पर अपना बेहतरीन प्रदर्शन लेकर 2023 के चुनाव में उतरना चाहते हैं

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