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अनजाने नायकः सुपर कॉप

विजयन का कहना है, ''मेरा मानना है कि अगर इरादा पक्का हो तो परिवर्तन संभव है. चाहे वह ओआरसी हो या एसपीसी, मेरी सारी पहल सरकार, एनजीओ और सिविल सोसाइटी के बीच साझेदारी विकसित करके लागू करने के लिए डिजाइन की गई है.''

पी. विजयन, 51 वर्ष  पुलिस महानिरीक्षक, केरल पी. विजयन, 51 वर्ष पुलिस महानिरीक्षक, केरल

पी. विजयन, 51 वर्ष

पुलिस महानिरीक्षक, केरल

केरल के पुलिस महानिरीक्षक पुतियोतिल विजयन को अनूठा सुधार मॉडल पेश करके राज्य में पुलिस की छवि बदलने का श्रेय दिया जाता है. कोझिकोड शहर के पुलिस प्रमुख के तौर पर विजयन ने 2010 में बाल अपराधियों को सुधारने में मदद के लिए 'ऑवर रेस्पॉन्सिबिलिटी टु चिल्ड्रेन' (ओआरसी) कार्यक्रम शुरू किया था. इसके तहत बाल अपराधियों को डिटेंशन होम में भेजे बिना सुधारना था.

राज्य के सामाजिक न्याय विभाग ने 2015 में किशोरों के आपराधिक व्यवहार को ठीक करने के लिए अपनी इंटीग्रेटेड चाइल्ड प्रोटेक्शन स्कीम में ओआरसी को शामिल कर लिया. ओआरसी 303 स्कूलों में चलता है और 1,00,000 बच्चे इसमें शामिल हैं. इसमें भाग लेने वाले—शिक्षक, सामुदायिक नेता और स्वयंसेवी काउंसलर—समस्याग्रस्त परिवारों से ताल्लुक रखने वाले बच्चों की मदद पर विशेष ध्यान देते हैं और अपने रवैये में बदलाव करके पढ़ाई-लिखाई में सुधार करने के लिए प्रेरित करते हैं.विजय कहते हैं, ''समस्याग्रस्त परिवारों के बच्चों को हमारी मदद और संरक्षण की जरूरत है. हमें उन्हें आपराधिक समूहों से अलग रखने की जरूरत है, जो उन्हें फंसा लेते हैं. उन्हें अपनी क्षमताओं को तलाशने का रास्ता दिखाकर हम एक तरह से नए भारत के निर्माण में मदद कर रहे हैं.''

विजयन ने हाइस्कूल के छात्रों की क्षमताओं को विकसित करके उन्हें भविष्य का नेता बनाने के लिए 2006 में स्टुडेंट पुलिस कैडेट (एसपीसी) प्रोग्राम शुरू किया था. इस प्रोग्राम का लक्ष्य छात्रों में जिम्मेदारी, स्व-अनुशासन, कानून का सम्मान और संवेदना का भाव भरना था. यह योजना पुलिस और शिक्षा विभाग की मदद से चलाई जा रही है और इसके नेटवर्क में 700 स्कूल तथा 60,000 छात्र हैं. 1,300 से ज्यादा शिक्षक और 1,500 पुलिस अधिकारी इसका हिस्सा हैं. विजयन का कहना है, ''मेरा मानना है कि अगर इरादा पक्का हो तो परिवर्तन संभव है. चाहे वह ओआरसी हो या एसपीसी, मेरी सारी पहल सरकार, एनजीओ और सिविल सोसाइटी के बीच साझेदारी विकसित करके लागू करने के लिए डिजाइन की गई है.''

क्लास 7 में स्कूल छोडऩे वाले विजयन ने पक्के इरादे और कड़ी मेहनत के बूते अपनी जिंदगी बनाई है. धान के खेतों में काम किया और फिर कोझिकोड की कंस्ट्रक्शन साइट पर काम किया और एक दिन अपने सहकर्मियों की चुनौती स्वीकार करके मैट्रिक कर लिया. स्कूल के बाद उन्होंने ग्रेजुएशन किया और इकोनॉमिक्स में पोस्ट-ग्रेजुएशन के बाद एमफिल के लिए सेंटर फॉर डेवलपमेंट स्टडीज में दाखिला ले लिया. चौथे प्रयास में उन्होंने 1999 में लोक सेवा परीक्षा पास कर ली और भारतीय पुलिस सेवा (आइपीएस) अधिकारी के तौर पर केरल कैडर जॉइन कर लिया.

विजयन का कहना है कि उन्हें अपना प्रोजेक्ट चलाना ज्यादा चुनौतीपूर्ण लगा क्योंकि पुलिस व्यवस्था में वरीयताक्रम है और सब कुछ खास क्रम में ही होता है. वे बताते हैं, ''मेरे प्रयास सिर्फ इस वजह से सफल हुए क्योंकि वे सामान्य लोगों—शिक्षक, पुलिसकर्मी, माता-पिता, सिविल सोसाइटी के सदस्य—को बेहतर भविष्य के साझा सपने वाले समर्पित और उत्साही नेताओं के रूप में तब्दील करने पर केंद्रित थे.'' विजयन ने केरल में पुलिस में अभिनव प्रयोग जारी रखा है. उन्होंने 2017 में कोट्टायम जिले में प्रोजेक्ट होप शुरू किया, जिसके तहत उन स्कूल छात्रों की पढ़ाई में मदद की जाती है जो सेकंडरी एग्जाम में फेल हो गए हों. इस प्रोजेक्ट को एर्णाकुलम, अलप्पुझा और अलुवा जिलों में भी लागू कर दिया गया है.

बेंगलूरू में केंद्रीय जांच ब्यूरो के पुलिस अधीक्षक थॉमसन जोस का कहना है, ''पुलिस अधिकारी और सामाजिक उद्यमी के तौर पर आइजीपी विजयन का रिकॉर्ड अद्वितीय है. वे अभिनव प्रयोग करने के इच्छुक पुलिस अधिकारियों के आदर्श हैं.''

परिवर्तन का पैमाना

केरल पुलिस के इस वरिष्ठ अधिकारी के बच्चों पर केंद्रित सुधारों ने पुलिसिंग को मानवीय रूप दिया.

रोल मॉडल

केरल के पुलिस महानिरीक्षक पी. विजयन तिरुवनंतपुरम में पेरूरकडा सरकारी बालिका विद्यालय में कैडेटों के साथ.

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