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आसमां से ऊंची उड़ान

भारतीय नागरिक उड्डयन क्षेत्र धीरे ही सही आगे बढ़ता हुआ वैश्विक उड्डयन क्षेत्र से बराबरी के लिए प्रयासरत है. इसे गुणवत्ता बनाए रखने और वित्तीय सावधानियां बरतने पर ध्यान देना चाहिए.

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उड़ान का इतिहास एयर इंडिया का एक विमान 1950 में उड़ान का इतिहास एयर इंडिया का एक विमान 1950 में

आजादी @ 75   इन्फ्रास्ट्रक्चर : एयरवेज

भारत के हवाई यातायात क्षेत्र से महामारी की छाया खत्म होने के साथ हवाई यात्रा सामान्य स्तर पर लौट रही है. दस करोड़ से अधिक लोगों ने इस दौरान देश के भीतर यात्रा की है. कोविड संबंधी प्रतिबंधों के समाप्त होने और अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की बेहिचक आवाजाही शुरू होने से अगले साल यह आंकड़ा 16.6 करोड़ तक पहुंचने की उम्मीद है.

भारत पहले से ही अमेरिका, चीन और यूरोप के बाद चौथा सबसे बड़ा विमानन बाजार है. यहां 129 हवाई अड्डे हैं. मार्च 2022 के अंत में भारतीय आसमान में 1,17,57,112 हवाई संचालन हुए जिससे देश में और अधिक हवाई अड्डे विकसित करने का दबाव बन रहा है. उम्मीद है कि अगले चार वर्षों में भारत में हवाई अड्डों की यह संख्या 220 तक पहुंच जाएगी.

हवाई अड्डे विकसित, आजादी से पहले भी भारत का उड्डयन क्षेत्र वैश्विक स्तर पर दूसरे देशों के साथ अग्रिम पंक्ति में था और उसके पास 74 डीसी-3 डकोटा, 12 वाइकिंग, तीन डीसी-4एस और विभिन्न छोटे विमानों का वाणिज्यिक बेड़ा था, जो बड़े पैमाने पर राजघरानों के सदस्यों, नौकरशाहों, नेताओं, व्यापारियों और संपन्न लोगों की सेवा करता था. 

आजादी के बाद देश ने राष्ट्रीयकरण का विकल्प चुना और आठ स्वतंत्र घरेलू एयरलाइंस—डेक्कन एयरवेज, एयरवेज इंडिया, भारत एयरवेज, हिमालयन एविएशन, कलिंग एयरलाइंस, इंडियन नेशनल एयरवेज, एयर इंडिया और एयर सर्विसेज ऑफ इंडिया—का विलय करते हुए घरेलू राष्ट्रीय विमान सेवा इंडियन एयरलाइंस का गठन किया गया जबकि टाटा समूह के स्वामित्व वाले अंतरराष्ट्रीय मार्गों को एयर इंडिया बनाने के लिए ले लिया गया था.

अंतत:, 2021 में एयर इंडिया वापस टाटा संस को बेच दिया गया. सात दशकों में देश के आसमान में भारी बदलाव दिखा. भारत में हवाई अड्डों जैसे बुनियादी ढांचे को बढ़ाने, उपकरणों और विमान अपग्रेड करने का काम धीमा रहा और इसके लिए निर्णय लेने में अक्षमता के साथ एयरलाइनों के खराब आर्थिक प्रदर्शन और खराब नीतियों को दोषी ठहराया जाता रहा. 

1995 में  जब भारत ने अपना आसमान फिर से निजी उद्यमियों के लिए खोलना शुरू किया तो इस क्षेत्र में निवेश हुए. इसी के साथ असफलताएं भी आईं. दो बड़ी एयरलाइंस—किंगफिशर और जेट एयरवेज—विफल रहीं और आर्थिक संघर्षों से जूझते स्पाइसजेट का नियंत्रण कई हाथों में बदलता रहा.

फिर भी, आज 10 से अधिक निजी कंपनियां यात्री सेवाएं प्रदान करती हैं और इंडिगो, स्पाइसजेट, गो एयर, एवं विस्तारा—टाटा संस तथा सिंगापुर एयरलाइंस का संयुक्त उद्यम—जैसी विमानन कंपनियां पहले से ही विदेशी गंतव्यों की उड़ान भर रहे हैं. विस्तारा ने आगे बढ़ते हुए लंदन के लिए लंबी दूरी की उड़ानों में छोटे आकार वाले विमानों का प्रयोग शुरू किया है. स्पाइसजेट भी नए बाजार तलाशते हुए भारतीय कंपनियों की अंतरराष्ट्रीय उपस्थिति बढ़ाने में लगी हुई है.

भारत अपने वैश्विक सहचरों की तुलना में सुस्ती से बढ़ रहा है लेकिन वह उनके साथ बना हुआ है. अब इसे गुणवत्ता बनाए रखने की जरूरत है.


मील के पत्थर
1947 ः भारत के पास 74 डीसी-3 डकोटा, 12 वाइकिंग, 3 डीसी-4एस और अन्य छोटे विमान थे, जो मुख्य तौर पर वीआइपी के लिए थे. 
टाटा की एयर इंडिया ने काहिरा और जिनेवा के रास्ते बंबई से लंदन की साप्ताहिक उड़ान के साथ विदेशी सेवाएं शुरू कीं

1953 ः एयरवेज उद्योग का राष्ट्रीयकरण हुआ. इंडियन एयरलाइंस की स्थापना की गई. एयर इंडिया बनाने के लिए टाटा से अंतरराष्ट्रीय मार्गों को लिया गया 

1995ः महानिदेशक, नागरिक उड्डयन को नियामक बनाने के लिए कानूनों में संशोधन किया गया; निजी क्षेत्र को अनुमति दी गई. कुल हवाई यातायात का 10 प्रतिशत निजी क्षेत्र से आया 

1990 ः भारत ने घरेलू क्षेत्र में एयर इंडिया के एकाधिकार को समाप्त करने का निर्णय लिया. ईस्ट वेस्ट एयरलाइंस देश में संचालित होने वाली पहली राष्ट्रीय स्तर की निजी एयरलाइन बनी

1960ः एयर इंडिया ने अपने पहले बोइंग 707-437 का संचालन शुरू किया. इसी वर्ष भारतीय एयरलाइनर ने संयुक्त राज्य अमेरिका और भारत के बीच सीधी उड़ान शुरू की 

1997ः सेना के विमानन पेशेवरों के एक समूह ने डेक्कन एविएशन की स्थापना की. यह निजी स्वामित्व वाली भारत की सबसे बड़ी चार्टर हेलीकॉप्टर कंपनी बनी 

2000 ः एयर इंडिया के निजीकरण की पहली कोशिश विफल
2003 ः एयर डेक्कन, भारत की पहली सस्ती एयरलाइन शुरू हुई. इस दशक में कम लागत वाली एयरलाइंस का संचालन संभव बनाने के लिए कई नीतिगत बदलाव किए गए

2018ः सिक्किम का पाकयोंग एयरपोर्ट देश का 100वां हवाईअड्डा बना जहां से आवाजाही चालू हुई

2010 ः भारत का पहला विश्वस्तरीय एकीकृत हवाई टर्मिनल (टी3) दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर खुला

2007 ः इंडियन एयरलाइंस के एयर इंडिया में विलय के बाद एयर इंडिया का कर्ज के जाल में उलझ जाना. मात्र 9.6 करोड़ अमेरिकी डॉलर का संयुक्त कर्ज अगले दो वर्षों में ही 90 करोड़ डॉलर का हो गया 

2020 ः विस्तारा ने लंबी दूरी की उड़ानों में छोटे विमानों के उपयोग के साथ भारत से लंदन के लिए उड़ान शुरू की

2021 ः एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस टाटा संस को 18,000 करोड़ रुपए में बेची गई

2022 ः महामारी के बाद हवाई यातायात 10 करोड़ घरेलू यात्रियों तक वापस पहुंचा जबकि एयरलाइंस लगभग 80 प्रतिशत क्षमता पर काम करने लगीं.
 

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