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मार्बल के महाराजा

अशोक पाटनी बताते हैं कि किस तरह उन्होंने मुनाफे का इस्तेमाल विस्तार, दूसरे क्षेत्रों में कदम बढ़ाने, नए कारोबारों में निवेश के लिए किया.

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अशोक पाटनी, सुरेश पाटनी,  विमल पाटनी
अशोक पाटनी, सुरेश पाटनी, विमल पाटनी

36वीं वर्षगांठ: दिग्गज कारोबारी

अशोक पाटनी, 69 वर्ष सुरेश पाटनी, 66 वर्ष विमल पाटनी, 56 वर्ष
किशनगढ़,  राजस्थान
कंपनीः आर.के. ग्रुप
कुल संपत्ति: 7,200 करोड़ रु.  (केवल सीमेंट कारोबार से)
कहां करते हैं निवेश
पाटनी बंधु गुणवत्ता में निवेश करते हैं और कारोबारी कामयाबी को लेकर उनका मानना है कि यह पारदर्शी तरीके से अपना सर्वश्रेष्ठ देने से आती है

   अनाज का थोक कारोबार करने वाले राजस्थान के खंडाच गांव के तीन पाटनी भाइयों—अशोक, सुरेश और विमल ने अस्सी के दशक में ही मार्बल खनन की संभावनाएं पहचान ली थीं. 1993 में मोरवाड़ में सोची-समझी रणनीति के साथ खदानें लीज पर लेने के साथ वियतनाम में दो खदानों के अधिग्रहण और आयातित उपकरणों के जरिए उन्होंने न सिर्फ अपना बल्कि किशनगढ़ का भी भाग्य बदलकर उसे मार्बल सिटी ऑफ इंडिया बना दिया. नतीजतन मकराना मार्बल के कारोबार की चमक अपेक्षाकृत फीकी पड़ गई.

जयपुर राजमार्ग पर अजमेर से 25 किलोमीटर पहले स्थित दो लाख की आबादी वाले किशनगढ़ में आज संगमरमर के  6,500 कारोबार, 2,000 संयंत्र और 40,000 कर्मचारी और बिचौलिये हैं. यहां संगमरमर का उत्पादन नहीं होता, लेकिन संगमरमर की ही बदौलत खरीदार नजदीक ही स्थित मकराना की खदानों को एक तरह से भूलने लगे हैं, जहां कभी इसका अकेला बाजार और खदानें हुआ करती थीं.

युवा पीढ़ी आगे बढ़ी, तो 2006 के बाद समूह घरेलू संगमरमर मैन्युफैक्चरिंग से आयात-निर्यात के कारोबार की तरफ बढ़ गया. यह दो-तिहाई संगमरमर का उत्पादन वियतनाम में करता है और 75 देशों को निर्यात करता है. इसे सुरेश के बेटे 42 वर्षीय विकास और 37 वर्षीय विनय संभालते हैं.

आर.के. ग्रुप के चेयरमैन अशोक के 43 वर्षीय बेटे विनीत ने नाइनटीन डिग्री स्टोन लॉन्च किया, जो कई किस्मों के अच्छी गुणवत्ता वाले हल्के भारतीय पत्थर बेचता है. उनके पास भारत में बॉडीशॉप, किएल और लेवोन की फ्रेंचाइज भी है. इसके अलावा, उन्होंने बॉडेस लॉन्च किया, जो 200 अलग-अलग ब्रांड बेचने वाला प्लेटफॉर्म है. सबसे छोटे भाई विमल के बेटे 30 वर्षीय विवेक और 27 वर्षीय ऋषभ, वंडर सीमेंट संभालते हैं, जो सबसे तेजी से बढ़ता उत्पाद है और जिसकी कंपनी के टर्नओवर और संपत्ति में सबसे ज्यादा हिस्सेदारी है.

समूह का नवीनतम उद्यम वंडर होम फाइनेंसेज सात राज्यों में 60 शाखाओं के जरिए चार साल के भीतर 7,648 ग्राहकों को तक पहुंचा  और इसने 633 करोड़ रुपए के कर्ज दिए. कर्ज की रकम का औसतन 9.50 लाख रुपए है. अशोक पाटनी कहते हैं, ''हम उन्हें कर्ज देते हैं जिन्हें कहीं और से नहीं मिलता.’’ पुट्टी बनाने का उनका 200 करोड़ रुपए का संयंत्र नवंबर में काम करने लगेगा. यह निंबाहेड़ा में है. यहीं उनका सीमेंट संयंत्र है, जो 35 लाख टन से 1.8 करोड़ टन सालाना उत्पादन तक पहुंच गया है.

परिवार में सबका काम बंटा हुआ है—अशोक ग्रुप का सार्वजनिक चेहरा हैं जबकि सुरेश बिक्री और विमल खनन के साथ अब सीमेंट उत्पादन भी संभालते हैं. लेकिन हर एक फैसला आम राय से लिया जाता है. अशोक और सुरेश अजमेर में रहते हैं, जबकि विमल संगमरमर और सीमेंट की खदानों और संयंत्रों के ज्यादा नजदीक उदयपुर में. परिवार जयपुर में भी एक मकान का मालिक है.

विनीत कहते हैं, ''किशनगढ़ सरीखे छोटे कस्बों में अच्छे स्कूल न होने के मसले हैं, पर फिर भी हम सब इससे जुड़े रहते हैं.’’ परिवार बढ़ने के साथ वे किशनगढ़ में उसी परिसर में मौजूदा घर से मिलता-जुलता एक और घर बना रहे हैं. अशोक पाटनी बताते हैं कि किस तरह उन्होंने मुनाफे का इस्तेमाल विस्तार, दूसरे क्षेत्रों में कदम बढ़ाने, नए कारोबारों में निवेश के लिए किया. वे कहते हैं, ''हम कभी शेयर बाजार में नहीं उतरे.’’ इसलिए अपनी संपत्ति का आकलन कर पाना उनके लिए मुश्किल होता है. 

विमल कहते हैं, ''आप कह सकते हैं कि हम गुणवत्ता में निवेश करते हैं.’’ उनका मानना है कि किसी भी उद्यम की कामयाबी के  लिए जरूरी है कि पारदर्शी तरीके से अपना सर्वश्रेष्ठ दिया जाए. हाल ही में उन्होंने मोलभाव की गुंजाइश खत्म करने के लिए अपने उत्पादों पर कीमत का बारकोड लगाया.

यह परिवार स्पोर्ट्स और लग्जरी कारों सहित कई कारों के अलावा एक हेलिकॉप्टर का मालिक है. परिवार चकाचौंध से बचता है. सभी मसलों पर अंतिम फैसला अशोक पाटनी का ही होता है. 

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