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विशेषांकः खुशी कई रूपों में अनुभव की जाती है

मेरी खुशियों का स्रोत यही हैं: प्रकृति, लोग और रिश्ते. इसके अलावा, प्रेम मुझे खुशी देता है, वह एक जन का हो, समाज का हो, कैसा भी हो

पंकज त्रिपाठी, अभिनेता पंकज त्रिपाठी, अभिनेता

यह कठिन सवाल है. प्रकृति को जब मैं उसके मूल रूप में देखता हूं तो मुझे बहुत खुशी होती है—जंग को, झरने को, पानी को बिना प्रदूषित हुए और उसके मूल रूप में, प्राकृतिक प्रवाह के साथ. प्रकृति मुझे खुशी देती है. वह मुझे आकर्षित करती है. लोगों के मुस्कुराते चेहरे भी मुझे खुशी देते हैं. अभिनय तो खैर, पेशा ही है. उसमें जब कभी-कभी अच्छा दृश्य होता है तो मजा आता है उसको करते हुए. लेकिन मेरी खुशियों का स्रोत यही हैं: प्रकृति, लोग और रिश्ते. इसके अलावा, प्रेम मुझे खुशी देता है, वह एक जन का हो, समाज का हो, कैसा भी हो''

पंकज त्रिपाठी, अभिनेता

''खुशी कई रूपों में अनुभव की जाती है. अपनी बेटियों को खुश देखकर ही मैं खुश हो जाता हूं. जब वे कुछ हासिल करती हैं तो मुझे इससे खुशी होती है कि काश मैं भी वही हासिल कर पाता. एक अच्छी तरह से डिजाइन किए गए स्थान का अनुभव करना खुशी की बात है और इससे भी ज्यादा अगर इसे मैंने डिजाइन किया है. इतालवी कैफे के बाहर एक कप अच्छी-सी एस्प्रेसो कॉफी के साथ फुटपाथ पर बैठना बेहद खुशी देता है. खुशी बड़ी चीजों के साथ-साथ छोटी चीजों में भी समान रूप से अनुभव की जाती है''

संजय पुरी, प्रधान आर्किटेक्ट, संजय पुरी आर्किटेक्ट, मुंबई

''प्रकृति की गोद में रहने से मुझे बेहद खुशी मिलती है. बहुत-से लोग सोचते हैं कि प्रकृति का मतलब समंदर, जंगल, बर्फ वाले खूबसूरत पहाड़ या विशाल झरने जैसे सुंदर स्थान हैं. लेकिन मेरे लिए यह केवल ऊटी या आल्प्स पर्वत जैसी जगह नहीं है, मुझे सहारा रेगिस्तान भी पसंद है और मैं इसकी गर्मी का भी भी उतना ही आनंद लेना चाहता हूं''

कार्ति, अभिनेता

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