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शख्सियतः मैं चीजों को जस का तस रखती हूं

आप सोशल मीडिया पर अभिनेत्री गुल पनाग को फॉलो करते हैं तो आपको जरूर जानना चाहिए कि उनका अपने पोस्ट और ट्रैवल का एक ही मंत्र है कि हर हाल में असली और मौलिक बने रहो

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अभिनेत्री गुल पनाग अभिनेत्री गुल पनाग

आप सोशल मीडिया पर अभिनेत्री गुल पनाग को फॉलो करते हैं तो आपको जरूर जानना चाहिए कि उनका अपने पोस्ट और ट्रैवल का एक ही मंत्र है कि हर हाल में असली और मौलिक बने रहो

महामारी ने आपके ट्रेवल फलसफे को कैसे बदला?

हम हमेशा बाहर घूमने के शौकीन थे, पर अब माहौल कैंपिंग और रोड ट्रिप के हक में है. हम अपने अनूठे और सुरक्षित अनुभव खोज रहे हैं, जो बाहर घूमने के इर्द-गिर्द केंद्रित हैं.

 हाल की कोई यात्रा जो आपको बहुत याद आती हो?

इसी साल हम, मम्मी-पापा और भाई तथा उसकी पत्नी के साथ फैमिली ट्रिप पर रणथंभौर गए. इस अनिश्चित वक्त में परिवार के एक साथ होने से बहुत कुछ मिला जिसके लिए हम शुक्रगुजार हैं... और मेरे बेटे ने पहली बार बाघ देखा.

आपकी कई यात्राएं ड्राइविंग केंद्रित मालूम देती हैं. इसने यात्रा के सिलसिले में क्या बदलाव किए?

बहुत ज्यादा कैंपिंग, नौसिखुओं के लिए! मेरे पापा एक बड़ा नया टेंट लाए, जो हमारे मौजूदा टेंट के अलावा परिवार के कॉमन एरिया का काम करता है. हम अलग-थलग बुटीक प्रॉपर्टीज और होमस्टे की यात्राओं का मनसूबा भी बना रहे हैं.

क्या सोशल मीडिया ने आपकी यात्रा के तौर-तरीकों को बदला? आप इंस्टाग्राम की आंखों से कभी नई चीजें देखती हैं?

शायद नहीं. मैं इंस्टाग्राम के आने के पहले से सैर-सपाटे के  लिए निकलती रही हूं. यह यादगार चीजों को याद और बयान करने (और शायद नई जगहें खोजने) की जगह है. मेरे लिए सोशल मीडिया मेरे असली रूप का प्रतिबिंब है, खुद को सजा-संवारकर रखने का नहीं. मैं चीजों को असल रूप में रखना पसंद करती हूं.

अकेले घूमना या परिवार के साथ घूमना... क्या ज्यादा अच्छा लगता है?

बेशक परिवार के साथ घूमना. सैर-सपाटे का प्रोग्राम बनाने के लिए जरूरी तालमेल के बावजूद परिवार के रूप में एक साथ सफर करने में असली मजा है. तीन साल के बच्चे की मां होने के नाते अकेले यात्रा की असलियत मुझे पता है—हर वक्त उसके बारे में चिंता करते रहो, मन उसी में लगा रहे. इसकी बजाए मैं उसे हमेशा अपने साथ रखना चाहूंगी.

अगर आपको इस साल हमारे पाठकों के लिए सर्दियों के तीन पर्यटन स्थल चुनने हों, तो वे क्या होंगे?

शिमला के आसपास की पहाड़ियां. वहां पहुंचना आसान है, वहां कई विकल्प हैं और वहां बर्फ होती है. रणथंभौर—रेगिस्तान में सर्दियों का मतलब है आप वाकई धूप सेक सकते हैं. अगर आप खुशकिस्मत हुए तो बाघ देखना बोनस है. तीसरा, मॉस्को—पहुंचना आसान है, यात्रा पर कोई पाबंदी नहीं है, और हां, वहां की स्थापत्य कला के बारे में तो क्या कहना! 

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