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विशेषांकः खेत-खलिहान के बूते

पंजाब में कृषि के क्षेत्र में सराहनीय उपलब्धियों का ही नतीजा था कि राज्य के बुनियादी ढांचे और दूसरे क्षेत्रों में भी उतनी ही तरक्की दर्ज की गई.

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झरता सोनाःअमृतसर में वाघा गांव के पास गेहूं की मड़ाई झरता सोनाःअमृतसर में वाघा गांव के पास गेहूं की मड़ाई

पंजाब: बुनियादी ढांचा, कृषि और स्वच्छता में श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले बड़े राज्य

संसद के शीतकालीन सत्र में पेश किए जाने वाले अन्य विधेयकों के बीच कृषि कानून निरसन विधेयक, 2021 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 24 नवंबर को मंजूरी दे दी, जिससे तीन विवादास्पद कृषि कानूनों को रद्द करने का रास्ता साफ हो गया. इन कानूनों का पुरजोर विरोध करने वाले पंजाब के किसानों को इससे बेहद खुशी हुई.

देश का लगभग 19 फीसद गेहूं और 12 फीसद धान पंजाब के खेतों में ही पैदा होता है. यहां बाजार में आने वाली 85 फीसद उपज की खरीद केंद्रीय एजेंसियां करती हैं, वह भी घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर.

पिछले कुछ वर्षों में मालवा क्षेत्र में कपास बेल्ट ने पैदावार में कमी के दौर के बाद उपज में फिर से वृद्धि देखी है. 2020-21 में कपास की खेती का रकबा 5,00,000 हेक्टेयर से ज्यादा था. इसकी एक बड़ी वजह एमएसपी थी, जिसे इस साल बढ़ाकर 6,025 रुपए प्रति क्विंटल कर दिया गया. पंजाब से आधी उपज केंद्रीय एजेंसी कॉटन कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (सीसीआइ) खरीदती है.

एक खेतिहर राज्य के रूप में देखें तो पंजाब में कई सारी नदियां बहती हैं. हालांकि, भीतरी इलाकों का एक बड़ा हिस्सा अभी भी भूजल पर निर्भर है, जहां डीजल और बिजली से चलने वाले बोरवेल पंपों का इस्तेमाल सिंचाई के लिए किया जाता है. और यहीं पर राज्य के सामने एक बड़ी चुनौती है.

विशेषांकः खेत-खलिहान के बूते
विशेषांकः खेत-खलिहान के बूते

धान की फसल में एक किलो उपज लेने के लिए 5,000 लीटर पानी की जरूरत होती है, जो खुद बिजली की निरंतर आपूर्ति पर निर्भर है. पंजाब उन कुछ राज्यों में शामिल है जो अभी भी खेतों को मुफ्त बिजली की आपूर्ति करते हैं.

इससे अंत में जाकर राज्य सरकार के लिए लागत में वृद्धि होती है. भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक, राज्य सब्सिडी के तौर पर करीब 1.5 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर खर्च करता है.

खेत खलिहान के बूते
खेत खलिहान के बूते

कृषि के क्षेत्र में पंजाब की प्रगति इसके बेहतर बुनियादी ढांचे में भी झलकती है. सभी गांव तारकोल की पक्की सड़कों से जुड़े हुए हैं. प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के फंड के अलावा, पंजाब का मंडी बोर्ड केंद्रीय खरीद पर शुल्क, कर और लेवी का उपयोग यही कोई 6.5 फीसद, गांव की सड़कों के निर्माण और मरम्मत के लिए करता है.

खेत खलिहान के बूते
खेत खलिहान के बूते

पिछले कुछेक सालों में राज्य के राजमार्गों में भी काफी सुधार हुआ है. पंजाब हर घर को बिजली उपलब्ध कराने वाले पहले राज्यों में से एक था, और राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण से पता चलता है कि इसमें पीने का पानी लगभग हर घर के लिए उपलब्ध है.

संपन्नता के संकेत के तौर पर अगर आप देखें तो ट्राइ (टीआरएआइ) के आंकड़े बताते हैं कि पंजाब में 1,000 निवासियों के लिए 1,241 मोबाइल हैं, जो देश में सबसे ज्यादा हैं.

राज्य में चंडीगढ़ और अमृतसर में दो अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे हैं. नागरिक उड्डयन मंत्रालय 'उड़ान’ योजना के तहत बठिंडा, आदमपुर, लुधियाना और पठानकोट में अपने चार घरेलू हवाई अड्डों के लिए और अधिक उड़ानों पर भी जोर दे रहा है.

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