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फरीदाबाद: एनसीआर में जन्नत

गुडग़ांव और दिल्ली से अच्छी कनेक्टिविटी और बेहतरीन बुनियादी सुविधाओं की वजह से सब की निगाहें फरीदाबाद पर टिकी हैं.

राजस्व विभाग से सेवानिवृत्त अधिकारी सुभाष अधलखा इन दिनों फरीदाबाद की 19 मंजिला प्रिंसेस पार्क बिल्डिंग में सुकून का जीवन जी रहे हैं. खबर है कि उनके अपार्टमेंट के करीब की 60 फुट रोड भी जल्द ही शुरू हो जाएगी. उनके चेहरे पर चमक है, आना-जाना आसान तो हो ही जाएगा और फ्लैट की कीमतें भी और बढ़ जाएंगी.

कुछ समय पहले तक गुडग़ांव में रहने वाले अधलखा को कम जगह और पार्किंग में आने वाली परेशानियों का सामना करना पड़ता था. दो बेटे थे तो परिवार बढ़ भी रहा था. बच्चों के पास समय नहीं था और उनकी उम्र थी, जिस वजह से वे खुद का मकान बनाने का सिर दर्द मोल नहीं ले सकते थे. फिर उन्होंने गुडग़ांव का मकान बेचकर फरीदाबाद में इसी अपार्टमेंट में तीन फ्लैट ले लिए. वे कहते हैं, ''यहां सेफ्टी है. मेरे दोनों बेटों के घर भी यहीं हैं.”

सुकून और सुरक्षा से जुड़े इस पहलू की वजह से ही तो कुछ समय पहले तक 30-35 लाख रु. में हाइराइज बिल्डिंग के फ्लैट्स की कीमतों में दोगुना इजाफा हो चुका है. गुडग़ांव से करीबी और दिल्ली से कनेक्टिविटी बेहतर होने के कारण कम बजट वाले लोगों के लिए ग्रेटर फरीदाबाद (नहर पार वाला इलाका) जन्नत बनता जा रहा है. बीपीटीपी के सीनियर वाइस प्रेजिडेंट प्रोजेक्ट दिनेश हरण कहते हैं, ''गुडग़ांव में फ्लैट्स बहुत महंगे हैं. ऐसे में फरीदाबाद आम आदमियों की जरूरतों को बखूबी पूरा करता है.”

बीपीटीपी ने हाल ही में फरीदाबाद की सबसे ऊंची इमारतों में से एक द रिसॉर्ट को पूरा किया है. इसमें ग्राउंड समेत 19 फ्लोर हैं और यह पोजेशन के लिए तैयार है. हालांकि फ्लैट्स महंगे हो गए हैं लेकिन अब भी पहुंच से परे नहीं हैं.

मेट्रो रेल ने भी ग्रेटर फरीदाबाद के विकास में अहम भूमिका निभाई है. फरीदाबाद के डिस्ट्रिक्ट टाउन प्लानर संजीव मान कहते हैं, ''हाइवे के साथ-साथ मेट्रो आ रही है. पिलर का काम पूरा हो गया है और यह वाइएमसीए चौक तक जाएगी.” बताया जा रहा है कि मेट्रो सेवा जल्द ही शुरू होने जा रही है. मान बताते हैं कि 37 हाइराइज इमारतों के लिए मंजूरी दी गई है.

ग्रेटर फरीदाबाद में अपने निर्माणाधीन मकान को देखने पहुंचे आइटी कंपनी में काम करने वाले संदीप शर्मा कहते हैं, ''मैंने दो साल पहले तीन कमरे का फ्लैट 30 लाख रु. में बुक कराया था, लेकिन इसका पोजेशन इस साल आखिर में मिलना है और इसकी कीमत अब तक 55 लाख रु. पर पहुंच गई है.”

कोई इन्वेस्टमेंट के टारगेट के साथ यहां निवेश कर रहा है तो किसी को दिल्ली और गुडग़ांव से बेहतर कनेक्टिविटी के लिए यहां अपना आशियाना चाहिए. यहां  प्रोपर्टी का काम करने वाले विनोद संदीप को सलाह देते हैं, ''रहना है तो अलग बात है. अगर बेचना है तो दो-तीन साल तक तो मकान को भूल जाओ. तब तक आपके मकान की कीमत मौजूदा कीमत की दोगुना हो जाएगी.” विनोद का कहना किसी हद तक सही भी है. पुल बन रहे हैं, मेट्रो आ रही है और मॉल जैसी सुविधाएं भी मुहैया कराई जा रही हैं. 62 वर्षीय अधलखा कहते हैं, ''मेरे बेटे के बच्चों के लिए यहां करीब ही स्कूल है. बाजार भी पास है और हम हफ्ते भर का सामान एक साथ ले आते हैं.”

क्राइम रेट के कम होने की वजह से अमनपसंद लोगों में ग्रेटर फरीदाबाद खासा लोकप्रिय हो रहा है. विनोद बताते हैं, ''थोड़ी ही दूरी में यहां पर तीन स्कूल हैं.” बेशक बाकी बुनियादी सुविधाओं को लेकर भी काम जोरों पर है और 2015-16 तक यहां जबरदस्त बसावट की उम्मीद लगाई जा रही है. जहां तक यहां मकान खरीदने आने वाले लोगों की बात है तो यहां सेलेरिड क्लास लोगों की ज्यादा आवक है. फरीदाबाद में हाउसिंग प्रोजेक्ट को अंजाम दे रहे आरपीएस ग्रुप के एजीएम (मार्केटिंग) रमणीक सिंह कहते हैं, ''हर तरह की सुविधाओं से लैस होने से फरीदाबाद भविष्य की हाइटेक सिटी बनेगा.” या कहें तंग जेब लोगों की जन्नत.

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