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विशेषांकः उम्मीद की लौ

कथक नृत्यांगना मंजरी चतुर्वेदी दूरदराज के कोविड प्रभावित कलाकारों तक मदद पहुंचा रहीं

सोने का दिल: मंजरी चतुर्वेदी सोने का दिल: मंजरी चतुर्वेदी

अदिति पै

मंजरी चतुर्वेदी को इसी अप्रैल में कोविड हो गया. उत्तर प्रदेश, पंजाब और राजस्थान के ग्रामीण इलाकों के बहुत-से कव्वाल, तबलावादक, सितारवादक और स्टेज टेक्नीशियन उनके शीघ्र स्वस्थ होने के लिए दुआएं करने लगे. असल में यह उन्होंने कमाया था. महामारी में नृत्य-संगीत के स्टेज कार्यक्रम बंद होने के बाद से 150 से ज्यादा आर्टिस्ट परिवारों के लिए चतुर्वेदी देवदूत साबित हुई हैं. 

वे इन परिवारों तक मदद पहुंचा रही थीं. ख्यातिप्राप्त कथक नृत्यांगना चतुर्वेदी कहती हैं, ''उनमें से अधिकांश के पास कोई दूसरा काम करने का हुनर ही नहीं है. उन्होंने अपना पूरा जीवन संगीत में बिताया है.’’ साथी कलाकारों की ओर से मदद की लगातार गुहार आने के बाद चतुर्वेदी ने दोस्तों और अन्य जानकारों से संपर्क साधा और जरूरतमंदों के लिए धन जुटाना शुरू कर दिया. पिछले एक साल में वे 25 लाख रु. से ज्यादा जुटाने में सफल रही हैं जिसे हर पीड़ित परिवार को 3,000-5,000 रु. के मासिक भत्ते के रूप में दिया जा रहा है. 

सहायता कोष बनाने के लिए चतुर्वेदी ने सोशल मीडिया पर भी संपर्क किया. उन्होंने कॉर्पोरेट घरानों, प्रायोजकों और सांस्कृतिक संगठनों को भी लिखा. पारदर्शिता बनाए रखने के लिए उन्होंने दानदाताओं को सीधे लाभार्थियों के साथ जोड़ दिया. 

पिछले साल तो प्रवाह बना रहा, इस साल पिछले कुछ महीनों में दानदाताओं की संख्या में कमी आई है. चतुर्वेदी कहती हैं, ‘‘एक साल हो चुका है, अब दान देने वाले भी परेशान हैं.’’ इस बीच, जरूरतमंद परिवारों की जरूरतें बुनियादी किराने के सामान से आगे बढ़ गई हैं. कुछ कोविड पीड़ित हो गए तो उन्हें दवाओं और अस्पतालों में इलाज के लिए पैसे की जरूरत है.

चतुर्वेदी ने पिछले साल अगस्त में केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय और बाद में कई राज्य सरकारों को पत्र लिखकर सिफारिश की थी कि ऑनलाइन संगीत कार्यक्रम आयोजित किए जाएं ताकि कलाकार समय-समय पर कुछ पैसे कमा सकें. वे पूछती हैं, ''सरकारों के पास धन है जो खर्च न होने पर लौट जाएगा. इसे कलाकारों को बचाने में क्यों न लगाएं?’’ ठ्ठ

मंजरी चतुर्वेदी, 45 वर्ष
कथक नृत्यांगना, नई दिल्ली
उन्होंने क्या किया ग्रामीण क्षेत्रों के 150 कलाकार परिवारों के लिए फंड तैयार किया जिनके पास काम नहीं है ताकि कम से कम उनके परिवार का पेट भरा जा सके

कलाकार इतने भर के लिए नहीं हैं कि आप पोस्टर पर सजाकर उन्हें दुनिया को भारत की तस्वीर के रूप में दिखाएं. उनका पेट पालने को हमारे पास कोई योजना भी तो हो
—मंजरी चतुर्वेदी

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