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विशेषांकः कोमल और शक्तिशाली

शिकागो में 'क्लाउड गेट’ जैसी अप्रतिम कृतियों के सर्जक अनीश कपूर ऐसे मूर्तिकार और कलाकार हैं जिन्हें रोजमर्रा की चीजों में भी कुछ नया तलाश लेने में महारत हासिल है.

75वां स्वतंत्रता दिवस विशेषांक-पथ प्रवर्तक / कला, संगीत और नृत्य

अनीश कपूर, 67 वर्ष

सुबोध गुप्ता

मेरी राय में अनीश कपूर आज के सबसे महत्वपूर्ण जीवित कलाकारों में से हैं. मैं पहली बार 1980 के दशक के अंत में दिल्ली आया था और भारत में काम कर रहे सभी तरह के कलाकारों की कृतियों को देख रहा था.

इंटरनेट से पहले के दौर में अंतरराष्ट्रीय कलाकारों के कामों को देख पाना कठिन था,  इसलिए मुझे याद है कि मैं अमेरिकन सेंटर लाइब्रेरी गया था, जहां मैंने रंजकों के साथ किए गए कपूर के शुरुआती कामों को देखा था.

इनमें लाल, पीले और काले रंग की ढेरियों को अलग-अलग आकार दिया गया था. कोमल और शक्तिशाली. मेरी दिलचस्पी यह जानने में थी कि कैसे कोई भारतीय मूल का कलाकार किसी चीज को मूल से ग्रहण करने के बाद उसे समकालीन भाषा में बदल सका.

इससे कई ऐसे कलाकारों के रास्ते का पता चला जो वस्तुओं में परिचित तत्व को देखते हुए कुछ और भी देख पाते हैं, जो अपने आस-पास को विषयगत रूप से देखते हैं और फिर उसे एक वस्तु के रूप में बदल देते हैं.

2003 में मैंने लंदन में टेट मॉडर्न के टर्बाइन हॉल में उनकी उत्कृष्ट कृति 'मार्सियाज’ देखी थी जो वास्तव में एक ऐसा स्थान प्रदर्शित कर रही थी जो अपने भीतर से एक इमारत को बाहर धकेल रही थी.

कपूर की बनाई मेरी कुछ पसंदीदा कृतियों में उनके स्टेनलेस स्टील दर्पण के टुकड़े और शिकागो में क्लाउड गेट हैं जो वास्तव में शहर के साथ वैसे ही संवाद करते हैं जैसे किसी सार्वजनिक मूर्ति को करना चाहिए.
 
सुबोध गुप्ता प्रतिष्ठित समकालीन भारतीय कलाकार हैं.

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