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जल विशेषांकः काला  पानी

पानी पर अत्यधिक आश्रित रहने वाली फसलों और उर्वरकों के भारी इस्तेमाल ने मिलकर पंजाब के जल संकट को बढ़ाया 

जीवन पर संकट फजिल्का जिले में घरेलू इस्तेमाल के लिए हैंडपंप से पानी निकालती महिलाएं जीवन पर संकट फजिल्का जिले में घरेलू इस्तेमाल के लिए हैंडपंप से पानी निकालती महिलाएं

इस समय पंजाब तीन बड़ी समस्याओं से जूझ रहा है: 1) प्रदूषित नहरें, 2) तेजी से घटता भूमिगत जलस्तर और 3) प्रदूषित भूमिगत जल. ये तीनों ही समस्याएं एक-दूसरे से जुड़ी हैं लेकिन पंजाब में ऑर्गेनिक खेती को प्रोत्साहन देने वाले एक गैर-सरकारी संगठन ‘खेती विरासत मंच’ के निदेशक उमेंद्र दत्त का कहना है कि एक तरफ जहां सतह पर जल एक बड़ी चुनौती है, वहीं भूमिगत जल के मामले जो हो रहा है, वह इससे भी कहीं बड़ी समस्या है. राज्य में भूजल का स्तर हर साल 49 सेंटीमीटर की दर से नीचे जा रहा है.

इसके अलावा प्राकृतिक रूप से होने वाले जल के रिचार्ज के मुकाबले भूजल निकालने का प्रतिशत 165 फीसद है. सबसे बड़ा दुश्मन धान की फसल है जो राज्य के 22 जिलों में उगाई जाती है. लुधियाना स्थित पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (पीएयू) के एक अध्ययन से पता चलता है कि प्रति किलोग्राम धान को मोटे तौर पर 5,000 लीटर पानी की जरूरत होती है.

पीएयू का अध्ययन यह भी बताता है कि पंजाब में प्रति हेक्टेयर 190.1 किलो उर्वरक का इस्तेमाल होता है जो राष्ट्रीय औसत 88.2 किलो के मुकाबले बहुत ज्यादा है. धान के अलावा, गेहूं (रबी की फसल) को उर्वरकों की भारी खुराक की जरूरत होती है. उर्वरकों के भारी इस्तेमाल के कारण भूजल को बहुत भारी नुक्सान हो रहा है. 

पंजाब में जल संसाधन मंत्रालय के प्रधान सचिव सर्वजीत सिंह कहते हैं, ''खेती की आदतें रातोरात नहीं बदलती हैं. किसानों की धान की खेती छोड़कर अन्य फसलों की खेती के प्रति प्रोत्साहित करने के लिए नीतिगत स्तर के साथ-साथ जमीनी स्तर पर भी काम किया जा रहा है.’’ सर्वजीत सिंह कहते हैं कि पंजाब इज्राएल की राष्ट्रीय जल कंपनी मेकोरोट के साथ मिलकर जल संरक्षण और प्रबंधन का मास्टर प्लान तैयार करने की दिशा में काम कर रहा है.

इज्राएल अपने यहां बेकार हो जाने वाले 80 प्रतिशत जल का दोबारा इस्तेमाल करता है. पंजाब में केवल 10 प्रतिशत से भी कम जल को रिसाइकिल किया जाता है, उसे यह लक्ष्य हासिल करने के लिए अभी बहुत लंबा रास्ता तय करना होगा. उम्मीद की जाती है कि मेकोरोट राज्य में जल के इस्तेमाल के मौजूदा तरीकों का अध्ययन करेगी और उसके बाद जल के संरक्षण और रिसाइकिल को लेकर कोई समुचित समाधान मुहैया कराएगी. ठ्ठ 

बड़ी तस्वीर 
समस्या  प्रदूषित भूमिजल और भूमिजल का घटता स्तर
समाधान किसानों को पानी पर बेहद आश्रित धान की फसल छोडऩे और अधिक उर्वरकों का इस्तेमाल वाली गेहूं की फसल का विकल्प आजमाने के लिए प्रोत्साहित करनाडी बनने दो साल के भीतर

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