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विशेषांकः गहरे रंगों का जमाना

टाटा मोटर्स डार्क थीम की गाड़ियां लॉन्च करने वाले सबसे पहले वाहन निर्माताओं में से एक है.

डार्क थीम की गाड़ियां डार्क थीम की गाड़ियां

ऑटो स्पेशल समाचार सार

जहां तक रंगों की बात है आजकल कारों में बहुत ज्यादा विकल्प उपलब्ध हैं. इसके बावजूद, काला और उसके विभिन्न शेड हमेशा से खरीदारों के पसंदीदा रहे हैं. काले रंग के लिए खरीदारों की विशेष दिलचस्पी को भुनाने के लिए अब, वाहन निर्माता 'डार्क’ थीम वाली गाड़ियां लॉन्च कर रहे हैं.

टाटा मोटर्स डार्क थीम की गाड़ियां लॉन्च करने वाले सबसे पहले वाहन निर्माताओं में से एक है. टाटा ने हाल ही में अल्ट्रोज, नेक्सॉन और हैरियर में अपनी 'डार्क’ रेंज प्रस्तुत की हैं. तीनों गाड़ियां काले रंग के स्पेशल शेड्स में आती हैं और इनमें अंदर से कुछ बदलाव रहते हैं.

बीएमडब्ल्यू ने हाल ही में अपनी सबसे महंगी रेंज एक्स 7 एम 50डी का डार्क शैडो संस्करण लॉन्च किया. दिल्ली में एक्स-शोरूम 2.02 करोड़ रुपए की कीमत वाली यह एसयूवी कुछ अतिरिक्त खूबियों से लैस है और काले रंग के शेड में आती है जिसे कंपनी ने फ्रोजन आर्कटिक ग्रे नाम दिया है.

इसमें जो अतिरिक्त उपकरण लगाए गए हैं उनमें बीएमडब्ल्यू के लेजरलाइट हेडलैंप, स्काई लाउंज पैनोरमिक सनरूफ (परिवेश के रंग के अनुसार रोशनी बिखरने के लिए 15,000 एलईडी), आगे की सीटों पर ऐक्टिव वेंटिलेशन, फाइव-जोन क्लाइमेट कंट्रोल, सॉफ्ट-क्लोज डोर, 360-डिग्री का कैमरा और टायर प्रेशर मॉनिटरिंग सिस्टम शामिल हैं.

एक करोड़ का आंकड़ा
जून में ह्यूंडई मोटर इंडिया ने अपनी एक करोड़वीं कार चेन्नै के पास मैन्युफैक्चरिंग इकाई से लॉन्च की थी. इसके साथ ही कंपनी सबसे तेजी से यह उपलब्धि हासिल करने वाली देश की वाहन निर्माता बन गई. ह्यूंडई की एक करोड़वीं गाड़ी ह्यूंडई ऐलकाज़ार थी. इस इकाई को ह्यूंडई मोटर इंडिया के एमडी और सीईओ एस.एस. किम और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन की मौजूदगी में लॉन्च किया गया.

चेन्नै के पास ह्यूंडई प्लांट की सालाना क्षमता 750,000 यूनिट है. कंपनी ने दस लाख यूनिट बनाने का मील का पत्थर 2006 में हासिल किया था; तब से, ह्यूंडई धीरे-धीरे अपना उत्पादन बढ़ाती रही है. इसने 2010 में 30 लाख गाड़ियां, 2015 में साठ लाख और 2019 में 90 लाख गाड़ियों के निर्माण आंकड़े को छू लिया था.

आपकी गाड़ी को विंटेज का दर्जा
भारत, गाडिय़ों की स्क्रैपिंग पॉलिसी (अप्रचलित बनाने की नीति) में लगातार सुधार कर रहा है. यह घोषणा की गई है कि 50 वर्ष से अधिक पुराने वाहनों को ‘विंटेज’ माना जाएगा और उनके दोबारा पंजीकरण (रि-रजिस्ट्रेशन) की अनुमति दी जाएगी. इन वाहनों को प्रति दिन की जरूरतों के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता बल्कि इन्हें केवल विशेष अवसरों पर या रखरखाव के उद्देश्य से ही सड़कों पर लाया जा सकेगा.

मालिकों के पास नए रजिस्ट्रेशन नंबर प्राप्त करने का विकल्प होगा, जिसमें उन गाड़ियों की विंटेज पहचान देने के लिए 'वीए’ टैग की सुविधा भी मिलेगी. अगर कोई शख्स चाहे तो उसके पुराने रजिस्ट्रेशन नंबर को भी बरकरार रखा जा सकता है. केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने पुराने वाहनों के पंजीकरण के लिए प्रस्तावित इन नियमों पर जनता से सुझाव मांगे हैं.

भारत का सबसे लंबा हाइ-स्पीड टेस्ट ट्रैक
जून में भारत को इंदौर के पास पीथमपुर में अपना सबसे लंबा हाइ-स्पीड ट्रैक मिला. 1,000 एकड़ में फैले इस ट्रैक को नेशनल ऑटोमोटिव टेस्ट ट्रैक्स की तरफ से विकसित किया गया है. 11.3 किमी लंबा यह ट्रैक दुनिया का पांचवां सबसे लंबा ट्रैक है. चार लेन वाला यह ट्रैक अंडाकार आकार का है जहां वाहन 375 किलोमीटर प्रति घंटे तक की गति से चलाए जा सकेंगे. इस परिसर में ब्रेकिंग, माइलेज, हैंडलिंग और एक्सीलरेशन के परीक्षण के लिए सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं.

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