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इंडिया टुडे कॉन्क्लेव 2019- युवा तुर्क

पुलवामा में आतंकवादी हमले को लेकर उनकी पार्टी के रुख के बारे में पूछे जाने पर सिंधिया ने कहा कि आतंकवाद से निबटने के मामले में पूरा देश एक है. वे बोले, आतंक की कड़े से कड़े शब्दों में निंदा की जानी चाहिए.

एक ही राह ज्योतिरादित्य सिंधिया और सचिन पायलट एक ही राह ज्योतिरादित्य सिंधिया और सचिन पायलट

इंडिया टुडे कॉन्क्लेव 2019

'क्या कांग्रेस जंग के लिए तैयार है?'

पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और राजस्थान के उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट पिछले कुछ वर्षों में कांग्रेस के सबसे चमकदार युवा सितारे बनकर उभरे हैं. चाहे 2018 के विधानसभा चुनावों में अपने-अपने राज्यों में पार्टी का नेतृत्व संभालना हो या आगामी लोकसभा चुनावों के लिए रणनीति तैयार करने में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की बात हो, सिंधिया और पायलट कांग्रेस की अगली पंक्ति के नेता हैं और अगले कई वर्षों तक पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी की मुख्य मंडली का हिस्सा रहेंगे.

सिंधिया को जहां पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की कमान संभालने का जिम्मा दिया गया है वहीं राजस्थान में पायलट को पार्टी की किस्मत चमकाने की महत्वपूर्ण भूमिका सौंपी गई है. 2014 में राजस्थान में कांग्रेस को लोकसभा की एक भी सीट नहीं मिली थी. ये दोनों नेता कांग्रेस के उन चंद नेताओं में शुमार हैं जिन्हें युवाओं के आदर्श के रूप में देखा जाता है.

कॉन्क्लेव में जहां उन्होंने देश के सियासी मूड, 2019 के चुनाव के मुख्य मुद्दों और उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की संभावनाओं के बारे में बात रखी, वहीं यह भी दिखाया कि वे न केवल एक जैसा सोचते हैं, बल्कि पहनते भी एक जैसा ही हैं. सिंधिया ने कहा कि देश की सुरक्षा के मामले में सारी पार्टियां एकजुट हैं. उन्होंने यह भी कहा, ''मेरा मानना है कि लोग सबसे ज्यादा समझदार नेताओं से भी ज्यादा समझदार हैं.'' और लोग मुख्य मुद्दों के आधार पर ही मतदान करते हैं.

खास बातें

ज्योतिरादित्य सिंधिया

पुलवामा में आतंकवादी हमले को लेकर उनकी पार्टी के रुख के बारे में पूछे जाने पर सिंधिया ने कहा कि आतंकवाद से निबटने के मामले में पूरा देश एक है. वे बोले, आतंक की कड़े से कड़े शब्दों में निंदा की जानी चाहिए. ''हम आतंकवाद का राजनीतिकरण किए जाने में यकीन नहीं रखते.''

''नेता दो तरह के होते हैं. एक तो वे जो बोलते ज्यादा हैं, करते कम हैं और दूसरे वे जो बोलते कम हैं और ज्यादा करके दिखाते हैं. मैं इस दूसरी तरह के नेताओं में यकीन रखता हूं.''

सचिन पायलट

यह पूछे जाने पर कि अगला चुनाव मंदिरों में लड़ा जाएगा या सीमा पर, इस पर पायलट का जवाब था कि यह खेतों और सड़कों, गली-कूचों में लड़ा जाएगा. उनका मानना था कि ''लोग पिछले पांच साल के किए हुए को देखकर वोट डालेंगे, कोरी जुमलेबाजी के प्रभाव में आकर नहीं.''

''अजमेर में लोकसभा के उपचुनाव में छह बूथों पर भाजपा को एक वोट न मिला. बदलाव की बयार इतनी तेज बह रही थी कि वह सब कुछ उड़ा ले गई.''

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