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विशेषांकः ऐंवई!!! खुशी आपकी नजर में क्या है

किसी चीज को इतना गौर करके देखने से या मतलब निकालने से कुछ हासिल नहीं होता. उसके एहसास में रस है. उसका जो तत्व है, वो जीवन का हिस्सा है

गुलज़ार, गीतकार, फिल्मकार गुलज़ार, गीतकार, फिल्मकार

''ऐंवई!!! खुशी आपकी नजर में क्या है, ये भी कोई सवाल है? बैठे-बैठे कुछ नहीं तो यही पूछ लिया. ये कोई बात है! एक बात बताओ, खुशी की, हैपीनेस की कोई डेफिनिशन होती है? और इसकी कोई डेफिनिशन हो सकती है क्या? हर आदमी की अपनी अलग डेफिनिशन होती है. यह कोई ऐसी चीज नहीं है जिसे आप डिफाइन करें. किसी चीज को इतना गौर करके देखने से या मतलब निकालने से कुछ हासिल नहीं होता. उसके एहसास में रस है. उसका जो तत्व है, वो जीवन का हिस्सा है''

गुलज़ार, गीतकार, फिल्मकार

खुशी वाकई उन लोगों और रिश्तों से मिलती है जो हमारे लिए मायने रखते हैं. यह उन्हीं लोगों के बीच रहते, उठते-बैठते फलती-फूलती है. खुशी इस एहसास में है कि वक्त पड़ने पर परिवार, दोस्त और प्रियजन पीछे खड़े हैं. यह रोजमर्रा की छोटी-छोटी चीजों में है.

मसलन, धूप का ताप या पानी की कलकल और प्रकृति का साथ. प्रकृति मुझे ज्यादा सहज, विनम्र और अपने में स्थित महसूस कराती है. मेरे लिए खुशी उपलब्धि के एहसास की उस भावना में भी है, जो हर गुजरते दिन अपने से पहले सेवा के लक्ष्य के नजदीक पहुंचने से ताकत हासिल करती है. यह मूर्त भी है और अमूर्त भी''

ज्योतिरादित्य सिंधिया, केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री

''परिवार, भोजन, मित्र, खाली समय और अप्रत्याशित मुलाकातें—लोगों से पहली बार मिलकर भी यह महसूस करना कि आप उन्हें अरसे से जानते हैं, मौजूदा व्यवस्थाओं के संदर्भ में दूसरों की उन क्षमताओं को पहचानना जिसका वे इस्तेमाल करते हैं, या उन लोगों से सीखना जो ऐसा कर पाते हैं; और एक नए प्रोजेक्ट के साथ महीनों के संघर्ष के बाद, एक विचार को उसकी पूरी क्षमता के साथ मूर्त रूप लेते अनुभव करना या विकसित होते देखना, किसी कलाकृति को गढ़ना या उसके लिए बातचीत करने और सहयोग करने का अवसर, यह सब मेरे लिए खुशियां लेकर आते हैं''

आयशा सिंह, कलाकार

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