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देश का मिजाज सर्वेक्षणः प्रतिरक्षाः ताकत की कूटनीति

चीन और पाकिस्तान अभी भी भारत के लिए बड़ी बाहरी चुनौतियां बने हुए हैं, लेकिन देश का मिज़ाज सर्वेक्षण के उत्तरदाताओं ने भरोसा जताया कि सरकार उनसे बेहतर ढंग से निबट रही है. हालांकि जम्मू-कश्मीर को राज्य के दर्जे की बहाली पर लोगों की राय सख्त होती जा रही

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शीर्ष नेता 13वें वर्चुअल ब्रिक्स सम्मेलन का एक पोस्टर जिसमें (बाएं से) ब्राजील के राष्ट्रपति मिशेल टेमर, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा शीर्ष नेता 13वें वर्चुअल ब्रिक्स सम्मेलन का एक पोस्टर जिसमें (बाएं से) ब्राजील के राष्ट्रपति मिशेल टेमर, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा

भारत ने नए साल में यह देखते हुए प्रवेश किया कि पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ सैन्य गतिरोध का तीसरा साल कैसा हो सकता है. 12 जनवरी को कोर-कमांडर स्तर की 14वें दौर की बातचीत इस सैन्य गतिरोध को हल करने में नाकाम रही. यह गतिरोध मई 2020 में शुरू हुआ था जब चीन ने लद्दाख में अपनी दो डिविजनों को तैनात कर दिया था. दोनों सेनाएं तीन विवादित जगहों पर आमने-सामने हैं. जब तक इन जगहों पर गतिरोध बना रहेगा, दोनों पक्ष अत्यधिक ऊंचाई पर अपने-अपने छोर पर करीब 1,00,000 सैनिकों की तैनाती जारी रखेंगे और यह दुनिया में अपने तरह की सबसे लंबी सैन्य तैनाती होगी.

देश का मिजाज सर्वेक्षणः प्रतिरक्षाः ताकत की कूटनीति
देश का मिजाज सर्वेक्षणः प्रतिरक्षाः ताकत की कूटनीति

चीन का नया सीमा कानून लंबे वक्त से चल रहे सीमा विवादों पर उसके सख्त होने का संकेत है और भारत के साथ भी उसका रुख ऐसा ही है. तिब्बत के पठार पर वह स्थायी संरचनाएं बना रहा है जो उसके वहां लंबे वक्त तक टिकने के मंसूबों का संकेत देती हैं. 15 जून, 2020 को गलवान में हुए संघर्ष के बाद सीमा पर हिंसक घटनाएं नहीं हुई हैं. गलवान संघर्ष में 20 भारतीय और चार चीनी सैनिक मारे गए थे. सरकार ने पाया है कि सीमा पर चौकसी के बेहतर नतीजे निकलते हैं. इससे कूटनीति और सैन्य संवाद के जरिए सीमा पर टकराव का हल करने में मदद मिलती है. देश का मिजाज सर्वेक्षण के 75 फीसद उत्तरदाता मानते हैं कि चीन से सीमा पर टकराव को केंद्र सरकार ने बहुत अच्छे तरीके से संभाला है—इसमें बस मामूली गिरावट आई है क्योंकि अगस्त 2021 में सरकार के रुख का समर्थन करने वालों की संख्या 78 फीसद थी. 

चीन के साथ टकराव बढ़ने की आशंका है और इसका मतलब है कि भारत की विदेश नीति का दूसरा बड़ा सिरदर्द—पाकिस्तान—अपेक्षाकृत नियंत्रण करने योग्य नजर आ रहा है. संकटों से घिरी अपनी अर्थव्यवस्था और दूसरों पर निर्भर अस्तित्व को देखते हुए, पाकिस्तान फिलहाल थोड़ी अवधि के लिए महत्वपूर्ण खतरा बनने में नाकाम दिखता है. पाकिस्तान की नई सुरक्षा नीति भारत से संबंध सुधारने की बात करती है. लेकिन भारत का मानना है कि जब तक इस्लामाबाद जम्मू-कश्मीर और पंजाब में सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देना जारी रखेगा तब तक कोई बातचीत नहीं हो सकती. 55 फीसद से अधिक उत्तरदाता नहीं चाहते कि बातचीत फिर शुरू हो.

देश का मिजाज सर्वेक्षणः प्रतिरक्षाः ताकत की कूटनीति
देश का मिजाज सर्वेक्षणः प्रतिरक्षाः ताकत की कूटनीति

ऐसे में केंद्र शासित जम्मू और कश्मीर—जिसके कुछ भाग चीनी और पाकिस्तानी कब्जे में हैं—पहले के मुकाबले ज्यादा केंद्र में है. तीन साल पहले केंद्र ने जम्मू-कश्मीर को दो केंद्रशासित प्रदेशों में बांटा और अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी कर दिया था. अब, 32.7 फीसद उत्तरदाता चाहते हैं कि जम्मू-कश्मीर को केंद्रशासित प्रदेश ही बनाए रखा जाए; 20 फीसद चाहते हैं कि अनुच्छेद 370 के बगैर उसका राज्य का दर्जा बहाल हो, हालांकि ऐसा मानने वालों में भारी कमी आई है, इनकी संख्या अगस्त में 41 फीसद थी. उन उत्तरदाताओं की संख्या करीब पहले जितनी ही है जो चाहते हैं कि जम्मू-कश्मीर को अनुच्छेद 370 के साथ राज्य का दर्जा वापस दिया जाए.

चीन-पाकिस्तान की धुरी का अर्थ है कि भारत को अमेरिका जैसे दोस्तों की जरूरत होगी. दो दशकों में भारत-अमेरिका के रिश्ते प्रगाढ़ हुए हैं. प्रमुख रणनीतिक सहयोगी के अलावा अमेरिका, भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार भी है—2020-21 में द्विपक्षीय व्यापार 145 अरब डॉलर (करीब 10.7 लाख करोड़ रु.) के पार जाने वाला है. लेकिन देश का मिज़ाज सर्वेक्षण में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन की लगातार गिरती रेटिंग एक रहस्य है. जनवरी 2021 में 52 फीसद उत्तरदाता उन्हें भारत के लिए अनुकूल मानते थे, लेकिन अगस्त में ऐसा मानने वालों की संख्या घटकर 42 फीसद और, अब केवल 38.8 फीसद रह गई है. यह शायद एक और बड़ा कारण है कि बाइडेन को नई दिल्ली आने का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आमंत्रण स्वीकार कर लेना चाहिए.

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